
इजरायल के चुनावी दंगल में वोटों की गिनती जैसे-जैसे आखिरी दौर में पहुंच रही है, सत्ता का समीकरण सुलझने के बजाय और उलझता दिख रहा है। करीब 90 फीसदी वोट्स की गिनती के बाद साफ हो गया है कि जनता ने किसी भी गठबंधन की झोली में पूर्ण बहुमत नहीं डाला है।
प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू 53 सीटों के साथ सबसे आगे तो हैं, लेकिन 61 के जादुई आंकड़े से 8 कदम पीछे हैं। दूसरी ओर गादी आइजेनकोट के नेतृत्व में विपक्षी गठबंधन 48 सीटों पर है। 19 सीटें जीतकर अरब पार्टियां बड़ी ताकत बनकर उभरी हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या बेंजामिन नेतन्याहू जोड़-तोड़ कर एक बार फिर सरकार बना लेंगे?
RT इंडिया से बातचीत में विदेश मामलों के जानकार रोबिंदर नाथ सचदेव ने कहा कि नेतन्याहू के पास फिलहाल विपक्ष के मुकाबले ज्यादा सीटें हैं। ऐसे में वह विपक्षी गठबंधन में सेंध लगाने और कुछ और पार्टियों को अपने साथ लाने की कोशिश कर सकते हैं। हालांकि, सरकार बनाने का रास्ता आसान नहीं दिख रहा।
क्या जोड़-तोड़ से बहुमत जुटा पाएंगे नेतन्याहू?
सचदेव के मुताबिक, नेतन्याहू के सामने एक रास्ता यह है कि वह विपक्षी खेमे की कुछ पार्टियों को अपने साथ आने के लिए मनाएं। इजरायल की राजनीति में कई पार्टियां मिलकर गठबंधन बनाती हैं। इसलिए चुनाव में सबसे ज्यादा सीटें हासिल करना अपने आप में सरकार बनाने की गारंटी नहीं है।
उन्होंने यह भी कहा कि कुछ पार्टियों के बीच बातचीत होने की खबरें हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में गठबंधनों में फेरबदल देखने को मिल सकता है। कुछ विपक्षी पार्टियां नेतन्याहू के साथ जाने पर विचार कर सकती हैं। हालांकि, यह अभी साफ नहीं है कि ऐसा कोई समझौता हो पाएगा या नहीं।
अगर कोई भी खेमा बहुमत जुटाने में नाकाम रहता है, तो राजनीतिक गतिरोध बना रह सकता है। सचदेव के मुताबिक, ऐसी स्थिति में करीब दो महीने तक खींचतान चल सकती है। इसके अलावा नए चुनाव कराने की नौबत भी आ सकती है।

अरब पार्टियां सरकार से दूर क्यों?
इस चुनाव में अरब पार्टियों की भूमिका अहम हो गई है। इन पार्टियों को मिलाकर करीब 19 सीटें मिली हैं। संख्या के लिहाज से वे सरकार बनाने में निर्णायक भूमिका निभा सकती हैं। लेकिन इजरायल के प्रमुख यहूदी राजनीतिक खेमे उनके साथ गठबंधन करने से इनकार करते रहे हैं।
सचदेव ने कहा कि यही इस चुनाव का सबसे अहम पहलू है। अरब पार्टियों के पास संसद में प्रतिनिधित्व तो होगा, लेकिन सरकार की नीतियों को प्रभावित करने का मौका मिलना मुश्किल दिख रहा है।
सचदेव के मुताबिक, पहले अरब पार्टियों के पास कम सीटें थीं, इसलिए सरकार बनाने की चर्चा में उनकी भूमिका उतनी प्रमुख नहीं थी। इस बार उनकी सीटें बढ़ने से यह सवाल ज्यादा अहम हो गया है कि क्या उन्हें सरकार बनाने की प्रक्रिया में जगह मिलेगी या नहीं।
उनका कहना है कि अरब पार्टियों को बाहर रखने की कोशिश से उनकी संख्या का संभावित राजनीतिक असर सीमित हो सकता है।

नेतन्याहू और विपक्ष की साझा सरकार बनेगी?
