हूती विद्रोही आखिर सऊदी के एयरपोर्ट्स को ही टारगेट क्यों कर रहे हैं?
हां, पिछले दो हफ्ते में कई हमले किए गए हैं। इसमें करीब 20 लोगों की मौत हो चुकी है और सैकड़ों घायल हुए हैं। सवाल है कि यमन के हूती विद्रोही सऊदी के साथ लड़ाई में आखिर उसके एयरपोर्ट को ही लगातार टारगेट क्यों कर रहे हैं?
हूती विद्रोही आखिर सऊदी के एयरपोर्ट्स को ही टारगेट क्यों कर रहे हैं?

13 जुलाई 2026! यमन के सना एयरपोर्ट पर एक विमान उतरने की कोशिश कर रहा था। विमान में ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में शामिल होकर लौट रहे यमनी नागरिक और हूती प्रतिनिधिमंडल के लोग सवार थे। तभी एयरपोर्ट के एक रनवे पर धमाका हुआ और आनन-फानन में विमान को देश के अल-हुदैदा एयरपोर्ट की ओर मोड़ना पड़ा।

हमला सऊदी अरब के समर्थन वाली यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार की तरफ से हुआ था। ईरान समर्थित यमन के हूती विद्रोही इस हमले से भड़क गए और उन्होंने इसे सिर्फ हमला नहीं माना बल्कि अपने नियंत्रण वाले यमन के इलाके की घेराबंदी के तौर पर देखा।

हूतियों ने सऊदी को घेराबंदी के बदले घेराबंदी की चेतावनी दे डाली और 2022 में दोनों पक्षों के बीच हुआ युद्धविराम टूट गया। इसी के साथ शुरू हुआ सऊदी के एयरपोर्ट्स पर हूती विद्रोहियों का हमला जो अब तक जारी है।

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हूतियों का पहला निशाना अभा एयरपोर्ट

हूती विद्रोहियों ने सबसे पहले सऊदी के अभा (Abha) इंटरनेशनल एयरपोर्ट को निशाना बनाया। यह एयरपोर्ट यमन की सीमा से लगे सऊदी अरब के पहाड़ी दक्षिणी क्षेत्र की राजधानी अभा में स्थित है। गर्मियों में सऊदी अरब के कई लोग भीषण गर्मी से राहत पाने के लिए इस इलाके में जाते हैं।

सितंबर में हूतियों ने लाल सागर के तट पर कई अहम इलाकों पर कब्जा कर लिया था, जिनमें रणनीतिक रूप से अहम मोखा बंदरगाह शहर भी शामिल है।

उन्होंने लाल सागर के अहम चोकपॉइंट बाब-अल-मंदेब स्ट्रेट के आसपास के द्वीपों पर कब्जा कर स्ट्रेट पर अपना प्रभाव बढ़ा लिया। यह समुद्री मार्ग लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ता है और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए महत्वपूर्ण है।

हूतियों ने सऊदी जहाजों के लिए स्ट्रेट के रास्ते बंद कर दिए जिससे सऊदी के तेल-गैस निर्यात को भारी नुकसान पहुंचा है।

हूतियों की बढ़त को देखते हुए सऊदी के समर्थन से यमनी सरकारी सेना ने जवाबी अभियान शुरू किया। सऊदी अरब ने इस अभियान को समर्थन देने के लिए हवाई हमले तेज किए। हाल ही में सऊदी गठबंधन ने हूतियों के खिलाफ 'ऑपरेशन डॉन ऑफ यमन' शुरू किया है जिसका मकसद यमन के सभी इलाकों को हूतियों के कब्जे से निकालना है।

हूती अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि जब तक रियाद अपना सैन्य अभियान बंद नहीं करता, सऊदी एयरपोर्टों और उसके इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमले जारी रहेंगे।

