Niger और Nigeria की स्पेलिंग के 'ia' ने कैसे 0% में भारत पहुंचा दिया सोयाबीन?
सोयाबीन नाइजर का या नाइजीरिया का? इस एक सवाल ने भारत के कस्टम विभाग के कान खड़े कर दिए हैं। जांच चल रही है। अधिकारियों को शक है कि सोयाबीन आया नाइजीरिया से लेकिन आयात शुल्क यानी इंपोर्ट ड्यूटी से बचने के लिए खेल किया गया। पूरा मामला समझिए।
Niger और Nigeria की स्पेलिंग के 'ia' ने कैसे 0% में भारत पहुंचा दिया सोयाबीन?
नाइजर में सोयाबीन की खेती की प्रतीकात्मक तस्वीर

अफ्रीका के दो देश, एक नाइजर तो दूसरे का नाम है नाइजारिया। मैप में देखेंगे तो दोनों पड़ोसी की तरह एकदूसरे के अगल-बगल दिखते हैं। अब नाम पढ़िए, क्या दिखा? दोनों में 'ia' का ही फर्क है, है न! अब इसी एक फर्क ने पूरा खेल कर दिया है। इसने भारत में बैठे कस्टम अधिकारियों का दिमाग घुमा दिया है।

दरअसल, नाइजर ने समंदर के रास्ते भारत को 3,80,868 टन सोयाबीन भेजा, लेकिन नाइजर में तो सोयाबीन का उत्पादन इतनी बंपर मात्रा में होता ही नहीं है कि वह किसी दूसरे देश को सोयाबीन बेच सके। अब इस इंपोर्ट की जांच हो रही है कि कोई देश इतने कम उत्पादन के बावजूद बंपर मात्रा में सोयाबीन कैसे भेज पा रहा है?

यहीं से जुड़ने लगी कड़ी से कड़ी

कस्टम अधिकारियों को शक है कि यह पूरा सोयाबीन नाइजर नहीं बल्कि नाइजीरिया से आया है और इंपोर्ट ड्यूटी(आयात शुल्क) से बचने के लिए इस पर नाइजीरिया की जगह नाइजर का गलत लेबल लगाकर भारत भेज दिया गया।

आइए आपको सरल भाषा में पूरी बात समझाते हैं...

पहले समझिए पूरा मामला क्या है?

भारत के कस्टम विभाग के पास एक मामला आया है। अफ्रीकी देश नाइजर से समंदर के रास्ते सोयाबीन हिंदुस्तान आया है। वाणिज्य मंत्रालय (Commerce Ministyry) के आंकड़ों के अनुसार, साल 2026 के पहले सात महीनों में भारत का कुल सोयाबीन आयात पिछले साल की इसी अवधि के महज 1996 टन से उछलकर रिकॉर्ड 9,09,606 टन पर पहुंच गया। वहीं, नाइजर से आने वाले घोषित माल की मात्रा शून्य से बढ़कर 3,80,868 टन हो गई। असल दिक्कत यहीं है।

नाइजर को सोयाबीन उत्पादक देश नहीं माना जाता क्योंकि वहां सोयाबीन का उत्पादन बहुत कम होता है या कहें इतना नहीं होता कि वह किसी देश या भारत को बंपर मात्रा में भेज सके।

भारतीय सीमा शुल्क (कस्टम) अधिकारी नाइजर से आने वाले सोयाबीन के आयात में अचानक हुई भारी बढ़ोतरी की जांच कर रहे हैं। कस्टम विभाग के एक पत्र और सूत्रों के अनुसार, अधिकारियों को शक है कि यह माल असल में नाइजीरिया से आया है और आयात शुल्क (इंपोर्ट ड्यूटी) से बचने के लिए इस पर गलत लेबल लगाया गया है।

दोनों अफ्रीकी देशों की लोकेशन

मैप से समझिए कैसे पहुंचा सोयाबीन

भारत में जांच क्यों होने लगी?

भारत सरकार दुनिया के सबसे कम विकसित देशों (LDCs - Least Developed Countries) को बढ़ावा देने के लिए वहां से आने वाले सामान पर कोई टैक्स नहीं लेती। नाइजर इसी सूची में आता है, इसलिए वहां से सोयाबीन मंगाने पर 0% टैक्स लगता है। नाइजर का पड़ोसी देश है नाइजीरिया। नाइजीरिया पूरे अफ्रीका महाद्वीप में सबसे ज्यादा सोयाबीन उगाता है और बेचता है, लेकिन नाइजीरिया को भारत की तरफ से टैक्स में कोई छूट नहीं है। अगर कोई सीधे नाइजीरिया से सोयाबीन मंगाता है, तो उसे भारत सरकार को 45% का भारी टैक्स देना पड़ता है।

मामले की जानकारी रखने वाले दो सरकारी और उद्योग से जुड़े दो सूत्रों ने रॉयटर्स को बताया कि कस्टम अधिकारी अब आयातकों से यह साबित करने को कह रहे हैं कि नाइजर से मंगाया गया सोयाबीन वास्तव में टैक्स छूट पाने का हकदार है या नहीं। सूत्रों का कहना है कि अगर लेबल गलत पाया जाता है, तो आयातकों को पूरा 45% आयात शुल्क चुकाना पड़ेगा।

सूत्रों के अनुसार, भारतीय कस्टम अधिकारियों ने शुरुआत में खेप को तब मंजूरी दे दी थी, जब आयातकों ने टैक्स-फ्री मंजूरी के लिए जरूरी दस्तावेज पेश किए थे, जिनमें नाइजर की ओर से जारी 'उत्पत्ति प्रमाण पत्र' (certificate of origin) आदि शामिल थे।

