
पाकिस्तान और ईरान के बीच सबकुछ अच्छा नहीं चल रहा। यह बात हम नहीं कह रहे, बल्कि दोनों देशों के बीच एक दूसरे के खिलाफ उठाए गए कुछ हालिया कदम कह रहे हैं। ईरान ने जहां पाकिस्तान के साथ लगने वाली अपनी जमीनी सीमा को पूरी तरह बंद कर दिया है तो वहीं इस्लामाबाद ने इसके जवाब में तेहरान के साथ होने वाले सभी तरह के ट्रेड और आवाजाही को रोक दिया है।
वैसे तो दोनों देशों ने एक दूसरे के खिलाफ यह एक्शन लेने के बाद इसके असली कारण का खुलासा नहीं किया है और न ही कुछ आरोप-प्रत्यारोप लगाया है। यहां तक कि पाकिस्तान और ईरान के विदेश मंत्रियों के बीच रविवार को फोन पर वार्ता भी हुई है। तब भी दोनों देशों के रिश्तों को सामान्य दिखाने की कोशिश की गई है, लेकिन आइये आपको बताते हैं कि पाकिस्तान और ईरान के बीच अंदरखाने कौन सा द्वंद चल रहा है, जो कभी भी फूट सकता है। पहले जानते हैं कि किस देश ने क्या कहा?
ईरान
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने पाकिस्तान के साथ जमीनी सीमा बंद होने पर अपनी पहली प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा, “कुछ तकनीकी दिक्कतों और और एहतियाती कदम उठाने की जरूरतों के चलते बॉर्डर क्रॉसिंग और आवाजाही को अस्थायी रूप से स्थगित कर दिया गया है। हालांकि, दोनों देशों के संबंधित अधिकारी इस मुद्दे को जल्द से जल्द हल करने और सीमा चौकियों पर सामान्य कामकाज बहाल करने के लिए लगातार संपर्क में हैं और बातचीत कर रहे हैं।”
Disruption in operation of Iran-Pakistan border crossings is temporary: @IRIMFA_SPOX https://t.co/7UJ39OdEpp https://t.co/46jO7A00Xk
— IRNA News Agency ☫ (@IrnaEnglish) October 17, 2026
पाकिस्तान
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने एक्स पर एक पोस्ट के जरिये बताया कि उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री मोहम्मद इशाक डार ने आज ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची के साथ टेलीफोन पर बातचीत की। दोनों नेताओं ने क्षेत्र में बदल रहे हालातों और बगदाद में चल रही ओआईसी (OIC) विदेश मंत्री परिषद की बैठक पर चर्चा की। विदेश मंत्री ने क्षेत्रीय चुनौतियों से निपटने के लिए लगातार बातचीत और कूटनीति के महत्व पर जोर दिया। दोनों नेताओं ने आपसी संपर्क बनाए रखने पर सहमति जताई।
पाकिस्तान और ईरान के बीच सीमा पर आवाजाही और ट्रेड बंद होने के बाद दोनों पक्षों की ओर से आए इन बयानों से लगता है कि दोनों देशों में सबकुछ सामान्य है, लेकिन ऐसा नहीं है। पाकिस्तान अब तक ईरान और अमेरिका के बीच शांति वार्ता को लेकर मुख्य मध्यस्थ भी रहा है, लेकिन अचानक ऐसा क्या हो गया, जिससे दोनों देशों के रिश्तों में मनमुटाव होने लगा, जो ट्रेड रोकने और बॉर्डर क्रॉसिंग के साथ आवाजाही बंद करने तक पहुंच गया।
Deputy Prime Minister/Foreign Minister Senator Mohammad Ishaq Dar @MIshaqDar50 held a telephone conversation today with the Foreign Minister of Iran, Seyyed Abbas Araghchi @araghchi. The two leaders discussed the evolving regional situation and the ongoing OIC Council of Foreign Ministers meeting in Baghdad. DPM/FM underscored the importance of continued dialogue and diplomacy in addressing regional challenges. The two leaders agreed to maintain close contact.
