UNSC में 'सेकेंड क्लास' स्थायी सीट? भारत ने कहा, आधे-अधूरे सुधार से काम नहीं चलेगा
यूएन में भारत के स्थायी प्रतिनिधि ने बताया कि पिछले करीब 35 साल में यूएनएससी के 5 स्थायी सदस्यों में से दो ने अब तक वीटो का इस्तेमाल नहीं किया है। ज्यादातर वीटो लगाने या उसकी धमकियां बाकी तीन सदस्यों की तरफ से ही आई हैं।
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UNSC में 'सेकेंड क्लास' स्थायी सीट? भारत ने कहा, आधे-अधूरे सुधार से काम नहीं चलेगा

संयुक्त राष्ट्र के मौजूदा ढांचे में सुधार की मांग दशकों से उठती रही है। 1945 की इसका गठन मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए किया गया था। तब से दुनिया बहुत बदल चुकी है। बावजूद इसके यूएन में पश्चिमी राष्ट्रों के दबदबे के चलते इसमें सुधार अब तक नहीं हो सका है। अब भारत ने एक बार फिर से संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) की पूर्ण बैठक के दौरान इसमें सुधार और 'वीटो' के अधिकार का मुद्दा मजबूती से उठाया है। भारत ने कहा कि यूएनएससी में सेकेंड क्लास स्तर की सीट से काम नहीं चलेगा, जिसमें सिर्फ 5 देशों के पास ही वीटो पावर हो।

यूएन में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पर्वथानेनी हरीश ने बिना वीटो पावर के स्थायी सीट देने के प्रस्तावों का विरोध किया और कहा कि वीटो कोई छोटे-मोटे राजनीतिक स्वार्थ साधने का साधन नहीं, बल्कि एक बड़ी जिम्मेदारी है। ऐसे में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के सभी पांचों ढांचों में सुधार की बात एक साथ होनी चाहिए। इस दौरान भारत ने यूएन को यह भी याद दिलाया कि 1945 वाली व्यवस्थाएं बहुत बदल चुकी हैं, इसलिए उसे आज की वास्तविकता को देखना होगा। 

भारत ने याद दिलाई वीटो की धमकियां

भारत ने कहा कि पिछले करीब 35 साल में यूएनएससी के 5 स्थायी सदस्यों (P5) में से दो ने अब तक वीटो का इस्तेमाल नहीं किया है। ज्यादातर वीटो लगाने या उसकी धमकियां P5 के बाकी तीन सदस्यों की तरफ से ही आई हैं, इसलिए यूएनएससी में टुकड़ों में किए जाने वाले सुधार काम नहीं आएंगे।

भारत ने कहा कि साल 2022 की 'वीटो पहल' को एक बदलाव की शुरुआत माना गया था। हालांकि प्रस्ताव UNGA 76/262 के बाद से जितने बड़े पैमाने पर वीटो का इस्तेमाल किया गया है, उसका रिकॉर्ड इसके बिल्कुल उलट कहानी कहता है।

'छिपा हुआ हथियार न बने वीटो'

भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि बिना लिखित सहमति के बनने वाले नियम, सुरक्षा परिषद के फैसलों और प्रतिबंध समितियों में छिपे हुए वीटो को बढ़ावा देते हैं। आपसी बातचीत में 'आम सहमति' का इस्तेमाल छिपकर वीटो लगाने का हथियार नहीं बनना चाहिए। 

भारत ने सभी सदस्यों को समान अधिकार की वकालत करते हुए कहा कि वीटो के बिना नए लंबे समय के लिए मिलने वाले पद 'दूसरे दर्जे के सदस्य' पैदा करेंगे और इससे हमेशा असमानता बनी रहेगी। भारत ने कहा कि नए सदस्यों समेत सभी स्थायी सदस्यों को समान अधिकार मिलने चाहिए। UNSC को 1945 की पुरानी वास्तविकताओं को नहीं, बल्कि आज की दुनिया की सच्चाइयों को दिखाना चाहिए।

