अमेरिका से मुंह मोड़कर यूरोप की तरफ क्यों जा रहा कनाडा?
कनाडा का अब अमेरिका से मोहभंग हो चुका है। राष्ट्रपति ट्रंप के मनमाने फैसलों और आए दिन की धमकियों के कारण अमेरिका से मुंह मोड़ने वालों की लिस्ट में कनाडा नया नाम है।
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अमेरिका से मुंह मोड़कर यूरोप की तरफ क्यों जा रहा कनाडा?
कनाडा के पीएम मार्क कार्नी, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेन

-अमेरिका और कनाडा के ऐतिहासिक संबंधों की जड़ें 250 वर्षों तक जाती हैं।
-करीब 100 साल पहले, 1927 में दोनों के बीच आधिकारिक कूटनीतिक संबंध बने।
-दुनिया की सबसे लंबी खुली और शांत सीमा इन्हीं दोनों देशों के बीच है।
-हाल तक दोनों के संबंध दुनिया में सबसे घनिष्ठ और मजबूत हुआ करते थे।

...लेकिन अब कनाडा का अमेरिका से मोहभंग हो चुका है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के तथाकथित मनमाने फैसलों और आए दिन की धमकियों के कारण अमेरिका से मुंह मोड़ने वाले देशों की लिस्ट में कनाडा नया नाम है। गुरुवार को कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी (Mark Carney) ने यूरोपीय संसद को संबोधित किया। जोरदार स्वागत और तालियों की गड़गड़ाहट के बीच उन्होंने यूरोप से अपने रिश्ते बढ़ाने का ऐलान किया।

कनाडा को यूरोपीय संघ (EU) का पहला 'एसोसिएट मेंबर' बनाने के ऑफर को स्वीकार करते हुए उन्होंने साफ कर दिया कि आने वाले दिनों में कनाडा और यूरोप के रिश्ते नए दौर में दिख सकते हैं। लेकिन ये नौबत आई क्यों? यूरोपीय संघ का पहला एसोसिएट मेंबर बनने से होगा क्या? क्या ये इतना आसान है? और सबसे बड़ी बात कि कनाडा की अमेरिका से बेरुखी का असर क्या होगा? आइए समझते हैं।

कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी यूरोपीय संसद को संबोधित करते हुए।© Facebook/Mark Carney

कनाडा के प्रधानमंत्री ने क्या कहा है?

कनाडाई पीएम कार्नी ने फ्रांस के स्ट्रासबर्ग में यूरोपीय संघ के सांसदों को संबोधित करते हुए यूरोप से नई साझेदारी की अहमियत समझाई, साथ ही अमेरिका पर तंज भी कसा। उन्होंने कहा कि हमारी इस नई साझेदारी का मकसद कोई नया जियोपॉलिटिकल ब्लॉक बनाना नहीं है। हम सिर्फ शिष्टाचार और बेहतर मैनर्स के साथ मिलकर काम करना चाहते हैं। हम किसी को डॉमिनेट करने की ताकत नहीं चाहते।

mark carney
मैं कोई शक्तिशाली प्रतिद्वंद्वी बनने के लिए तीसरा गुट बनाने का प्रस्ताव नहीं रख रहा हूं, बल्कि ये सिर्फ बेहतर तौर-तरीकों और शिष्टाचार के साथ काम करने की एक पहल है। हमारा मकसद दूसरों पर हावी होना या ताकत हासिल करना नहीं है।
मार्क कार्नी, कनाडा के प्रधानमंत्री
मार्क कार्नी, कनाडा के प्रधानमंत्री

उन्होंने कहा कि हम अपनी आर्थिक स्थिति को इतना मजबूत बनाना चाहते हैं कि कोई भी हमारे खुले बाजारों पर कब्जा न कर सके, हमारी संप्रभुता को नुकसान न पहुंचा सके और हमारे लोकतंत्र, आजादी और कानून के शासन को चुनौती न दे सके। ये सिर्फ कनाडा को अधिक मजबूत, संप्रभु, स्वतंत्र, समृद्ध और टिकाऊ बनाने का भविष्य का अवसर है।

कनाडा को EU का एसोसिएट मेंबर बनाने का विचार

दरअसल, यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन (Ursula von der Leyen) ने कनाडा को ईयू का एसोसिएट मेंबर बनाने का विचार रखा है। कार्नी ने इस पर सहमति जता दी है। लेकिन ये भी कहा कि कनाडा न तो यूरोपीय संघ का पूर्ण सदस्य बनना चाह रहा है और न ही वह इस स्थिति में है।

