
तारीख - 28 फरवरी 2025
जगह - वाइट हाउस का ओवल ऑफिस
यूक्रेन के नेता व्लादिमीर जेलेंस्की और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप मुलाकात के बाद ओवल ऑफिस में बैठकर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे थे। उपराष्ट्रपति जेडी वेंस भी साथ में थे।
उसी दौरान ट्रंप ने जेलेंस्की से कहा- अगर आपके पास हमारे मिलिट्री इक्विपमेंट्स नहीं होते तो ये (यूक्रेन) संघर्ष दो हफ्ते में खत्म हो जाता। ...मैं बताए देता हूं, इस तरह से काम करना मुश्किल हो जाएगा। ...क्या आप यह कह रहे हैं कि आप (रूस से) संघर्षविराम नहीं चाहते? मैं सीजफायर चाहता हूं। क्योंकि (स्थायी) समझौते की तुलना में सीजफायर बहुत जल्दी हो सकता है।
ऐसे ही मुद्दों पर ट्रंप और जेलेंस्की के बीच सबके सामने खूब अनबन हुई थी। पूरी दुनिया ने इसे देखा।
वो दिन है, और आज का दिन। ठीक 1 साल, 7 महीने और 13 दिन के बाद ट्रंप ने कहा है- अब वक्त आ गया है कि यूक्रेन को नया राष्ट्रपति मिलना चाहिए।
रूस से डीजल खरीदने की बड़ी डील के अगले ही दिन ट्रंप का ये बयान काफी कुछ कह देता है। ट्रंप ने इस डील की आलोचना करने के लिए जेलेंस्की को फटकार भी लगाई।
सवाल है कि जो अमेरिका इतने साल तक यूक्रेन में संघर्ष को हवा देता रहा, जेलेंस्की के हाथों में हथियार थमाता रहा, आखिर अब ट्रंप का जेलेंस्की से मोहभंग क्यों हो गया है? आखिर वो कौन सी वजहें हैं, जो तनातनी यहां तक पहुंच गई है।
ट्रंप ने जेलेंस्की को लेकर क्या कहा है?
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने वाइट हाउस के बाहर पत्रकारों से बातचीत में कहा कि जेलेंस्की रूसी रिफाइनरियों पर हमले की मंजूरी देकर ‘दुनिया के लिए मुश्किलें खड़ी करना चाहते हैं। उन्हें यह सब तुरंत बंद कर देना चाहिए। अब समय आ गया है कि यूक्रेन को नया राष्ट्रपति मिलना चाहिए।
ट्रंप ने संकेतों में साफ कहा कि यूक्रेन में जेलेंस्की ने रूस के साथ संघर्ष खत्म करने के लिए पर्याप्त प्रयास नहीं किए हैं। ट्रंप ने कहा, 'मेरा सुझाव है कि यूक्रेन को एक नया नेता चुनना चाहिए जो (शांति) डील कर सके। उनका कहना था कि किसी वजह से (जेलेंस्की) ऐसा कभी नहीं करते हैं। ...अगर 2022 में वह अमेरिका के राष्ट्रपति होते तो रूस-यूक्रेन संघर्ष शुरू ही नहीं होता।
ट्रंप और जेलेंस्की का अलग-अलग नजरिया
अंतरराष्ट्रीय संबंधों और प्रैक्टिकल विदेश नीति के चश्मे से देखें तो डोनाल्ड ट्रंप और यूक्रेनी नेता जेलेंस्की के रिश्ते कभी भी पारंपरिक 'सहयोगी संबंधों' जैसे नहीं रहे।
ट्रंप का 'अमेरिका फर्स्ट' और लेनदेन-आधारित कूटनीतिक दृष्टिकोण, जेलेंस्की की संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और पश्चिमी सुरक्षा-गारंटी पर टिकी नीति से सीधा टकराता है। ट्रंप जेलेंस्की को 'दुनिया का सबसे बेहतरीन सेल्समैन' बता चुके हैं।
ट्रंप का मानना है कि जेलेंस्की जानबूझकर अमेरिका को युद्ध में और ज्यादा धकेल रहे हैं और शांति वार्ता की टेबल पर आने से बच रहे हैं।
रूसी तेल रिफाइनरियों पर सैन्य हमले