— Ministry of Foreign Affairs - Pakistan (@ForeignOfficePk) October 18, 2026
सऊदी अरब और हूतियों का मुद्दा
रक्षा और विदेश नीति विशेषज्ञ कमर आगा ने RT Hindi से बातचीत में कहा कि पाकिस्तान और ईरान के बीच अब सबकुछ सामान्य नहीं है। दोनों देशों में सऊदी और हूती के मुद्दों को लेकर तनाव बढ़ने लगा है। उन्होंने कहा कि हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब में जंग तेज हो गई है। हूती सऊदी अरब पर भारी पड़ रहे हैं। पाकिस्तान का सऊदी अरब के साथ द्विपक्षीय रक्षा समझौता है। इसके अलावा अगस्त में पाकिस्तान, तुर्की और सऊदी अरब ने मक्का डिफेंस डील भी किया था, जिसमें एक पर हमला सब पर हमला माना था।
पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच द्विपक्षीय डिफेंस डील में भी यही क्लॉज था। मगर पाकिस्तान अब तक ईरान की वजह से सऊदी की मदद नहीं कर रहा था। मगर अब वह पैसे की चाह में सऊदी में अपनी सेना और सैन्य मदद बढ़ा रहा है। इससे तनाव बढ़ने लगा है।

वरिष्ठ पत्रकार अशोक उपाध्याय ने RT Hindi से बातचीत में कहा कि पाकिस्तान और ईरान में यह होना ही था। पाकिस्तान और तुर्की ने मिलकर जब सऊदी अरब के साथ मक्का डील की थी, तभी इस तरह की परिस्थितियां आने की आशंका बढ़ गई थी। पाकिस्तान अमेरिका के इशारे पर चलने वाला देश है। अब वह उसके कहने पर और सऊदी अरब से पैसे की चाह में हूतियों के खिलाफ रियाद की मदद कर रहा है। ऐसे में ईरान से रिश्ते बिगड़ना स्वाभाविक है, क्योंकि ईरान अमेरिका के सभी सहयोगियों को अपना दुश्मन मानता है। हूती ईरान के प्रॉक्सी हैं। उन पर पाकिस्तान, तुर्की या अमेरिका समेत कोई भी देश किसी तरह का एक्शन लेगा तो ईरान भी चुप नहीं रहेगा।
हूतियों के खिलाफ एक्शन मतलब ईरान से पंगा
कमर आगा ने कहा कि अगर पाकिस्तान हूतियों के खिलाफ किसी भी कार्रवाई में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तौर पर शामिल होता है तो यह सीधे ईरान के खिलाफ एक्शन माना जाएगा। पाकिस्तान को सऊदी अरब से पैसे चाहिए। इसलिए उसने सऊदी अरब को सेना और अन्य सैन्य मदद पहुंचानी शुरू कर दी है।
ईरान और पाकिस्तान में और बढ़ सकता है तनाव
कमर आगा ने कहा कि अभी ईरान ने सिर्फ ट्रेलर दिया है। अगर पाकिस्तान इसके बावजूद नहीं माना तो दोनों देशों के रिश्तों में किसी भी हद तक तनाव बढ़ सकता है। वैसे भी ईरान यह बात समझ चुका है कि पाकिस्तान अपने फायदे के लिए मध्यस्थता की भूमिका निभा रहा है, क्योंकि वह ईरान से ज्यादा अमेरिका की ओर झुका हुआ है। ऐसे में ईरान पाकिस्तान पर भरोसा नहीं कर सकता।
अब सऊदी अरब और हूतियों के मामले में पाकिस्तान की भूमिका ने उसकी पूरी तरह पोल खोल दी है। पाकिस्तान ने सोचा कि वह सऊदी अरब की मदद करके उनसे वित्तीय मदद हासिल कर लेगा। क्योंकि पाकिस्तान की इकोनॉमिक स्थिति बहुत खराब चल रही है। मगर अब वह ऐसे दो राहे पर खड़ा है, जहां उसके लिए एक तरफ कुआं और दूसरी तरफ खाईं जैसी स्थिति है।
