
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन की दोस्ती जगजाहिर है। दो शक्तिशाली देशों के ये राष्ट्राध्यक्ष पूरी दुनिया में अपने-अपने अंदाज के लिए मशहूर हैं। प्रधानमंत्री मोदी और पुतिन के बीच ब्रिक्स के दौरान शुक्रवार को नई दिल्ली में 40 मिनट तक द्विपक्षीय मुलाकात हुई। यह उनके बीच 15 दिनों में दूसरी और एक साल में चौथी मुलाकात थी।
इनके बीच की दोस्ती ऐसी है कि वे एक-दूसरे पर फुल कॉन्फिडेंस रखते हैं। इसका ताजा उदाहरण दिल्ली में एक बार फिर देखने को मिला जब दोनों नेताओं ने एक ही कार से यात्रा की। जब दोनों नेता कहीं भी एक मंच पर होते हैं तो पूरी दुनिया की उन पर नजर होती है, जब वह एक साथ बोलते हैं तो पूरी दुनिया ध्यान देती है और जब वह एक साथ फैसले लेते हैं तो उसका असर पूरी दुनिया पर होता है।
विश्लेषकों से समझते हैं कि पीएम मोदी और पुतिन की यह दोस्ती भारत-रूस रिश्तों को किस तरह नई दिशा दे रही है और दोनों देशों की साझेदारी में क्या नया अध्याय जुड़ रहा है?
#WATCH | Delhi: Prime Minister Narendra Modi and Russian President Vladimir Putin hold a bilateral meeting on the sidelines of BRICS Summit 2026.
— ANI (@ANI) September 11, 2026
(Video Source: DD News) pic.twitter.com/KhlCIatMI2
मोदी-पुतिन की दोस्ती विश्व के लिए क्या संदेश?
जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफेसर और विदेश मामलों के अभिषेक श्रीवास्तव ने कहा कि 2014 के बाद भारत की विदेश नीति को काफी प्रोएक्टिव हुई है। भारत ने अपनी विदेश नीति को मल्टी-अलाइड (बहुत देशों के साथ साझेदारी करना) बनाया है। मगर इसका मतलब यह बिलकुल नहीं है कि अन्य देशों के साथ संबंध और सहयोग बढ़ाने के लिए वह पुराने दोस्तों का साथ छोड़ रहा। भारत ने पुराने दोस्तों को बनाए रखते हुए नए दोस्त बनाने की नीति अपनाई।
भारत-रूस की दोस्ती में यह गहराई इसी वजह से आई है। इसका असर यह हुआ कि भारत-रूस मिलकर यह विश्वास बनाने में सफल रहे कि वह दूसरे देशों की भी मिलकर रक्षा कर सकते हैं, उन्हें सहयोग दे सकते हैं। तमाम दूसरे मुल्क यही देखकर उनके करीब आ रहे है कि अगर ये दोनों साथ हैं तो उनकी समस्याओं का समाधान हो सकता है।
भारत-रूस एक दूसरे के पूरक
प्रोफेसर अभिषेक श्रीवास्तव ने कहा कि भारत-रूस के बीच ऊर्जा का आदान-प्रदान भी बहुत बड़ा है। यह संबंध विश्व के सप्लाई चेन सिस्टम को मजबूत करता है। रूस की भूमिका इसमें बहुत बड़ी है। अगर इसे भारत के लिहाज से देखें तो विश्व की कुल जनसंख्या के लिहाज से हर छठें व्यक्ति को रूस ऊर्जा सप्लाई कर रहा है। यह छोटी बात नहीं है। भारत के दृष्टिकोण से विश्व की 15 फीसदी आबादी रूसी ऊर्जा पर निर्भर है। इसके अलावा डिफेंस सेक्टर में भी रूस भारत के साथ बहुत बड़ा रोल निभा रहा है।
