
अमेरिका में कुछ दिन पहले ही एक महिला को दो बार जहरीला इंजेक्शन देकर सजा-ए-मौत देने की कोशिश की गई, लेकिन वह बच गई। उस पर विवाद अभी थमा नहीं था और एक दोषी कैदी को गोली मारने का सीधा प्रसारण करने की तैयारी की जा रही है। कुछ लोग इस फैसले की आलोचना कर रहे हैं। बाकायदे सजा-ए-मौत का लाइव टेलिकास्ट करने का प्लान है। आखिर क्यों?
वो तारीख 3 दिसंबर मुकर्रर की गई है। 13 लोगों को मौत के घाट उतारने वाले अमेरिका के इस पूर्व सैनिक को सीधे गोली मारने के आदेश हैं। अब इस फैसले को पूरा करना है। हालांकि, बात यहीं खत्म नहीं होती। सवाल आरोपी को गोली मारते हुए पूरी दुनिया को लाइव दिखाने का है। अमेरिका के 65 साल के इतिहास में पहली बार किसी पूर्व सैन्य अधिकारी को ऐसी सजा दी जा रही है। सजा के इस तरीके पर कुछ एक्सपर्ट्स ने भी सवाल उठाए हैं।
पहले पूरा मामला समझिए
अमेरिका में जन्मे मुस्लिम निदाल मलिक हसन वहां की सेना में मेजर रैंक के सैन्य अधिकारी थे। पेशे से मनोचिकित्सक नादिल हसन ने 17 साल पहले 5 नवंबर 2009 को फोर्ट हूड के एक मिलिट्री प्रोसेसिंग सेंटर में अंधाधुंध गोलियां चलाईं। इस नरसंहार में 13 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई और 32 लोग घायल हो गए। दावा किया गया, हमले के दौरान उन्होंने “अल्लाहु अकबर” का नारा लगाया था।

इस हमलावर ने पहले कट्टरपंथी इस्लामी उपदेशक अनवर अल-अव्लाकी के साथ ईमेल से बातचीत की थी, जो बाद में यमन में एक अमेरिकी ड्रोन हमले में मारा गया। कोर्ट-मार्शल के दौरान हसन ने इस नरसंहार की जिम्मेदारी कबूल की और दावा किया कि उसने अफगानिस्तान में अमेरिकी सैन्य अभियानों से अपने साथी मुसलमानों की रक्षा करने के लिए यह कदम उठाया था।
उसे 2013 में सोची-समझी हत्या (प्रीमेडिटेटेड मर्डर) और हत्या के प्रयास का दोषी ठहराया गया था और मौत की सजा सुनाई गई। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने मार्च 2025 में उसकी सजा की समीक्षा करने से इनकार कर दिया, जिससे पीटर हेगसेथ की सिफारिश के बाद इस महीने की शुरुआत में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस मृत्युदंड को मंजूरी दे दी।
3 दिसंबर को ही सजा क्यों? इसकी वजह है
निदाल मलिक को 3 दिसंबर दोपहर 1 बजे गोली मारकर मौत की सजा दी जाएगी। यह समय रखने के पीछे भी एक खास वजह है। असल में यह वही समय है जब 2009 में निदाल ने फोर्ट हूड में फायरिंग की थी। हालांकि, हसन अभी भी नागरिक संघीय अदालत (सिविलियन फेडरल कोर्ट) में एक अलग कानूनी चुनौती के जरिये अपनी मौत की सजा को टालने की मांग कर सकता है। अमेरिकी सेना ने आखिरी मृत्युदंड 1961 में दिया था, जब सेना के एक सिपाही (प्राइवेट) को 11 साल की बच्ची के साथ बलात्कार और हत्या के प्रयास के जुर्म में फांसी दी थी।
लाइव टेलीकास्ट करने की वजह?
रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने 'रियल अमेरिकास वॉयस' से बात करते हुए कहा- ”हम यह सुनिश्चित करेंगे कि लोग इसे देख सकें और यह सार्वजनिक हो।”
गुरुवार को पेंटागन के अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि इस मृत्युदंड का सीधा प्रसारण किया जाएगा और इससे जुड़ी बाकी जानकारी जल्द साझा की जाएगी।
MAJOR NEWS!!! @SECWAR REVEALS FORT HOOD SHOOTER’S FIRING SQUAD EXECUTION WILL BE PUBLIC Sec. Pete Hegseth says Nidal Hasan will be executed by soldiers at Fort Hood on December 3 at 1 PM—the same time as the 2009 attack. “We’ll make sure that people are able to watch it, that it’s public.” @JackPosobiec
— Real America's Voice (RAV) (@RealAmVoice) October 8, 2026
पीट हेगसेथ ने एक बातचीत में कहा,

सजा को सार्वजनिक करने और वह भी फायरिंग स्क्वाड जैसी हिंसक पद्धति के जरिये को लेकर हेगसेथ के इस खुलासे ने अमेरिका में मृत्युदंड के तौर-तरीकों पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं, खासकर टेनेसी में क्रिस्टा पाइक को जहरीला इंजेक्शन देने में हुई गंभीर चूक (बॉच्ड लेथल इंजेक्शन) के बाद यह और चर्चा का विषय बन गया है।
Correct.