वजह ये है कि यूरोपीय संघ की संधि में प्रावधान है कि सिर्फ यूरोपीय देश ही ईयू के पूर्ण सदस्य बन सकते हैं। कनाडा भौगोलिक रूप से उत्तरी अमेरिका में आता है, इसलिए इस शर्त को पूरा नहीं करता। कनाडा को फुल मेंबर बनाने के लिए मूल संधि में संशोधन करना होगा। ये फिलहाल संभव नहीं दिखती क्योंकि इसके लिए सभी 27 सदस्य देशों की आम सहमति जरूरी होगी और उनकी संसदों से प्रस्ताव पारित कराने होंगे।

एसोसिएट मेंबरशिप क्या है?

ईयू के इसी पेच को देखते हुए कनाडा को ईयू में एसोसिएट मेंबर बनाने की बात हो रही है। फिलहाल पहले से ऐसा कोई पद नहीं है, ईयू की संधियों में भी इसका जिक्र नहीं है, इसलिए ये साफ नहीं है कि इसका स्वरूप क्या होगा। एसोसिएट मेंबर बनने पर कनाडा को क्या अधिकार मिलेंगे और उसके क्या दायित्व होंगे।

यूरोपियन कमीशन इसे नई तरह की ऐसी पार्टनरशिप बता रहा है, जिसका मकसद यूरोप के बाहर के देश के साथ करीबी संबंध स्थापित करना है। ईयू के कई ऐसे देशों के साथ पहले से गहरे संबंध हैं, जो इसके मेंबर नहीं हैं। मिसाल के लिए नॉर्वे, आइसलैंड और लिकटेंस्टीन यूरोपियन इकोनोमिक जोन (EEA) के जरिए ईयू के सिंगल मार्केट में शामिल हैं। स्विट्जरलैंड ने भी ग्रुप के साथ कई द्विपक्षीय समझौते किए हैं। हालांकि इनमें से किसी देश के पास ईयू के एसोसिएट मेंबर का दर्जा नहीं है।

अमेरिका और कनाडा के व्यापारिक रिश्ते

2025 में कुल द्विपक्षीय व्यापार: करीब 880 अरब डॉलर
कनाडा से अमेरिका को कुल आयात: करीब 453.6 अरब डॉलर
अमेरिका से कनाडा को कुल निर्यात : लगभग 426.3 अरब डॉलर

  • करीब 4 करोड़ की आबादी वाले कनाडा की GDP 2.32 ट्रिलियन है।
  • 1988 में फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के बाद से कनाडा अमेरिका पर बहुत निर्भर रहा है।
  • अमेरिका की अर्थव्यवस्था कनाडा से करीब 13 गुना बड़ी है।
  • कनाडा का लगभग 70 फीसदी एक्सपोर्ट अमेरिका को होता है।
  • कनाडा का व्यापार उसकी GDP के 64% के बराबर है, जबकि अमेरिका के लिए यह 25% है।
  • तनाव बढ़ने से पहले अमेरिकी आयात पर कनाडा लगभग 2.4% लगाता था, जो अमेरिका के 5% टैरिफ के आधे से भी कम थी।

ट्रंप ने दी व्यापार रोकने की धमकी

कनाडा को यूरोपीय संघ का एसोसिएट मेंबर बनाने का आइडिया सामने आने पर भी ट्रंप ने तीखा बयान दिया। उन्होंने यूरोप पर भारी भरकम टैरिफ लगाने और व्यापार रोकने की धमकी भी दे दी।

donald trump
कनाडा एक बेहद घटिया व्यापारिक नीति अपना रहा है। मैं साफ कर देना चाहता हूं कि अगर वो (यूरोपीय संघ) ऐसा करते हैं, और मुझे लगता है कि यह एक शत्रुतापूर्ण कदम है तो मैं बहुत भारी टैरिफ लगा दूंगा, या यूरोप के साथ कई चीजों का व्यापार ही बंद कर दूंगा
डोनाल्ड ट्रंप, अमेरिकी राष्ट्रपति
डोनाल्ड ट्रंप, अमेरिकी राष्ट्रपति

