
अमेरिका के इलिनॉय राज्य के ऑरोरा में हिंदू मंदिर पर कथित हमले की कोशिश को लेकर 105 सांसदों ने FBI से जांच की मांग की है। भारतीय-अमेरिकी सांसद राजा कृष्णमूर्ति के नेतृत्व में सांसदों ने FBI निदेशक काश पटेल को पत्र लिखकर मामले की संभावित संघीय हेट क्राइम के तौर पर जांच करने की अपील की है। साथ ही, उन्होंने भारतीय-अमेरिकियों, हिंदू-अमेरिकियों और दूसरे दक्षिण एशियाई समुदायों को निशाना बनाने वाली ऑनलाइन धमकियों की पहचान और उनसे निपटने के लिए FBI की ओर से उठाए जा रहे कदमों पर जवाब मांगा है।
I led 105 lawmakers in demanding the FBI investigate the attempted mass shooting at my family’s Hindu temple in Aurora as a potential hate crime. We must confront the rising tide of anti-Indian hate and the online threats putting our communities at risk. https://t.co/gkckZeXbyZ https://t.co/rc9gGPQTUU
— Congressman Raja Krishnamoorthi (@CongressmanRaja) October 20, 2026
11 अक्टूबर का है मामला
प्रॉसिक्यूटर के मुताबिक, 19 साल के आरोपी अलेक्जेंड्रोस पापोराकिस ने मंदिर के बाहर एक व्यक्ति पर गोली चलाने की कोशिश की, लेकिन उसकी राइफल जाम हो गई। इसके बाद वह वहां से भाग गया। बाद में उसने दोबारा लौटने की बात कही। इसकी जानकारी एक सहकर्मी ने पुलिस को दी, जिसके बाद पुलिस ने उसे उसी दिन गिरफ्तार कर लिया।
जांचकर्ताओं के मुताबिक, आरोपी के घर से राइफल, बड़ी संख्या में गोलियां, बॉडी आर्मर और श्वेत वर्चस्ववाद से जुड़ी सामग्री मिली। अभियोजकों का आरोप है कि उसने आठ पन्नों का एक घोषणापत्र भी लिखा था, जिसमें हिंदू धार्मिक स्थल पर भारतीय मूल के लोगों के खिलाफ हिंसा की बात थी।

विदेश मामलों के विशेषज्ञ रोबिंदर सचदेव का मानना है कि अमेरिका में नस्लीय हिंसा और हेट क्राइम के पीछे श्वेत राष्ट्रवादी विचारधारा और 'ग्रेट रिप्लेसमेंट थ्योरी' जैसी मान्यताएं काम कर रही हैं। इसके चलते अलग रंग-रूप और पृष्ठभूमि वाले लोगों को निशाना बनाया जा रहा है।
सांसदों ने FBI से क्या पूछा?
सांसदों ने पूछा है कि क्या FBI इस मामले में नस्लीय, जातीय और धार्मिक नफरत के पहलुओं की जांच कर रही है। वे यह भी जानना चाहते हैं कि आरोपी ने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल धमकी देने, निशाना चुनने या किसी दूसरे व्यक्ति से मदद लेने के लिए किया था या नहीं।
इसके अलावा, सांसदों ने भारतीय-अमेरिकी, हिंदू, सिख और दूसरे दक्षिण एशियाई समुदायों को मिलने वाली ऑनलाइन धमकियों से निपटने की FBI की रणनीति पर भी जवाब मांगा है। उन्होंने धार्मिक स्थलों तक खतरे की जानकारी पहुंचाने और उनकी सुरक्षा के लिए उपलब्ध संसाधनों के बारे में भी पूछा है। FBI से 29 अक्टूबर तक जवाब मांगा गया है।
सचदेव के मुताबिक, अमेरिका में हिंदू मंदिरों और समुदाय को निशाना बनाए जाने के पीछे धार्मिक कट्टरता और दुष्प्रचार भी बड़े कारण हैं।
वहीं 3 अक्टूबर को ओहायो में एक हिंदू मंदिर पर ईंटों से हमला करने का मामला सामने आया था।
⚠️Hindu temple attacked in Ohio today| At 1:30 PM today, the Shree Swaminarayan Vadtal Dham Hindu Mandir in Richmond Heights, Ohio was attacked by perpetrator(s) who threw bricks at the temple causing significant damage. Surveillance video is available and being reviewed by authorities. The @FBI @CivilRights are being alerted. HAF is in touch with temple leaders and offering all assistance. This possible hate crime comes at a time of unprecedented hate & vitriol directed at the Hindu American community, and we ask that law enforcement make apprehending the perpetrator(s) a top priority. We also call on our nation’s elected leaders & government agencies to publicly & unequivocally condemn hateful rhetoric against Indian and Hindu American communities.
