7 महीने में 5वीं बार मुनीर क्यों पहुंचे तेहरान, इस बार Iran-US War नहीं, असल मुद्दा कुछ और है
पाकिस्तान के आर्मी चीफ आसिम मुनीर ऐसे समय तेहरान पहुंचे हैं, जब एक तरफ ईरान-अमेरिका के बीच अगले दौर की शांति वार्ता की संभावना तलाशने के प्रयास हो रहे हैं, तो दूसरी तरफ तेहरान और इस्लामाबाद के बीच रिश्ते अंदरखाने काफी तनावपूर्ण हो चुके हैं।
7 महीने में 5वीं बार मुनीर क्यों पहुंचे तेहरान, इस बार Iran-US War नहीं, असल मुद्दा कुछ और है
पाकिस्तान के आर्मी चीफ असीम मुनीर मंगलवार को तेहरान पहुंचे।

पाकिस्तान के फील्ड मार्शल और चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज आसिम मुनीर 7 महीने में 5वीं बार ईरान के दौरे पर पहुंच गए हैं। मुनीर का यह पहला ऐसा तेहरान दौरा बताया जा रहा है, जो अचानक हुआ है। पहले से इसका कोई आधिकारिक ब्यौरा पाकिस्तान या ईरान की ओर से नहीं दिया गया था, न ही यात्रा का मकसद बताया गया। ईरान और पाकिस्तान की मीडिया इसे अमेरिका-ईरान के बीच अगले दौर की वार्ता के लिए मध्यस्थता प्रयास तेज करने के संदर्भ में देख रही है। लेकिन इसकी इनसाइड स्टोरी कुछ और ही है। 

ईरान-अमेरिका युद्ध शुरू होने के बाद से मुनीर इससे पहले 4 बार तेहरान जा चुके हैं। अब उनका यह 5वां दौरा बहुत रणनीतिक और कूटनीतिक तरीके से हो रहा है। मुनीर ऐसे समय तेहरान पहुंचे हैं, जब एक तरफ ईरान-अमेरिका के बीच अगले दौर की शांति वार्ता पर सहमति बनाने का प्रयास हो रहा है, तो दूसरी तरफ तेहरान और इस्लामाबाद के बीच अंदरखाने रिश्ते काफी तनावपूर्ण हो चुके हैं।

पाकिस्तान-ईरान में क्या चल रहा?

चर्चाएं हैं कि पाकिस्तान और ईरान के बीच अंदर ही अंदर तनाव बढ़ चुका है। ये बात अलग है कि दोनों ही पक्ष अभी इस पर खुलकर नहीं बोल रहे हैं, लेकिन उनके बीच पिछले कई दिनों में जमीनी बॉर्डर सील करने से लेकर ट्रेड रोके जाने तक के फैसले रिश्तों में कड़वाहट की कहानी बयां कर रहे हैं। अलजजीरा न्यूज की एक रिपोर्ट के अनुसार, तनाव के चलते इस्लामाबाद ने ईरान के साथ ट्रेड को पूरी तरह ठप कर दिया है। इसकी वजह से सामान से लदे 2000 से ज्यादा ट्रक दोनों देशों की सीमाओं के बीच फंस गए हैं। 

इधर, तेहरान टाइम्स में मिडिल ईस्ट टेंशन पर कुछ इस तरह से मैसेज देने की कोशिश की गई।

तेहरान टाइम्स में कुछ ऐसा छपा है।

3 मोर्चों पर फंसा पाकिस्तान

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के प्रोफेसर और जियोपॉलिटिकल एक्सपर्ट शांतेश कुमार सिंह ने RT हिंदी से बातचीत में कहा कि पाकिस्तान ऐसी राह पर चल पड़ा है, जहां से उसे बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं मिल पा रहा है। उसने ईरान-अमेरिका के बीच मध्यस्थ बनकर पहले ट्रंप को खुश करने की कोशिश की, लेकिन उसमें सफल नहीं हो पाया। पाकिस्तान को लगा था कि अगर वह मध्यस्थता कराने में सफल हो गया तो अमेरिका से बड़ी ग्रांट हासिल करेगा। लेकिन ऐसा नहीं हुआ और इसकी वजह से अमेरिका भी उससे बहुत खुश नहीं है। 

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान दूसरी तरफ ईरान से भी अपने रिश्तों को बनाए रखना चाहता था ताकि उसकी तेल, गैस जैसी ऊर्जा जरूरतें पूरी होती रहें। मगर हूतियों के खिलाफ सऊदी अरब में अपनी सेना भेजने का ऐलान करके वह ईरान का भरोसा भी खो चुका है।