वरिष्ठ पत्रकार अशोक उपाध्याय ने कहा कि पाकिस्तान ने ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थता नहीं कर रहा था, बल्कि वह खेल कर रहा था। ईरान के लिए पाकिस्तान कभी भरोसेमंद नहीं हो सकता है। दोनों देशों में पहले भी अविश्वास और असुरक्षा सर्जिकल स्ट्राइक तक पहुंच चुकी है।
और फैल सकता है क्षेत्रीय युद्ध का दायरा
कमर आगा ने कहा कि पाकिस्तान और ईरान के बीच अगर यह मामला सुलझाया नहीं गया तो इससे क्षेत्रीय युद्ध का दायरा और ज्यादा बड़ा हो सकता है। तब मध्य-पूर्व और पश्चिम एशिया में और ज्यादा अस्थिरता फैल जाएगी। यह युद्ध और बड़ा हो जाएगा। इसका भुगतान कई अन्य देशों को भी करना पड़ेगा। जैसे अभी ईरान-अमेरिका युद्ध का खामियाजा दूसरे देश भुगत रहे हैं। तेल, गैस की कीमतें बढ़ गई हैं। इससे महंगाई चरम पर है। इसका असर वैश्विक इकोनॉमी पर पड़ रहा है।
पाकिस्तान ने ईरान के साथ गब्द-रिमदान और ताफ़्तान सीमा से व्यापार रोका
कनाडा के 'द स्टार' न्यूज ने पाकिस्तान के 'द डॉन' न्यूज के हवाले बताया कि आधिकारिक रूप से इस्लामाबाद ने गब्द-रिमदान और ताफ़्तान बॉर्डर क्रॉसिंग जरिए ईरान के साथ होने वाले व्यापार को निलंबित कर दिया है। बलूचिस्तान के मुख्यमंत्री के मीडिया और राजनीतिक मामलों के सलाहकार शाहिद रिंद ने बताया कि “पाकिस्तान-ईरान सीमा को अस्थायी रूप से बंद करने का उद्देश्य सुरक्षा चिंताओं को दूर करना, तस्करी रोकना और सीमा प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाना है।
रिंद ने सोशल मीडिया पर चल रही अफवाहों को खारिज करते हुए जनता से असत्यापित जानकारी पर ध्यान न देने की अपील की। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के उच्च अधिकारियों के बीच बातचीत जारी है और सीमा जल्द ही दोबारा खुलने की उम्मीद है।
सीमा व्यापार बंद होने का क्या हो सकता है असर
क्वेटा के चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (QCCI) ने अपने सदस्यों और व्यापारियों को अगला आदेश आने तक ईरान के साथ आयात-निर्यात के नए ऑर्डर न देने की सलाह दी है। इस फैसले के बाद एलपीजी (LPG), चावल, ताज़े फल और अन्य आवश्यक सामानों से भरे सैकड़ों मालवाहक ट्रक सीमा के दोनों ओर फंसे हुए हैं।
गब्द-रिमदान मार्ग पाकिस्तान की ऊर्जा ज़रूरतों के लिए महत्वपूर्ण रहा है, जिससे रोजाना 4,000 टन से अधिक एलपीजी का आयात होता था। इस रास्ते के बंद होने से कराची और देश के अन्य हिस्सों में एलपीजी की किल्लत हो सकती है और कीमतें बढ़ सकती हैं। पिछले कुछ महीनों में पाकिस्तान ने ईरान को चावल का निर्यात काफी बढ़ा दिया था। स्थानीय व्यापारियों और चैंबर ने चेतावनी दी है कि व्यापार में रुकावट से राष्ट्रीय खजाने को भारी नुकसान होगा और लोगों की आजीविका प्रभावित होगी।







