
“यह काफी अजीब है कि एक बड़ी टेक कंपनी का मालिक ओलिगार्की (अल्पतंत्र) की बात कर रहा है। लेकिन मजाक से हटकर बात यह है कि आप अपनी चिंताओं या विरोध के लिए सोशल मीडिया को जरिया नहीं बना सकते। आपको यह देखना होगा कि आप रेगुलेटर की शर्तों को कैसे पूरा कर रहे हैं। केवल प्रेस गेम खेलने या सोशल मीडिया पर आरोप लगाने से भारतीय नागरिकों को भड़काना सही नहीं है। आपको भारत की कानूनी शर्तें पूरी करने से ही आगे बढ़ने का मौका मिल सकता है।”
यह कहना है कानूनी मामलों की एक्सपर्ट और सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ वकील एन.एस. नप्पिनाई का।
“मस्क को अपनी स्टारलिंक से जुड़ी शिकायतें सही चैनलों के जरिए करनी चाहिए, न कि सोशल मीडिया पर”: सुप्रीम कोर्ट की वकील @NSNappinai उन्होंने कहा, "शॉर्टकट अपनाने के लिए सिर्फ आरोप लगाना सही तरीका नहीं हो सकता।" https://t.co/zmmAVtAF71
— RT Hindi (@RT_hindi_) October 8, 2026
स्टारलिंक के मालिक एलन मस्क के आरोपों पर आरटी इंडिया से बातचीत में नप्पिनाई ने आगे कहा, “सरकार एक ट्रस्टी की भूमिका निभा रही है। वह सबसे पहले देश की सुरक्षा और जरूरतों को प्राथमिकता देगी और उसके बाद सभी कंपनियों को समान अवसर सुनिश्चित करेगी। अगर वास्तव में कोई ओलिगार्की या एकाधिकार स्टारलिंक के अधिकारों को रोक रहा है, तो मस्क के पास भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग जाने का कानूनी रास्ता खुला है।”
स्टारलिंक को लेकर सुरक्षा का पेच क्यों फंसा है?
इसकी सबसे बड़ी चिंता यह है कि सैटेलाइट कनेक्टिविटी पारंपरिक टेलीकॉम नेटवर्क से बाहर काम कर सकती है। इससे सरकारी एजेंसियों के लिए इस पर निगरानी और नियंत्रण रखना मुश्किल हो सकता है। यह संवेदनशीलता 2008 के मुंबई आतंकी हमलों (26/11) के दौरान भी सामने आई थी, जब आतंकियों ने अपने हैंडलर्स से बात करने के लिए सैटेलाइट संचार का इस्तेमाल किया था। तब से सैटकॉम राष्ट्रीय सुरक्षा का विषय बन गया है।
इसके अलावा, भारत में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए इंटरनेट सेवाएं बंद करने का प्रावधान है। अगर किसी सैटेलाइट सर्विस को आसानी से बंद न किया जा सके, तो स्थिति और जटिल हो सकती है। इसलिए सरकार चाहती है कि सभी सुरक्षा उपाय पहले से तय हों। सरकार का कहना है कि नियम सबके लिए बराबर हैं और सुरक्षा में कोई ढील नहीं दी जा सकती।
इन देशों में भी है स्टारलिंक का विवाद

मस्क का आरोप क्या है?
एलन मस्क ने अपनी एक पोस्ट में आरोप लगाया कि कुछ अल्पतंत्र यानी पूंजीपतियों की वजह से स्टारलिंक को भारत में एक्सेस नहीं मिल पा रहा है। स्टारलिंक का कहना है कि उसने सभी शर्तें पूरी कर दी हैं, फिर भी उसे रोका जा रहा है।
इसे लेकर एलन मस्क ने एक्स पर लिखा, “दुर्भाग्य से, भारतीय लोगों पर अपना एकछत्र एकाधिकार बनाए रखने के लिए कुछ पूंजीपति (ओलिगार्क) हमें रोक रहे हैं। आप अंदाजा लगा सकते हैं कि वे कौन हैं... यह भारत की जनता के खिलाफ एक अपराध है!”
Unfortunately, we are being blocked by certain oligarchs in order to maintain their monopolistic chokehold on the Indian people. You can guess who they are … This is a crime against the people of India!
