यमन के हूती विद्रोहियों के हमलों से परेशान सऊदी अरब अब ईरान से बातचीत कर रहा है। सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किये के बड़े अधिकारी सोमवार को ईरान की राजधानी तेहरान में ईरानी नेतृत्व से मुलाकात करने पहुंच चुके हैं। सऊदी अरब के रक्षा मंत्री खालिद बिन सलमान, पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर और तुर्किये की खुफिया एजेंसी के प्रमुख इब्राहिम कालिन इस बैठक में शामिल हो रहे हैं।
Pakistan’s Army Chief has arrived in Tehran to meet with Iranian officials and participate in a joint, multilateral meeting with Iran’s top security official. https://t.co/1Gh2y0jQgO
— Tehran Times (@TehranTimes79) October 26, 2026
बैठक का मकसद क्षेत्रीय तनाव कम करना और अमेरिका-ईरान के बीच बातचीत का रास्ता तलाशना है। यह बैठक इसलिए अहम है, क्योंकि सऊदी अरब के इस संघर्ष में उलझने के बाद पहली बार मक्का पैक्ट के तीनों देशों के बड़े अधिकारी ईरान के नेताओं से बातचीत करने जा रहे हैं।

अगस्त में हुए इस समझौते के मुताबिक, अगर किसी एक देश पर हमला होता है, तो उसे तीनों देशों पर हमला माना जाएगा।
सऊदी अरब के उप विदेश मंत्री रायद करीमली ने कहा कि यह बैठक मक्का पैक्ट के तहत क्षेत्र में तनाव कम करने, कूटनीतिक समाधान तलाशने और कतर-पाकिस्तान की मध्यस्थता की कोशिशों को समर्थन देने के लिए हो रही है।
HRH Prince Khalid bin Salman bin Abdulaziz Al-Saud, Minister of Defense, leads the Kingdom’s delegation to the meetings that will be held today in Tehran, capital of Iran, between Makkah Joint Defense Agreement countries and officials from the Islamic Republic of Iran, with participation of Field Marshall Asim Munir, Pakistani Chief of Army Staff and Ibrahim Kalin, Director of the Turkish National Intelligence. Representatives of Makkah Joint Defense Agreement countries will meet with the H.E. President of the Islamic Republic of Iran Dr. Masoud Pezeshkian, and H.E. the Secretary of the Supreme National Security Council of Iran Mohsen Rezaei. The visit comes as part of the continued efforts by the Makkah Joint Defense Agreement countries for de-escalation between parties involved in the ongoing crisis, and promoting dialogue and diplomatic solutions, in support of the mediation efforts carried out by the State of Qatar and the Islamic Republic of Pakistan. The visit underscore the pivotal role of Makkah Joint Defense Agreement countries in reinforcing regional security and stability, and working with all countries in the region to achieve that goal.
— AMB Dr. Rayed Krimly (@Rayedkrimly) October 26, 2026
उन्होंने एक्स पर लिखा कि यह दौरा क्षेत्र की सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखने में मक्का पैक्ट के देशों की अहम भूमिका और क्षेत्र के सभी देशों के साथ मिलकर काम करने की उनकी इच्छा को भी दिखाता है।
जेएनयू में असिस्टेंट प्रोफेसर और जियोपॉलिटिकल एक्सपर्ट अभिषेक श्रीवास्तव RT हिंदी से बात करते हुए कहते हैं, ‘मक्का एलायंस करने वाले देशों को समझ आ गया है कि पश्चिम एशिया में शांति के लिए ईरान से बात करना जरूरी है। सऊदी अरब पर हूतियों के हमलों को रोकने के लिए भी ईरान से बात करना जरूरी है। उसे इग्नोर करके मध्य-पूर्व में शांति नहीं आ सकती।’
हूती हमलों से सऊदी अरब को भारी नुकसान
इस बैठक के पीछे एक बड़ी वजह यमन में हूती विद्रोहियों के बढ़ते हमले हैं। हूती विद्रोही मिसाइलों और ड्रोन से सऊदी अरब को लगातार निशाना बना रहे हैं। रॉयटर्स के मुताबिक, रविवार को भी सऊदी अरब ने मिसाइलों और ड्रोन हमलों को नाकाम किया।
हूतियों के हमले ऐसे समय में बढ़ रहे हैं, जब ईरान और अमेरिका के बीच तनाव फिर बढ़ रहा है। इससे सऊदी अरब के लिए मुश्किल बढ़ गई है, क्योंकि वह मक्का पैक्ट के तहत पाकिस्तान और तुर्किये के साथ सामूहिक रक्षा समझौते में शामिल है। ऐसे में ईरान से बातचीत की पहल को क्षेत्र में तनाव कम करने की कोशिश के तौर पर देखा जा सकता है।
यमन के हूती विद्रोहियों के हमलों से सऊदी अरब में एयरपोर्ट और तेल से जुड़े ठिकानों को नुकसान पहुंचा है। अक्टूबर में रियाद के किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर कई हमले हुए। रिपोर्टों के मुताबिक, इन हमलों में 17 से 18 लोगों की मौत हुई और 300 से ज्यादा लोग घायल हुए।

