एलन मस्क को शायद लगता है कि दुनिया उनके इशारे पर चलेगी। भारत में अपनी कारोबारी राह आसान करने के लिए कभी सरकार पर निशाना साधते हैं, तो कभी बिजनेसमैन मुकेश अंबानी पर तंज कसते हैं। X पर उनकी बयानबाजी देखकर लगता है कि वह नियमों के तहत बिजनेस करने से ज्यादा प्रोपेगेंडा फैलाने में भरोसा करते हैं। लेकिन यूक्रेन में स्टारलिंक और उसकी सैन्य सेवाओं के इस्तेमाल से जुड़ा घटनाक्रम दिखाता है कि मस्क की कंपनी की तकनीक का असर सिर्फ इंटरनेट मुहैया कराने तक सीमित नहीं है।
यूक्रेनी अधिकारियों और सैन्य कमांडरों के मुताबिक, मंगलवार रात से बुधवार के बीच स्टारलिंक और सैन्य इस्तेमाल के लिए तैयार स्टारशील्ड के कुछ टर्मिनलों ने अचानक काम करना बंद कर दिया। उस वक्त यूक्रेनी ड्रोन 100 मील प्रति घंटे यानी करीब 161 किलोमीटर प्रति घंटे से ज्यादा की रफ्तार से उड़ रहे थे और संचार में आई इस बाधा से कुछ सैन्य अभियान प्रभावित हुए। मस्क ने हालांकि सेवाएं सीमित करने का निर्देश देने से इनकार किया है। यह घटनाक्रम भारत की उस चिंता को भी अहम बनाता है कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े संचार के लिए किसी निजी विदेशी कंपनी की तकनीक पर निर्भरता कितनी सुरक्षित है।
जिस स्टारलिंक पर यूक्रेन ने अपने कम्युनिकेशन के लिए भरोसा किया, उसी की पाबंदियों को लेकर यूक्रेनी नेता जेलेंस्की ने नाराजगी जताई है। मामला अब सिर्फ मस्क की कंपनी का नहीं, उस ताकत का है जो किसी निजी कारोबारी के हाथ में आ जाए, तो पूरा देश उसके फैसलों पर निर्भर हो जाता है।
दरअसल, भारत में सैटेलाइट इंटरनेट को लेकर यह आशंका पहले से जताई जाती रही है। यूक्रेन का उदाहरण देकर सवाल उठाए जाते रहे हैं कि अगर किसी देश की संचार व्यवस्था एक विदेशी कंपनी पर निर्भर हो जाए, तो क्या उस कंपनी के फैसले राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक हितों को प्रभावित कर सकते हैं? यूक्रेन में हालिया घटनाक्रम ने इस सवाल को और प्रासंगिक बना दिया है।

स्टारलिंक और स्टारशील्ड में क्या फर्क है?
यूक्रेन से जुड़ी खबरों को समझने के लिए पहले दो सेवाओं का अंतर जानना जरूरी है। स्टारलिंक एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स की सैटेलाइट इंटरनेट सेवा है। यूक्रेन ने रूस के साथ संघर्ष के दौरान इसका इस्तेमाल सैनिकों के बीच संचार और ड्रोन ऑपरेशन के लिए भी किया है। ऐसे में इसकी कनेक्टिविटी बाधित होने से सैन्य गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं।
स्टारशील्ड इससे अलग है। यह अमेरिकी सरकार के लिए विकसित सैन्य संचार प्रणाली है, जिसका नियंत्रण अमेरिकी सरकार के पास है। यूक्रेन में स्टारलिंक की कनेक्टिविटी बाधित होने की शिकायतों के साथ-साथ स्टारशील्ड पर पाबंदियों की खबरें भी सामने आई हैं। इसलिए दोनों सेवाओं से जुड़े घटनाक्रमों का मामला अलग-अलग हो सकता है लेकिन असका सीधा असर तो यूक्रेन पर पड़ ही रहा है।
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जेलेंस्की ने मस्क पर क्या आरोप लगाए?
