1 फ्रेम और 21 नेता... BRICS की इस फैमिली फोटो का BIG मैसेज समझिए
ब्रिक्स समिट के दूसरे दिन सबसे पावरफुल तस्वीर आ चुकी है। 21 देशों के नेता दुनिया के मानचित्र पर BRICS के बढ़ते कद की बिग पिक्चर पेश कर रहे हैं।

ये महज एक तस्वीर नहीं है, ये दुनिया की बदलती ताकत का नया नक्शा है... आर्थिक और रणनीतिक शक्ति संतुलन के बदलते ध्रुवों का मानचित्र है।

वैश्विक कूटनीति में तस्वीरें केवल यादें संजोने के लिए नहीं ली जाती हैं। उनके पीछे अहम संदेश भी छिपे होते हैं। भारत की अध्यक्षता में नई दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का आयोजन हुआ। उसके बाद ब्रिक्स फैमिली की फोटो आई। ये तस्वीर अपने आप में एक कहानी है। कहानी बदलती दुनिया की, बदलती व्यवस्थाओं की और आकार लेते नए सिस्टम की। ये तस्वीर भी उस दुनिया का प्रतीक है, जो दिखाती है कि वैश्विक शक्ति अब सिर्फ पश्चिम तक सीमित नहीं रह गई है। ये तस्वीर इतनी महत्वपूर्ण क्यों है, इसका संदेश क्या है, आइए समझते हैं।

दुनिया के नक्शे पर कितना फैला BRICS।

इस एक फ्रेम में क्या-क्या समाया, देखिए-

  • इस फोटो में ब्रिक्स की पूरी फैमिली एकसाथ नजर आ रही है।
  • फोटो में दुनिया की 49.5 फीसदी आबादी का प्रतिनिधित्व दिख रहा है।
  • वैश्विक अर्थव्यवस्था (GDP) का 40 पर्सेंट हिस्सा इसमें नजर आ रहा है।
  • दुनिया के कुल व्यापार की 26% ताकत की झलक इसमें मौजूद है।

विविधता में एकजुटता

बहुध्रुवीय दुनिया की इस तस्वीर की अहमियत इन आंकड़ों से भी कहीं ज्यादा है। इसमें जिन देशों के नेता साथ में खड़े नजर आ रहे हैं, वो हर मामले पर एकराय नहीं दिखते। कई मुद्दों पर उनके हित अलग हैं, विचार अलग हैं, फिर भी वो यहां एकसाथ हैं। यही इस फ्रेम की खासियत है।

  • भारत-चीन के बीच सीमा को लेकर नरम-गरम रिश्ते रहे हैं, लेकिन इस फोटो में पीएम मोदी और चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग साथ खड़े हैं।
  • ईरान और सऊदी अरब दशकों से धार्मिक-वैचारिक प्रतिस्पर्धा और क्षेत्रीय तनाव में रहे हैं। कूटनीतिक संबंध बहाल होने के बाद भी अविश्वास का पर्दा पूरी तरह नहीं हट पाया है, लेकिन इस मंच पर दोनों के नेता एकसाथ हैं।
  • चीन और वियतनाम, मलेशिया जैसे देश अपनी समुद्री सीमा को लेकर भी अलग-अलग दावे करते हैं, लेकिन ब्रिक्स में ये साथ खड़े नजर आ रहे हैं।
  • सऊदी-UAE और UAE-ईरान के विचार भी कई मसलों पर नहीं मिलते, लेकिन जब बात वैश्विक हितों की हो तो वो ब्रिक्स के मंच पर जुटते हैं।
  • कच्चे तेल और गैस के सबसे बड़े उत्पादक देश- रूस, सऊदी अरब, UAE, ईरान और इजिप्ट इस फोटो फ्रेम में एकसाथ देखे जा सकते हैं।
ब्रिक्स समिट में पीएम मोदी, राष्ट्रपति पुतिन और जिनपिंग के बीच की गर्मजोशी साफ नजर आई।© X/@narendramodi