एयरपोर्ट पर उड़ानें भी प्रभावित हुईं। दक्षिण-पश्चिमी सऊदी अरब के अभा एयरपोर्ट पर हुए हमलों में तीन लोगों की मौत और 28 लोगों के घायल होने की खबर आई। जजान और नजरान के एयरपोर्ट पर भी हमले हुए, जिनमें तीन लोग घायल हुए। दम्माम के किंग फहद इंटरनेशनल एयरपोर्ट को भी निशाना बनाया गया।
हमलों का असर सऊदी अरब के तेल कारोबार से जुड़े ठिकानों पर भी पड़ा। 13 अक्टूबर की रात सरकारी तेल कंपनी सऊदी अरामको के धहरान स्थित मुख्यालय परिसर की एक प्रशासनिक इमारत पर हमला हुआ। सऊदी ऊर्जा मंत्रालय ने बताया कि वहां आग लगी, लेकिन किसी की मौत या घायल होने की खबर नहीं थी।
इसके अलावा, हूतियों ने 26 अक्टूबर को दावा किया कि उन्होंने सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट तेल पाइपलाइन के पंपिंग स्टेशनों और रियाद एयरपोर्ट को निशाना बनाया। इससे पहले उन्होंने यानबू में अरामको की सुविधा और राबिग रिफाइनरी पर हमले का दावा भी किया था। हालांकि, इन दावों की सऊदी अरब की ओर से तत्काल पुष्टि नहीं हुई थी।
पाकिस्तान बना बातचीत की अहम कड़ी
रॉयटर्स के मुताबिक, तेहरान में इस बैठक की पहल पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर की पिछले हफ्ते हुई ईरान यात्रा के दौरान हुई थी।

मुनीर ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान और दूसरे वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात की थी। इसके बाद सऊदी अरब और तुर्किये के प्रतिनिधियों के तेहरान पहुंचने का कार्यक्रम बना।
पाकिस्तान पहले भी ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थता की कोशिश कर चुका है। जून में पाकिस्तान और कतर की मदद से दोनों देशों के बीच एक अंतरिम समझौता हुआ था। इसका मकसद होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही बहाल करना, अमेरिकी नाकेबंदी खत्म करना और व्यापक समझौते पर बातचीत शुरू करना था।
लेकिन कुछ ही हफ्तों बाद लड़ाई दोबारा शुरू हो गई और समझौता टिक नहीं पाया। अब पाकिस्तान और कतर फिर तनाव कम कराने की कोशिश कर रहे हैं।
ईरान बातचीत में क्या चाहता है?
ईरान इस बैठक को केवल तनाव कम करने की कोशिश के रूप में नहीं, बल्कि क्षेत्रीय सुरक्षा व्यवस्था पर अपना पक्ष रखने के मौके के तौर पर भी देख रहा है। ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के उप सचिव अली बाघेरी कानी के मुताबिक, चारों देशों के प्रतिनिधि क्षेत्रीय सुरक्षा पर चर्चा करेंगे। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय देशों को अपनी सुरक्षा खुद सुनिश्चित करनी चाहिए और इसके लिए ईरान के रक्षा अनुभव से भी सीख ली जा सकती है।
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि बातचीत में इजरायल की नीतियों, फिलिस्तीन और लेबनान के हालात और ईरान पर अमेरिका-इजरायल की सैन्य कार्रवाई के असर पर चर्चा हो सकती है। हालांकि, बैठक का पूरा एजेंडा अभी तय नहीं किया गया है।
ईरान लंबे समय से कहता रहा है कि मध्य-पूर्व की सुरक्षा से जुड़े फैसले क्षेत्रीय देशों को लेने चाहिए, न कि बाहरी शक्तियों को। तेहरान में होने वाली यह बैठक उसे इसी विचार को आगे बढ़ाने का मौका दे सकती है।
बातचीत की पहल में रूस-चीन का भी रोल?
अभिषेक श्रीवास्तव कहते हैं कि इस बातचीत के पीछे रूस और चीन का बैक सपोर्ट है।
वो कहते हैं कि ईरान की नजदीकी रूस और चीन से है। पश्चिम एशिया में इसलिए इन दोनों देशों की भूमिका अहम है। मगर यह मीटिंग सिर्फ सऊदी अरब पर हूतियों के हमलों को रोकने के लिए ही नहीं है, बल्कि इसमें कई और बड़े मुद्दों पर बात सकती है जो क्षेत्रीय सुरक्षा और शांति के लिए जरूरी है।
अभिषेक श्रीवास्तव कहते हैं, 'इसमें ग्लोबल सप्लाई चेन का लंबे समय से बाधित होना एक बड़ा मुद्दा है। क्योंकि तेल, गैस से लेकर फर्टिलाइजर समेत अन्य वस्तुओं की वैश्विक आपूर्ति बाधित हुई है।
क्या अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत फिर शुरू हो सकती है?
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव हाल के दिनों में फिर बढ़ा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ एक और सैन्य अभियान की संभावना जताई है। वहीं, ईरानी अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि अमेरिका ने हमला किया तो जवाब पहले से ज्यादा कड़ा होगा। रॉयटर्स के मुताबिक, दोनों पक्षों ने संभावित युद्ध दोबारा शुरू होने की स्थिति के लिए योजनाएं भी तैयार की हैं।

ऐसे में सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किये की कोशिश है कि तनाव और न बढ़े और बातचीत की गुंजाइश बनी रहे। सऊदी अरब ने कहा है कि इस पहल का मकसद क्षेत्रीय तनाव कम करना, कूटनीतिक समाधान को बढ़ावा देना और पाकिस्तान तथा कतर की मध्यस्थता को समर्थन देना है।
इस बैठक का अहम संकेत यह है कि मक्का पैक्ट के देश ईरान के साथ बढ़ते तनाव को सिर्फ सैन्य ताकत के जरिए संभालना नहीं चाहते। वे अपनी रक्षा व्यवस्था मजबूत करने के साथ बातचीत का रास्ता भी खुला रखना चाहते हैं। ईरान के लिए यह बैठक क्षेत्रीय सुरक्षा पर अपना नजरिया रखने का मौका है और सऊदी अरब चाहता है कि उसके ऊपर हो रहे हूती हमलों जल्द से जल्द रूक जाएं।