सरकार बनाने का एक दूसरा रास्ता भी हो सकता है। नेतन्याहू का गठबंधन और विपक्षी नेता गादी आइजेनकोट का खेमा मिलकर राष्ट्रीय एकता की सरकार बनाने पर विचार कर सकते हैं। ऐसी सरकार में दोनों पक्षों को सत्ता साझा करनी होगी। लेकिन इसके साथ ही सवाल उठेगा कि प्रधानमंत्री कौन बनेगा और दूसरे नेताओं को क्या भूमिका मिलेगी।
सचदेव ने कहा कि इस तरह के गठबंधन में सीटों के अलावा नेताओं के राजनीतिक हित भी अहम होंगे। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में जोड़-तोड़ और सौदेबाजी देखने को मिल सकती है।
हालांकि, नेतन्याहू के लिए प्रधानमंत्री पद पर बने रहना खास तौर पर अहम है। सचदेव ने इसकी वजह उनके खिलाफ चल रहे मामलों को बताया। उनके मुताबिक, नेतन्याहू के सामने भ्रष्टाचार के आरोपों और 7 अक्टूबर के हमलों से जुड़े सुरक्षा संबंधी सवालों समेत कई चुनौतियां हैं।
गादी गुट भी सरकार बनाने की कोशिशों में जुटी
दूसरी तरफ, डेमोक्रेट्स पार्टी के अध्यक्ष यायर गोलान ने प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को सत्ता से हटाने की कोशिशों के तहत बेयाचाद (B’Yachad) पार्टी के दूसरे नंबर के नेता यायर लैपिड से मुलाकात की।
יוצא מפגישה טובה עם חברי, יאיר לפיד. אני נחוש לעשות כל מאמץ, להפוך כל אבן ולפעול עם כל שותפינו כדי להציל את ישראל. נמשיך לעבוד בתיאום. לא נוותר על ההזדמנות לשינוי. נעשה ונצליח 🇮🇱 https://t.co/jQLZgv69Iz
— Yair Golan - יאיר גולן (@YairGolan1) October 29, 2026
गोलान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, “मैं इजरायल को बचाने के लिए हर संभव कोशिश करने, हर रास्ता तलाशने और अपने सहयोगियों के साथ मिलकर काम करने के लिए प्रतिबद्ध हूं।”
उन्होंने आगे कहा, “हम मिलकर काम करना जारी रखेंगे। हम बदलाव लाने का मौका हाथ से नहीं जाने देंगे।”
लिकुड ने लगाया धांधली का आरोप, गादी ने क्या कहा?
नेतन्याहू की लिकुड पार्टी ने अरब पार्टियों पर इजरायल के चुनाव में धांधली करने का आरोप लगाया है। पार्टी की ओर से जारी बयान में कहा गया, “इजरायल के चुनाव अरब पार्टियों ने चुरा लिए, जो आतंकवाद और यहूदी देश को खत्म करने का समर्थन करती हैं। चुनाव में धांधली के लिए रिश्वतखोरी, धमकियों, हिंसा, जालसाजी और मतदाताओं को जुटाने के लिए प्रतिबंधित सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल जैसे गंभीर अपराध किए गए।”
הליכוד: הבחירות במדינת ישראל נגנבו על ידי מפלגות ערביות שתומכות בטרור ובחיסול המדינה היהודית באמצעות עבירות פליליות חמורות של שוחד, איומים, אלימות, זיופים ושימוש בתוכנות אסורות להמרצת מצביעים. מפלגת הליכוד מעבירה למשטרה, לשב״כ ולוועדת הבחירות מאות עדויות וראיות על גניבת בחירות בקלפיות ערביות רבות- אלפי מעטפות עם כסף מזומן ופתקי רע״ם, איומים ואלימות כלפי חברי הקלפי, ריבוי מצביעים מאחורי הפרגוד, הצבעות בזהות כפולה, פערים בין מספר המעטפות למספר המצביעים, שימוש בתוכנות המרצה אסורות ועוד. אנו דורשים מהמשטרה ומהשב״כ חקירה יסודית בגין גניבת הבחירות על ידי המפלגות הערביות ומיצוי הדין עם העבריינים. אנו דורשים מוועדת הבחירות התייחסות מיידית לחקירת העבירות הפליליות הללו שפגעו באופן קיצוני בטוהר הבחירות בישראל ובתוצאות הבחירות. זו פגיעה חמורה בדמוקרטיה הישראלית ובזכות הבחירה של אזרחי ישראל. גופי האכיפה מוכרחים לפעול ביד קשה ובאופן מיידי.
