डेटा सेंटर, समुद्री केबल... ईरान की यह चेतावनी अमेरिका के लिए क्यों बड़ी है?
ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका फिर से युद्ध शुरू करता है, तो वह खाड़ी देशों में मौजूद डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बना सकता है। इसमें अमेरिकी डेटा सेंटर, समुद्र के नीचे बिछी केबल और AI सुविधाएं शामिल हैं।
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डेटा सेंटर, समुद्री केबल... ईरान की यह चेतावनी अमेरिका के लिए क्यों बड़ी है?
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप और ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव मोहसेन रेजाई।

पश्चिम एशिया में अमेरिका-ईरान की लड़ाई अब एयर स्पेस से आगे बढ़कर डिजिटल स्पेस में पहुंचती नजर आ रही है। ईरान के सिक्योरिटी चीफ ने अब खाड़ी में मौजूद अमेरिकी डेटा सेंटर, समुद्र के नीचे बिछी केबल और AI फैसिलिटी पर हमला करने की चेतावनी दी है।

ईरान की इस चेतावनी ने अमेरिका समेत खाड़ी देशों की चिंता बढ़ा दी है। ऐसे में दोनों देशों के बीच संघर्ष और तेज हो सकता है। अगर ईरान ने अपनी धमकी को हकीकत में बदला, तो इसका असर सिर्फ खाड़ी देशों तक सीमित नहीं रहेगा। इसका असर ग्लोबल इकोनॉमी पर भी पड़ेगा।

ईरानी की तरफ से क्या है नई धमकी?

ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव मोहसेन रेजाई ने चेतावनी दी है कि अगर वाशिंगटन (अमेरिका) ने फिर से हमला किया, तो ईरान खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका के टेक्निकल इंफ्रास्ट्रक्चर को नष्ट कर देगा। 'प्रेस टीवी' को दिए एक इंटरव्यू में रेजाई ने संयुक्त अरब अमीरात और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास मौजूद अमेरिकी संपत्तियों का विशेष रूप से उल्लेख किया।

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“अभी तक हमने डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की संपत्तियों को अपने टारगेट में शामिल नहीं किया है। लेकिन अगर युद्ध छिड़ता है, तो इनमें से कई अंडरसी केबल, डेटा सेंटर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस फैसिलिटी और कई अन्य जगहें तबाह कर दी जाएंगी।”
मोहसेन रेजाई
मोहसेन रेजाई
ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव

उन्होंने इन संपत्तियों का मूल्य 2 ट्रिलियन डॉलर से अधिक आंका। रेजाई ने इन इंफ्रास्ट्रक्चर को 'इस क्षेत्र में अमेरिकी अर्थव्यवस्था की धड़कन' बताया।

रेजाई ने कहा कि तेहरान ने पिछली लड़ाइयों के दौरान जानबूझकर अपनी कुछ सैन्य क्षमताओं का इस्तेमाल नहीं किया था। लेकिन अगर फिर से लड़ाई शुरू होती है, तो वह इनका इस्तेमाल करने और 'एक कहीं अधिक व्यापक और विस्तृत योजना के साथ दुश्मन का सामना करने' के लिए तैयार है।

डेटा सेंटर्स पर अटैक क्यों है बड़ा खतरा?

  • डेटा सेंटर का बैंकिंग सेक्टर और पब्लिक सर्विसेज पर सीधा असर पड़ता है।

  • इनमें मेडिकल, फाइनेंस और सरकार के संवेदनशील डेटा का रिकॉर्ड होता है।

  • यूरोप और एशिया के बीच करीब 90% डेटा लाल सागर के नीचे बिछी केबल के जरिए गुजरता है।

  • इन केबल को नुकसान पहुंचने पर अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिविटी प्रभावित हो सकती है।

  • लाल सागर को डिजिटल इकोनॉमी का 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' कहा जा सकता है।

इसे ऐसे समझ सकते हैं कि आज के मॉडर्न वॉरफेयर में सस्ते ड्रोन हमले करोड़ों रुपये के डिफेंस सिस्टम पर भारी पड़ रहे हैं। इसी तरह बिजली की सप्लाई बाधित होने, आग लगने या कूलिंग सिस्टम फेल होने से डेटा सेंटर बंद हो सकते हैं। इससे बड़े पैमाने पर सेवाएं ठप पड़ सकती हैं। इस तरह का छोटा हमला भी बड़ा असर डाल सकता है।

खाड़ी देशों के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) प्रोजेक्ट अमेरिकी कंपनियों से जुड़े हुए हैं। ऐसे में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर अगला निशाना हो सकता है।

ईरान की धमकी कितनी गंभीर?

