'दोस्तो, आज की रात नहीं सोना है', कैसे ‘लूला आर्मी’ ने ब्राजील चुनाव की हवा बदल दी
ब्राजील में लूला द सिल्वा की चुनावी वापसी में ‘लूला आर्मी’ नाम के वॉट्सऐप चैनल की भूमिका चर्चा में रही। 1.08 करोड़ फॉलोअर्स वाले इस चैनल ने वीडियो शेयर करने, हैशटैग चलाने और मतदाताओं तक पहुंचने में समर्थकों को जुटाया। जानिए, सोशल मीडिया के इस अभियान ने चुनावी प्रचार को कैसे प्रभावित किया।
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'दोस्तो, आज की रात नहीं सोना है', कैसे ‘लूला आर्मी’ ने ब्राजील चुनाव की हवा बदल दी
ब्राजील में लूला द सिल्वा की जीत।RT

ब्राजील के राष्ट्रपति चुनाव में लगातार चौथी बार जीत दर्ज करने वाले लूला द सिल्वा की चुनावी जीत के पीछे एक वॉट्सऐप चैनल की भूमिका भी चर्चा में है। ‘दोस्तो, आज की रात नहीं सोना है’ जैसे संदेशों के साथ इस चैनल ने लाखों समर्थकों को चुनावी प्रचार में जुटाए रखा। ‘लूला आर्मी’ नाम के इस चैनल से 1.08 करोड़ लोग जुड़ गए। समर्थकों को वीडियो शेयर करने, हैशटैग चलाने और नए मतदाताओं तक पहुंचने के काम सौंपे गए। इस डिजिटल अभियान ने लूला की मुहिम को कैसे नई ताकत दी और उनकी चुनावी वापसी में इसकी कितनी भूमिका रही? आइए समझते हैं।

‘लूला आर्मी’ कैसे बनी?

लूला द सिल्वा की चुनावी मुहिम से जुड़े इस वॉट्सऐप चैनल का नेतृत्व सांसद आंद्रे जानोनेस कर रहे थे। चुनाव में लूला के सामने दक्षिणपंथी उम्मीदवार फ्लावियो बोल्सोनारो की चुनौती थी। एक समय ऐसा लग रहा था कि लूला के लिए मुकाबले में वापसी करना मुश्किल होगा, लेकिन आखिरी तीन हफ्तों में उनकी मुहिम ने जोर पकड़ लिया।

ब्राजील में जीत के बाद लूला ने की आंद्रे जानोनेस की तारीफ।AP

’लूला आर्मी’ ने समर्थकों को ऑनलाइन एक्टिव रखने के लिए एक खास तरीका अपनाया। चैनल पर उन्हें ऐसे मैसेज और तैयार कंटेंट दिए जाते थी, जिन्हें वे अपने दोस्तों और परिवार के लोगों के साथ शेयर कर सकते थे। हर मैसेज के साथ समर्थकों को एक खास काम दिया जाता था, ताकि सोशल मीडिया पर लूला की मौजूदगी बढ़ाई जा सके।

’दोस्तो, आज की रात नहीं सोना है’

इस अभियान में जानोनेस का अंदाज काफी आक्रामक था। वह अपने समर्थकों को लगातार नए काम सौंपते रहते थे। कभी किसी चुनावी वीडियो को ज्यादा से ज्यादा शेयर करने के लिए कहते, तो कभी किसी नए हैशटैग को लोकप्रिय बनाने की अपील करते। उनके संदेशों में लिखा होता था, ‘दोस्तो, यह जरूरी है’, ‘अभी सोने मत जाओ’, ‘मिशन पूरा होने से पहले खाना नहीं’ और ‘जाने से पहले एक काम और करना है।’

इन मैसेजेस का मकसद समर्थकों को लगातार एक्टिव रखना और चुनावी प्रचार को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाना था। चुनाव से ठीक पहले जानोनेस ने 24 घंटे का एक लाइव स्ट्रीम भी किया, जिसे ‘टर्नअराउंड लाइवस्ट्रीम’ कहा गया। यह उस समय हुआ, जब सर्वेक्षणों में फ्लावियो बोल्सोनारो की जीत के संकेत मिल रहे थे।

सोशल मीडिया पर किसकी पकड़ थी?

