कलाम की वो अधूरी ख्वाहिश और आखिरी पल, खुद बताया था दुनिया कैसे रखे उन्हें याद
मिसाइलमैन और पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल के पर्सनल असिस्टेंट (PA) रहे सृजन पाल सिंह ने RT India से एक्सक्लूसिव बातचीत की। इस दौरान उन्होंने बताया कि निधन से 48 घंटे पहले कलाम साहब ने पहली बार मौत को लेकर बात की थी। ये भी बताया कि डॉ. कलाम को जिंदगी में किस बात का सबसे ज्यादा अफसोस रहा।
कलाम की वो अधूरी ख्वाहिश और आखिरी पल, खुद बताया था दुनिया कैसे रखे उन्हें याद
डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम और अपने पर्सनल असिस्टेंट रहे सृजन पाल सिंह के साथ© RT Hindi

इस दुनिया से जाने का सबसे बेहतरीन तरीका ये है कि आप सीधे खड़े हों, जूते पहने हुए हों और जो काम आपको सबसे ज्यादा पसंद हो, वो करते हुए दुनिया को अलविदा कह दें…

भारत के मिसाइलमैन और पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने अपने निधन से 48 घंटे पहले ये बात कही थी। और संयोग देखिए, जिस पल उन्होंने अंतिम सांस ली, वो ठीक ऐसा ही कर रहे थे। कलाम साहब के पर्सनल असिस्टेंट (PA) रहे सृजन पाल सिंह ने RT India पर 11 साल पहले की उस दर्दनाक घटना के बारे में विस्तार से बताया, जिसने देश से इस महान हस्ती को हमेशा के लिए छीन लिया। उन्होंने ये भी बताया कि डॉ. कलाम को किस बात का सबसे ज्यादा अफसोस रहा। वो कौन सी चीज थी, जो वह अपने माता-पिता को नहीं दे पाए।

27 जुलाई 2015 का वो दिन 

डॉ. कलाम के साथ साए की तरह रहने वाले उनके पीए और पेशे से लेखक सृजन पाल सिंह ने RT India पर पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद के स्पेशल शो में उस पल के बारे में बताया। उनके मुताबिक, निधन से 48 घंटे पहले डॉ. कलाम ने पहली बार मौत को लेकर बात की थी, इस दुनिया से विदाई का सबसे बेहतर तरीका बताया था। 

27 जुलाई 2015 का दिन था। डॉ. कलाम IIM शिलॉन्ग में अपना सबसे पसंदीदा काम कर रहे थे। वो था- पृथ्वी को रहने लायक ग्रह बनाने को लेकर छात्रों को स्पीच देना। उसी दौरान अचानक उनकी तबीयत खराब हुई। वह अचेत होकर मंच पर ही गिर पड़े। कुछ देर बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। 

ऊपर देखा और जमीन पर गिर पड़े

सलमान खुर्शीद के सवाल के जवाब में सृजन पाल सिंह ने बताया कि डॉ. कलाम आईआईएम शिलांग में छात्रों को संबोधित कर रहे थे। मैं उनसे महज 1 मीटर की दूरी पर खड़ा था। उनकी स्क्रीन पर आने वाली लाइन्स टाइप कर रहा था। वो छात्रों को संबोधित कर रहे थे। उनका माइक ऑन था। डॉ. कलाम बोले- दुनिया के युवाओं का साझा लक्ष्य होना चाहिए- गरीबी मिटाना, प्रदूषण खत्म करना और सभी के लिए समृद्धि लाना... 

ये वाक्य पूरा करने के बाद वह अचानक रुके और ऊपर की तरफ देखने लगे। सृजन ने बताया कि उन्हें लगा शायद स्क्रीन या माइक का कनेक्शन कट गया है, इसलिए कलाम साहब ऊपर देख रहे हैं। देखते ही देखते वह अचानक नीचे गिर पड़े।

वायरल तस्वीर का झूठा सच 

सृजन पाल सिंह ने साफ किया कि इंटरनेट पर डॉ. कलाम के गिरने की जो एक तस्वीर वायरल होती है, वह उस दिन की नहीं बल्कि किसी और इवेंट की है। उस दिन तो वह जमीन पर जोरदार आवाज के साथ गिरे थे। गिरने के बाद उनकी आंखें खुली हुई थीं और वह सीधे मेरी तरफ देख रहे थे। फिर उन्होंने अपनी आंखें बंद कर लीं। 

सृजन ने बताया कि शुरुआत में हम सबको लगा कि वह बेहोश हो गए हैं। मैंने तुरंत पास जाकर उन्हें उठाया और उनकी हथेलियों को रगड़ना शुरू किया। उसी दौरान कलाम साहब के हाथ मुड़े और उनकी उंगलियां और नाखून मेरे हाथों में कस गए। कलाम साहब अपने नाखून कभी-कभी ही काटते थे, इसलिए उनके नाखून थोड़े बड़े थे। जब उन्होंने जोर से उनका हाथ दबाया, तो नाखून उन्हें महसूस हुए। 

डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की वायरल तस्वीर

डॉक्टर बोले- बहुत देर हो गई

इसके बाद कलाम साहब ने अपने शरीर को सीधा किया और हमेशा के लिए शांत हो गए। उनके मुंह से एक शब्द भी नहीं निकला। आईआईएम शिलांग के डॉक्टर तुरंत दौड़े आए। जब मैंने कहा कि इन्हें तुरंत अस्पताल ले चलते हैं, तो डॉक्टर ने कहा कि बहुत देर हो चुकी है। 

डॉ. कलाम के साथ सृजन पाल सिंह (File Photo)© RT Hindi

दुनिया किस रूप में याद रखे, कलाम ने बताया था

सृजन बताते हैं कि जब कलाम साहब से कभी पूछा जाता कि आप किस रूप में याद रखे जाना चाहते हैं- मिसाइल मैन, वैज्ञानिक या राष्ट्रपति? तो वह हमेशा कहते थे- एक शिक्षक के रूप में। और किस्मत देखिए कि अपने अंतिम पलों में भी वह एक टीचर की तरह छात्रों को पढ़ा रहे थे। आखिरी वक्त में भी उनके अंदर युवाओं और गरीबों के लिए एक विजन था। 

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