ट्रंप और जेलेंस्की के बीच तत्काल तनाव का एक बड़ा कारण रूसी एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर यूक्रेनी हमले हैं। ट्रंप ने रूस की तेल रिफाइनरियों पर यूक्रेनी सैन्य हमलों की कड़ी आलोचना की है। उनका तर्क है कि इन्हें नुकसान पहुंचाने से ग्लोबल फ्यूल सप्लाई बाधित होती है और कीमतें बढ़ती हैं।
अमेरिका इस वक्त खुद डीजल की भारी कमी झेल रहा है। इसी कमी को दूर करने के लिए ट्रंप ने एक दिन पहले रूसी राष्ट्रपति पुतिन से फोन पर डेढ़ घंटे तक बात की थी। उसके बाद रूस से कई किश्तों में लाखों टन डीजल खरीदने की घोषणा की थी।
ट्रंप का मानना है कि जेलेंस्की जानबूझकर अमेरिका को संघर्ष में और ज्यादा धकेल रहे हैं और शांति वार्ता की टेबल पर आने से बच रहे हैं। इससे इस टकराव को खत्म करने में मुश्किलें आ रही हैं। इसका असर अमेरिका पर भी पड़ रहा है।
शांति वार्ता और सुरक्षा गारंटी पर मतभेद
ट्रंप अंतरराष्ट्रीय संबंधों को मुनाफे और घाटे की डील की तरह देखते हैं। वह चाहते हैं कि संघर्ष तुरंत खत्म हो। इसके विपरीत, जेलेंस्की यूक्रेन की संप्रभुता का अपना राग अलापते हुए अड़े हैं, जिसे ट्रंप अव्यावहारिक हठधर्मिता मानते हैं।
ट्रंप और जेलेंस्की के बीच रूस के साथ शांति वार्ता को लेकर मतभेद जगजाहिर हैं। ट्रंप लगातार फ्रंटलाइन को स्थिर करने के लिए जल्द से जल्द शांति समझौता चाह रहे हैं। दूसरी तरफ जेलेंस्की किसी भी शर्त को मानने से पहले पश्चिमी देशों से पक्की सुरक्षा गारंटी चाहते हैं।
फरवरी 2025 में वाइट हाउस के ओवल ऑफिस में ट्रंप, जेडी वेंस और जेलेंस्की की बेहद तनावपूर्ण बैठक में भी ट्रंप ने जेलेंस्की पर शांति समझौते में अड़ंगा लगाने का आरोप लगाया था।
ट्रंप ने बार-बार जेलेंस्की पर संघर्ष खत्म करने के अवसर ठुकराने का आरोप लगाया है। वह इस बात पर निराशा जताते रहे हैं कि यूक्रेन शांति प्रस्तावों को टालता रहा है और जेलेंस्की संघर्ष को ठीक से नहीं संभाल पाए।
'अमेरिका फर्स्ट' और भारी वित्तीय बोझ
डोनाल्ड ट्रंप और उनके (MAGA) समर्थक मानते हैं कि अमेरिकी टैक्सपेयर्स के अरबों डॉलर यूरोप के एक क्षेत्रीय संघर्ष में झोंके जा रहे हैं, जबकि ये रिसोर्स अमेरिकी सीमा की सुरक्षा और घरेलू अर्थव्यवस्था पर खर्च होने चाहिए थे। जेलेंस्की की लगातार हथियारों और वित्तीय सहायता की मांग ट्रंप के आर्थिक एजेंडे के खांचे में फिट नहीं बैठती है।
2024 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव अभियान के दौरान भी ट्रंप ने लगातार जेलेंस्की पर हमला बोला था। उन्होंने जेलेंस्की को व्यंग्यात्मक रूप से ' दुनिया सबसे बेहतरीन सेल्समैन' बताया था, जो अमेरिका आते हैं और हर बार अरबों डॉलर की सैन्य सहायता ले जाते हैं।

यूक्रेन पर अमेरिका का भारी-भरकम खर्च
अमेरिका के स्पेशल इंस्पेक्टर जनरल फॉर ऑपरेशन अटलांटिक रिजॉल्व (SIG-OAR) की रिपोर्ट के मुताबिक, 31 मार्च 2026 तक अमेरिकी कांग्रेस ने यूक्रेन युद्ध के लिए कुल 195 अरब डॉलर जारी किए हैं। इसमें 164 अरब डॉलर पांच प्रमुख विधेयकों के जरिए, 27 अरब डॉलर वार्षिक बजट और अन्य आवंटनों से जारी किए गए। इसके अलावा 4 अरब डॉलर नाटो सहयोगियों के अंशदान से आए हैं। इतना ही नहीं, 2024 के आखिर में अमेरिका ने विश्व बैंक के जरिए 20 अरब डॉलर का कर्ज भी यूक्रेन को दिलवाया था। इसकी ब्याज की भरपाई रूस की जब्त संपत्तियों से की जानी है।