ब्राजील की राजनीति में सोशल मीडिया लंबे समय से अहम भूमिका निभाता रहा है। साल 2018 में पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो की जीत के बाद वॉट्सऐप और टेलीग्राम जैसे प्लेटफॉर्म पॉलिटिकल प्रचार के बड़े माध्यम बन गए थे। माना जाता था कि बोल्सोनारो के समर्थक इन ऐप्स पर ज्यादा मजबूत हैं। ऐसे में ‘लूला आर्मी’ का तेजी से बढ़ना ब्राजील के वामपंथी खेमे के लिए अहम माना गया। इस अभियान ने समर्थकों को एक साथ जोड़ने और ऑनलाइन प्रचार में उनकी भागीदारी बढ़ाने का तरीका दिया।

हालांकि, लूला की पार्टी के कुछ नेताओं को जानोनेस के आक्रामक अंदाज से चिंता भी थी। उन्हें डर था कि सोशल मीडिया पर इस तरह की टकराव वाली भाषा लूला की उस छवि को नुकसान पहुंचा सकती है, जिसमें उन्हें एक संतुलित और उदार नेता के तौर पर पेश किया जा रहा था। इसके बावजूद लूला ने अपनी जीत के भाषण में जानोनेस की तारीफ की। उन्होंने उन्हें ‘हमारा जनरल’ कहा और हर दिन समर्थकों का मनोबल बढ़ाने के लिए धन्यवाद दिया।

क्या वॉट्सऐप चैनल ने बदल दिया चुनाव?

लूला के समर्थक उनकी वापसी का श्रेय ‘लूला आर्मी’ को देते हैं, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि सिर्फ सोशल मीडिया को जीत की वजह मानना सही नहीं होगा। यह तय करना भी मुश्किल है कि इस सोशल अभियान से कितने वोटर्स का फैसला बदला। लूला की रणनीति में बदलाव भी उनकी वापसी की अहम वजह रही है। उनकी मुहिम ने सिर्फ ऑनलाइन प्रचार पर भरोसा नहीं किया, बल्कि स्थानीय स्तर पर लोगों तक पहुंचने की कोशिशें भी तेज कीं।

लूला के कैंपेन में यह संदेश दिया गया कि फ्लावियो बोल्सोनारो की जीत से सामाजिक कल्याण योजनाओं में बदलाव हो सकता है और लोगों के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। इस तरह चुनावी प्रचार को लोगों की रोजमर्रा की चिंताओं से जोड़ने की कोशिश की गई।

ऑनलाइन प्रचार के साथ सड़क पर भी उतरे समर्थक

ब्राजील के साओ पाउलो में लूला द सिल्वा के समर्थक उनकी एक गुड़िया और कार्ड दिखाते हुए।AP

लूला की जीत में ऑनलाइन प्रचार के साथ जमीनी मेहनत का भी अहम योगदान रहा है। उनके समर्थकों ने लोगों को वोट देने के लिए प्रेरित किया और उन मतदाताओं तक पहुंचने की कोशिश की, जो अपना वोट तय नहीं कर पाए थे। यानी सोशल मीडिया पर पैदा हुआ उत्साह तब ज्यादा असरदार हुआ, जब उसे वास्तविक दुनिया में लोगों से जुड़ने के लिए इस्तेमाल किया गया।

चुनाव से लूला ने क्या सीखा?

लूला ने भी अपनी जीत के भाषण में संकेत दिया कि चुनाव के दौरान हुए इन अनुभवों का असर उनकी सरकार के कामकाज पर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि चुनाव ने उन्हें कई सबक दिए हैं और वह ब्राजील को चलाने के तरीके में बदलाव करना चाहते हैं। लूला ने लोगों को फैसले लेने की प्रक्रिया में ज्यादा भागीदारी देने और अपनी सरकार में डिजिटल संवाद की भूमिका बढ़ाने की बात कही। ब्राजील के चुनाव में सोशल मीडिया पर लोगों को एक्टिव करना और फिर उन लोगों को लूला के पक्ष में वोट करने के लिए फिजिकली मनाना, इन दोनों फैक्टर्स ने लूला की मुहिम को नई ताकत दी। इसी का असर रहा कि वह एक बार फिर से राष्ट्रपति की कुर्सी तक पहुंचने में कामयाब रहे।  

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