ईरान की तरफ से अमेरिकी डेटा सेंटर पर हमले की धमकी कितनी गंभीर है? इस बारे में पश्चिम एशिया मामलों की जानकार दीपिका सारस्वत का कहना है कि अमेरिका के साथ युद्ध में ईरान की शुरुआत से ही असममित रणनीति (Asymmetric Strategy) रही है।

असममित रणनीति का मतलब है युद्ध लड़ने का ऐसा तरीका, जिसमें अपने से कहीं अधिक ताकतवर और आधुनिक हथियारों वाली सेना के खिलाफ सीधे पारंपरिक युद्ध लड़ने के बजाय ऐसे तरीकों का इस्तेमाल किया जाता है, जिनसे दुश्मन को भारी नुकसान पहुंचाया जा सके।

सारस्वत ने कहा कि ईरान के लिए अमेरिका की शर्तों पर लड़ाई लड़ने का कोई मतलब नहीं है। उन्होंने कहा कि ईरान जानता है कि यह उसके अस्तित्व की लड़ाई है। इसलिए युद्ध के पहले चरण में हमने देखा कि ईरान ने लड़ाई को क्षेत्रीय इलाकों तक सीमित कर दिया। इसमें उसने खाड़ी में अमेरिकी ठिकानों और खाड़ी देशों को निशाना बनाया। साथ ही, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद कर दिया। सऊदी अरब के अलग-अलग एयरपोर्ट पर हमले भी इसी रणनीति का हिस्सा थे।

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"अगर फिर से संघर्ष छिड़ता है, तो बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने वाली जंग का अगला चरण कहीं अधिक गंभीर होगा। इसका असर सिर्फ उस इलाके तक सीमित नहीं रहेगा। जिन खाड़ी देशों में यह बुनियादी ढांचा मौजूद है, वहां भारी तबाही और व्यवधान हो सकता है। साथ ही, इसका असर एशिया और यूरोप समेत पूरी ग्लोबल इकोनॉमी पर भी पड़ेगा।"
दीपिका सारस्वत
दीपिका सारस्वत
पश्चिम एशिया एक्सपर्ट

धमकी सच हुई तो भारी तबाही

दीपिका ने कहा कि युद्ध के कारण दुनिया भर में ऊर्जा की कीमतें बढ़ गईं। इसका असर मध्य पूर्व के देशों समेत पूरी दुनिया पर पड़ा। अब इसी तरह ईरान के सिक्योरिटी चीफ ने डेटा सेंटर पर हमले की धमकी दी है।

ईरान जानता है कि खाड़ी के देश ग्लोबल इकोनॉमी के अहम केंद्र हैं। यहां डेटा सेंटर और समुद्र के नीचे बिछी केबल जैसे महत्वपूर्ण और जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर मौजूद हैं। करीब 90% केबल लाल सागर के नीचे से गुजरती हैं। इनमें से कुछ स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के नीचे से भी गुजरती हैं।

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दीपिका सारस्वत ने आगे कहा कि इससे ईरान को निश्चित रूप से कुछ हद तक बढ़त मिल जाती है। अगर अमेरिका फिर से युद्ध को आगे बढ़ाता है, तो जाहिर है कि पहले से अधिक व्यापक स्तर पर हमले होंगे। ऐसे में अमेरिकी राष्ट्रपति जिस तरह से ईरान की पूरी सभ्यता को मिटाने और उसे पाषाण काल में पहुंचाने की धमकी देते हैं, उन्हें इस तरह की जवाबी धमकियों के लिए भी तैयार रहना चाहिए।

यही देखने को मिल रहा है। अगर ईरान ने अपनी धमकी के मुताबिक हमले किए, तो भारी तबाही हो सकती है। इसका असर सिर्फ खाड़ी देशों पर ही नहीं, बल्कि एशिया और यूरोप की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा।

क्या हैं मौजूदा हालात?

अमेरिका और इजरायल ने 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ अपना सैन्य अभियान शुरू किया था। हालांकि, तब से लड़ाई कुछ कम हुई है, लेकिन वाशिंगटन की तरफ से ईरानी बंदरगाहों की नौसैनिक नाकेबंदी अभी भी जारी है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज भी अभी बंद है।

पाकिस्तान, कतर और इराक के जरिए राजनयिक बातचीत जारी है। रेजाई ने कहा कि वाशिंगटन ने संघर्ष सुलझाने के लिए तेहरान की सात शर्तों में से कुछ को मान लिया है, लेकिन बाकी शर्तों पर स्थिति स्पष्ट नहीं की है। इस वजह से उसका जवाब अधूरा रह गया है।

ईरान की मांगों में नौसैनिक नाकेबंदी हटाना, सभी मोर्चों पर शत्रुता खत्म करना और रोकी गई संपत्ति को बहाल करना शामिल है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने 10 अक्टूबर को कहा था कि मध्यस्थों के जरिए बातचीत चल रही है और तेहरान, वाशिंगटन के नए प्रस्तावों की समीक्षा कर रहा है।

क्या कह रहा है अमेरिका?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले ही ईरान के प्रस्ताव को खारिज कर दिया था। उन्होंने कहा था कि तेहरान ‘एक समझौता करना चाहता है, लेकिन यह वह समझौता नहीं है जो मैं करना चाहता हूं।’ उन्होंने यह भी संकेत दिया था कि अमेरिका फिर से हमले शुरू कर सकता है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप।AP

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी पिछले हफ्ते कहा था कि तेहरान का स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर से 'पूरी तरह से कंट्रोल खत्म' हो गया है और तेल की आवाजाही युद्ध से पहले के स्तर के करीब पहुंच रही है।

हालांकि, रेजाई ने वाशिंगटन के इन दावों को खारिज कर दिया कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खुला है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस स्ट्रेट पर ईरान का ही कंट्रोल बना रहेगा। उन्होंने अमेरिकी सेंट्रल कमांड के प्रमुख पर यह आरोप भी लगाया कि वे संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की सेना की मदद से तेल की तस्करी का काम चला रहे हैं।

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