सजा-ए-मौत में दिए गए जहर के दो इंजेक्शन, लेकिन वो बच गई
अमेरिकी मौत की सजा की प्रक्रिया और एग्जीक्यूशन पर सवाल खड़े हो गए हैं। क्या है क्रिस्टा गेल पाइक केस? और 30 सितंबर की रात अमेरिका की जेल में क्या हुआ?
सजा-ए-मौत में दिए गए जहर के दो इंजेक्शन, लेकिन वो बच गई
क्रिस्टा पाइक को 1996 में जब वह 18 साल की थी तब उन्हें मौत की सजा सुनाई गई थी।AP

मौत की सजा के तहत एक महिला कैदी को घातक दवा का इंजेक्शन दिया गया...

कायदे से इसके बाद उसकी सांसें थम जानी थीं और उसे मृत घोषित किया जाना था। सारी तैयारी उसी हिसाब से की गई थी, लेकिन यहां कहानी ने ऐसा मोड़ लिया, जिसकी शायद किसी ने कल्पना भी नहीं की थी।

दो बार घातक दवा देने के बाद भी महिला जिंदा थी

सेल के अंदर से तेज सांस लेने की आवाजें आ रही थीं और उसके पैर भी हिल रहे थे। ये घटनाक्रम किसी फिल्मी सीन जैसा लग सकता है, लेकिन ये अमेरिका में हुई एक सच्ची घटना है।

तो सजा देने के दौरान आखिर हुआ क्या था? और 30 साल पुराने किस मामले में इस महिला को मौत की सजा सुनाई गई थी? पूरी कहानी समझिए...

क्रिस्टा पाइक को 1996 में सुनाई गई थी मौत की सजा।AP

क्या हुआ 30 सितंबर की रात?

30 सितंबर बुधवार रात अमेरिकी राज्य टेनेसी की एक हाई-सिक्योरिटी जेल में 50 साल की क्रिस्टा गेल पाइक को मौत की सजा देने की तैयारी थी। पाइक करीब तीन दशक से मौत की सजा का इंतजार (Death Row) कर रही थीं।

मौत की सजा को अंजाम देने से कुछ घंटे पहले तक अदालत में कानूनी लड़ाई चलती रही। उनके वकील अदालत में सजा रुकवाने की कानूनी कोशिश कर रहे थे। एक निचली अदालत ने आखिरी वक्त पर एग्जीक्यूशन रोक भी दिया, लेकिन अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने उस रोक को हटा दिया। इसके बाद टेनेसी अधिकारियों ने तय प्रक्रिया के तहत एग्जीक्यूशन प्रक्रिया आगे बढ़ाई। इस राज्य में 200 साल में पहली बार किसी महिला को मौत की सजा दी जा रही थी। 

पहली बेअसर... तो फिर दी गई दूसरी डोज

अमेरिका के कई राज्यों में मौत की सजा देने के लिए लीथल इंजेक्शन का इस्तेमाल होता है। घातक इंजेक्शन में दी जाने वाली ये दवा शरीर के जरूरी बॉडी पार्ट्स को धीरे-धीरे निष्क्रिय करती है- होश खत्म होता है, सांस रुकती है और आखिर में दिल की धड़कन थम जाती है।

क्रिस्टा पाइक की प्रस्तावित फांसी से पहले जेल के बाहर मौत की सजा के विरोध में प्रदर्शन करते लोग।AP

टेनेसी ने 2024 में अपने पुराने तीन-दवा वाले तरीके की जगह एक ही दवा- pentobarbital- का इस्तेमाल शुरू किया था। पाइक को भी यही दवा दी गई।

लेकिन… पहली डोज के बाद भी वह जिंदा थीं। फिर उसे दूसरी डोज दी गई।

इसके बावजूद भी सांसें चलती रहीं।

मौत की सजा का मकसद फेल

पाइक के वकीलों ने अदालत में दाखिल दस्तावेजों में दावा किया कि दोनों डोज दिए जाने के बाद भी वह जीवित थी जोर से खर्राटे (Snoaring) ले रही थीं। एग्जीक्यूशन देखने वाले पत्रकारों ने भी तेज सांस छोड़ने, गैसपिंग और दर्द की शिकायतों जैसी आवाजें सुनने की बात कही। उसके पैर इतनी बार हिले कि बिस्तर पर डाली गई चादर तक हट गई।

कुछ देर बाद उन्हें एंबुलेंस से जेल से बाहर एक अस्पताल ले जाया गया।

यानी जिस प्रक्रिया का मकसद मौत की सजा को पूरा करना था, वह महिला को मृत घोषित किए बिना ही खत्म हो गई।

क्रिस्टा पाइक को बाद में एंबुलेंस से जेल से बाहर एक अस्पताल ले जाया गया।AP

लेकिन क्रिस्टा को मौत की सजा मिली क्यों?

इसके पीछे करीब 31 साल पुरानी कहानी है।

जनवरी 1995 में पाइक सिर्फ 18 साल की थीं और टेनेसी राज्य के एक शहर नॉक्सविल (Knoxville) के सरकारी ट्रेनिंग सेंटर में पढ़ती थीं। वहीं उनकी मुलाकात 19 साल की कोलीन स्लेमर से हुई।

अभियोजन पक्ष के मुताबिक, पाइक ने अपने तत्कालीन बॉयफ्रेंड Tadaryl Shipp और एक अन्य युवती Shadolla Peterson के साथ मिलकर स्लेमर को एक सुनसान जगह ले जाकर उस पर हमला किया। अदालती रिकॉर्ड के मुताबिक, स्लेमर पर करीब 30 से 45 मिनट तक हमला किया गया और बाद में उसकी मौत हो गई।

1995 में कोलीन स्लेमर की हत्या कर दी गई थी।AP

1996 में पाइक को first-degree murder और हत्या की साजिश के मामले में दोषी ठहराया गया और मौत की सजा सुनाई गई। इसके बाद करीब तीन दशक तक वह टेनेसी की डेथ रो यानी मौत की सजा पाए कैदियों के लिए जेल व्यवस्था में रहीं।

अब आगे क्या?

इस असफल एग्जीक्यूशन के बाद मामला फिर अदालत और टेनेसी सरकार के सामने है।

पाइक के वकीलों का कहना है कि वह दोनों इंजेक्शंस के बाद भी जिंदा थीं। वहीं टेनेसी का कारागार विभाग का कहना है कि अधिकारियों ने राज्य के तय एग्जीक्यूशन प्रोटोकॉल के हर कदम का पालन किया।

पाइक के मामले ने अमेरिका की एग्जीक्यूशन प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं।AP

सबसे बड़ा सवाल अब यही है- 

अगर दो डोज के बाद भी कैदी की मौत न हो तो आगे क्या?

टेनेसी के मौजूदा प्रोटोकॉल में पहली डोज के बाद मौत न होने की स्थिति में दूसरी डोज देने का प्रावधान है। लेकिन दूसरी डोज के बाद भी व्यक्ति जिंदा रहे तो आगे क्या किया जाए, इसे लेकर स्पष्ट प्रावधान नहीं है।

इसी असाधारण घटना के बाद टेनेसी के गवर्नर ने इस साल होने वाली बाकी एग्जीक्यूशन रोक दी है और पूरे मामले की स्वतंत्र जांच के आदेश दिए हैं।

अब इस जांच और अदालतों के अगले फैसलों से तय होगा कि क्रिस्टा पाइक के मामले में आगे क्या होता है।

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