'प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन- दोनों मजबूत, अनुभवी और जिम्मेदार नेता हैं। वे अपने ही नहीं, दूसरे देशों के राष्ट्रहित भी अच्छी तरह से समझते हैं '
RT हिंदी के लॉन्च पर रूस के डिप्टी एंबेसडर रोमन बाबुश्किन ने दोनों नेताओं की गर्मजोशी की यही वजह बताई। आज जब दिल्ली में दोनों नेता मिले, तो रिश्तों में एक नया चैप्टर जुड़ गया। औपचारिक बयान से पहले आई तस्वीरों ने ही पूरी कहानी कह दी।
दरअसल, जब हम अपनों से मिलते हैं, तो औपचारिकता के लिए जगह नहीं बचती। ना चेहरे पर, ना हाव-भाव में।
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की केमिस्ट्री का सबसे दिलचस्प पहलू भी यही है। समय के साथ ये दोस्ती और मजबूत होती गई है।
3.30 बजे का समय पहले से तय था। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन तड़के ही दिल्ली पहुंच चुके थे। भारत ही नहीं, दुनियाभर की मीडिया को इस पल का इंतजार था। 3 बजकर 40 मिनट के करीब दोनों नेता एक ही कार में बैठकर भारत मंडपम में दाखिल हुए। कुछ ही मिनट में वो तस्वीर भी आ गई, जिसका इंतजार सबको था।
दो कदम आगे वाली बात
ब्रिक्स समिट के मेजबान के तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खड़े थे और पुतिन को आता देख वह दो कदम बढ़े और दोस्ती का हाथ आगे बढ़ा दिया। इसके बाद चिर-परिचित अंदाज में वे मुस्कुराते हुए गले मिले। ये रिश्ता दिल से दोस्ती का है।
आगे ढेर सारी बातें होंगी, लेकिन 15 दिन में दोनों नेताओं की दूसरी मुलाकात अपने आप में मैसेज दे रही है कि वे एक दूसरे को कितना महत्व देते हैं।
किताबी कूटनीति से आगे बढ़कर इनका गले मिलना, पीठ थपथपाना अपने आप में स्नेह और रिश्ते की सहजता को दिखाता है। यह बॉडी लैंग्वेज कूटनीतिक रिश्तों से आगे की बात है।
मोदी बोल रहे थे, पुतिन सुन रहे थे
हां, आज की एक और तस्वीर पर गौर किया जाना चाहिए।
मिलने के बाद पीएम ने एक ग्रंथ रूसी राष्ट्रपति को भेंट किया। पुतिन ने इसे सिर्फ गिफ्ट के तौर पर नहीं लिया। उन्होंने बड़े ध्यान से उसका नाम पढ़ा और गौर से पीएम को सुनने लगे। मोदी उन्हें उसकी खासियत बता रहे थे। यह कवि तिरुवल्लुवर की रचना ‘तिरुक्कुरल' थी, जिसका रूसी भाषा में अनुवाद हुआ है।
आमतौर पर नेता इस तरह के गिफ्ट को सिर्फ फोटो औपचारिकता मानते हैं। यहां ऐसी कोई बात नहीं दिखी।

और हां, भारत-रूस रिश्तों की गर्मजोशी समझने के लिए दोनों नेताओं की कोई भी तस्वीर देख लीजिए। वो उत्साह, वो अपनापन, वो अलग फीलिंग दिख ही जाएगी। ऐसे घनिष्ठ रिश्ते का दूसरा उदाहरण दुनिया में नहीं दिखता।
पश्चिम में तो एक हाथ से दो, एक हाथ से लो टाइप का स्वार्थ नजर आता है जबकि मित्रता वो होती है, जो जरूरत के समय साथ खड़ा रहे। भारत-रूस की दोस्ती इस कसौटी पर कई बार खतरी उतरी है।
31 अगस्त को किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में दोनों नेता कुछ इस तरह मुस्कुराते हुए गले मिले थे।

उस शाम एक स्पोर्ट्स इवेंट में जाने के लिए पीएम मोदी और रूसी राष्ट्रपति एक ही कार में सवार हुए थे। एक दिलचस्प वाकया हुआ। कार पहुंची, तो गेट खोले गए लेकिन दोनों नेता बातचीत में इतने मशगूल थे कि गेट फिर बंद कर दिया गया। यह दिखाता है कि दोनों नेताओं में कितनी जबर्दस्त बॉन्डिंग है।

पुतिन का इस बार तीन दिन तक भारत की राजधानी में रुकना भी रिश्तों की उड़ान का नया संदेश दे रहा है।
वैसे भी, दिल्ली में हो रहा ब्रिक्स सम्मेलन कई मायनों में खास बन चुका है। दुनिया इस समय कई तरह के उतार-चढ़ाव देख रही है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप टैरिफ वॉर छेड़े हुए हैं। संघर्ष भड़काने की साजिश हो रही है। G7 में दुनिया के विकसित राष्ट्र मिलकर अपने फायदे की बात करते हैं, लेकिन ब्रिक्स दुनिया की उभरती अर्थव्यवस्था वाले देशों को मौका देता है। BRICS आज ग्लोबल साउथ की आवाज बन चुका है।
ब्रिक्स से इतर मोदी-पुतिन ने क्या बात की?
दोनों नेताओं ने राजनीतिक, आर्थिक, रक्षा, ऊर्जा, स्पेस, कौशल और दोनों देशों के लोगों के बीच संबंधों को लेकर द्विपक्षीय सहयोग में प्रगति की समीक्षा की।
दोनों नेताओं ने रूस की अंतरराष्ट्रीय औद्योगिक प्रदर्शनी “इनोप्रोम इंडिया” का स्वागत किया। यह भारत में पहली बार 9-11 सितंबर 2026 तक आयोजित की गई। दोनों इनोप्रोम इंडिया प्रदर्शनी देखने गए और प्रतिभागियों के साथ बातचीत भी की।
रूस जाएंगे पीएम मोदी
राष्ट्रपति पुतिन ने प्रधानमंत्री को 24वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन के लिए रूस आने का निमंत्रण दिया। प्रधानमंत्री ने न्योता स्वीकार भी कर लिया। शिखर सम्मेलन की तारीखें आपसी सुविधा के अनुसार तय की जाएंगी।
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