अभी रूस के 5वीं पीढ़ी के फाइटर जेट एसयू-57 की बात हो रही है। इसके अलावा एस-400 जैसी मिसाइलें, एयरक्राफ्ट पर भारत की रूस पर निर्भरता है। रूस भी कई क्षेत्रों में भारत पर निर्भर है। वैश्विक मंचों पर उसके लिए आवाज उठाने की बात हो या रूस के राष्ट्रीय हितों को डिफेंड करने की बात हो, भारत हमेशा साथ देता है। इसके अलावा वैश्विक राजनीति के लोकतांत्रिकरण के लिए भारत-रूस की दोस्ती बहुत जरूरी है। वैश्विक मंचों पर भारत हमेशा रूस के हित की बात उठाता है। रूस की नीतियों को भारत सपोर्ट करता है।
रूस के साथ भारत की दोस्ती अटूट
रक्षा और विदेश नीति विशेषज्ञ कमर आगा ने कहा कि रूस ने हमेशा भारत का खुलकर साथ दिया है। रूस लंबे समय से भारत का रणनीतिक पार्टनर है। दोनों देशों के संबंधों को अब 80-90 साल हो गए हैं। भारत की जनता या कोई भी सरकार हो वह रूस को कभी नहीं छोड़ सकती। रूस के साथ हमारा बहुत गहरा संबंध है। अब उसके साथ मिलिट्री संबंधों को और ज्यादा बढ़ाना चाहिए। इसके अलावा रूस से तेल लेते रहना चाहिए। भारत और रूस को अमेरिकी प्रतिबंधों के विरोध में वैश्विक स्तर पर एक अभियान चलाने की जरूरत है, क्योंकि यह दुनिया के लिए बहुत बड़ी धमकी है। अब समय आ गया है कि रूस के साथ मिलकर भारत हाई नेटवर्क प्रोडक्ट बनाए।
भारत-रूस को मिलकर बनाना चाहिए सिविलियन प्लेन
कमर आगा ने कहा कि सिविलियन प्लेन बहुत महंगे मिलते हैं। भारत-रूस दोनों मिलकर इसे बना सकते हैं। इसके अलावा ऑयल टैंकर जैसे अन्य हाई नेटवर्क प्रोडक्ट भी बनाना चाहिए, जिनकी डिमांड तमाम देशों में है। भारत रूस के बीच रक्षा साझेदारी बढ़ रही है। रूस के साथ हमारा टेक सेक्टर काफी मजबूत हुआ है।
डिजिटल करेंसी को मिले रफ्तार
कमर आगा ने कहा कि डिजिटल करेंसी यानी रुपये और रूबल में ट्रेड होना चाहिए। इसका दोनों देशों को बहुत फायदा है। दोनों देश इस पर काम भी कर रहे हैं। भारत-रूस मिलकर सऊदी अरब, यूएई, कतर, ईरान में भी जाकर अपना कोई हाई नेटवर्क संयुक्त प्रोडक्ट बना सकते हैं। भारत-रूस बड़ी ताकतें हैं।
भारत-रूस और किन क्षेत्रों में कर सकते हैं काम
कमर आगा ने कहा कि द्विपक्षीय वार्ता संबंधों को नया मोड़ और नया मुकाम देगी। भारत-रूस के रिश्ते और मजबूत होंगे। भारत हमेशा से अपने हित में अमेरिका के प्रेशर के बावजूद रूस से तेल लेता रहा है। इससे पता चलता है कि वह रूस से अपने संबंधों को हमेशा बनाए रखता है। भारत का मकसद हमेशा दूसरे देशों के साथ भी अच्छे संबंध बनाना है। रूस के साथ संबंधों को नई उड़ान देने के लिए अब एनर्जी और डिफेंस सेक्टर के अलावा आटोमोबाइल और अन्य क्षेत्रों में आगे बढ़ना चाहिए।
दोनों देशों के लिए मेडिसिन क्षेत्र में भी संभावनाएं हैं। रूस भी बहुत तेजी से फार्मास्युटिकल्स में आगे आ रहा है। भारत बड़े पैमाने पर जेनरिक मेडिसिन बनाता है। वह अमेरिका को बेचता है। फिर अमेरिका उसे महंगे दामों पर दूसरे देशों को बेचता है। भारत-रूस मिलकर इस क्षेत्र में काम कर सकते हैं और दुनिया के तमाम देशों में इसे बेच सकते हैं। ईरान भी मेडिसिन इंडस्ट्री में बहुत अच्छा कर रहा है। इन सभी के साथ सहयोग होना चाहिए।
भारत-रूस को किन सेक्टरों पर करना चाहिए ज्यादा फोकस
- सिविलियन प्लेन
- मेडिसिन
- ऑटोमोबाइल सेक्टर
- डिफेंस सेक्टर में और तेजी
- अंतरिक्ष क्षेत्र
- ऊर्जा
- व्यापार
मोदी-पुतिन की दोस्ती क्या कहती है?