ब्रिटिश टीवी होस्ट पियर्स मॉर्गन को दिए इंटरव्यू में यूक्रेनी नेता व्लादिमीर जेलेंस्की ने आरोप लगाया कि रात के समय स्टारलिंक की कनेक्टिविटी बाधित हुई, जिससे यूक्रेनी सेना के अभियान प्रभावित हुए। उन्होंने कहा कि इसका असर सिर्फ सैन्य कार्रवाई पर नहीं, बल्कि हमलों से बचाव और लोगों की जान बचाने पर भी पड़ सकता है। जेलेंस्की ने इसे बड़ी गलती बताते हुए सेवा बहाल करने की अपील की।
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मस्क ने किया किनारा, अमेरिका में भी आलोचना
एलन मस्क ने इस बात से इनकार किया है कि उन्होंने अपनी कंपनी स्पेसएक्स (SpaceX) को यूक्रेनी सेना के ड्रोन अभियानों में इस्तेमाल होने वाली स्टारलिंक (Starlink) और स्टारशील्ड (Starshield) सैटेलाइट संचार सेवाओं पर अचानक रोक लगाने या उन्हें सीमित करने का निर्देश दिया था।
यूक्रेनी अधिकारियों और अग्रिम मोर्चे पर तैनात सैन्य कमांडरों ने बताया कि मंगलवार रात से बुधवार सुबह के बीच अचानक कई टर्मिनलों ने काम करना बंद कर दिया। उस समय ड्रोन 100 मील प्रति घंटे (करीब 161 किलोमीटर प्रति घंटे) से अधिक की रफ्तार से उड़ रहे थे। इससे कुछ सैन्य अभियान प्रभावित हुए।
स्पेसएक्स की स्टारलिंक सेवा के सैन्य इस्तेमाल के लिए तैयार संस्करण स्टारशील्ड में यह समस्या ऐसे समय आई, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप यूक्रेन पर रूसी तेल रिफाइनरियों पर हमले रोकने का दबाव बना रहे थे। ट्रंप ने ऊर्जा की बढ़ती कीमतों के लिए इन हमलों को जिम्मेदार ठहराया था।
मस्क ने साफ कहा कि स्टारलिंक का इस्तेमाल आक्रामक सैन्य कार्रवाई के लिए नहीं होना चाहिए। वहीं, स्टारशील्ड के इस्तेमाल और उसकी गति पर पाबंदियों का फैसला अमेरिकी सेना और राष्ट्रपति ट्रंप के अधिकार क्षेत्र में बताया। यूक्रेन में संचार सेवाओं पर कथित पाबंदियों को लेकर अमेरिका में भी आलोचना हुई है। इस विवाद ने सवाल खड़ा किया है कि जब किसी देश की सुरक्षा निजी कंपनी की तकनीक पर निर्भर हो, तो संकट के वक्त उसके इस्तेमाल की शर्तें तय करने का अधिकार किसके पास होगा।
जेलेंस्की बोले- अमेरिका से धोखा मिला
मस्क और स्टारलिंक को लेकर विवाद ऐसे समय में सामने आया है, जब अमेरिका और यूक्रेन के रिश्तों में तनाव बढ़ गया है। जेलेंस्की ने NPR को दिए एक इंटरव्यू में उन खबरों की पुष्टि की, जिनके मुताबिक अमेरिका ने रूस के ऊर्जा ठिकानों पर यूक्रेन के हमले रोकने के लिए खुफिया जानकारी देना बंद करने की चेतावनी दी थी।
इस बीच, यूक्रेनी अधिकारियों ने कहा कि पश्चिमी देशों ने हमले को लेकर कीव को लगातार दो रात कोई चेतावनी नहीं दी। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, अमेरिकी अधिकारियों ने इसकी वजह खराब मौसम बताया, लेकिन यूक्रेनी अधिकारियों को इस सफाई पर भरोसा नहीं हुआ। बुधवार को पियर्स मॉर्गन ने जेलेंस्की से पूछा कि क्या उन्हें ट्रंप प्रशासन से धोखा मिला है। जेलेंस्की ने जवाब दिया, ‘हां।’ उन्होंने कहा कि यह अफसोस की बात है कि यूक्रेन एक मजबूत साझेदार खो रहा है।
