अमेरिका में मंदिर पर हमले की कोशिश, 105 सांसदों ने मांगी FBI जांच, मिडटर्म चुनाव पर क्या असर?
हिंदू मंदिर पर हमले की कोशिश और बढ़ती नस्लीय नफरत ने भारतीय-अमेरिकियों की सुरक्षा का सवाल खड़ा किया है। 105 सांसदों ने FBI निदेशक काश पटेल को पत्र लिखकर मामले की संभावित संघीय हेट क्राइम के तौर पर जांच करने की अपील की है।
अमेरिका में मंदिर पर हमले की कोशिश, 105 सांसदों ने मांगी FBI जांच, मिडटर्म चुनाव पर क्या असर?
(फोटो- AP Photo/Laura Bargfeld)

अमेरिका के इलिनॉय राज्य के ऑरोरा में हिंदू मंदिर पर कथित हमले की कोशिश को लेकर 105 सांसदों ने FBI से जांच की मांग की है। भारतीय-अमेरिकी सांसद राजा कृष्णमूर्ति के नेतृत्व में सांसदों ने FBI निदेशक काश पटेल को पत्र लिखकर मामले की संभावित संघीय हेट क्राइम के तौर पर जांच करने की अपील की है। साथ ही, उन्होंने भारतीय-अमेरिकियों, हिंदू-अमेरिकियों और दूसरे दक्षिण एशियाई समुदायों को निशाना बनाने वाली ऑनलाइन धमकियों की पहचान और उनसे निपटने के लिए FBI की ओर से उठाए जा रहे कदमों पर जवाब मांगा है।

11 अक्टूबर का है मामला

प्रॉसिक्यूटर के मुताबिक, 19 साल के आरोपी अलेक्जेंड्रोस पापोराकिस ने मंदिर के बाहर एक व्यक्ति पर गोली चलाने की कोशिश की, लेकिन उसकी राइफल जाम हो गई। इसके बाद वह वहां से भाग गया। बाद में उसने दोबारा लौटने की बात कही। इसकी जानकारी एक सहकर्मी ने पुलिस को दी, जिसके बाद पुलिस ने उसे उसी दिन गिरफ्तार कर लिया।

जांचकर्ताओं के मुताबिक, आरोपी के घर से राइफल, बड़ी संख्या में गोलियां, बॉडी आर्मर और श्वेत वर्चस्ववाद से जुड़ी सामग्री मिली। अभियोजकों का आरोप है कि उसने आठ पन्नों का एक घोषणापत्र भी लिखा था, जिसमें हिंदू धार्मिक स्थल पर भारतीय मूल के लोगों के खिलाफ हिंसा की बात थी।

(फोटो- AP Photo/Laura Bargfeld)

विदेश मामलों के विशेषज्ञ रोबिंदर सचदेव का मानना है कि अमेरिका में नस्लीय हिंसा और हेट क्राइम के पीछे श्वेत राष्ट्रवादी विचारधारा और 'ग्रेट रिप्लेसमेंट थ्योरी' जैसी मान्यताएं काम कर रही हैं। इसके चलते अलग रंग-रूप और पृष्ठभूमि वाले लोगों को निशाना बनाया जा रहा है।

रोबिंदर सचदेव, विदेश मामलों के जानकार
”अमेरिका में एक असरदार विचारधारा बन गई है कि देश को एक 'व्हाइट क्रिश्चियन नेशन' बनाना है और बाहर से आने वाले प्रवासियों की जरूरत नहीं है। इसे 'ग्रेट रिप्लेसमेंट थ्योरी' कहा जाता है। इसी सोच के चलते जो लोग अलग दिखते हैं या अलग रंग और संस्कृति के हैं, उन्हें हेट क्राइम का सामना करना पड़ रहा है।”
रोबिंदर सचदेव, विदेश मामलों के जानकार
रोबिंदर सचदेव, विदेश मामलों के जानकार

सांसदों ने FBI से क्या पूछा?

सांसदों ने पूछा है कि क्या FBI इस मामले में नस्लीय, जातीय और धार्मिक नफरत के पहलुओं की जांच कर रही है। वे यह भी जानना चाहते हैं कि आरोपी ने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल धमकी देने, निशाना चुनने या किसी दूसरे व्यक्ति से मदद लेने के लिए किया था या नहीं।

इसके अलावा, सांसदों ने भारतीय-अमेरिकी, हिंदू, सिख और दूसरे दक्षिण एशियाई समुदायों को मिलने वाली ऑनलाइन धमकियों से निपटने की FBI की रणनीति पर भी जवाब मांगा है। उन्होंने धार्मिक स्थलों तक खतरे की जानकारी पहुंचाने और उनकी सुरक्षा के लिए उपलब्ध संसाधनों के बारे में भी पूछा है। FBI से 29 अक्टूबर तक जवाब मांगा गया है।

सचदेव के मुताबिक, अमेरिका में हिंदू मंदिरों और समुदाय को निशाना बनाए जाने के पीछे धार्मिक कट्टरता और दुष्प्रचार भी बड़े कारण हैं।

रोबिंदर सचदेव, विदेश मामलों के जानकार
”हिंदू धर्म के प्रति नफरत का एक पहलू यह भी है कि हिंदुत्व बहुदेववादी (polytheist) है, जबकि इवैंजेलिकल ईसाई परंपरा में एक ईश्वर की मान्यता है। चरमपंथी सोच वाले लोग इसे यह कहकर दुष्प्रचारित करते हैं कि ये लोग हमारे जैसे नहीं हैं और पत्थरों की पूजा करते हैं। यही षड्यंत्रकारी सोच उन लोगों को उकसाती है, जो पहले से कट्टर मानसिकता के शिकार हैं।”
रोबिंदर सचदेव, विदेश मामलों के जानकार
रोबिंदर सचदेव, विदेश मामलों के जानकार

