गांव, ब्लड, DNA...132 साल बाद पुरखों की जड़ें कैसे ढूंढ रही सूरीनाम की फैमिली?
सूरीनाम से करीब 15 हजार किलोमीटर का सफर कर यूपी के गाजीपुर पहुंचा परिवार अब अपने पुरखों की जड़ें तलाश रहा है। परिवार के लोग खानपुर गांव में लोगों से मिल रहे हैं।
गांव, ब्लड, DNA...132 साल बाद पुरखों की जड़ें कैसे ढूंढ रही सूरीनाम की फैमिली?
RT© फोटो : ANI

132 साल पहले भारत छोड़ने वाले शख्स का परिवार अब अपने पुरखों की जड़ें ढूंढता यूपी के गाजीपुर पहुंचा है। रामनंदन सूरीनाम जाकर वहीं बस गए। उनकी अगली पीढ़ी को अपने पूर्वजों के बारे में बहुत कम जानकारी थी। अब उन्हें लगा कि अपने पुरखों की तलाश करनी चाहिए। रामनंदन जिन्हें छोड़ गए थे, उनके परिवार में अब कौन-कौन है? मन में उमड़ते ये विचार उन्हें गाजीपुर खींच लाए।हालांकि, उन्हें यह नहीं पता था कि अपनी जड़ों की तलाश कहां से शुरू करें।

भारत आने के बाद परिवार गाजीपुर के खानपुर गांव पहुंचा। यहां उन्होंने अपने मूल का पता लगाने के लिए स्थानीय लोगों से मुलाकात की। वाराणसी के 'ज्ञान लैब' में जमा कराए गए DNA टेस्ट के नतीजों के आधार पर, परिवार को उम्मीद है कि वे पूर्वी उत्तर प्रदेश और गाजीपुर में अपने भारतीय रिश्तेदारों को ढूंढ पाएंगे।

15 हजार किमी दूर से एक परिवार 132 साल बाद पुरखों की धरती पर लौटा है

अब आगे की प्रक्रिया समझिए

प्रो. ज्ञानेश्वर चौबे ने RT हिंदी से बातचीत में बताया कि सूरीनाम का परिवार, जो अपने रिश्तेदारों के ब्लड सैंपल लेकर आया है, उनके ब्लड सैंपल लेकर लैब में डीएनए निकाला जाएगा। इसके बाद दोनों क्रोमोसोम्ज्स का माइटोक्रॉन्ड्रियल एनालिसिस, Y क्रोमोसोम्स एनालिसिस और इसके बाद ऑटोसोमल एनालिसिस किया जाएगा।

इस तरह की जांच में कितना समय लगता है? प्रो. ज्ञानेश्वर चौबे का कहना है कि इन सैंपल का, लैब के सैंपल से मिलान किया जाएगा। सैंपल तैयार करने की प्रक्रिया, कंस्ट्रेशन को एक लेवल तक ले जाने समेत अन्य काम में कम से कम दो महीने का समय लग सकता है।

प्रो. चौबे के अनुसार इन सैंपल का डीएनए डेटा जेनरेट करने में कम से कम एक महीने का समय लगता है। ऐसे में करीब तीन महीने बाद परिवार से जुड़ा डेटा आ जाएगा। प्रो. चौबे ने कहा कि डेटा आने के बाद एक सप्ताह के अंदर बायोइंफोर्मेटिक्स एनालिसिस के बाद रिजल्ट सामने आएगा।

कैसे जुड़ेंगे पुरखों के तार?

उन्होंने समझाया कि दो अलग-अलग व्यक्तियों के ब्लड सैंपल से डीएनए विश्लेषण (DNA Analysis) के जरिए वंशावली या पारिवारिक संबंध सिद्ध करने की प्रक्रिया जेनेटिक वंशावली विज्ञान (Genetic Genealogy) पर आधारित होती है। इसके बाद डीएनए निष्कर्षण (DNA Extraction) होता है।

ब्लड में मौजूद वाइट ब्लड सेल्स से डीएनए निकाला जाता है। स्पेक्ट्रोफोटोमेट्री या फ्लोरोमेट्री तकनीक से डीएनए की सांद्रता और शुद्धता मापी जाती है ताकि आगे का परीक्षण सटीक रहे।

निकाले गए डीएनए के विशिष्ट टारगेट पार्ट्स (Markers) की पीसीआर मशीन में लाखों-करोड़ों कॉपियां तैयार की जाती हैं जिससे माइक्रो लेवल के मार्करों का भी एनालिसिस संभव हो सके। एडवांस सीक्वेंसर और डीएनए माइक्रोरी चिप्स (SNP Microarrays) का उपयोग करके जीनोम के लाखों विशिष्ट बिंदुओं का एनालिसिस किया जाता है।