वीटो के बिना नए स्थाई सदस्य 'दोयम दर्जे के' बन जाएंगे: भारत

भारत ने जोर देकर कहा कि UNSC में सुधार का कोई भी ऐसा तरीका, जो बिना वीटो वाले स्थाई सदस्यों की एक नई श्रेणी बनाता है, वह उन्हें प्रभावी रूप से “दूसरे दर्जे” के स्तर पर लाकर खड़ा कर देगा। इससे निर्णय लेने की पूरी प्रक्रिया पर मौजूदा पांच स्थायी शक्तियों का ही नियंत्रण बना रहेगा। क्योंकि इसमें सिर्फ चुनिंदा देशों के पास ही वीटो पावर होगी और बाकी नए स्थाई सदस्यों के लिए यह स्थाई सीट सेकेंड क्लास बनकर रह जाएगी, जिसके पास समान अधिकार नहीं होंगे। इसलिए पूर्ण सुधार होना चाहिए।

क्या है सुरक्षा परिषद का ढांचा?

5 स्थायी सदस्य

  1. अमेरिका
  2. फ्रांस
  3. ब्रिटेन
  4. रूस
  5. चीन
RT

10 अस्थायी सदस्य

ये 2 साल के कार्यकाल के लिए चुने जाते हैं। इसके बाद किसी नए देश को सदस्य बनने का मौका मिलता है।

नए स्थाई सदस्यों को मिले वीटो का अधिकार

यूएन में भारत ने कहा कि जब तक वीटो का सिस्टम है, तब तक इसे सुरक्षा परिषद में सुधार के बाद बनने वाले नए स्थायी सदस्यों को भी दिया जाना चाहिए, क्योंकि निष्पक्षता और न्याय की मांग है कि सभी स्थायी सदस्यों को समान अधिकार और जिम्मेदारियां मिलनी चाहिए। वीटो पर भारत का रुख साफ है कि जब तक वीटो का अस्तित्व है, इसे एक सुधरे हुए परिषद के सभी स्थायी सदस्यों के पास होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि वीटो अधिकारों के साथ या उसके बिना स्थायी सदस्यों की एक नई श्रेणी बनाना, पहले से ही जटिल चर्चा को और अधिक उलझा देगा और “उस असमानता को और मजबूत कर देगा, जिसे हम सुधारना चाहते हैं।”

भारत स्थायी सीट का मजबूत दावेदार क्यों?

भारत में दुनिया की सबसे बड़ी जनसंख्या वाला देश है। यहां विश्व की करीब 18 प्रतिशत आबादी रहती है। 

भारत 26 जून 1945 को ही संयुक्त राष्ट्र चार्टर पर हस्ताक्षर कर दिए थे, तब वह आजाद भी नहीं हुआ था। 

भारत अब तक दो-दो साल के लिए 8 बार UNSC अस्थायी सदस्य रह चुका है।

2021–22 के कार्यकाल के लिए भारत को 193 में से 184 वोट मिले थे, ये उसकी सर्वमान्यता को दिखाता है।

1948 से अब तक 2.75 लाख से ज्यादा भारतीय सैन्य और पुलिसकर्मी UN के ध्वज के अधीन सेवा दे चुके हैं।

भारत यूएन के शांति अभियानों में सबसे बड़े और लगातार योगदान देने वाले देशों में शामिल है।

उभरती ग्लोबल ताकत

भारत एक उभरती हुई वैश्विक ताकत है। वह G20, BRICS, QUAD और SCO जैसे अलग-अलग मंचों का सदस्य है। वह पश्चिमी देशों, रूस और विकासशील दुनिया... तीनों से संवाद कर सकता है। भारत परमाणु हथियार संपन्न देश है। उसके पास बड़ी सैन्य क्षमता, अंतरिक्ष कार्यक्रम, बड़ा बाजार और हिंद महासागर में महत्वपूर्ण भौगोलिक स्थिति है। ये खूबियां उसे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सीट का सबसे बड़ा दावेदार बनाती हैं। 

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