रिपोर्ट बताती है कि फरवरी 2022 से लेकर जून 2026 के बीच अमेरिका ने यूक्रेन को रक्षा उपकरण और सेवाओं के रूप में 68.2 अरब डॉलर से अधिक की सहायता दी है। अमेरिकी रक्षा विभाग के मौजूदा स्टॉक से लगभग 31.7 अरब डॉलर के हथियार और रक्षा सामान दिए गए। यूक्रेन सिक्योरिटी असिस्टेंट इनिशिएटिव के तहत रक्षा उपकरणों की खरीद के लिए लगभग 33.5 अरब डॉलर की राशि आवंटित की गई। इसके अलावा फॉरेन मिलिट्री फाइनेंसिंग के तहत लगभग 3.7 अरब डॉलर की विदेशी सैन्य वित्तीय सहायता दी गई।
2022 से यूक्रेन में मार्शल लॉ लागू
जेलेंस्की अप्रैल 2019 में चुनाव जीतकर यूक्रेन के राष्ट्रपति बने थे। यूक्रेन के संविधान के अनुसार, राष्ट्रपति का कार्यकाल 5 वर्ष का होता है। इस हिसाब से उनका नियमित 5 साल का कार्यकाल 20 मई 2024 को समाप्त हो गया।
यूक्रेन में 24 फरवरी 2022 को संघर्ष के बाद मार्शल लॉ लागू कर दिया गया था। यूक्रेन के कानून और चुनावी नियमों के तहत मार्शल लॉ के प्रभावी रहने के दौरान किसी भी प्रकार के राष्ट्रीय चुनाव (संसदीय या राष्ट्रपति चुनाव) आयोजित कराने पर रोक है।
जेलेंस्की संघर्ष के बीच चुनाव कराने की प्रक्रिया को यूक्रेन के लिए 'सुनामी' जैसा बता चुके हैं। उन्होंने पद से हटाए गए पूर्व रक्षा मंत्री की वोटिंग कराने की मांग को भी खारिज कर दिया था।
ट्रंप ने पिछले साल दिसंबर में यूक्रेन में नए चुनाव कराने की मांग की थी। उस समय कहा भी था कि यूक्रेनी वोटरों को जेलेंस्की को बदलने का विकल्प मिलना चाहिए।
.@POTUS: We told Zelensky, 'You can do whatever you want to Russia, but don't hit the refineries because that's a world problem.' And what does he do? He goes and hits the diesel fuel. He better damn well stop. https://t.co/CdRlMcPlKr
— Rapid Response 47 (@RapidResponse47) October 10, 2026
मस्क ने किया ट्रंप का समर्थन
जेलेंस्की की आलोचना में अरबपति एलन मस्क ने भी राष्ट्रपति ट्रंप का साथ दिया है। मस्क ने रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, 'जेलेंस्की ने हद पार कर दी है।'
उन्होंने वाइट हाउस के एक वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए ये शब्द लिखे। इस वीडियो में जेलेंस्की के बारे में ट्रंप की आलोचना शामिल थी, जिसमें उनका यह सुझाव भी था कि 'अब यूक्रेन के लिए नया राष्ट्रपति चुनने का समय आ गया है।'
मस्क की आलोचना इसलिए भी अहम है क्योंकि यूक्रेन, उनकी कंपनी SpaceX के सैटेलाइट इंटरनेट नेटवर्क 'स्टारलिंक' पर बहुत अधिक निर्भर है। 2022 से स्टारलिंक टर्मिनल कीव के संघर्ष वाले इलाकों में बातचीत, ड्रोन ऑपरेशन और सैन्य यूनिट्स के बीच तालमेल के लिए जरूरी हो गए हैं। अगर स्टारलिंक का एक्सेस बंद हो जाए तो इन क्षमताओं में भारी रुकावट आ सकती है।