खुफिया जानकारी, सैन्य सहयोग और सैटेलाइट कम्युनिकेशन जैसी व्यवस्थाएं यूक्रेन की सुरक्षा के लिए अहम हैं। ऐसे में इनसे जुड़ी अनिश्चितता कीव के लिए गंभीर चुनौती बन सकती है।
अब स्टारलिंक पर भारत की चिंता समझिए
स्टारलिंक को लेकर भारत की चिंता सुरक्षा से जुड़े सवालों की भी है। दिल्ली के थिंक टैंक 'कूटनीति फाउंडेशन' की एक रिपोर्ट में आगाह किया गया है कि स्टारलिंक सिर्फ इंटरनेट देने वाली कंपनी नहीं, बल्कि अमेरिका के रणनीतिक प्रभाव का जरिया भी बन सकती है। रिपोर्ट के मुताबिक, अगर किसी विदेशी कंपनी के हाथ में भारत की अहम संचार सेवाओं को बंद करने तक की ताकत हो, तो यह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बन सकता है। रिपोर्ट ने विदेशी सैटेलाइट कंपनियों पर सख्त शर्तें लगाने, भारतीय डेटा को देश में रखने और नेटवर्क पर भारत का नियंत्रण सुनिश्चित करने की सिफारिश की है।
कुछ घंटे पहले भारती एंटरप्राइजेज के चेयरमैन सुनील भारती मित्तल ने एलन मस्क पर तंज कसते हुए कहा था कि उन्होंने स्टारलिंक से पांच साल पहले सैटेलाइट इंटरनेट के लिए आवेदन किया था, लेकिन अब तक मंजूरी नहीं मिली। बोले, 'हमें खुशी होगी अगर मस्क से कुछ दिन पहले ही अनुमति मिल जाए।'
#WATCH | Delhi | Bloomberg New Economy Forum | Over Elon Musk's tweet on Starlink, Bharti Enterprises Chairman Sunil Bharti Mittal says, "We are all awaiting our approvals. I am significantly ahead of him in the queue. I applied five years back. I have had my ground network ready for the last three years. My satellites have been hovering over India for the last five years. We don't have the permission. So, we will be very happy to get it at least a few days before him." (Source: Bloomberg New Economy Forum via ANI)
— ANI (@ANI) October 14, 2026
अमेरिका की कंपनी, इंटरनेट और भारत
भारत में सैटेलाइट इंटरनेट को लेकर अब तक ज्यादा चर्चा इसकी कीमत, बाजार और दूरदराज के इलाकों तक इंटरनेट पहुंचाने की रही है। मस्क भी इस तकनीक के इन्हीं फायदों को गिनाते रहे हैं। लेकिन यूक्रेन के मामले ने एक बड़ा सवाल खड़ा किया है। अगर कोई देश अपनी जरूरी संचार सेवाओं के लिए किसी विदेशी कंपनी पर निर्भर हो जाए, तो संकट के समय सेवा जारी रखने की गारंटी कौन देगा और क्या वह उसके हिसाब से काम करेगी? आखिर किसी कंपनी के फैसले से किसी देश की संचार व्यवस्था प्रभावित होने का जोखिम क्यों होना चाहिए?
स्टारलिंक के विवादों की लंबी है लिस्ट

भारत स्टारलिंक के लिए पहला विवाद नहीं है। ईरान में इसकी सेवा को लेकर पाबंदी का मामला उठा, दक्षिण अफ्रीका में लाइसेंस को लेकर विवाद हुआ, कनाडा में सरकार ने स्टारलिंक का एक बड़ा इंटरनेट करार रद्द किया और यूक्रेन संघर्ष के दौरान इसकी सेवाओं को लेकर सवाल उठे। यानी अलग-अलग देशों में स्टारलिंक को लाइसेंस, कानून, सुरक्षा और सेवा के इस्तेमाल से जुड़े विवादों का सामना करना पड़ा है।