इधर सऊदी अरब से द्विपक्षीय समझौता होने और मक्का डील के बावजूद पाकिस्तान ने अब तक हूतियों के खिलाफ कोई खुलकर कार्रवाई नहीं की है। इसकी वजह से रियाद का भी भरोसा भी उससे डगमगाता दिख रहा है। ईरान और सऊदी अरब के बीच फंसे पाकिस्तान ने अब डैमेज कंट्रोल के लिए मुनीर को तेहरान भेजा है।

Foreign Expert
पाकिस्तान न तो अमेरिका का भरोसा जीत पाया, न सऊदी अरब का और न ही ईरान का। अब वह न घर का रह गया न ही घाट का। सऊदी में पाकिस्तान के सेना भेजने से ईरान ने अपना बॉर्डर सील कर दिया है। हूतियों पर अगर पाकिस्तान ने कुछ किया तो ईरान चुप नहीं बैठेगा।
शांतेश कुमार सिंह, प्रोफेसर जेएनयू
शांतेश कुमार सिंह, प्रोफेसर जेएनयू
विदेश मामलों के एक्सपर्ट

रक्षा और विदेश नीति विशेषज्ञ कमर आगा ने RT हिंदी से बातचीत में कहा कि पाकिस्तान एक तरफ ईरान को अपना दोस्त बताता है, लेकिन दूसरी तरफ वह अमेरिका की चापलूसी करता है। इसके अलावा सऊदी अरब में अपने सैनिक भी भेजता है, जो अप्रत्यक्ष रूप से ईरान के खिलाफ उठाया जाने वाला कदम है। इससे ईरान पाकिस्तान से नाराज हो गया है। 

पाकिस्तान ने ईरान से व्यापार क्यों रोका?

पाकिस्तान ने ईरान के साथ गब्द-रिमदान और ताफ़्तान सीमा से होने वाले व्यापार को 2 दिन पहले पूरी तरह रोक दिया है। वह इस पर खुलकर बात नहीं कर रहा है। इसे सुरक्षा और तस्करी रोकने के कदम के तौर पर पेश कर रहा है। पाकिस्तान की ओर से इस कार्रवाई के एक दिन पहले ईरान ने पाकिस्तान के साथ अपनी जमीनी सीमा को पूरी तरह से बंद करने का ऐलान किया था। ईरान ने भी इसके पीछे आंतरिक और सुरक्षा कारणों को वजह बताया था। मगर अब यह विवाद अंदरखाने दोनों पक्षों में गहराता जा रहा है।

कमर आगा ने कहा कि पाकिस्तान सऊदी अरब में हूतियों के खिलाफ अपनी सैन्य तैनाती बढ़ा रहा है और उसकी मदद कर रहा है। इस बात से ईरान उससे खफा हो गया है। ईरान को पहले भी पाकिस्तान पर इतना ज्यादा भरोसा नहीं था, क्योंकि उसका कोई स्थाई स्टैंड कभी रहा ही नहीं है। वह जहां अपना फायदा देखता है, पाला बदल लेता है। 

पाकिस्तान ने क्यों पाली ईरान से दुश्मनी?

इस सवाल का जवाब देते हुए कमर आगा कहते हैं कि मौजूदा वक्त में पाकिस्तान की आर्थिक हालत बहुत खराब है। ईरान-अमेरिका युद्ध के चलते पाकिस्तान में पेट्रोल-डीजल के दाम कई गुना बढ़ चुके हैं। रोजमर्रा की वस्तुएं महंगी हो गई हैं। उसकी अर्थव्यवस्था पहले से खस्ताहाल है। पाकिस्तान इस हालात को संभाल नहीं पा रहा है। अब उसे पैसा चाहिए। अभी तक उसे अमेरिका से उम्मीद थी कि मध्यस्थता करने के बदले कुछ लाभ मिल जाएगा, लेकिन उधर से कुछ मिला नहीं है।

Foreign Expert
पाकिस्तान सऊदी अरब की सैन्य मदद करने के बहाने उससे पैसा लेना चाह रहा है। मगर उसने हूतियों के खिलाफ खड़े होकर इधर ईरान से दुश्मनी पाल ली है। ईरान बहुत मजबूत देश है, जब अमेरिका को उसने नहीं छोड़ा तो पाकिस्तान की हालत भी खराब कर सकता है।
कमर आगा
कमर आगा
रक्षा और विदेश नीति विशेषज्ञ

'दोधारी तलवार पर चल रहा पाकिस्तान'