— Pete Hegseth (@PeteHegseth) October 8, 2026
विशेषज्ञ इस पर क्या कहते हैं
विशेषज्ञ इसपर बंटे हुए हैं। कोई इसके पक्ष में है तो कोई इसके खिलाफ बोल रहा है। रिपब्लिकन सीनेटर थॉम टिलिस ने हसन को इस तरीके की सजा देने की मुखालिफत की है। उन्होंने कहा,
“हसन को मौत की सजा मिलनी चाहिए, लेकिन उसकी फांसी को सार्वजनिक करना और स्ट्रीम करना? अत्यंत घिनौना है। सार्वजनिक फांसी ईरान और अफगानिस्तान जैसे दमनकारी तानाशाही शासन करते हैं। यह अमेरिका में नहीं होना चाहिए।”
डेमोक्रेट सीनेटर क्रिस मर्फी ने CNN न्यूज चैनल से बातचीत में इस लाइव-स्ट्रीम योजना पर हैरानी जताते हुए इसे “मध्ययुगीन” (Medieval) और “घिनौना” (Disgusting) बताया और कहा,
“क्या वह (पीट हेगसेथ) ISIS की तरह दी जाने वाली सजाओं की नकल कर रहे हैं? क्या अमेरिका अब ऐसा बन गया है?”
येल लॉ स्कूल में सैन्य कानून के विशेषज्ञ और विजिटिंग लेक्चरर यूजीन आर. फिदेल ने AP से कहा,
”ईमानदारी से कहें तो यह मौजूदा सरकार के कार्यकाल से भी आगे खिंच सकता है और कौन जानता है कि अगली सरकार को मौत की सजा देने का ऐसा ही शौक होगा या नहीं।”
फोर्डम यूनिवर्सिटी में कानून की प्रोफेसर और मृत्युदंड मामलों की विशेषज्ञ डेबोरा डेनो ने कहा कि मृत्युदंड का लाइव प्रसारण करने से यह प्रक्रिया कहीं अधिक पारदर्शी हो सकती है और जनता को यह समझने का मौका मिलेगा कि वास्तव में मौत की सजा में क्या-कुछ शामिल होता है।
विलानोवा लॉ के प्रोफेसर और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मिलिट्री जस्टिस के उपाध्यक्ष ब्रेनर फिसेल ने कहा कि जब कई राज्यों को घातक दवाओं की कमी या मौत की सजा में शामिल होने के लिए डॉक्टरों/चिकित्साकर्मियों के न मिलने के कारण जहरीले इंजेक्शन से सजा देने में मुश्किलें आ रही हैं, ऐसे में फायरिंग स्क्वाड को अपेक्षाकृत कम अमानवीय विकल्प के रूप में देखा जाने लगा है।
जहरीले इंजेक्शन के बाद अब कैसी है वो महिला?
निदाल मलिक हसन को मौत की सजा वाली चर्चा के बीच बीते 30 सितंबर को अमेरिकी राज्य टेनेसी की एक हाई-सिक्योरिटी जेल में 50 साल की क्रिस्टा गेल पाइक को जिस अनोखे तरीके से सजा दी गई थी, वो भी याद दिलाना होगा। 1995 में 19 साल की कोलीन स्लेमर की अपने साथियों संग मिलकर हत्या करने के जुर्म में जहरीला इंजेक्शन देकर मारने की सजा दी गई थी। किस्सम या कहें नियति को कुछ और मंजूर था। दो डोज देने के बाद भी पाइक बच गईं और अब रिकवर हो रही हैं। यही नहीं वो बोल-चाल के साथ चलने भी लगी हैं।
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क्रिस्टा पाइक की सजा रुकवाने के लिए उनके वकील अदालत में कानूनी लड़ाई लड़े, पर सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालत के आदेश पर रोक लगाकर सजा देने की मंजूरी दे दी थी। 200 साल में पहली बार किसी महिला को मौत की सजा दी जा रही थी। इस सजा के तरीके की भी काफी आलोचना हुई थी।