वहीं 3 अक्टूबर को ओहायो में एक हिंदू मंदिर पर ईंटों से हमला करने का मामला सामने आया था। 

ऑनलाइन नफरत के मामलों में भारी बढ़ोतरी

सांसदों ने पत्र में दक्षिण एशियाई लोगों के खिलाफ ऑनलाइन नफरत को लेकर हालिया आंकड़ों का भी हवाला दिया है। जनवरी 2025 से जून 2026 के बीच X पर दक्षिण एशियाई लोगों को निशाना बनाने वाली 5.42 लाख से ज्यादा नफरत भरी पोस्ट मिलीं। जनवरी 2024 से जून 2026 के बीच ऐसी पोस्ट की मासिक संख्या करीब 240% बढ़ी।

Carnegie Endowment के 2026 के सर्वे में 48% भारतीय-अमेरिकियों ने कहा कि उन्होंने 2025 की शुरुआत से भारतीयों या भारतीय-अमेरिकियों को निशाना बनाने वाली नस्लीय पोस्ट बहुत या कुछ हद तक अक्सर देखी हैं।

हमलों को रोकने में ट्रंप प्रशासन की विफलता के सवाल पर सचदेव ने कहा कि सरकार को ऐसे नफरती माहौल पर अंकुश लगाने के ठोस कदम उठाने चाहिए, जो इन हमलों को बढ़ावा देता है।

रोबिंदर सचदेव, विदेश मामलों के जानकार
”यह कोई संगठित साजिश के तहत नहीं, बल्कि समाज में फैले नफरती माहौल के कारण हो रहा है। ऐसे मामलों में व्यक्ति अकेले ही कट्टरपंथी होकर हमला कर देता है, जिन्हें हम 'लोन वुल्फ' कहते हैं। केवल हिंदू मंदिर ही नहीं, बल्कि यहूदी सिनेगॉग और एबॉर्शन क्लीनिक भी इसी तरह के हमलों का शिकार होते हैं। किसी भी सरकार के लिए इस तरह के अलग-अलग (isolated) हमलों को पूरी तरह रोक पाना एक बड़ी प्रशासनिक सीमा है, हालांकि नफरत फैलाने वाले माहौल को रोकना सरकार की जिम्मेदारी है।”
रोबिंदर सचदेव, विदेश मामलों के जानकार
रोबिंदर सचदेव, विदेश मामलों के जानकार

क्या मिडटर्म चुनावों पर पड़ेगा असर?

अमेरिका में 3 नवंबर को मिडटर्म चुनाव होने हैं। युद्ध और महंगाई जैसे मुद्दे ट्रंप प्रशासन के लिए बड़ी चुनौतियां बने हुए हैं। ऐसे में हेट क्राइम का मुद्दा एक और मुश्किल खड़ी कर सकता है। सवाल है कि क्या इस तरह की घटनाओं का असर चुनाव पर पड़ेगा?

रोबिंदर सचदेव के मुताबिक, हेट क्राइम का मुद्दा रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक, दोनों पार्टियों के भारतीय-अमेरिकी समर्थकों को प्रभावित करता है, लेकिन इससे उनके पारंपरिक मतदान पैटर्न में बुनियादी बदलाव आने की संभावना कम है।

रोबिंदर सचदेव, विदेश मामलों के जानकार
“अमेरिका में भारतीय समुदाय के लगभग एक-तिहाई मतदाता वोट डालने ही नहीं जाते। जो वोट करते हैं, उनमें से करीब 65 से 70 फीसदी डेमोक्रेट्स और 25 से 30 फीसदी रिपब्लिकन पार्टी का समर्थन करते आए हैं। नस्लवाद और हेट क्राइम का बढ़ता माहौल दोनों पक्षों के भारतीय-अमेरिकियों को प्रभावित जरूर कर रहा है, लेकिन इसका आगामी चुनाव में वोटिंग पैटर्न पर कोई खास फर्क नहीं पड़ेगा। जो लोग जिस पार्टी के समर्थक हैं, वे मोटे तौर पर उसी के साथ बने रहेंगे।”
रोबिंदर सचदेव, विदेश मामलों के जानकार
रोबिंदर सचदेव, विदेश मामलों के जानकार

सांसदों ने ट्रंप प्रशासन के कुछ सरकारी संदेशों की भी आलोचना की। उन्होंने होमलैंड सिक्योरिटी विभाग की एक पोस्ट का उदाहरण दिया, जिसमें एक सिख व्यक्ति की तस्वीर के साथ लिखा था, “Get off our roads, you don’t know how to drive Mr. Singh.” सांसदों का कहना है कि ऐसे संदेश नस्लीय और धार्मिक रूढ़ियों को बढ़ावा दे सकते हैं।

उन्होंने शिक्षा विभाग की एक पोस्ट का भी जिक्र किया। यह पोस्ट टेक्सास के एक रिपब्लिकन नेता की उस शिकायत के बाद की गई थी, जिसमें उन्होंने टेक्सास यूनिवर्सिटी के फुटबॉल मैच में दक्षिण एशियाई लोगों के पहुंचने पर आपत्ति जताई थी। इसके बाद शिक्षा विभाग ने “Make College Football Great Again” लिखा था।

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