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ये कुछ जनरल प्रॉम्प्ट्स हैं, जो आप-हम अक्सर एआई को देकर अपना काम निकालते हैं। एआई अब हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है। लेकिन इसे लेकर कई डर भी हैं। किसी को अपनी नौकरी जाने का डर, किसी को बिजनेस छिनने का डर… सवाल है कि क्या एआई इसी तरह नौकरियां छीनता रहेगा? या ये तकनीक आम आदमी की जिंदगी में नई क्रांति लेकर आएगी? कुछ इसी तरह के सवालों पर RT इंडिया की हेड ऑफ न्यूज रुनझुन शर्मा ने अपने स्पेशल शो India, Russia & The World में आंध्र प्रदेश के आईटी मंत्री नारा लोकेश से बात की। लोकेश ने विस्तार से यह भी बताया कि किस तरह भारत का एआई मॉडल दुनिया के बाकी देशों से अलग और ज्यादा मानवीय है। पेश है उनसे हुई खास बातचीत के मुख्य अंश।
भारत का एआई मॉडल चीन-अमेरिका, यूरोप से कितना अलग?
इस सवाल पर आंध्र प्रदेश के सूचना एवं प्रसारण मंत्री नारा लोकेश ने कहा कि भारत के एआई मॉडल का जोर ‘एआई के लोकतंत्रीकरण’ करने पर है। जहां कुछ देश इससे मुनाफा कमाने की ओर देख रहे हैं, तो कुछ देश इसे केवल रेगुलेट करने की कोशिश कर रहे हैं। मेरा मानना है कि भारत को अपने बड़े पैमाने को देखते हुए एआई का लोकतांत्रीकरण करना चाहिए। हम इस रास्ते पर अच्छी तरह आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि एक राज्य के तौर पर हमने कहा है कि हर परिवार को या तो सक्रिय रूप से एआई का उपयोग करना चाहिए या एआई के लिए एक यूज केस (Use Case) तैयार करना चाहिए। आंध्र प्रदेश के 1.5 करोड़ परिवार भारत के एआई मिशन में प्रभावी रूप से योगदान दे सकते हैं। मेरा मानना है कि दुनिया के पूरे एआई इकोसिस्टम में भारत यही सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
‘AI for 1.4 Billion: Everyday Use Over Profit’ - Nara Lokesh, Minister for IT, Electronics & Communication, Andhra Pradesh on ‘India, Russia, & The World With Runjhun Sharma’
— RT_India (@RT_India_news) June 19, 2026
‘We don't look at AI as a profit-making machine, but we look at the scale of 1.4 billion people using… pic.twitter.com/RErS7EVAzv
भारत का एआई मिशन क्या है?
नारा लोकेश ने कहा कि भारत का एआई मिशन मुख्य रूप से 3 बातों को लेकर बिल्कुल स्पष्ट है। पहला हम फिजिकल इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार कर सकते हैं। दूसरा हम अपने स्थानीय मॉडल (Local Models) कैसे बना सकते हैं। और तीसरा, हम अपने नागरिकों के लिए परिणामों को बेहतर बनाने में एआई का बेहतर ढंग से उपयोग कैसे कर सकते हैं। हमारा मानना है कि एआई केवल अमीरों का प्रोडेक्ट बनकर नहीं रहना चाहिए। इसे एक बड़ा डिजिटल डिवाइड नहीं पैदा करना चाहिए।
While Some Countries Want To Regulate & Profit From AI, India Is Looking At How To Democratise It - Nara Lokesh, Minister for IT, Electronics & Communication, Andhra Pradesh
— RT_India (@RT_India_news) June 18, 2026
In the latest episode of India, Russia and the World, @naralokesh tells RT India Head of News,… pic.twitter.com/N1BpaAdJKv
नारा लोकेश ने आगे कहा कि भारतीय एआई मिशन का जोर अमीर और गरीब दोनों को एक साथ लाने पर है। इससे खेत में मौजूद किसान को मदद मिलनी चाहिए, सड़क पर मौजूद रेहड़ी-पटरी वाले को मदद मिलनी चाहिए, टैक्सी ड्राइवर या ऑटो ड्राइवर को मदद मिलनी चाहिए, तभी आप वास्तव में एआई की वैल्यू को अनलॉक कर पाएंगे।

