
मान लीजिए, आप 10 दिन के टूर पर निकले हैं। टिकट बुक है, होटल की चिंता नहीं, घूमने-फिरने का पूरा प्लान तैयार है। लेकिन अभी आधा रास्ता ही तय हुआ है कि कोई आपसे कह दे- बस, अब यहीं उतर जाइए! आगे का सफर फिलहाल नहीं हो सकता। सुनकर कैसा लगेगा? अब सोचिए, यही बात आपसे तब कही जाए, जब आपने सिर्फ 10 दिन नहीं, बल्कि अगले कई सालों के लिए अपना घर ही एक जहाज पर बसा लिया हो!
कुछ ऐसा ही हुआ है अमेरिका के एक क्रूज MV Odyssey पर सवार यात्रियों के साथ। दुनिया घूमने के लिए निकला यह जहाज तीन साल की समुद्री यात्रा पूरी करने वाला था, लेकिन ईरान युद्ध के बाद बढ़ी ईंधन की कीमतों ने इसके सफर पर ब्रेक लगा दिया। हालात ऐसे बने कि यात्रियों को बीच में ही जहाज से उतरना पड़ा।
सवाल है कि आखिर एक जहाज का तेल इतना महंगा कैसे हो गया कि लोगों का घर बना क्रूज ही अपना सफर जारी नहीं रख सका?

जहाज नहीं, चलता-फिरता घर था Odyssey
MV Odyssey कोई ऐसा क्रूज नहीं था, जिस पर लोग कुछ दिन की छुट्टियां बिताने के लिए सवार हुए हों। अमेरिका की कंपनी Villa Vie Residences ने इसे एक तैरते हुए घर (Floating Home) के तौर पर पेश किया था। यानी समुद्र के बीच रहिए और दुनिया के अलग-अलग देशों की सैर भी करते रहिए।
जहाज की यात्रा अक्टूबर 2024 में उत्तरी आयरलैंड के बेलफास्ट से शुरू हुई थी। बेलफास्ट यूनाइटेड किंगडम के हिस्से उत्तरी आयरलैंड का एक प्रमुख शहर है। यहां से जहाज सातों महाद्वीप की यात्रा पर निकला था। इस सफर को करीब साढ़े तीन साल में पूरा करने का प्लान था।
कंपनी ने जहाज में लंबे समय तक रहने के लिए केबिन बेचने की पेशकश की थी। कुछ योजनाओं में केबिन की कीमत करीब 2.30 लाख डॉलर यानी उस समय के हिसाब से लगभग 1.9 करोड़ रुपये से शुरू होती थी। इसके अलावा यात्रियों को रखरखाव जैसे खर्च भी उठाने पड़ते थे।
यानी लोगों ने सिर्फ छुट्टियां मनाने के लिए टिकट नहीं खरीदा था, बल्कि समुद्र के बीच अपनी जिंदगी बिताने का सपना देखा था।

थाईलैंड की खाड़ी के पास क्यों रुका जहाज?
फिलहाल MV Odyssey कंबोडिया के सिहानोकविल (Sihanoukville) बंदरगाह पर खड़ा है। कंबोडिया दक्षिण-पूर्व एशिया का एक देश है और सिहानोकविल उसके दक्षिण-पश्चिमी तट पर स्थित बंदरगाह शहर है। यह थाईलैंड की खाड़ी के किनारे बसा है।
जहाज पर 203 यात्री और 156 क्रू मेंबर यानी चालक दल के सदस्य सवार थे। इसकी क्षमता करीब 650 यात्रियों की है।
जहाज का संचालन करने वाली फ्लोरिडा स्थित कंपनी के मुताबिक, पहले प्रति केबिन हर महीने ईंधन पर औसतन 1,800 डॉलर खर्च होते थे। लेकिन एशिया के कुछ हिस्सों में यह खर्च बढ़कर 6,000 से 8,000 डॉलर तक पहुंच गया। कंपनी ने कहा कि यात्रा की रफ्तार कम करने और बंदरगाहों पर ज्यादा समय बिताने जैसे उपाय भी बढ़ते खर्च की भरपाई नहीं कर सके।
ईरान युद्ध से जहाज के ईंधन का क्या कनेक्शन?
अब सवाल उठता है कि अमेरिका से जुड़ी एक कंपनी का क्रूज कंबोडिया में क्यों फंस गया? इसका जवाब समझने के लिए पश्चिम एशिया की लोकेशन समझना होगी।
ईरान के पास स्थित होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के अहम समुद्री ऊर्जा मार्गों में से एक है। खाड़ी क्षेत्र से निकलने वाले तेल और अन्य एनर्जी उत्पादों की सप्लाई के लिए यह रास्ता बेहद महत्वपूर्ण है।
ईरान युद्ध के दौरान इस समुद्री रास्ते पर जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से ऊर्जा की सप्लाई पर दबाव पड़ा। इसका असर ईंधन की उपलब्धता और कीमतों पर भी पड़ा, खासकर एशिया के कुछ हिस्सों में।
क्रूज जहाजों को चलाने के लिए बड़ी मात्रा में ईंधन चाहिए। ऐसे में कीमतों में भारी उछाल का सीधा असर उनके संचालन के खर्च पर पड़ता है। MV Odyssey के मामले में कंपनी का कहना है कि बढ़ते खर्च ने उसके लिए यात्रा जारी रखना मुश्किल कर दिया।
कंपनी ने यह भी कहा कि ईंधन की बढ़ी हुई कीमत यात्रियों से वसूलना सही नहीं था। लिहाजा उसने यात्रा रोकने और कंपनी के वित्तीय ढांचे को फिर से व्यवस्थित करने पर ध्यान देने की बात कही।

यात्रियों के सपनों पर फिरा पानी?
जहाज पर रहने वाले कई यात्रियों के लिए यह सिर्फ एक यात्रा का रुकना नहीं, बल्कि उनके घर और जीवनशैली से जुड़ा सपना टूटने जैसा था।
अमेरिका के वायोमिंग राज्य से आए रिटायर्ड दंपति पॉल और लिन मोंटोया करीब 17 महीने से जहाज पर रह रहे थे। उन्होंने उम्मीद की थी कि समुद्र के बीच उनकी जिंदगी कई साल तक चलती रहेगी। लेकिन उनके मुताबिक, कंपनी को बढ़ते खर्चों के अलावा प्रबंधन से जुड़ी समस्याओं का भी सामना करना पड़ रहा था।

कैलिफोर्निया की 69 वर्षीय कैरोल लार्सन और उनकी 72 वर्षीय बहन क्रिस्टल लैवरिंग भी करीब 18 महीने से जहाज पर रह रही थीं। लार्सन ने बताया कि उन्होंने अपना केबिन करीब 1.20 लाख डॉलर में खरीदा था और किस्तों में भुगतान किया था। उन्होंने कहा कि उन्हें इस अनुभव का कोई पछतावा नहीं है। हालांकि, वह चाहती हैं कि कोई नई कंपनी जहाज को खरीदकर इस सफर को फिर से शुरू करे।
कुछ यात्रियों ने शिकायत की कि उन्हें जहाज से उतरने के लिए बहुत कम समय दिया गया और रहने की व्यवस्था भी खुद ही करनी पड़ी। वहीं, कंपनी ने कहा कि वह यात्रियों, चालक दल और कर्मचारियों की मदद कर रही है और आगे के विकल्प तलाश रही है।
फिलहाल जहाज के दोबारा रवाना होने की कोई पक्की तारीख सामने नहीं आई है।
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