तस्वीर में RIC की ताकत

इस तस्वीर में वो तीन चेहरे भी शामिल हैं, जिन पर पूरी दुनिया की नजर ठहर जाती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग। इन तीनों की सम्मिलित ताकत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि दुनिया की 36 फीसदी से ज्यादा आबादी का ये प्रतिनिधित्व करते हैं। टॉप-5 मिलिट्री पावर्स में ये दूसरे, तीसरे और चौथे नंबर पर आते हैं। वर्ल्ड की नॉमिनल जीडीपी में इनका संयुक्त योगदान 27 पर्सेंट है। ब्रिक्स के अंदर तीनों की संयुक्त इकोनॉमी 80 पर्सेंट से ज्यादा है।

इस फैमिली फोटो से निकले संदेश

  • ये तस्वीर दिखाती है कि ग्लोबल साउथ की आवाज कितनी मजबूत हो चुकी है।
  • ऐसे समय में जब विश्व की पुरानी व्यवस्थाएं ध्वस्त हो रही हैं, ये तस्वीर नई कहानी कह रही है।
  • अब जबकि पश्चिम के प्रभाव पर सीधे सवाल उठ रहे हैं, ये फैमिली फोटो नई वैश्विक व्यवस्था की झलक पेश करती है।
  • ये दिखाती है कि संयुक्त राष्ट्र, वर्ल्ड बैंक जैसी संस्थाओं की फीकी पड़ती चमक के बीच ब्रिक्स कैसे नया सितारा बनकर उभरा है।

भारत की अगुआई में पावर पिरामिड

इस सबके अलावा, उभरती अर्थव्यवस्थाओं की ये साझा तस्वीर ये भी दिखाती है कि भारत किस तरह संतुलन साधकर, सबको साथ लेकर, साझा सहमति बना सकता है। भारत चौथी बार ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है। इससे पहले 2012, 2016 और 2021 में उसने इस मंच की कमान संभाली है। जब-जब भारत ने इसकी अगुआई की, इस अंतरराष्ट्रीय मंच को और मजबूती हासिल हुई है। अलग-अलग जियोपॉलिटिकल हित और विचार रखने वालों को एक मंच पर लाना भी एक बड़ी उपलब्धि है। यह भारत की संतुलनकारी और सर्वसमावेशी नीति की अहम तस्वीर है।

इस बात को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिक्स में अपने संबोधन में पावर पिरामिड का जिक्र करते हुए और भी स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि हम एक दूसरे के दृष्टिकोण का सम्मान करते हैं और सहमति से आगे बढ़ते हैं। हम किसी के खिलाफ नहीं बल्कि सबको साथ लेकर चलने की सोच के साथ आगे बढ़ने का प्रयास करते हैं। प्रधानमंत्री का कहना था कि ग्लोबल साउथ आज वैश्विक संकटों की पहली पंक्ति में है, लेकिन फैसला लेने में सबसे पीछे है। हमें इस पिरामिड और प्रिविलेज को प्लेटफॉर्म और पार्टनरशिप में बदलना है।

2006 में 4 देश- ब्राजील, रूस, भारत और चीन के साथ आगाज करने वाले BRIC अब BRICS के 11 पूर्ण सदस्यों और 10 साझेदार देशों के साथ विश्व का एक ताकतवर जियोपॉलिटकल ब्लॉक बन चुका है। आर्थिक विचार-विमर्श से शुरू हुआ यह मंच अपना 20वां साल आने तक चार महाद्वीपों तक अपना विस्तार कर चुका है। इसका प्रभाव अब पूरी दुनिया देख रही है और समझ भी रही है। नई दिल्ली से सामने आई इस तस्वीर की धमक, ग्लोबल रिफॉर्म्स की चमक और आर्थिक तरक्की की खनक आने वाले दिनों में दुनिया महसूस करेगी।

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