कमर आगा ने कहा कि मोदी-पुतिन के बीच अच्छी केमिस्ट्री है। वे वैश्विक और क्षेत्रीय समस्याओं को समझते हैं। एक दूसरे के विचारों पर उनमें सहमति है। युद्ध खत्म होने चाहिए। युद्ध मल्टीपोलर वर्ल्ड को रोकने के लिए छेड़े गए हैं। इसलिए इसको खत्म होना चाहिए। अगर अमेरिका ईरान के साथ ट्रेड नहीं करता तो अन्य देशों को करना चाहिए। समय आ गया है कि ब्रिक्स बोले कि जिन देशों पर अमेरिकी सेंक्शन हैं, वह अवैध हैं। वह उन देशों के साथ ट्रेड जारी रखें।
अमेरिका जितने देशों पर अपने हित के लिए प्रतिबंध लगाता है, उसे खारिज करना चाहिए। वह पहले उन देशों पर प्रतिबंध लगाता है, जिससे उसकी दुश्मनी होती है, फिर वह उन देशों पर भी सेकेंड्री प्रतिबंध लगा देता है, जो उसके साथ व्यापार करते हैं। ब्रिक्स को ऐलान करना चाहिए कि वह अमेरिका और यूरोप के प्रतिबंधों को नहीं मानेगा। क्योंकि इससे बहुत नुकसान हो रहा है। एनर्जी सेक्टर पर सेंक्शन नहीं लगना चाहिए, ये ब्रिक्स फैसला करे। सेंक्शन से तेल के दाम बढ़ते हैं, उससे अमेरिकी कंपनियों और विकसित देशों का फायदा होता है। भारत, रूस, चीन, ईरान जैसे देशों का नुकसान होता है। तेल और ऊर्जा पर बैन नहीं लगना चाहिए। ये तभी संभव है, जब सभी देश मिलकर यह तय करें।
मोदी-पुतिन की जोड़ी दुनिया में सुपरहिट
इंस्टीट्यूट फॉर डिफेंस स्टडीज एंड एनालिसिस के पूर्व रिसर्चर व जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय के प्रोफेसर और विदेशी मामलों के जानकार राजीव नयन ने कहा कि पीएम मोदी और राष्ट्रपति पुतिन की जोड़ी पूरी दुनिया में सुपर हिट है। ये दोनों नेता वैश्विक स्तर पर बड़ी छवि रखते हैं। ये ट्रंप के खिलाफ भी नहीं हैं, लेकिन उनकी मनमानी को चुनौती जरूर देते हैं। ब्रिक्स में पीएम मोदी और पुतिन की यह मुलाकात बहुत अहम है। इस दौरान ऊर्जा यानी तेल का पूरे विश्व में संकट है।
पश्चिम एशिया और खाड़ी देशों में संघर्ष की वजह से ऐसे हालात पैदा हुए हैं। रूस एनर्जी के री-ओरिएंटेशन में भारत में बड़ा रोल निभा सकता है। रूस भारत का बड़ा ऊर्जा सप्लायर है। वैश्विक हालात को देखते हुए मोदी और पुतिन के बीच यह मुलाकात और वार्ता बहुत जरूरी थी। इससे कई द्विपक्षीय क्षेत्रीय और कई वैश्विक मुद्दों का भी हल निकलेगा। इसके अलावा डिफेंस सेक्टर में भारत-रूस को मिलकर और आगे बढ़ना चाहिए। वह डिफेंस सेक्टर में कई बड़ी डील भी कर रहे हैं। यह कदम भारत की रक्षा और सुरक्षा को और मजबूत करेगा। साथ ही दुश्मनों पर स्ट्रैटेजिक बढ़त देगा।
1 साल में कितनी बार और कहां मिले मोदी और पुतिन?