कनाडा-अमेरिका टेंशन की 4 बड़ी वजहें

  • टैरिफ वॉरः ट्रंप प्रशासन ने चार हफ्ते पहले ट्रेड वार्ता फेल होने पर कनाडा के 20 अरब डॉलर के उत्पादों पर 50 पर्सेंट टैरिफ लगा दिया था। बदले में कनाडा ने भी जवाबी टैरिफ लगाए।
  • ट्रंप की बयानबाजीः कनाडा के नेताओं पर ट्रंप के निजी हमलों से भी तनाव बढ़ा। पीएम कार्नी का वह कई बार अपमान कर चुके हैं। वह कनाडा को कमजोर सहयोगी बताते हैं।
  • अमेरिका का 51वां राज्यः ट्रंप कनाडा को अमेरिका का 51वां राज्य बनाने पर अड़े हैं। उनकी सोच है कि इससे द्विपक्षीय व्यापार घाटा, टैक्स और सुरक्षा संबंधी चिंताएं खत्म हो जाएंगी।
  • की अर्थव्यवस्था ट्रंप ने कनाडा के लेक ओंटारियो का नाम ही बदलकर लेक अमेरिका रख दिया। कनाडा ने इसे मजाक में उड़ा दिया, लेकिन गूगल और एप्पल जैसी कंपनियों ने दबाव में आकर अपने मैप बदल दिए।

क्या यह वाकई संभव है?

कनाडा पहला देश नहीं है, जिसके लिए ईयू में इस तरह के अस्पष्ट दर्जे पर चर्चा हुई हो। जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ ने इस साल की शुरुआत में यूक्रेन के लिए भी ऐसा ही आइडिया दिया था। हालांकि कीव ने इसे खारिज कर दिया था और यूरोपीय संघ की पूर्ण सदस्यता पर जोर दिया। ये अलग बात है कि इस विचार को ईयू के अंदर भी व्यापक समर्थन नहीं मिल पाया।

कनाडा के प्रस्तावित दर्जे को अभी परिभाषित किया जाना बाकी है और इसके लिए EU के सदस्य देशों के समर्थन की आवश्यकता होगी। ब्रसेल्स और ओटावा के बीच 29-30 अक्टूबर को मॉन्ट्रियल में होने वाले आगामी कनाडा-EU शिखर सम्मेलन से पहले इस मुद्दे पर बातचीत जारी रहने की उम्मीद है।

यूरोप के कितना करीब कनाडा?

यूरोपीय संघ पहले से ही कनाडा का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझीदार है। उनके बीच पहले से ही व्यापक आर्थिक व सुरक्षा संबंध हैं। 2017 में उन्होंने व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता (CETA) किया था। इससे अधिकतर टैरिफ हटा लिए गए थे। 2025 में उन्होंने सिक्योरिटी और डिफेंस पार्टनरशिप की। इस साल कनाडा ईयू के SAFE डिफेंस प्रोग्राम में शामिल होने वाला पहला गैर-यूरोपीय देश भी बन गया है।

इसके अलावा कनाडा में एलएनजी यानी तरल प्राकृतिक गैस के विशाल भंडार हैं। रूस पर निर्भरता घटाने के बाद यूरोप को इनकी जरूरत है। कनाडा के पास काफी मात्रा में महत्वपूर्ण खनिजों के भंडार भी हैं। 

कनाडा और यूरोप के बीच साझा हितों का एक क्षेत्र आर्कटिक भी है। आर्कटिक काउंसिल के आठ मेंबर देशों में कनाडा भी शामिल है। ईयू के सदस्य देशों में सिर्फ डेनमार्क, फिनलैंड और स्वीडन की इस काउंसिल में हैं।

कनाडा ने यूरोप से रक्षा संबंध भी बढ़ाए हैं। हाल ही में जर्मनी से अटैक सबमरीन और स्वीडन की साब (Saab) कंपनी से एयरबोर्न अर्ली वार्निंग एयरक्राफ्ट खरीदे हैं।

अब सवाल ये है कि क्या ट्रंप का कड़वाहट भरा रवैया कनाडा को हमेशा के लिए यूरोप के करीब ले जाएगा या फिर ये सिर्फ एक रणनीतिक दांव है? लेकिन एक बात तो साफ है कि दुनिया का नक्शा बदल रहा है, अमेरिका के पुरानी सहयोगियों का विश्वास डगमगा रहा है, दशकों पुराने समीकरण नई करवट ले रहे हैं।

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