
ईरान और अमेरिका के बीच समझौता हो भी जाए, तो क्या यमन में संघर्ष खत्म हो जाएगा? यमन की सना सरकार (हूती नियंत्रित) के विदेश और प्रवासी मामलों के कार्यवाहक मंत्री अब्दुल वाहिद अबू रास से जब ये सवाल पूछा गया तो उनका जवाब था- यमन का मामला अलग है।
RT इंडिया को दिए एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में उन्होंने सऊदी अरब के सामने दो बड़ी शर्तें रखीं- यमन की नाकाबंदी खत्म करना और अपने सैनिकों को वहां से वापस बुलाना। अबू रास ने यह भी चेतावनी दी कि सऊदी अरब के हमले नहीं रुके तो हूतियों के हमले भी जारी रहेंगे।
मंत्री अबू रास ने साफ कहा कि जब तक रियाद यमन में सैन्य अभियान जारी रखेगा, हूती सऊदी हवाई अड्डों, तेल प्रतिष्ठानों, बुनियादी ढांचे और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाते रहेंगे।
’जैसे को तैसा’ वाली रणनीति
🎙️ RT India EXCLUSIVE | Sana’a Says Yemen’s Fight Is Separate From Iran-US Deal Houthi Acting Minister of Foreign Affairs, Abdulwahid Abu Ras told RT India's Managing Editor @ashokbagriya10 that Sana’a’s operations were a “completely separate issue” from any Iran-US deal, demanding Saudi Arabia lift its blockade and withdraw from Yemeni territory. Stay tuned for the full exclusive interview on RT India.
— RT_India (@RT_India_news) October 14, 2026
अब्दुल वाहिद अबू रास ने RT इंडिया के मैनेजिंग एडिटर अशोक बागड़िया से बातचीत में हूतियों की रणनीति को ‘जैसे को तैसा’ जवाब बताया। उन्होंने कहा कि यमन की नाकेबंदी के जवाब में नाकाबंदी और हमलों के जवाब में हमले किए जाएंगे। उनके शब्दों में, 'नाकेबंदी के बदले नाकेबंदी, हवाई अड्डे के बदले हवाई अड्डा, बंदरगाहों के बदले बंदरगाह और तनाव बढ़ाने के बदले तनाव बढ़ाना।'
बातचीत की मेज पर आने को तैयार
अबू रास ने कहा कि यमन के हवाई अड्डों और बंदरगाहों पर लगी पाबंदियां खत्म करना उनकी प्रमुख शर्त है। उन्होंने देश के तेल और गैस संसाधनों तक पहुंच की मांग भी की। हालांकि, उन्होंने सऊदी अरब के साथ सीधे बातचीत की संभावना से इनकार नहीं किया। उनके मुताबिक, हूती प्रशासन बातचीत की मेज पर आने और पहले हुए समझौतों को लागू कराने के लिए तैयार है।
क्या ईरान-अमेरिका समझौते से खत्म हो जाएगी यमन की लड़ाई?

कार्यवाहक विदेश मंत्री ने यमन के संघर्ष को ईरान और अमेरिका के बीच जारी टकराव से अलग बताया। ईरान हूतियों का प्रमुख समर्थक है, लेकिन अबू रास का कहना है कि तेहरान और वॉशिंगटन के बीच समझौता हो या नहीं, यमन में हूतियों की कार्रवाई का फैसला अलग आधार पर होगा। उन्होंने कहा, 'इस्लामी गणराज्य ईरान के हमारे भाई अमेरिकी पक्ष के साथ समाधान तक पहुंचें या नहीं, यह पूरी तरह अलग मुद्दा है।'
अबू रास के मुताबिक, हूतियों की कार्रवाई का संबंध यमन के आंतरिक और राष्ट्रीय मुद्दे से है, न कि किसी बाहरी एजेंडे से। उनके इस बयान से साफ है कि हूती प्रशासन ईरान-अमेरिका के बीच संभावित समझौते को यमन में संघर्ष खत्म करने की पर्याप्त शर्त नहीं मानता।
पाकिस्तान और तुर्किये को लेकर क्या बोले हूती मंत्री?
अबू रास ने पाकिस्तान और तुर्किये का भी जिक्र किया। उन्होंने उम्मीद जताई कि दोनों देशों के पास इतनी समझदारी और हालात की जानकारी है कि वे ऐसे युद्धों में शामिल नहीं होंगे, जिन्हें वह अन्यायपूर्ण मानते हैं। उन्होंने कहा, 'हमें यकीन है कि इन देशों के पास ऐसे अन्यायपूर्ण युद्धों में शामिल न होने के लिए पर्याप्त समझदारी और हालात की समझ है।'
बाब अल-मंदेब में जहाजों पर टोल लगाने से इनकार
रणनीतिक रूप से अहम बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य को लेकर भी हूती मंत्री ने अपना रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि सना का इरादा इस रास्ते से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों पर शुल्क या टोल लगाने का नहीं है। हूती प्रशासन चाहता है कि इस समुद्री रास्ते और यहां से होने वाला व्यापारिक आवागमन सामान्य बना रहे। यह स्ट्रेट वैश्विक समुद्री व्यापार के लिए अहम मार्गों में से एक है।

ब्रिटेन पर लगाया संघर्ष बढ़ाने का आरोप
अबू रास ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में ब्रिटेन की भूमिका की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि ब्रिटेन सऊदी अरब की कार्रवाइयों को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर समर्थन देता है और इससे संघर्ष और जटिल हो रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि बाहरी हस्तक्षेप क्षेत्र को बड़े संघर्ष की ओर धकेल सकते हैं, जिसके नतीजे पूरे क्षेत्र को प्रभावित कर सकते हैं।
अबू रास के बयान के मुताबिक, यमन में संघर्ष खत्म करने के लिए नाकाबंदी हटाना, सऊदी सैनिकों की वापसी और पहले हुए समझौतों को लागू करना जरूरी है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ईरान-अमेरिका के बीच किसी संभावित समझौते को वह यमन के संघर्ष का समाधान नहीं मानते।







