
भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील पर बातचीत चल रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ ही अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो भी कह चुके हैं कि दोनों देश ट्रेड डील के बेहद करीब हैं। इस बीच RT इंडिया पर 'इन कन्वर्सेशन विद सलमान खुर्शीद' में भारत के पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ने अमेरिका और जर्मनी में भारत की पूर्व राजदूत मीरा शंकर से बातचीत की।
इस बातचीत में मीरा शंकर ने US प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ वॉर और अमेरिका की बदलती वैश्विक प्राथमिकताओं पर बातचीत की। मीरा शंकर ने उन कारकों पर भी चर्चा की जो ग्लोबल कूटनीति को नया रूप दे रहे हैं
ट्रंप vs ओबामा : अलग-अलग अप्रोच

मीरा शंकर ने कहा कि ओबामा को राष्ट्रपति बनने के बाद विरासत में कांटों का ताज मिला था क्योंकि उस समय 2008 का वित्तीय संकट चल रहा था। साथ-साथ अमेरिका इराक और अफगानिस्तान के दो युद्धों में फंसा हुआ था। अमेरिकी अर्थव्यस्था डूबती स्थिति में थी।
उन्होंने कहा कि यह बहुत कठिन परिस्थिति थी, लेकिन साथ ही यह असाधारण उम्मीदों का भी दौर था कि अमेरिका अंततः एक उत्तर-नस्लीय (Post-Racial) समाज बन गया है, हालांकि बाद में ऐसा देखने को नहीं मिला।
मीरा शंकर ने कहा कि ओबामा तर्क और विवेक वाले व्यक्ति थे, जो मुद्दों को समझने के बाद तार्किक रूप से निर्णय लेते थे। इसकी वजह थी कि वह सार्वजनिक जीवन और शासन में अपेक्षाकृत नए भी थे। इसके विपरीत, ट्रंप एक ऐसे नेता हैं जो अपनी अंतः प्रेरणा/सहज ज्ञान (instinct) के अनुसार काम करते हैं।
पूर्व राजदूत ने कहा कि इसके कारण दुनिया के लिए स्थिति समग्र रूप से अधिक अस्थिर हो गई है, क्योंकि अमेरिका सबसे शक्तिशाली देश और सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। ऐसे में इस अमेरिकी कार्यशैली की वजह से पूरी दुनिया के लिए अस्थिरता काफी बढ़ गई है, क्योंकि अमेरिका सबसे शक्तिशाली देश और सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। इसलिए वह जो कुछ भी करता है या नहीं करता है, उसका व्यापक असर दुनिया भर के लोगों पर पड़ता है।
भारत का भरोसेमंद है ट्रंप का अमेरिका?
ट्रंप ने अमेरिका के कई पारंपरिक रुख को पूरी तरह से उलट दिया है। पहले अमेरिका मुक्त व्यापार और वैश्वीकरण का समर्थन करता था, लेकिन अब ट्रंप उचित व्यापार (Fair Trade) पर जोर देते हैं। इस बदलाव के कारण पर मीरा शंकर ने कहा कि यह कोई व्यक्तिगत सनक नहीं है, बल्कि इसका कारण यह है कि जब मैनुफैक्चरिंग की नौकरियां चीन जैसे देशों में चली गईं, तो अमेरिका में फॉर्मल मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में कई लोग प्रभावित हुए और उनकी नौकरियां चली गईं।
ट्रंप का मानना है कि अन्य देशों ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर 'फ्रीलोड' (मुफ्तखोरी) की है, इसलिए उन्हें टैरिफ लगाकर चीजों को ठीक करना था। उन्होंने बहुत तेज गति से भारत सहित कई देशों पर भारी टैरिफ लगाए हैं। मीरा शंकर ने कहा कि उनके पहले कार्यकाल में ध्यान मुख्य रूप से चीन पर था और टैरिफ अमेरिका को होने वाले चीनी निर्यातों के एक बड़े हिस्से पर लगाए गए थे। इस कार्यकाल में उन्होंने दोस्त और दुश्मन दोनों के साथ एक समान व्यवहार किया है।

अमेरिकी दबाव और भारतीय रणनीति
मीरा शंकर ने कहा कि ट्रंप के टैरिफ पर जवाब के लिए चीन ने इस बार पूरी तैयारी की थी। उन्होंने कहा कि चीन ने क्रिटिकल मिनिरल्स प्रोसेसिंग में अपने प्रभुत्व का लाभ उठाया और 5 महत्वपूर्ण खनिजों के एक्सपोर्ट पर बैन लगा दिया।
भारत की पूर्व राजदूत ने कहा कि चीन के इस दबदबे ने राष्ट्रपति ट्रंप को चीन के प्रति नरम रुख अपनाने पर विवश किया। वर्तमान में चीन और अमेरिका अपने संबंधों को स्थिर करने की कोशिश कर रहे हैं, यद्यपि भविष्य की तकनीकों और अर्थव्यवस्थाओं पर अपना दबदबा बनाने के लिए उनके बीच प्रतिस्पर्धा और तेज हो रही है।
जब पूछा गया कि यह स्थिति भारत को कहां छोड़ती है, तो मीरा शंकर ने बताया कि यह भारत को एक कमजोर स्थिति में लाती है। उन्होंने कहा कि इसकी वजह यह है कि जिस क्षण हिंद-प्रशांत में स्ट्रैटिजिक कन्वर्जेंस-अर्थात ऐसा संतुलन बनाना जो टिकाऊ हो और किसी एक देश के प्रभुत्व में न हो। इस साझेदारी का कोर ड्राइवर नहीं रह जाता, तो यह संबंध अपना रणनीतिक महत्व/वजन (strategic heft) खो देता है।
ब्रिक्स में एक देश का प्रभुत्व?
मीरा शंकर ने बदली हुई विश्व व्यवस्था में ब्रिक्स, संयुक्त राष्ट्र सुधार और भारत की भूमिका पर भी बातचीत की। उन्होंने कहा कि एक पश्चिम-विरोधी ब्लॉक वह होता जिसका काम पश्चिम को नीचे गिराना या उसे सीमित करना समझता है।
दूसरी ओर, ब्रिक्स ऐसे देशों का समूह है जिसमें पश्चिमी शक्तियां शामिल नहीं हैं और यह दुनिया पर उनके दृष्टिकोण को प्रतिबिंबित नहीं करता है। साथ ही, यह पश्चिम-विरोधी ब्लॉक के रूप में कार्य करने का प्रयास नहीं कर रहा है।
भारत की पूर्व राजदूत से जब पूछा गया कि क्या ब्रिक्स में किसी एक देश के समग्र प्रभुत्व को रोकने के लिए कुछ किया जा सकता है, तो उन्होंने बैंक (न्यू डेवलपमेंट बैंक) का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि यह बैंक सभी देशों के समान योगदान के आधार पर स्थापित किया गया था, ताकि कोई एक देश इसके प्रशासन/गवर्नेंस पर हावी न हो।
मीरा शंकर ने कहा कि यह इस तरह का कदम है जो दुनिया के लाभ के लिए उठाया जा सकता है। इससे अधिक फंड उपलब्ध होते हैं और इसका एडमिनिस्ट्रेटिव स्ट्रक्चर किसी विशेष देश को विशेषाधिकार नहीं देती।