— Benjamin Netanyahu - בנימין נתניהו (@netanyahu) October 28, 2026
लिकुड पार्टी का कहना है कि वह कई अरब बहुल मतदान केंद्रों पर कथित धांधली से जुड़े सैकड़ों बयान और सबूत पुलिस, शिन बेट (इजरायल की आंतरिक सुरक्षा एजेंसी) और केंद्रीय चुनाव समिति को सौंप रही है। पार्टी ने आरोप लगाया कि इन केंद्रों पर नकदी से भरे हजारों लिफाफे और रा’म पार्टी की पर्चियां मिलीं।
पार्टी ने कहा, “हम पुलिस और शिन बेट से मांग करते हैं कि अरब पार्टियों की ओर से चुनाव में धांधली के आरोपों की गहराई से जांच की जाए और इसमें शामिल अपराधियों के खिलाफ पूरी कानूनी कार्रवाई की जाए।”
מברך על כך שנתניהו מגנה סוף סוף מעורבות קטארית במדינת ישראל. מעורבות זרה במדינת ישראל היא דבר פסול וחמור מאין כמוהו, במיוחד כשמדובר במדינה שמממנת ותומכת בארגון חמאס. זה חמור כשזה קורה בלשכת רה״מ וזה חמור אם זה קורה במערכת הבחירות. שב״כ חייב לחקור ללא משוא פנים את החשדות באופן מלא ומידי. יש לנקוט באגרוף ברזל כלפי כל מי שיתברר שפגע או שניסה לפגוע בטוהר הבחירות. כל החלטה הנוגעת לבחירות צריכה להתקבל בחרדת קודש קיצונית ומתוך הבנה שהשבעת הכנסת ה-26 חייבת להתקיים במועדה. מימוש רצון הבוחר בבחירות דמוקרטיות הוא רכיב יסוד בדמוקרטיה הישראלית ובחוסן הלאומי. נתניהו, שהתרגל להתמודד עם המציאות באמצעות שקרים, הנדסת תודעה והפצת כאוס, מוביל יחד עם שותפיו מבצע השפעה פסול על הציבור הישראלי במטרה לעכב את פרסום תוצאות הבחירות במועדן ולייצר דה לגיטימציה פיקטיבית לפעילות הכנסת ה-26. הניסיון לנצל מידע (שטרם נחקר) שפרטיו והיקף חשדותיו טרם התבררו כדי לערער על תוצאות הבחירות הרשמיות- שבהן הציבור הישראלי הצביע נגד ממשלת המחדל, אינו מתקבל על הדעת ויש לדחות אותו מכל וכל.
— Gadi Eisenkot - גדי איזנקוט (@gadi_eisenkot) October 29, 2026
वहीं, विपक्षी नेता गादी आइजेनकोट ने इजरायल में कतर की कथित दखलंदाजी की निंदा करने के लिए नेतन्याहू की सराहना की। उन्होंने कहा, “इजरायल के आंतरिक मामलों में किसी दूसरे देश की दखलंदाजी अस्वीकार्य और बेहद गंभीर मामला है। खासकर तब, जब उस देश पर हमास को आर्थिक मदद देने और उसका समर्थन करने के आरोप हों। प्रधानमंत्री कार्यालय या चुनावी व्यवस्था में ऐसी दखलंदाजी गंभीर मामला है।”
आइजेनकोट ने शिन बेट से इन आरोपों की निष्पक्षता से और जल्द जांच करने की अपील भी की।
नई सरकार गाजा पर इजरायल की नीति बदलेगी?
चुनाव के बाद बनने वाली सरकार से गाजा को लेकर इजरायल की नीति में बड़े बदलाव की उम्मीद पर भी एक सवाल है। इजरायल के सैन्य अभियान में गाजा को भारी नुकसान पहुंचा है। संयुक्त राष्ट्र समेत कई पक्ष फिलिस्तीनियों की पीड़ा और मानवीय स्थिति पर गंभीर चिंता जता चुके हैं।
लेकिन सचदेव को नहीं लगता कि सरकार बदलने या नया गठबंधन बनने से इजरायल की नीति में कोई बड़ा बदलाव आएगा। उनके मुताबिक, नेतन्याहू फिर प्रधानमंत्री बनते हैं, तो मौजूदा नीति जारी रह सकती है। अगर कोई दूसरा गठबंधन बनता भी है, तो उसमें शामिल प्रमुख नेताओं का रुख भी गाजा के मामले में सख्त रह सकता है।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि नेतन्याहू 53 सीटों से 61 तक पहुंचने के लिए कितनी पार्टियों को अपने साथ ला पाते हैं। अगर वह बहुमत जुटा लेते हैं, तो सरकार बनाने का रास्ता खुल सकता है। लेकिन अगर गठबंधन का गणित नहीं सुलझा, तो इजरायल को लंबे राजनीतिक गतिरोध या नए चुनाव का सामना करना पड़ सकता है।
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