— Hindu American Foundation (@HinduAmerican) October 3, 2026
ऑनलाइन नफरत के मामलों में भारी बढ़ोतरी
सांसदों ने पत्र में दक्षिण एशियाई लोगों के खिलाफ ऑनलाइन नफरत को लेकर हालिया आंकड़ों का भी हवाला दिया है। जनवरी 2025 से जून 2026 के बीच X पर दक्षिण एशियाई लोगों को निशाना बनाने वाली 5.42 लाख से ज्यादा नफरत भरी पोस्ट मिलीं। जनवरी 2024 से जून 2026 के बीच ऐसी पोस्ट की मासिक संख्या करीब 240% बढ़ी।
Carnegie Endowment के 2026 के सर्वे में 48% भारतीय-अमेरिकियों ने कहा कि उन्होंने 2025 की शुरुआत से भारतीयों या भारतीय-अमेरिकियों को निशाना बनाने वाली नस्लीय पोस्ट बहुत या कुछ हद तक अक्सर देखी हैं।
हमलों को रोकने में ट्रंप प्रशासन की विफलता के सवाल पर सचदेव ने कहा कि सरकार को ऐसे नफरती माहौल पर अंकुश लगाने के ठोस कदम उठाने चाहिए, जो इन हमलों को बढ़ावा देता है।
क्या मिडटर्म चुनावों पर पड़ेगा असर?
अमेरिका में 3 नवंबर को मिडटर्म चुनाव होने हैं। युद्ध और महंगाई जैसे मुद्दे ट्रंप प्रशासन के लिए बड़ी चुनौतियां बने हुए हैं। ऐसे में हेट क्राइम का मुद्दा एक और मुश्किल खड़ी कर सकता है। सवाल है कि क्या इस तरह की घटनाओं का असर चुनाव पर पड़ेगा?
रोबिंदर सचदेव के मुताबिक, हेट क्राइम का मुद्दा रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक, दोनों पार्टियों के भारतीय-अमेरिकी समर्थकों को प्रभावित करता है, लेकिन इससे उनके पारंपरिक मतदान पैटर्न में बुनियादी बदलाव आने की संभावना कम है।
सांसदों ने ट्रंप प्रशासन के कुछ सरकारी संदेशों की भी आलोचना की। उन्होंने होमलैंड सिक्योरिटी विभाग की एक पोस्ट का उदाहरण दिया, जिसमें एक सिख व्यक्ति की तस्वीर के साथ लिखा था, “Get off our roads, you don’t know how to drive Mr. Singh.” सांसदों का कहना है कि ऐसे संदेश नस्लीय और धार्मिक रूढ़ियों को बढ़ावा दे सकते हैं।
उन्होंने शिक्षा विभाग की एक पोस्ट का भी जिक्र किया। यह पोस्ट टेक्सास के एक रिपब्लिकन नेता की उस शिकायत के बाद की गई थी, जिसमें उन्होंने टेक्सास यूनिवर्सिटी के फुटबॉल मैच में दक्षिण एशियाई लोगों के पहुंचने पर आपत्ति जताई थी। इसके बाद शिक्षा विभाग ने “Make College Football Great Again” लिखा था।
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