Diplomacy। हिंदी में कूटनीति। यानी कूट+नीति। एक-एक शब्द तोल-मोल के साथ। भावनाओं पर नियंत्रण। संयम और मर्यादा की रेखा खींचते हुए। दुनिया के सबसे अच्छे कूटनीतिज्ञों की भाषा देखेंगे, तो इसकी झलक मिलती है। भाषा की यह परिभाषा इसलिए क्योंकि अमेरिकी सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल की भाषा और उससे ज्यादा उनका लहजा वायरल है। वह रूस से तेल खरीदने पर भारत और चीन को चेतावनी दे रहे थे। 8 सेकेंड के उनके वीडियो में अमेरिकी गुरूर की झलक मिल रही थी। सोशल मीडिया पर उनकी यह क्लिप वायरल है। सवाल अमेरिका से पूछा जा रहा है- आखिर वह इतना एटिट्यूड लाता कहां से है?
क्या हुआ?
अमेरिकी संसद में भारत और चीन जैसे रूस से ज्यादा तेल खरीदने वाले देशों पर 100 पर्सेंट टैरिफ लगाने की छूट देने वाला बिल पास हुआ है। अब ट्रंप जो चाहें फैसला ले सकते हैं। अभी टैरिफ लगा नहीं है, लेकिन डेढ़ दशक से ज्यादा समय से डेमोक्रेटिक सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल खुलेआम धमकी देने पर उतारू हो गए। वह भी उस देश के खिलाफ जिसके साथ अच्छे संबंध हैं।
यह बिल ऐसे समय में पास हुआ, जब 15 दिन पहले ही भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कह दिया था-
'यह विवाद (यूक्रेन संघर्ष) किसी के तेल, मिनरल, मेटल या फर्टिलाइजर खरीदने या ना खरीदने से हल नहीं होगा। बातचीत, कूटनीति और चर्चा से सुलझेगा।'
फिर भी तेल की धार कुंद करने में अमेरिका सारी ताकत झोंक रहा है, जबकि यह 140 करोड़ लोगों की बेसिक जरूरत है।
सीनेटर ने कहा क्या?
हैरत की बात है कि अमेरिका से यह धमकी ऐसे समय आई है, जब 3000 करोड़ के उसके E-3 सेंट्री प्लेन के टूटे पंखे और मलबे की तस्वीर सोशल मीडिया पर दुनिया देख रही है। टूटे खिलौने की तरह अमेरिकी एयरफोर्स का यह जंबो प्लेन ईरान की जवाबी कार्रवाई में नष्ट हुआ है। यह अपने आप में सारे भ्रम तोड़ रहा है। तेहरान के खिलाफ शुरू की गई लड़ाई में देश में महंगाई बढ़ी है, हथियारों की कमी पड़ गई फिर भी ऐसी धमकी?
इस पर सवाल उठता है कि अमेरिका को किस बात का इतना गुरूर है?
एक सवाल और पूछा जा रहा है कि क्या एक एक्ट पास होने से अमेरिका भारत के साथ अपने रिश्तों को ताक पर रखना चाहता है? क्या इस तरह की अमर्यादित भाषा किसी मित्र देश के लिए ठीक है? जिस देश से तेल खरीद को लेकर अमेरिका भारत पर भड़का हुआ है, वह अपनी और यूरोप की जरूरतों के लिए उसी देश (रूस) के साथ बिजनस पर आंख मूंदकर बैठा है।
डबल स्टैंडर्ड का यह उदाहरण पढ़ लीजिए
पूर्व विदेश सचिव और कई देशों में भारत के एंबेसडर रहे कंवल सिब्बल अमेरिकी सीनेटर का वीडियो देखकर कहते हैं-
सोशल मीडिया एक्स पर उन्होंने कूटनीति की संतुलित भाषा में आईना भी दिखाने की कोशिश की है।
हां, विदेश मामलों को गहराई से समझने वाले सिब्बल ने लिखा, 'इसमें कोई शक नहीं कि अमेरिका ताकतवर है, लेकिन पश्चिम एशिया में उसकी ताकत की सीमाएं सबने देख ली हैं। साथ ही, चीन को बराबरी की ताकत के तौर पर स्वीकार करने और उसके साथ तालमेल बिठाने की इच्छा भी देखी जा रही है।'
सिब्बल ने कहा है कि अमेरिका का राजनीतिक सिस्टम तेजी से लड़खड़ा रहा है और इसी वजह से ऐसे बेतुके विदेश नीति वाले कानून बन रहे हैं।
What arrogant language! No sense of proportion in thinking and words.
— Kanwal Sibal (@KanwalSibal) September 17, 2026
This India- baiting Senator nurses a warped world view and is too imbued with a sense of unfettered US power.