मंत्री नारा लोकेश ने इंटरव्यू में बताया कि हमने ‘व्हाट्सएप गवर्नेंस’ (WhatsApp Governance) लागू किया है, जहां हमारी सरकार की लगभग हजार सेवाएं एक ही व्हाट्सएप नंबर पर दी जाती हैं। अब इसे एआई के जरिए मजबूत किया जा रहा है। हमारे पास अपने नागरिकों का सबसे बेहतरीन डेटा है। इसके जरिए हम नागरिक सेवाओं को केवल रिएक्टिव होने के बजाय अधिक तात्कालिक और अधिक प्रोएक्टिव रूप से सक्षम बना सकते हैं। हम भूमि रिकॉर्ड (Land Records) को डिजिटल करने और जमीन संबधी सेवाएं देने में भी एआई का उपयोग कर रहे हैं। इसी तरह एआई वास्तव में गवर्नेंस की क्षमता को अनलॉक कर सकता है।
'India Will Lead The Next 6G Telecom Revolution' - Nara Lokesh, Minister for IT, Electronics & Communication, Andhra Pradesh
— RT_India (@RT_India_news) June 18, 2026
In the latest episode of India, Russia and the World, RT India Head of News, @runjhunsharmas is told by @naralokesh that India is actively working to be… pic.twitter.com/7k8bkubI5J
भारत में एआई का क्या योगदान आम लोगों तक कैसे पहुंच बना रहा है?
नारा लोकेश ने कहा कि यही स्मार्टफोन की ताकत है। भारत ने इस मामले में लंबी छलांग लगाई है। हमने पीसी क्रांति (PC Revolution) को पीछे छोड़ दिया और सीधे स्मार्टफोन पर आ गए। भारत एक तकनीक-संचालित (Tech-driven) राष्ट्र है। अगर आप केवल उसी तरीके को देखें जिस तरह से हमने यूपीआई (UPI) का उपयोग किया है, तो यह अद्भुत है कि हमारे 90% के करीब डिजिटल लेनदेन हमारे अपने खुद के प्लेटफॉर्म पर होते हैं। अब हम इसे दुनिया में ले जा रहे हैं। तो यह आश्चर्यजनक है कि कैसे भारत एक फिजिकल कैश वाले देश से अब एक डिजिटल-फर्स्ट देश के रूप में लंबी छलांग लगा रहा है। ये वो तकनीक हैं जो हमने अपने लिए ईजाद की हैं और अब हम इसे दुनिया को पेश कर सकते हैं। मुझे विश्वास है कि एआई में भारत ठोस योगदान दे सकता है।
क्या एआई भारत में बड़े पैमाने पर नौकरियां छीन लेगा?
ये वो सवाल है जो एआई को लेकर अक्सर उठाया जाता है। आंध्र के मंत्री नारा लोकेश ने बताया कि अगर ऐतिहासिक रूप से देखें तो हर औद्योगिक क्रांति (Industrial Revolution) ने जितनी नौकरियां बदली हैं, उससे कहीं अधिक नौकरियां पैदा की हैं, लेकिन ये नौकरियां उन्हीं देशों में पैदा हुईं, जो उस औद्योगिक क्रांति को अपनाने के लिए तैयार थे। अब भारत एआई क्रांति को अपनाने के लिए तैयार है। फिजिकल इंफ्रास्ट्रक्चर से लेकर हमारे अपने मॉडल बनाने से लेकर हमारे पूरे एजुकेशन सिस्टम को बदलने, हमारे पाठ्यक्रम को वर्तमान एआई क्रांति के अनुरूप बनाने तक, हमारे पास पूरा स्टैक मौजूद है। यही कारण है कि एआई हमारे युवाओं को बेहतर जीवनस्तर और उच्च आय प्राप्त करने में सक्षम बनाएगा। हां, छोटे-मोटे या दिमागी मेहनत न करवाने वाले काम ऑटोमेट हो सकते हैं, लेकिन इतना तय है कि एआई बड़े पैमाने पर नए अवसर भी खोल रहा है।

एआई को अपनाने में क्या भारत सुस्त है?
नारा लोकेश का कहना था कि जब टेक्नोलॉजी की बात आती है, तो कई बार ऐसा होता है कि भारत उसे अपनाने में स्लो होता है, लेकिन जब वह अपना रुख बदलता है तो बहुत तेजी से बदलता है। हम रुख बदलेंगे, हम रुख बदलने की प्रक्रिया में हैं और यह निश्चित रूप से हमें अपने आय स्तर को दोगुना करने में सक्षम बनाएगा। और यह तो बस शुरुआत है। मैंने फील्ड में देखा है कि किस तरह एआई का उपयोग किसान, हमारे ऑटोवाले, हमारे रेहड़ी-पटरी वाले तक कर रहे हैं। एआई वहां मौजूद है। लोग इसका उपयोग मेरी सोच से कहीं अधिक प्रभावी ढंग से कर रहे हैं। और मुझे लगता है कि यह भारत का समय है।

किसान एआई का उपयोग कैसे कर रहे?
मैं एक खेत में गया था। मैंने देखा कि किसान पत्तियों की तस्वीरें ले रहे थे और एक एआई टूल के जरिए इमेज प्रोसेसिंग कर रहे थे। ये सब इसलिए ताकि पता चल सके कि उन्हें कौन सा कीटनाशक (Pesticide) इस्तेमाल करना चाहिए या कौन सी खाद डालनी चाहिए या कितना पानी देना चाहिए। कहने का मतलब ये कि काम के कई टूल्स मौजूद हैं। भारत के युवा नए-नए अद्भुत टूल्स बना रहे हैं। हर कोई इस पर काम कर रहा है। इसीलिए वहां कॉम्पिटिशन है। हमारे यहां मोबाइल फोन की क्रांति है। हमारे नागरिक लगभग हर दो से ढाई साल में एक बार अपना मोबाइल फोन अपग्रेड करते हैं। वो फोन नई चिप वाले होते हैं, जो उन्हें अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग करने में सक्षम बनाती है, जो ईमानदारी से पश्चिम ने भी उपयोग नहीं की है।
एआई का बच्चों पर प्रभाव
बच्चों को एआई के इस्तेमाल की छूट पर नारा लोकेश का कहना था कि सभी मॉडल उम्र के अनुकूल कंटेंट में अच्छे नहीं होते हैं। आपने देखा होगा कि कुछ मॉडल ऐसा कंटेंट देते हैं जो बच्चों के लिए ठीक नहीं कहे जा सकते, ऐसी इमेजरी (छवियां) देते हैं जो अच्छी तरह से कंडीशन्ड नहीं हैं। ये ऐसी चुनौतियां हैं जिनसे समाज गुजर रहा है। यह सिर्फ भारत की समस्या नहीं है बल्कि यह एक वैश्विक चुनौती है।
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