दुनिया के नक्शे में कहां हैं नाइजर और नाइजीरिया

नाइजर चारों तरफ से जमीन से घिरा (लैंडलॉक्ड) देश है और वहां से सोयाबीन की खेप पड़ोसी देश नाइजीरिया के रास्ते भेजी जा सकती है। सीमा शुल्क (कस्टम) अधिकारियों ने आयातकों से सड़क के रास्ते (ट्रांसपोर्ट) का पूरा ब्योरा मांगा है, जिसमें नाइजर से माल ले जाने के लिए जारी किए गए पारगमन परमिट (ट्रांजिट परमिट) भी शामिल हैं।

भारतीय आयातकों का कहना है कि कस्टम विभाग ने जो जानकारियां मांगी हैं, उनमें से कुछ उनके पास उपलब्ध नहीं हैं। इसलिए उन्होंने अपने विदेशी सप्लायर्स से ये रिकॉर्ड देने को कहा है।

कस्टम का नोटिस पाने वाले एक आयातक ने कहा-

”हमने सोयाबीन का आयात तभी किया जब सप्लायर्स ने हमें बताया कि यह माल नाइजर का ही है और उन्होंने इसके लिए सभी जरूरी दस्तावेज भी दिए थे।”

सोयाबीन कौन कितना पैदा करता है?

कहां कितना उत्पादन, समझिए

Source- US Department Of Agriculture USDA के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार

45 फीसदी वाला इंपोर्ट शुल्क समझिए

यह इंपोर्ट शुल्क सामान्यतः इंपोर्ट किए सोयाबीन की CIF value यानी Cost, Insurance और Freight मिलाकर भारत पहुंचने की कीमत पर लगता है। उदाहरण के लिए, अगर किसी शिपमेंट की CIF value ₹100 करोड़ है, तो 45% शुल्क लगभग ₹45 करोड़ का होगा। इसके अलावा लागू Cess और IGST अलग से जुड़ सकते हैं। अगर certificate of origin फर्जी या गलत निकले, तो आयातकों पर पहले से आयात हुए माल का शुल्क वसूला जा सकता है। इससे पोर्ट्स पर या ट्रांजिट में पड़े शिपमेंट रुक सकते हैं, क्योंकि न आयातक और न निर्यातक 45% का बोझ उठाना चाहते हैं।

दोनों देशों के नाम का क्या है कनेक्शन?

नाइजर (Niger) और नाइजीरिया (Nigeria) दोनों देशों के नाम एक ही भौगोलिक स्रोत नाइजर नदी (Niger River) से जुड़े हैं। यह नदी पश्चिम अफ्रीका की सबसे प्रमुख और तीसरी सबसे लंबी नदी है, जो इन दोनों देशों से होकर (या इनकी सीमा से) बहती है।

नाइजीरिया और नाइजर नदी का कनेक्शन

  • 'नाइजीरिया' नाम इस देश से होकर बहने वाली नाइजर नदी से लिया गया था।
  • ऐसा माना जाता है कि यह नाम 19वीं सदी के अंत में ब्रिटिश पत्रकार फ्लोरा शॉ ने गढ़ा था, जिन्होंने बाद में ब्रिटिश औपनिवेशिक प्रशासक बैरन फ्रेडरिक लुगार्ड से शादी की थी।
  • 19वीं सदी के यूरोपीय उपनिवेशवाद से पहले, टिम्बकटू के आसपास नदी के मध्य हिस्से के किनारे रहने वाले लोग इस नाम का इस्तेमाल करते थे।
  • आज का नाइजीरिया विभिन्न युगों में उभरी सभ्यताओं, राज्यों, साम्राज्यों, एक खिलाफत और औपनिवेशिक शासन के लंबे इतिहास से होकर गुजरा है।
  • इसके बाद ही 1914 में नाइजीरिया राष्ट्र-राज्य की नींव पड़ी और आगे चलकर 1960 में इसे आजादी मिली।

नाइजर- जमीन से घिरा एक लैंडलॉक्ड देश

  • पश्चिम अफ्रीका में स्थित यह देश चारों तरफ से जमीन से घिरा (लैंडलॉक्ड) है
  • इसका नाम नाइजर नदी के नाम पर पड़ा है, जो इसके दक्षिण-पश्चिमी हिस्से से होकर बहती है
  • 'नाइजर' नाम की उत्पत्ति तामाशेक (तुआरेग) भाषा के वाक्यांश 'गेर एन-गेरेन' से हुई है, जिसका अर्थ होता है—”नदियों के बीच की नदी” (या विशाल नदी)।
  • नाइजर कई जातीय समूहों का घर है, जिनमें सबसे बड़े समूह हौसा, सोंघाई-जरमा और तुआरेग हैं।
    इस देश की राजधानी नियामी (Niamey) है।

भारत में सोयाबीन का उत्पादन कितना होता है?

  • भारत में सोयाबीन का उत्पादन आमतौर पर लगभग 12 से 15 मिलियन टन (1.2 से 1.5 करोड़ टन) प्रति वर्ष रहता है।
  • सरकार के अंतिम अनुमान के अनुसार 2024-25 में भारत ने रिकॉर्ड 15.26 मिलियन टन सोयाबीन पैदा किया
  • इसके बाद 2025-26 में उत्पादन गिरकर लगभग 12.6 मिलियन टन रहने का अनुमान है।
  • Soybean Processors Association of India ने 2025-26 के लिए अपने संशोधित अनुमान में उत्पादन 11.03 मिलियन टन बताया है
  • भारत का सोयाबीन उत्पादन मुख्य रूप से मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान में होता है।

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