सऊदी के 5 एयरपोर्ट पर हमले, कई लोगों की मौत

अनादोलू एजेंसी की 12 अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक, 5 से 11 अक्टूबर के बीच हूतियों ने सऊदी अरब के पांच एयरपोर्टों पर कुल 10 हमले किए। इन हमलों में 20 लोगों की मौत हुई और सैकड़ों लोग घायल हुए।

सबसे ज्यादा हमले राजधानी रियाद के किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर हुए। 10 अक्टूबर को एयरपोर्ट पर हुए हमले में 13 लोगों की मौत हो गई और 300 से अधिक लोग घायल हुए। अगले दिन फिर से एयरपोर्ट को निशाना बनाया गया जिसमें एक पाकिस्तानी नागरिक की मौत हुई और 11 लोग घायल हुए।

रियाद एयरपोर्ट पर हुए हमलों के बाद उड़ानों का परिचालन रोकना पड़ा और कई एयरलाइंस ने अपनी सेवाएं रद्द कर दी हैं।

इसके अलावा दम्माम, अभा, जाजान और नजरान के एयरपोर्ट को भी निशाना बनाया गया।

हूतियों ने सऊदी एयरपोर्टों और बुनियादी ढांचे पर हमले जारी रखने की चेतावनी दी है। दूसरी ओर, सऊदी नेतृत्व वाला गठबंधन हूती मिसाइलों को रोकने और यमन में सैन्य अभियान जारी रखने की बात कह रहा है। 

इस लड़ाई में सना एयरपोर्ट कनेक्शन

ईरान और हूतियों के बीच संबंधों को लेकर 23 जुलाई को रॉयटर्स ने चार सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट दी थी कि 13 जुलाई की उसी उड़ान में ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के कमांडर, सैन्य सलाहकार और मिसाइलों व ड्रोन से जुड़े उपकरण भी ले जाए गए थे।

हालांकि, हूतियों ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि विमान में यमनी नागरिक और प्रतिनिधिमंडल के सदस्य थे। ईरान ने भी हूतियों को हथियार देने के आरोपों से इनकार किया है।

यमन की सरकार का आरोप है कि हूती प्रतिनिधिमंडलों को ईरान लाने-ले जाने के लिए सना एयरपोर्ट का इस्तेमाल किया जाता है। उनका आरोप है कि हथियारों के लिए भी एयरपोर्ट इस्तेमाल हो रहा था।

सऊदी को भारी नुकसान पहुंचा रहे हूती

हूती विद्रोही सऊदी के एयरपोर्ट के अलावा उसके अहम इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी हमले कर रहे हैं। इसकी चपेट में सऊदी की सरकारी तेल और गैस कंपनी अरामको के कई ठिकाने भी आ रहे हैं।

सऊदी के एयरपोर्ट पर हमलों से जान-माल का नुकसान तो हो ही रहा है, साथ ही फ्लाइट्स रद्द हो रही हैं, एयर ट्रैफिक में रुकावट आ रही है, विदेशी यात्रियों, निवेशकों और कारोबारियों के बीच असुरक्षा बढ़ रहा है।

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एसोसिएटेड प्रेस के मुताबिक, वॉशिंगटन स्थित इंस्टीट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ वॉर ने अपने विश्लेषण में कहा कि हूती नागरिक बुनियादी ढांचे, जैसे तेल प्रतिष्ठानों और एयरपोर्टों, पर हमला करके सऊदी अरब की आर्थिक लागत बढ़ाना और उसे अपनी मांगें मानने के लिए मजबूर करना चाहते हैं।

अमेरिका के दखल की आशंका से और बढ़ा तनाव

इस संघर्ष में अमेरिका की भूमिका ने भी चिंता बढ़ा दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में कहा था कि वॉशिंगटन सऊदी अरब के सैन्य अभियान में शामिल होने पर विचार कर रहा है।

इसके जवाब में हूतियों ने चेतावनी दी कि अगर अमेरिका युद्ध में शामिल हुआ, तो अमेरिकी सैन्य बलों और लाल सागर में उसके युद्धपोतों को भी निशाना बनाया जा सकता है।

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