स्टारलिंक पर Social Bullying कर रहे मस्क को भारत ने दिखाया आईना
केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने एलन मस्क के आरोपों पर जवाब देते हुए साफ शब्दों में कहा कि सैटेलाइट इंटरनेट के क्षेत्र में भारत में एकाधिकार का कोई सवाल ही नहीं उठता।
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स्टारलिंक पर Social Bullying कर रहे मस्क को भारत ने दिखाया आईना
(बाएं से) केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, स्पेसएक्स के मालिक एलन मस्क और पूर्व केंद्रीय मंत्री राजीव चंद्रशेखर

भारत में स्टारलिंक की मंजूरी में हो रही देरी को लेकर एलन मस्क बेचैन हैं। उनका सवाल सरकार की नीति को लेकर है, लेकिन सोशल मीडिया पर बुलीइंग जैसा बर्ताव कर रहे हैं। भारत सरकार का सूचना मंत्रालय पहले ही उनके आरोपों को खारिज कर चुका है। शुक्रवार को केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी साफ शब्दों में उन्हें जवाब दिया। केंद्र सरकार में इलेक्ट्रॉनिक्स एंड आईटी राज्य मंत्री रह चुके राजीव चंद्रशेखर ने एलन मस्क को आईना दिखाया है और सैटलाइट कम्युनिकेशन (सैटकॉम) जैसी सर्विस का टेरर एंगल समझाया है। उन्होंने भारत की चिंताओं को सामने रखते हुए बताया कि पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम न किए जाएं तो ये तकनीक कितनी खतरनाक हो सकती है।

मस्क को सिंधिया का जवाब 

एलन मस्क ने बड़ा आरोप लगाया है कि कुछ अमीर उद्योगपति (oligarchs) भारत में स्टारलिंक का रास्ता रोक रहे हैं। इस पर भारत सरकार के संचार मंत्रालय ने 8 अक्तूबर को अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी कि हमारी नीतियां सभी के लिए बराबर और निष्पक्ष हैं, किसी के साथ कोई भेदभाव नहीं हो रहा है।

अब शुक्रवार को केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने एक कार्यक्रम में बोलते हुए मस्क के आरोपों पर जवाब दिया। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि सैटेलाइट इंटरनेट के क्षेत्र में भारत में एकाधिकार (Monopoly) का कोई सवाल ही नहीं उठता।

ज्योतिरादित्य सिंधिया
मैं बिल्कुल साफ कर देना चाहता हूं कि भारत किसी भी क्षेत्र में किसी एक कंपनी के एकाधिकार की अनुमति नहीं देता। सैटेलाइट इंटरनेट के मामले में भी किसी एक कंपनी को नहीं चुना गया है। जो भी यह सर्विस देना चाहता है, उन सभी को लाइसेंस दिए गए हैं।
ज्योतिरादित्य सिंधिया, केंद्रीय संचार मंत्री
ज्योतिरादित्य सिंधिया, केंद्रीय संचार मंत्री

ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि सैटेलाइट इंटरनेट के लिए आज एक कंपनी को लेकर बहुत बातें हो रही हैं, लेकिन तीन कंपनियों को लाइसेंस दिया गया है। ये हैं- रिलायंस जियो, वनवेब और स्टारलिंक। इसके अलावा एक और कंपनी है जो लाइसेंस लेने में रुचि रख रही है, और वह है ऐमजॉन। उसे भी तय प्रक्रिया का पालन करना होगा।

सुरक्षा नियमों का पालन तो करना ही होगा

सिंधिया ने कहा कि सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस की कीमतें तय करने के आखिरी दौर की प्रक्रिया चल रही है लेकिन स्टारलिंक समेत सभी लाइसेंसी कंपनियों को काम शुरू करने से पहले सुरक्षा से जुड़ी शर्तें पूरी करनी होंगी।

उन्होंने कहा कि शुरुआत में यह तय किया गया था कि स्पेक्ट्रम बिना नीलामी के दिया जाएगा या नीलाम किया जाएगा। दूसरा सवाल यह था कि इसके दाम कैसे तय होंगे, जिस पर ट्राई (TRAI) और दूरसंचार विभाग आपस में बात कर रहे हैं। हम इस पर अंतिम फैसला लेने के करीब हैं। तीसरी बात सुरक्षा नियमों के पालन की है।

सिंधिया ने कहा कि जैसे ही ये तीनों कंपनियां सुरक्षा जांच से जुड़ी शर्तें अपने-अपने स्तर पर पूरी कर लेंगी और सरकार फीस तय कर देगी, वे अपना काम शुरू कर सकती हैं। लेकिन सुरक्षा नियमों का पालन हर कंपनी को करना ही होगा।

राजीव चंद्रशेखर ने टेरर एंगल पर समझा दिया

एलन मस्क को एक तरफ ज्योतिरादित्य सिंधिया ने जवाब दिया, दूसरी तरफ पूर्व केंद्रीय मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने बेरोकटोक सैटलाइट कम्युनिकेशन के खतरे बताते हुए आगाह किया। 

केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एंड आईटी राज्य मंत्री रह चुके राजीव चंद्रशेखर ने एक पोस्ट लिखा कि जब भारत में वायरलेस सेक्टर का नया फ्रेमवर्क तैयार किया जा रहा था, मैं सरकार की उस टीम का हिस्सा रहा था। पहले एक सांसद के रूप में फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की टीम के हिस्से के रूप में मैंने इसे करीब से देखा है।

उन्होंने कहा कि सैटेलाइट आईपी सेवाओं से सुरक्षा के कई पहलू जुड़े होते हैं। भारत के लिए तो यह और भी अहम है जो शत्रुतापूर्ण पड़ोसी देश की शह पर वर्षों से आतंकवाद झेल रहा है। 26/11 हमलों से लेकर पहलगाम में हुए हमले तक में देखा गया है कि सैटलाइट कम्युनिकेशन आतंकियों से संपर्क का पसंदीदा जरिया रहा है।

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राजीव चंद्रशेखर का कहना है कि सैटेलाइट VOIP (इंटरनेट के लिए जरिए फोन कॉल करने की सुविधा) और एन्क्रिप्शन सुरक्षा के नजरिए से अधिक चुनौतियां पैदा करते हैं। ऐसा नहीं है कि इन चुनौतियों का समाधान नहीं निकाला जा सकता, लेकिन सुरक्षा और भरोसा बनाए रखने के लिए आधुनिक सिस्टम और क्षमताएं बढ़ानी होंगी।

राजीव चंद्रशेखर
सैटेलाइट आईपी (IP) सर्विसेज से सुरक्षा के कई पहलू जुड़े होते हैं। भारत जैसे देश के लिए तो यह और भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि भारत अपने पड़ोस में शत्रुतापूर्ण देशों की शह पर वर्षों से आतंकवाद और उग्रवाद का सामना कर रहा है। मुंबई के 26/11 आतंकी हमलों से लेकर पहलगाम में हुए हमलों तक से, यह साफ हो चुका है कि सैटलाइट कम्युनिकेशन (सैटकॉम) आतंकवादियों से संपर्क रखने का पसंदीदा जरिया रहा है।
राजीव चंद्रशेखर, पूर्व केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एंड आईटी राज्य मंत्री
राजीव चंद्रशेखर, पूर्व केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एंड आईटी राज्य मंत्री

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की सरकार ने टेलिकॉम, इंटरनेट समेत पूरा टेक सेक्टर 3 सिद्धांतों (OSTA) से संचालित होता है-

  1. खुला (Open) : यह सेक्टर किसी भी तरह के एकाधिकार से मुक्त हो। सभी को स्वतंत्र और निष्पक्ष मौके मिलें।
  2. सुरक्षित-विश्वसनीय (Safe & Trusted): इन्फ्रास्ट्रक्चर, नेटवर्क और प्लेटफॉर्म सभी सुरक्षित और विश्वसनीय होने चाहिए।
  3. जवाबदेह (Accountable): सुरक्षा और विश्वास के लिए हर प्रतिभागी को कानूनी रूप से जवाबदेह होना चाहिए।

केरल से मौजूदा विधायक राजीव चंद्रशेखर ने आगे लिखा कि अब मैं केंद्र सरकार का हिस्सा नहीं हूं और उसके प्रतिनिधि के रूप में नहीं बोल रहा हूं। लेकिन मुझे लगता है कि सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है: सभी तीन सैटकॉम (सैटलाइट कम्यूनिकेशन) लाइसेंसधारी सुरक्षा मंजूरी सुनिश्चित करने के मामले में लगभग एक ही चरण में हैं, जिसमें पहले उनकी सुरक्षा और विश्वसनीयता की जांच की जा रही है, उसके बाद स्पेक्ट्रम की।

बीजेपी नेता राजीव ने अपनी पोस्ट में लिखा कि ये सच है कि भारत का टेलीकॉम सेक्टर कई दशकों तक अपारदर्शिता और भ्रष्टाचार से घिरा रहा। राजनीतिक सरपरस्ती में पूंजीपति हावी हुआ करते थे। लेकिन वर्षों पुरानी राजनीतिक-प्रशासनिक अपारदर्शिता और भ्रष्टाचार से लड़ने के अपने अच्छे-खासे अनुभव के आधार पर मैं कह सकता हूं कि आज का भारत पूंजीवाद के पुराने दौर से प्रभावित नहीं होता।

राजीव चंद्रशेखर ने कहा कि देश को कोई भी फैसला करने से पहले अपने लोगों के हितों का ख्याल रखना होता है, और मेरे ख्याल से भारत यही कर रहा है। ऐसे में थोड़ा सब्र रखना ही होगा और इस मामले तो ये बेहद जरूरी भी है।

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