
ब्राजील में राष्ट्रपति लूला द सिल्वा की 'Missing Finger' पर विपक्ष के नेता बोल्सोनारो का मजाक उड़ाना सेल्फ गोल साबित हुआ। 80 साल के लूला ने चौथी बार राष्ट्रपति चुनाव जीतकर इतिहास रच दिया है। लूला के मिसिंग फिंगर की कहानी जानने से पहले समझ लीजिए कि साउथ अमेरिका महाद्वीप ही नहीं, पूरी दुनिया में राष्ट्रपति लूला द सिल्वा की चर्चा हो रही है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई भारतीय नेताओं ने उन्हें जीत की बधाई दी है। PM ने कहा कि हम साथ मिलकर विभिन्न क्षेत्रों में अपने सहयोग को मजबूत करना जारी रखेंगे और ‘ग्लोबल साउथ’ की साझा प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाएंगे। लूला की जीत को भारत-रूस, चीन वाले समूह BRICS के लिए भी अच्छी खबर माना जा रहा है।

छोटे कद के लूला का अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से छत्तीस का आंकड़ा है। जीतते ही इशारों में उन्होंने कहा भी कि हम किसी के पिछलग्गू नहीं हैं। दरअसल, हारने वाले बोल्सोनारो को ट्रंप का करीबी माना जाता रहा है।
Heartiest congratulations to my dear friend, President Lula, on his remarkable re-election victory. I look forward to working closely with him to further deepen and expand the multifaceted India-Brazil Strategic Partnership. Together, we will continue to strengthen our cooperation across diverse sectors, advance the shared priorities of the Global South and work towards a more inclusive, equitable and sustainable world. @LulaOficial
— Narendra Modi (@narendramodi) October 26, 2026
अब उंगली की कहानी पर लौटते हैं।
दरअसल, लूला जब 17 साल के थे तो एक फैक्ट्री में काम करते हुए उनकी एक उंगली कट गई थी। यह तस्वीर गौर से देखिए। बाएं हाथ की सबसे छोटी उंगली नहीं है। 1964 में लूला एक मेटलवर्कर के रूप में फैक्ट्री में काम कर रहे थे। प्रेस मशीन में हाथ आ गया और कनिष्ठा उंगली कुचल गई। बाद में इसे काट दिया गया। यही वजह है कि विरोधी उन्हें 'नौ उंगलियों वाला' या अंग्रेजी में Nine Fingers कहते हैं।