The US is powerful no doubt but the limits of its power have been exposed in West Asia,… https://t.co/xfNS0IYRIK
सीनेटर की धमकी पर भारतीय सेना के एक रिटायर्ड मेजर जनरल ने सख्त लहजे में कहा-
ट्रंप ने अपनी बेवकूफी भरी हरकतों से तेल की कीमतें बढ़ाई हैं। अगर आपको लगता है कि हम आपका तेल खरीदेंगे और रूस से तेल लेना बंद कर देंगे, तो आप गलतफहमी में हैं।
मेजर जनरल हर्ष कक्कड़ (रिटायर्ड) ने आगे सवालों की झड़ी लगा दी।
उन्होंने कहा, 'आपको (अमेरिका) क्या लगता है कि भारत ने ट्रेड डील साइन करने से मना क्यों किया? उसने (भारत) कभी आप पर असल में भरोसा नहीं किया और न ही करेगा, जब तक ट्रंप सत्ता में हैं। आपकी इकोनॉमी खस्ताहाल है, हमारी नहीं। आपका कर्ज बेकाबू हो गया है, हमारा नहीं। पहले अपने मामले तो संभाल लीजिए। वैसे भी, मिड-टर्म चुनाव बदलाव लाएंगे। ईरानियों और हूतियों ने आपकी पोल खोल दी है, आपके पास बेतुकी बातें करने के अलावा कोई जवाब नहीं है।'
कुछ लोग अमेरिका के टैरिफ वाले कानून को उसकी बौखलाहट बता रहे हैं।
This dumbo Richard Blumenthal does not realize that India eats jokers like him for breakfast. It is @realDonaldTrump who caused a spike in oil prices by his stupid actions. If you think we will buy your oil and stop Russian, you are dreaming.
— Maj Gen Harsha Kakar (@kakar_harsha) September 17, 2026
Why do you think India has refused to… https://t.co/bl4ePE73WP
टैरिफ किस पर लगेगा?
हाल ही में अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने 'लिंडसे ओ. ग्राहम सेंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट 2026' पास किया है। यह विधेयक अमेरिकी राष्ट्रपति को उन देशों पर 100% तक टैरिफ (आयात शुल्क) लगाने का अधिकार देता है, जो रूस से तेल और गैस खरीद रहे हैं। इस बिल के पास होने के बाद जोश-जोश में अमेरिकी डेमोक्रेटिक सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल धमकी देने लगे।

ब्लूमेंथल को 5 बातें समझनी होंगी।
1. भारत की पॉलिसी भारत तय करेगा
आलोचकों और भारतीय एक्सपर्ट्स का कहना है कि भारत एक स्वतंत्र और संप्रभु राष्ट्र है। कोई दूसरा देश भारत को यह निर्देश नहीं दे सकता कि उसे अपनी जरूरत का सामान किससे खरीदना है और किससे नहीं। सीनेटर की भाषा को भारत के आंतरिक मामलों और विदेश नीति में सीधा दखल माना जा रहा है।
2. डिप्लोमेसी में भाषा मर्यादित होती है
डिप्लोमेसी और अंतरराष्ट्रीय संबंधों में बात रखने, यहां तक कि विरोध जताने का भी एक शिष्टाचार होता है। अमेरिका के एक सीनेटर एक बड़े लोकतांत्रिक देश और रणनीतिक साझेदार के लिए 'अपना बर्ताव सुधारो' जैसे शब्दों का इस्तेमाल कैसे कर सकते हैं। भारत में आम लोगों, नेताओं और राजनयिकों ने इसकी कड़ी निंदा की है।
3. भारत के लिए अपना हित पहले है
क्या अमेरिका 140 करोड़ लोगों की ऊर्जा सुरक्षा की अनदेखी करना चाहता है? भारत सरकार के विदेश मंत्रालय (MEA) ने साफ किया है कि भारत की प्राथमिकता अपने 1.4 अरब (140 करोड़) लोगों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना है। भारत अपनी अर्थव्यवस्था और नागरिकों के हितों को ध्यान में रखकर ही तेल का आयात करता है। अमेरिका अपनी जियोपॉलिटिकल लड़ाई के लिए भारत की बड़ी आबादी की जरूरतों को नजरअंदाज कर रहा है।
4. अमेरिका अपना डबल स्टैंडर्ड कब देखेगा?
हां, एक्सपर्ट कह रहे हैं कि अमेरिका भारत को रूस के बजाय वेनेजुएला जैसे देशों से तेल खरीदने का दबाव बना रहा है, लेकिन वहां से भारत तक तेल लाने का खर्च इतना ज्यादा है कि यह भारतीय अर्थव्यवस्था को नुकसान होगा। इसके अलावा, खुद यूरोपीय देश लंबे समय तक रूस से ऊर्जा खरीदते रहे हैं, ऐसे में केवल भारत और चीन को निशाना बनाना अमेरिका के दोहरे मापदंड को दिखाता है।
5. संबंधों में धमकी क्यों?
हां, एक मुद्दे को छोड़ दें तो भारत और अमेरिका में चीजें सामान्य ही हैं। कई महत्वपूर्ण व्यापार समझौते और रणनीतिक साझेदारियों पर काम हो रहा है। इस तरह की धमकियां और 100% टैरिफ का डर दिखाना दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे आपसी सम्मान और साझा हितों के रिश्तों को कमजोर करता है।