— Elon Musk (@elonmusk) October 7, 2026
एलन मस्क की इस पोस्ट के बाद भारत सरकार ने भी जवाब दिया और उनके आरोपों को आधारहीन बताते हुए खारिज कर दिया।
सरकार का पलटवार
भारत सरकार की ओर से मस्क के आरोपों के बाद एक बयान जारी किया गया। इसमें कहा गया, “लाइसेंस के नियम और शर्तों के तहत, हर लाइसेंस धारक को सुरक्षा शर्तों का पालन करके दिखाना जरूरी है। इस प्रक्रिया के तहत तीनों लाइसेंस धारकों की सुरक्षा समीक्षा फिलहाल जारी है। यह कहना पूरी तरह से आधारहीन और गलत है कि हमारा नियम या उसका पालन किसी के साथ भेदभाव करता है।”
स्टारलिंक को भारत में कोई खास अड़चन नहीं, सरकार ने मस्क की चिंता पर दिया जवाब मिनिस्ट्री ऑफ कम्युनिकेशन ने कहा कि भारत का सैटेलाइट कम्युनिकेशन नियम सभी कंपनियों के लिए एक बराबर और निष्पक्ष है। मंत्रालय के मुताबिक, लाइसेंस के लिए आवेदन करने वाली तीनों कंपनियां फिलहाल एक ही रेगुलेटरी स्टेज पर हैं। मंत्रालय ने स्टारलिंक के साथ भेदभाव किए जाने की बात को बेबुनियाद और गलतफहमी पर आधारित बताया है। सरकार का बयाान ऐसे समय में आया है, जब एलन मस्क ने आरोप लगाया था कि भारत में एकाधिकार वाली पकड़ बनाए रखने के लिए स्टारलिंक को रोका जा रहा है। मस्क ने कहा था कि भारत में स्टारलिंक के प्लान को कुछ खास रईस लोगों (Oligarchs) द्वारा रोका जा रहा है।
— RT Hindi (@RT_hindi_) October 8, 2026
भारत सरकार का यह भी कहना है कि उसका ढांचा पूरी तरह निष्पक्ष है और यह सैटेलाइट सहित सभी टेलीकॉम सेवाओं पर समान रूप से लागू होता है। सैटेलाइट आधारित मोबाइल संचार को बढ़ावा देने के लिए तीन कंपनियों को लाइसेंस दिए गए हैं, जो नॉन-जियोस्टेशनरी सैटेलाइट्स का इस्तेमाल करती हैं। हालांकि, इसके साथ यह शर्त भी जुड़ी है कि हर लाइसेंस धारक को सुरक्षा आवश्यकताओं को पूरा करना होगा। इसका उद्देश्य उपयोगकर्ताओं और उनके डेटा की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
प्रधानमंत्री भी कह चुके हैं- फोन और नेटवर्क की सुरक्षा जरूरी
प्रधानमंत्री ने भी टेलीकॉम और डिजिटल तकनीक से जुड़े सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने पर जोर दिया है। इंडिया मोबाइल कांग्रेस में उन्होंने कहा,
मस्क ने किफायती इंटरनेट की कही बात
एलन मस्क का मानना है कि भारत में अभी भी दूरदराज के क्षेत्रों में कनेक्टिविटी और किफायती इंटरनेट की समस्या है, जिसे वह दूर कर सकते हैं।
इसी वजह से उन्होंने एक अन्य पोस्ट में लिखा, “भारत में स्टारलिंक उन लोगों के लिए हाई-स्पीड और किफायती इंटरनेट कनेक्टिविटी मुहैया कराएगा, जो मौजूदा कीमतों को वहन नहीं कर सकते या जिनके पास इंटरनेट कनेक्शन ही नहीं है!”
Starlink in India would enable high-speed, affordable Internet connectivity for those who can’t afford current prices or who don’t have a connection at all!
— Elon Musk (@elonmusk) October 7, 2026
हालांकि, प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सस्ते डेटा और बेहतर कनेक्टिविटी ने देश में कई नए सेक्टर और कारोबार के मौके पैदा किए हैं। उन्होंने कहा, “बीते दशक में टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर का लगातार विस्तार हुआ है। दूर-दराज के इलाकों में टावर लगाए गए, ऑप्टिकल फाइबर का बड़े पैमाने पर विस्तार हुआ और डेटा भी सस्ता हुआ। इससे इकॉनमी के नए सेक्टर भी बने। टेक्नोलॉजी, एंटरटेनमेंट और एजुकेशन सेक्टर में नए कंज्यूमर भी बढ़े हैं।”
📹 PM मोदी बोले- “भारत में डेटा पहले से ही सस्ता है”, उम्मीद है मस्क सुन रहे होंगे! इंडिया मोबाइल कांग्रेस में बोलते हुए उन्होंने भारत के बढ़ते टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर और डेटा की घटती कीमतों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अब स्मार्टफोन लाखों लोगों के लिए "गेमिंग कंसोल" बन गए हैं। उधर स्टारलिंक के प्रमुख एलन मस्क ने बुधवार को कहा कि उनकी सर्विस उन भारतीयों तक "हाई-स्पीड, सस्ता इंटरनेट" पहुंचाएगी जो मौजूदा कीमतें नहीं चुका सकते या जिनके पास कनेक्शन नहीं है।
— RT Hindi (@RT_hindi_) October 8, 2026
भारत में स्टारलिंक की मौजूदा स्थिति क्या है?
स्टारलिंक के पास भारत के दूरसंचार विभाग से सैटेलाइट लाइसेंस (GMPCS) और IN-SPACe से 5 साल का सैटेलाइट अधिकार पहले से मौजूद है। कंपनी ने सैकड़ों एंटिना के साथ करीब 20 गेटवे भी बना लिए हैं। हालांकि, केवल लाइसेंस मिलना ही लॉन्चिंग की गारंटी नहीं है।
स्टारलिंक को अभी स्पेक्ट्रम आवंटन, अंतिम सुरक्षा मंजूरी और FDI (विदेशी प्रत्यक्ष निवेश) जैसी अन्य स्वीकृतियों का इंतजार है।
वहीं, भारत ने स्पेक्ट्रम आवंटन के लिए एक प्रशासनिक मॉडल को मंजूरी दी है। इसमें कुल राजस्व का 5% और ग्रामीण या दूरदराज इलाकों के लिए 4% इस्तेमाल शुल्क तय किया गया है।
सरकार का बड़ा लक्ष्य उन दूरदराज इलाकों तक भी सस्ता इंटरनेट पहुंचाना है, जहां ऑप्टिकल फाइबर या मोबाइल टावर लगाना मुश्किल या महंगा है। सैटेलाइट इंटरनेट इस कमी को पूरा कर सकता है, लेकिन प्रधानमंत्री ने भी साफ कर दिया है कि सुरक्षा से कोई समझौता नहीं हो सकता।
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