लूला की उंगली कटी तो उनकी राजनीतिक पहचान से जुड़ गई। 27 अक्टूबर 1945 को जन्मे लूला का बचपन काफी गरीबी में बीता था। वह अपने परिवार के साथ साओ पाउलो चले गए थे, जहां बहुत कम उम्र से ही काम करना शुरू कर दिया। उन्होंने मेटलवर्कर के रूप में ट्रेनिंग ली और तभी एक हादसे में उनकी एक उंगली कट गई। यह घटना आगे चलकर ब्राजील के मजदूर वर्ग के प्रतिनिधि के रूप में उनकी राजनीतिक पहचान का हिस्सा बन गई। इसे मेहनत और संघर्ष से जोड़कर देखा गया।
हड़ताल, मजदूर आंदोलन और राजनीति
देश में सैन्य तानाशाही के दौरान लूला मजदूर आंदोलन से जुड़े। वह मेटलवर्कर्स यूनियन के नेता बने। 1970 के दशक के आखिर में हड़ताल आंदोलन का नेतृत्व करने से राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली। 1980 में उन्होंने 'वर्कर्स पार्टी' (मजदूर पार्टी) की। शुरुआती असफलताओं के बाद वह 2002 में राष्ट्रपति चुने गए। आर्थिक स्थिरता बनाए रखते हुए गरीबी से लड़ने का वादा किया।
लूला के बाद उनकी राजनीतिक सहयोगी डिल्मा रूसेफ राष्ट्रपति बनीं, जिन पर 2016 में महाभियोग चलाया गया था।
Botamos pra virar, Brasil! 🇧🇷❤️ Fizemos história nas ruas e nas urnas, com o povo como protagonista de uma caminhada que ainda tem muito pela frente. A democracia venceu, a esperança se fortaleceu e o Brasil segue em frente. Essa vitória é nossa. E vamos fazer muito mais juntos! 💫
— Lula (@LulaOficial) October 26, 2026
फिर जेल जाना पड़ा
'ऑपरेशन कार वॉश' नामक भ्रष्टाचार जांच के दौरान लूला के राजनीतिक करियर को बड़ा झटका लगा। इस जांच में कई राजनेता और बड़े कारोबारी रिश्वतखोरी और मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों में फंसे थे। अप्रैल 2018 में उन्हें जेल भेज दिया गया। वह उस साल राष्ट्रपति का चुनाव नहीं लड़ सके। उन्होंने 580 दिन जेल में बिताए।
कोर्ट ने फैसले को ही Illegal माना
2021 में, ब्राजील के सुप्रीम कोर्ट ने सजा वाले फैसले को रद्द कर दिया। कोर्ट ने कहा कि जिन अदालतों में उनके मामले चले, उन्हें उन मामलों की सुनवाई का अधिकार (अधिकार क्षेत्र) ही नहीं था। कोर्ट ने यह भी पाया कि एक मामले की सुनवाई के दौरान पूर्व जज का रवैया पक्षपाती था। इन फैसलों के बाद लूला फिर से सार्वजनिक पद (चुनाव) लड़ने के योग्य हो गए।
2022 के चुनाव में उन्होंने मौजूदा राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो को कड़े मुकाबले में हराया और लगभग 50.9% वैध वोट हासिल करके फिर से राष्ट्रपति बने। जनवरी 2023 में शपथ ग्रहण के एक हफ्ते बाद, बोल्सोनारो के समर्थकों ने कांग्रेस, सुप्रीम कोर्ट और राष्ट्रपति भवन पर हमला कर दिया। वे चुनाव नतीजों को पलटना चाहते थे।
BRICS के साथ लूला
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लूला ने ब्रिक्स के माध्यम से उभरती अर्थव्यवस्थाओं के साथ घनिष्ठ सहयोग बढ़ाया। चीन के साथ संबंधों को मजबूत किया और ब्राजील के लिए एक बड़ी भूमिका की वकालत की। वॉशिंगटन के साथ उनके संबंध उस समय खराब हो गए जब ट्रंप ने ब्राजील के सामानों पर टैरिफ लगाया और पूर्व राष्ट्रपति बोल्सोनारो का सार्वजनिक रूप से समर्थन किया। हालांकि, ट्रंप ने 2026 के चुनाव में फ्लेवियो बोल्सोनारो का औपचारिक रूप से समर्थन नहीं किया था।

लूला ने ब्राजील के मामलों में अमेरिकी हस्तक्षेप की आलोचना की और राष्ट्रीय संप्रभुता को अपने कैंपेन का मुख्य मुद्दा बनाया।
साउथ अमेरिका में बड़ा उलटफेर
उनकी यह जीत लैटिन अमेरिका में व्यापक दक्षिणपंथी बदलाव के बीच आई है, जहां चिली, कोलंबिया और पेरू सहित कई देशों में कंजर्वेटिव सरकारों ने सत्ता संभाली है, जिनमें से कुछ ट्रंप के साथ घनिष्ठ संबंध बनाने की कोशिश कर रही हैं।
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इस परिणाम के बाद ब्राजील इस क्षेत्र की उन सबसे बड़ी सरकारों में से एक है जो वॉशिंगटन के प्रति एक स्वतंत्र दृष्टिकोण बनाए रखती है और ग्लोबल साउथ की सशक्त आवाज बनकर उभरी है।
लूला का नया चार साल का कार्यकाल 5 जनवरी, 2027 से शुरू होगा। इससे उनका राष्ट्रपति पद का कार्यकाल लगभग तीन दशकों तक बढ़ जाएगा।