वाराणसी के ज्ञान लैब में डीएनए सैंपल देते परिवार के सदस्य।© फोटो : ANI

4 पीढ़ियों से पुराने रिश्ते में कौन-कौन से मार्कर

सामान्य पितृत्व जांच (Paternity Test) में केवल 15-20 STR मार्कर पर्याप्त होते हैं क्योंकि संबंध केवल एक पीढ़ी (माता-पिता और बच्चे) का होता है। लेकिन 130 साल पुराने पारिवारिक रिश्तों की पुष्टि के लिए तीन मुख्य जेनेटिक टूल का यूज किया जाएगा।

Y-क्रोमोसोम्स एनालिसिस : यह केवल पुरुषों (पिता से पुत्र) में बिना किसी बड़े बदलाव के पीढ़ी-दर-पीढ़ी ट्रांसफर होता है। यदि, सूरीनाम से आया पुरुष सदस्य और खानपुर का परिवार एक ही पुरुष पूर्वज (जैसे दादा/परदादा के भाई) के वंशज हैं, तो दोनों का Y-Haplogroup और Y-STR प्रोफाइल शत-प्रतिशत या मामूली म्यूटेशन के साथ मेल खाएगा। इससे एक ही कुल/गोत्र की पुष्टि हो सकती है।

ऑटोसोमल एनालिसिस : व्यक्ति में 22 जोड़े ऑटोसोमल क्रोमोसोम माता और पिता दोनों से आते हैं। पीढ़ियां बीतने के साथ डीएनए पुनर्संयोजन (Recombination) के कारण साझा डीएनए के टुकड़े छोटे होते जाते हैं। जेनेटिक्स में इसे centiMorgans (cM) में मापा जाता है।

4th से 5th कजिन्स में आमतौर पर 15 से 50 cM का साझा डीएनए खंड (IBD Segments) मिल सकता है। यदि दोनों व्यक्तियों में ऐसे साझा ब्लॉक मिलते हैं, तो यह सीधे तौर पर 4-5 पीढ़ी पहले साझा पूर्वज होने का पक्का प्रमाण होता है।

माइटोकॉन्ड्रियल डीएनए (mtDNA): यह केवल मां से संतान में जाता है। यदि वंशावली महिला पूर्वज (जैसे राजवंतिया) की मातृ-शाखा से जुड़ी हो, तो यह टेस्ट उपयोगी होता है।

बायोइंफोर्मेटिक्स एनालिसिस: इस एनालिसिस के बाद एक सम्बंध गुणांक (Kinship Index) निकलता है। अगर यह मान सामान्य स्थानीय आबादी के औसत स्तर से ज्यादा आता है और दोनों में विशिष्ट साझा जेनेटिक सिग्नेचर मिलते हैं, तो वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित हो जाएगा कि दोनों परिवार एक ही पूर्वज की शाखाएं हैं।

परदेस की वो यात्रा

दक्षिण अमेरिका के सूरीनाम का एक परिवार, अपनी पुश्तैनी जड़ों का पता लगाने के लिए 132 साल बाद गाजीपुर पहुंचा है। जॉन मोहनलाल रामनंदनलाल और शारदा रामनंदनलाल अपने 70 साल के पिता की इच्छा पूरी करने के लिए गाजीपुर के खानपुर गांव और वाराणसी में हैं। परिवार अपने वंश की वैज्ञानिक पुष्टि करने और अपने पूर्वजों का पता लगाने में जुटा है।

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साल 1892 में 24 साल के रामनंदन 25 अगस्त 1894 को 'एम्स' (Ames) नाम के एक ब्रिटिश जहाज से अनुबंधित मजदूरों (indentured labourers) के रूप में कलकत्ता से सूरीनाम (पैरामारिबो) के लिए रवाना हुए थे। उनके साथ 22 साल की राजवंतिया भी थीं।

सूरीनाम में बसने के बाद रामनंदन और राजवंतिया ने 20 दिसंबर 1911 को आधिकारिक तौर पर शादी कर ली। परिवार के रिकॉर्ड में दर्ज है कि उनके बेटे जयकरम ने 15 अक्टूबर 1934 को आधिकारिक तौर पर 'रामनंदनलाल' सरनेम अपना लिया। यही सरनेम आज की पीढ़ी तक चला आ रहा है। अब यह परिवार 132 साल बाद भारत आकर अपने पुरखों की जड़ तलाश रहा है।

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