जेएनयू के प्रोफेसर शांतेश सिंह कहते हैं कि पाकिस्तान दोधारी तलवार पर है। वह न तो अमेरिका को खुश कर पाया, न ईरान को और न ही सऊदी अरब को। पाकिस्तान की जनता भी अपनी सरकार के फैसलों से नाराज है। मुनीर और शहबाज ने ईरान-अमेरिका के बीच मध्यस्थ बनकर अपनी छवि चमकाने की कोशिश की थी ताकि उनकी ब्रांडिंग हो और अमेरिका, सऊदी अरब जैसे देशों से फंड मिल सके। मगर वह तीनों पक्षों का भरोसा खो चुका है। 

कमर आगा कहते हैं कि पाकिस्तान अब किसी तरह ईरान के साथ अपने रिश्तों को बचाना चाहता है और तनाव कम करना चाहता है। मगर पाकिस्तान भरोसे के लायक नहीं है, यह बात ईरान को समझ आ गई है। ऐसे में पाकिस्तान को हूतियों के खिलाफ जाना और अमेरिका के हित में काम करना कितना भारी पड़ सकता है, ये वक्त बताएगा। लेकिन पाकिस्तान की जनता अपनी हुकूमत की हरकतों को देख रही है, मौका मिलते ही वह अपनी आवाज बुलंद करेगी।

पश्चिम एशिया में संघर्ष और तेज हो सकता है

कमर आगा आशंका जताते हैं कि पाकिस्तान और ईरान के बीच जो नया तनाव पैदा हो रहा है, वह पश्चिम एशिया में संघर्ष को और तनावपूर्ण बना सकता है। हालात बिगड़े तो पूरा मध्य-पूर्व और भी ज्यादा अस्थिर हो सकता है। अमेरिका को इसकी फिक्र नहीं है। वह अब युद्ध से निकलना चाहता है, लेकिन मौका नहीं मिल रहा है। अमेरिका का पूरा फोकस तेल पर है चाहे वेनेजुएला का तेल हो, ईरान का हो या मध्य-पूर्व का हो। अमेरिका तेल को आगे हथियार की तरह इस्तेमाल करना चाहता है।

मुनीर इससे पहले कब और क्यों गए ईरान?

ईरान-अमेरिका युद्ध शुरू होने के बाद आसिम मुनीर मंगलवार 5वीं बार तेहरान गए हैं। इससे पहले वह 4 बार और ईरान जा चुके हैं। ईरानी सरकारी समाचार एजेंसी IRNA के अनुसार, मुनीर के साथ पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी भी तेहरान पहुंचे हैं। पिछले 4 दौरे ईरान-अमेरिका के बीच मध्यस्थता प्रयासों के तहत हुए थे।

पहला दौरा: मुनीर का पहला ईरान दौरा 15-18 अप्रैल तक रहा। इस दौरान उन्होंने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान, संसद अध्यक्ष मोहम्मद बागेर घालिबाफ, विदेश मंत्री अब्बास अराघची जैसे नेताओं से मुलाकात की। ईरान-अमेरिका के बीच शांति को लेकर चर्चा की।

दूसरा दौराः मुनीर का दूसरा दौरा 22-23 मई को हुआ। इस दौरान भी उन्होंने ईरानी नेताओं से मुलाकात में क्षेत्रीय शांति समेत ईरान-अमेरिका शांति वार्ता को लेकर बातचीत की।

तीसरा दौरा: मुनीर का तीसरा तेहरान दौरा जुलाई के पहले हफ्ते में हुआ। वह ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में हिस्सा लेने के लिए प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के साथ गए थे।

चौथा दौरा: मुनीर 24 अगस्त को चौथी बार एक दिवसीय दौरे पर तेहरान गए। ईरान-अमेरिका के बीच तनाव कम करने, होर्मुज स्ट्रेट खोलने और संघर्ष समाप्त करने पर चर्चा के लिए वह ईरान के टॉप लीडरों से मिले।

टूटने के कगार पर द्विपक्षीय संबंध?

मुनीर ऐसे वक्त तेहरान का दौरा कर रहे हैं, जब पाकिस्तान और ईरान के बीच सीमा व्यापार पूरी तरह ठप है। सैकड़ों ट्रक फंसे हुए हैं। क्रॉसिंग फिर से खोलने पर बातचीत चल रही है। दूसरी तरफ ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के मिसाइल और ड्रोन हमले तेज हुए हैं। सऊदी अरब के ऊर्जा ठिकानों और हवाई अड्डों को निशाना बनाया गया है। सऊदी के समर्थन वाली यमनी सेना ने भी कार्रवाई तेज की है। देखना होगा कि ये दौरा बढ़ते तनाव को कितना कम करने में सफल हो पाता है। 

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