इजरायल के आम चुनाव में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के नेतृत्व वाले गठबंधन को बहुमत मिलता नहीं दिख रहा है। 90 फीसदी से ज्यादा वोटों की गिनती के बाद भी किसी बड़े राजनीतिक खेमे के पास सरकार बनाने के लिए जरूरी सीटें नहीं हैं। ऐसे में सरकार गठन को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। अब सवाल है कि इन नतीजों को इजरायल के लोग किस तरह देख रहे हैं और फिलिस्तीनियों को इससे क्या उम्मीदें हैं?
कौन लोग निराश हैं?
इजरायल के मतदाताओं की राय बंटी हुई है। कुछ लोग चुनाव में राजनीतिक बदलाव का मौका हाथ से निकलने से निराश हैं, तो कुछ चाहते हैं कि नेतन्याहू के नेतृत्व में दक्षिणपंथी गठबंधन सरकार बनाए। नेतन्याहू के विरोध में वोट देने वाले एक वोटर ने कहा कि बड़ी संख्या में लोग बदलाव की उम्मीद लेकर वोट देने निकले थे। अगर देश में फिर चुनाव कराने की नौबत आती है, तो यह एक बड़ा मौका गंवाने जैसा होगा। उन्होंने सवाल उठाया कि इजरायल बार-बार उसी राजनीतिक स्थिति में क्यों पहुंच जाता है।
वहीं, नेतन्याहू के एक समर्थक ने उम्मीद जताई कि लिकुड पार्टी के नेतृत्व में दक्षिणपंथी गठबंधन सरकार बनाने में कामयाब होगा। उन्होंने कहा कि देश को आगे बढ़ाने के लिए एक और चुनाव से बचना जरूरी है। इजरायल के अरब नागरिकों की राजनीतिक भूमिका भी चर्चा में है। एक इजरायली नागरिक ने कहा कि अरब मूल के इजरायली भी देश के नागरिक हैं और उन्हें किसी विरोधी पक्ष के रूप में देखना सही नहीं है।
फिलिस्तीनियों को सरकार बदलने से कितनी उम्मीद?
इजरायल में सरकार बदलने की संभावना के बीच गाजा के भविष्य को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। एक फिलिस्तीनी व्यक्ति का कहना है कि नेतन्याहू की जगह कोई दूसरा नेता सत्ता में आता है, तब भी फिलिस्तीनियों के प्रति इजरायल की बुनियादी नीति में बड़े बदलाव की उम्मीद कम है। हालांकि, उनका मानना है कि नेतन्याहू और दूसरे नेताओं के रवैये में अंतर हो सकता है।
गाजा में मानवीय सहायता को लेकर भी निराशा जताई गई है। एक अन्य व्यक्ति ने कहा कि गाजा को दो हिस्सों में बांटे रखने की व्यवस्था को मजबूत करने की कोशिश हो सकती है और मानवीय सहायता से जुड़े कदमों को वास्तविक राजनीतिक समाधान के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।
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वेस्ट बैंक के लोगों को क्या उम्मीद?
वेस्ट बैंक में रहने वाले फिलिस्तीनियों की उम्मीद है कि इजरायल की राजनीति में अरब सांसदों की बढ़ती ताकत उनके लिए कुछ राहत ला सकती है। एक व्यक्ति ने कहा कि गाजा में हिंसा, लोगों की मौत और किसानों के अपनी जमीन तक नहीं पहुंच पाने जैसी स्थितियों से ज्यादा बुरा क्या होगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि अरब सांसद हिंसा रोकने और लोगों के हालात सुधारने में भूमिका निभा सकते हैं।
हालांकि, वेस्ट बैंक के दूसरे लोगों का कहना है कि इजरायल में सरकार चाहे दक्षिणपंथी हो या किसी दूसरे राजनीतिक खेमे की, फिलिस्तीनी जमीन पर नियंत्रण की नीति में बड़ा बदलाव आने की उम्मीद कम है।
अरब पार्टियों की सीटों से जगी उम्मीद
इजरायल के चुनाव में अरब पार्टियों की भूमिका भी अहम हो गई है। शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक, अरब पार्टियों के पास 19 सीटें हो सकती हैं। ऐसे में सरकार बनाने के लिए बहुमत जुटाने की कोशिश में इन पार्टियों का समर्थन महत्वपूर्ण हो सकता है। वेस्ट बैंक के कुछ फिलिस्तीनियों को उम्मीद है कि अरब सांसद उनकी आवाज उठाएंगे और हिंसा रोकने में भूमिका निभाएंगे। एक व्यक्ति ने कहा कि वे चाहते हैं कि अरब सीटों पर जीतने वाले सांसद खूनखराबा रोकने और लोगों को शांतिपूर्ण जीवन दिलाने की दिशा में काम करें।
हालांकि, दूसरे लोगों का मानना है कि इजरायल की राजनीतिक पार्टियां फिलिस्तीनी राज्य के गठन और विस्थापन जैसे मुद्दों पर पर्याप्त प्रतिबद्धता नहीं दिखातीं। एक व्यक्ति ने कहा कि दशकों से शांति की बातें हो रही हैं, लेकिन फिलिस्तीनियों को इसका ठोस लाभ नहीं मिला है।
सरकार गठन पर टिकी निगाहें
इजरायल में सरकार बनाने के लिए 120 सदस्यीय नेसेट में कम से कम 61 सांसदों का समर्थन जरूरी है। शुरुआती आंकड़ों में नेतन्याहू के गठबंधन को करीब 53 सीटें और विपक्षी खेमे को 48 सीटें मिलने का अनुमान बताया गया है। अरब पार्टियों की सीटें भी सत्ता के समीकरण में महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में राजनीतिक दलों के सामने गठबंधन बनाने या नए चुनाव की ओर बढ़ने का विकल्प है। इजरायल के राष्ट्रपति ने भी सभी राजनीतिक दलों से खुले मन से बातचीत करने और एक और चुनाव से बचने की अपील की है।
फिलहाल, इजरायल में सरकार किसकी बनेगी, यह स्पष्ट नहीं है। लेकिन चुनाव के बाद सामने आ रही प्रतिक्रियाएं बताती हैं कि जहां कुछ इजरायली राजनीतिक बदलाव चाहते हैं और कुछ नेतन्याहू की वापसी की उम्मीद कर रहे हैं, वहीं कई फिलिस्तीनियों को संदेह है कि सत्ता बदलने से उनके हालात में कोई बुनियादी बदलाव आएगा।