- 1 सितंबर 2025 को चीन के तियानजिन में एससीओ समिट के दौरान
- 4 दिसंबर 2025 को नई दिल्ली में 23वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन में
- 31 अगस्त 2026 को किर्गिस्तान के बिश्केक में एससीओ शिखर सम्मेलन में
- 11 सितंबर को अब ब्रिक्स शिखर सम्मेलन नई दिल्ली में
पीएम मोदी ने पुतिन को कौन सी किताब दी?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने व्लादिमिर पुतिन को एक किताब भेंट की। पीएम मोदी ने एक्स पर लिखा, “मैंने रूसी राष्ट्रपति पुतिन को महान विद्वान तिरुवल्लुवर द्वारा लिखी गई पवित्र 'तिरुक्कुरल' किताब का रूसी अनुवाद भेंट किया। तिरुक्कुरल संत तिरुवल्लुवर के उस असीम ज्ञान का संदेश देता है जो राष्ट्रों की सीमाओं और भाषाओं के परे है।” उन्होंने पुतिन को यह किताब देते हुए कहा कि मुझे भरोसा है कि यह भारत और रूस के संबंधों को मजबूत करने में अहम साबित होगी।
Presented President Putin with a Russian translation of the Thirukkural, which carries the eternal wisdom of the great Thiruvalluvar across languages and borders. pic.twitter.com/rvk3rRDnvg
— Narendra Modi (@narendramodi) September 11, 2026
आज पीएम मोदी और पुतिन की बैठक में क्या हुआ?
विदेश मंत्रालय के अनुसार पीएम मोदी और पुतिन के बीच बैठक में कई मुद्दों पर चर्चा हुई। इनमें राजनीतिक, आर्थिक,डिफेंस सेक्टर, एनर्जी, अंतरिक्ष और स्किल डेवलपमेंट जैसे मामले अहम रहे। मोदी और पुतिन ने रूस और भारत की ओर से लगाई गई अंतरराष्ट्रीय “इनोप्रोम इंडिया” प्रदर्शनी को भी देखा। इसे रूस और भारत ने मिलकर 9-11 सितंबर तक आयोजित किया। यह भारत-रूस के बीच व्यापार और औद्योगिक संबंधों को विस्तार देने के मकसद से लगाई गई थी। दोनों नेताओं ने इस प्रदर्शनी को अहम बताया। दोनों नेताओं ने इनोप्रोम इंडिया प्रदर्शनी देखने के दौरान प्रतिभागियों से बातचीत भी की।
⚡️PM Modi & Putin Walk & Ride Side By Side To Check Out INNOPROM.India #BRICS2026#BRICSIndia2026#IndiaBRICSChairshippic.twitter.com/Wu8vxEK77I
— RT_India (@RT_India_news) September 11, 2026
पश्चिम एशिया संघर्ष और समुद्र में भारतीय नाविकों की सुरक्षा पर बात
इस दौरान विशेष रूप से भारत की अध्यक्षता में ब्रिक्स पर विचार-विमर्श किया गया। साथ ही भारत-रूस सहयोग पर चर्चा हुई। उन्होंने एक दूसरे देशों के हितों के लिए क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी अपने विचार साझा किए। इस दौरान पश्चिम एशिया और काला सागर क्षेत्र में संघर्ष शामिल के मामले पर भी दोनों नेताओं में बातचीत हुई, जिसकी वजह से समुद्री व्यापार और भारतीय नाविकों की सुरक्षा को पर असर पड़ा है। प्रधानमंत्री ने एक बार फिर दोहराया कि संघर्षों के समाधान का रास्ता संवाद और कूटनीति से ही निकलता है। भारत शांति प्रयासों में हर मदद के लिए तैयार है।
रणनीतिक साझेदारी और मजबूत करने पर जोर
दोनों नेताओं ने भारत-रूस के बीच विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के प्रयासों में सक्रिय रहने पर सहमति व्यक्त की। इस साझेदारी में लगातार मजबूती देखी जा रही है। भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बावजूद यह साझेदारी लचीलापन दिखा रही है। मुलाकात के दौरान राष्ट्रपति पुतिन ने प्रधानमंत्री मोदी को 24वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन के लिए रूस आने का निमंत्रण दिया। प्रधानमंत्री ने उनका निमंत्रण स्वीकार कर लिया। शिखर सम्मेलन की तारीखें राजनयिक माध्यमों से आपसी सुविधा के अनुसार तय की जाएंगी।





