
इस समय पूरी दुनिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर बहस चल रही है। चिंताएं जाहिर की जा रही हैं। कुछ इस्तीफों और बयानों से सवाल भी उठे हैं कि क्या AI इंसानी कंट्रोल से बाहर निकल रहा है या निकल सकता है?
क्या एआई मानवता के अस्तित्व के लिए खतरा बन सकता है?
क्या एआई कंपनियों को 'स्लो' होना चाहिए?
इन सबके बीच डोनाल्ड ट्रंप अपनी शेखी बघारते हुए कह रहे हैं-
''AI को केवल एक मजबूत और स्मार्ट (हाई IQ वाले) प्रेसिडेंट के कंट्रोल की जरूरत है। और अमेरिका के पास वो पर्याप्त है... AI और डेटा सेंटर्स के खिलाफ एक साजिश चल रही है और इससे सिर्फ चीन खुश है। जो भी AI की रेस जीतेगा, वही जीतेगा। हम चीन और बाकी सभी से आगे हैं, और आगे भी रहेंगे। साजिश रचने वालो, देशद्रोहियों, गद्दारों और लीकर्स सावधान हो जाओ।''
अब सवाल यह पूछा जा रहा है कि जब रिसर्चर और तमाम एक्सपर्ट एआई की चिंताओं को सामने रख रहे हैं, तो अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप इसका पुरजोर तरीके से सपोर्ट क्यों और किस आधार पर कर रहे हैं?
अमेरिकी एक्सपर्ट का बड़ा सवाल
प्रसिद्ध अर्थशास्त्री, लेखक और एक्सपर्ट पॉल क्रूगमैन ने ट्रंप की मंशा पर सवाल उठाया है। वह लिखते हैं कि क्या AI इकोनॉमी को बदल देगा- इस पर अभी कोई फैसला या समझ नहीं बनी है। अब तक इस बात के बहुत कम प्रमाण हैं कि बड़े पैमाने पर नौकरियां चली जाएंगी या प्रोडक्टिविटी में जबरदस्त बढ़ोतरी होगी, जैसा कि इंडस्ट्री के लीडर्स ने दावा किया था या चेतावनी दी थी।
फिर भी अभी तो शुरुआत है।
क्रूगमैन कहते हैं-
लेकिन AI अमेरिका की राजनीति को जरूर बदलता दिख रहा है। मुझे ऐसी कोई टेक्नोलॉजी याद नहीं, जिसने इतने अलग-अलग तरह के राजनीतिक विचारों वाले लोगों के बीच नफरत पैदा की हो। यहां तक कि बड़ी AI कंपनियां भी अपनी टेक्नोलॉजी के खतरे के बारे में चेतावनी दे रही हैं और सरकार से अपील कर रही हैं कि इसे धीमा करने के लिए नियम बनाए जाएं।
इस पर यह बात हैरान करती है कि डोनाल्ड ट्रंप AI को पूरी तरह अपना रहे हैं। वह दावा कर रहे हैं कि इसके खतरों के बारे में चिंताएं महज एक 'धोखा' हैं। वे इस पर किसी भी तरह के नियम-कानून का विरोध कर रहे हैं।
ऐसा करके, वे एक ऐसा रुख ले रहे हैं जो बहुत कम लोगों को पसंद आ रहा है। यहां तक कि रिसर्च यूनिवर्सिटी (University of Massachusetts Amherst) का हालिया पोल यही कह रहा है-

गौर करने वाली बात ये है कि ट्रंप के समर्थक भी इस मुद्दे पर उनका साथ छोड़ रहे हैं। हां, एक-चौथाई रिपब्लिकन भी उनसे सहमत नहीं हैं।
अगला और सबसे महत्वपूर्ण सवाल-
ट्रंप ऐसी बातें क्यों पोस्ट कर रहे हैं?
क्रूगमैन आगे प्रोफेसर, लेखक और एक्सपर्ट Robert Reich के लेख का जिक्र करते हैं, जिन्होंने बत्तख और बिल्ली के साथ ट्रंप की तस्वीर पोस्ट की है।
रॉबर्ट रीच के पोस्ट में पैसे के लेनदेन पर ध्यान देने को कहा गया है। क्रूगमैन कहते हैं कि रॉबर्ट के मुताबिक ट्रंप परिवार के सदस्यों का एआई इंडस्ट्री में अपना पैसा लगा हुआ है और मौजूदा अमेरिकी हालात में एक मकसद ट्रंप का लालच भी है, जिसे कभी भी नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
क्रूगमैन ने दो और बातें जोड़ी हैं।
पहली बात, रॉबर्ट इस बात को खारिज कर देते हैं कि ट्रंप को लगता है कि उन्हें पता है कि वे क्या कर रहे हैं। रॉबर्ट के शब्दों में, 'ऐसा नहीं हो सकता कि उन्हें AI के बारे में बहुत ज्यादा जानकारी हो।'
लेकिन क्या उन्हें पता है कि उन्हें जानकारी नहीं है?
'ट्रुथ सोशल' पोस्ट में ट्रंप खुद को इस नई और अजीब टेक्नोलॉजी को संभालने में धुरंधर बताते हैं क्योंकि वह एक 'मजबूत और स्मार्ट (हाई IQ वाले!) प्रेसिडेंट' हैं।
आगे वह ट्रंप को 'डनिंग-क्रूगर इफेक्ट' (Dunning-Kruger effect) का बेहतरीन उदाहरण बताते हैं। इस इफेक्ट में कम समझदार लोग भी अपने फैसले को लेकर बहुत ज्यादा कॉन्फिडेंट दिखते हैं क्योंकि वे इतने नाकाबिल होते हैं कि उन्हें एहसास ही नहीं होता है कि वे नाकाबिल हैं।
दूसरी बात, यह समझना जरूरी है कि ट्रंप को AI बूम की कितनी ज्यादा जरूरत है।
ट्रंप फेल!
दरअसल, ट्रंप इस सोच के साथ सत्ता में आए थे कि उनके टैरिफ से नौकरियों में जबरदस्त उछाल आएगा लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। जो नौकरियां बढ़ी हैं, ज्यादातर महिलाओं को मिली हैं। ऊपर से टैरिफ की वजह से चीजों की कीमतें बढ़ गई हैं।
यहां भी फेल!
ट्रंप का ईरान युद्ध का फैसला आर्थिक और रणनीतिक दोनों लिहाज से एक बड़ी नाकामी साबित हुआ है। अमेरिकी एक्सपर्ट कहते हैं कि डीजल की कीमतें अब 6 डॉलर गैलन से ज्यादा हो गई हैं। ट्रंप के अधिकारी अक्सर यह कहते हैं कि बाइडेन के समय में पेट्रोल की कीमत 5 डॉलर प्रति गैलन से ज्यादा थी, जो सच भी था लेकिन सिर्फ एक हफ्ते के लिए।
आखिर में समझिए
ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में एक चीज सही दिशा में जाती दिख रही थी। AI को लेकर उत्साह से जबरदस्त निवेश हो रहा था और स्टॉक की कीमतें बढ़ रही थीं। ट्रंप के अधिकारी, खासकर ट्रेजरी सेक्रेट्री स्कॉट बेसेंट यह दावा करने लगे थे कि AI उनकी सारी समस्याओं का समाधान कर देगा। लागत कम करके महंगाई खत्म करेगा और जबरदस्त आर्थिक विकास करके बजट घाटे को दूर करेगा।
ऐसे में, AI के खिलाफ उठ रही आवाजें उस एक चीज को खत्म कर रही हैं जिसे ट्रंप के समर्थक अपने लिए फायदे की चीज मानते थे। समझा जा सकता है कि ट्रंप उस जादू को बनाए रखने की पूरी कोशिश कर रहे हैं।
शायद इससे इंसानियत का भविष्य खतरे में पड़ रहा हो, लेकिन उन्हें इसकी कोई परवाह नहीं है।
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