इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की राजनीतिक किस्मत का फैसला होने जा रहा है। मंगलवार को संसद यानी नेसेट के चुनाव के लिए हो रही वोटिंग के ठीक बाद एग्जिट पोल आने लगेंगे। इसमें चुनाव की एक झलक देखने को मिलेगी। पहले के सर्वे में नेतन्याहू विपक्षी नेता और पूर्व सेना प्रमुख गादी आइजेनकोट से पिछड़ते दिखे थे।
चैनल 12 के सर्वे में 45 फीसदी लोगों ने आइजेनकोट को प्रधानमंत्री पद के लिए ज्यादा उपयुक्त माना, जबकि 33 फीसदी ने नेतन्याहू का समर्थन किया है। आज जनता अपने फैसले पर मुहर लगा रही है। आइए जानते हैं स्थानीय समयानुसार रात 10 बजे वोटिंग पूरी होने के बाद आगे क्या होगा।
इजरायल में मंगलवार रात वोटिंग खत्म होने के बाद सबसे पहले एग्जिट पोल आएंगे, फिर वोटों की गिनती शुरू होगी।
पहले जान लीजिए कि इजरायल में मतदाता सीधे प्रधानमंत्री नहीं चुनते, बल्कि पार्टियों को वोट देते हैं। इसके बाद संसद में सीटों का हिसाब और अलग-अलग पार्टियों के बीच गठबंधन की बातचीत तय करती है कि देश का अगला प्रधानमंत्री कौन होगा।
वोटिंग खत्म होते ही क्या होगा?
इजरायल में वोटिंग स्थानीय समय के मुताबिक रात 10 बजे खत्म होगी, यानी भारतीय समय के अनुसार बुधवार, 28 अक्टूबर की रात 12:30 बजे।

इसके बाद टीवी चैनल एग्जिट पोल जारी करेंगे। ये पोल वोटिंग के दौरान वोटर्स से मिली जानकारी के आधार पर शुरुआती रुझान देते हैं कि किस पार्टी को कितनी सीटें मिल सकती हैं।
इसके बाद असली वोटों की गिनती के आंकड़े सामने आएंगे। शुरुआती रुझानों से तस्वीर जल्दी साफ हो सकती है, लेकिन अगर किसी भी गठबंधन को स्पष्ट बहुमत मिलता नहीं दिखा, तो सरकार कौन बनाएगा, यह तय होने में कई दिन या हफ्ते भी लग सकते हैं।
वोटों की गिनती 30 अक्टूबर तक पूरी होने की उम्मीद है और आधिकारिक नतीजे 4 नवंबर को प्रकाशित किए जाएंगे।

3.25% वाला मैजिक नंबर क्या है?
इजरायल में संसद नेसेट में कुल 120 सीटें हैं। यहां पूरे देश को एक ही निर्वाचन क्षेत्र माना जाता है। वहां किसी स्थानीय उम्मीदवार को नहीं, बल्कि सीधे राजनीतिक दल को वोट दिया जाता है। जिस पार्टी को देशभर में जितने प्रतिशत वोट मिलते हैं, संसद में उसकी सीटों का हिस्सा भी लगभग उतना ही होता है।
इजरायल के कानून के मुताबिक, किसी भी पार्टी को संसद में एक भी सीट पाने के लिए कुल राष्ट्रीय वोटों का कम से कम 3.25% हासिल करना अनिवार्य है। यदि किसी पार्टी को 3.25% वोट मिले तो उसे संसद में उसकी हिस्सेदारी 120 सीट के हिसाब से 4 सीटें मिलेंगी।
यदि किसी पार्टी को 3.24% वोट मिले तो उस पार्टी का कोई भी प्रतिनिधि संसद नहीं पहुंचेगा। ऐसे में उसके सारे वोट बेकार मान लिए जाएंगे।

सबसे ज्यादा सीटें जीतने वाली पार्टी का नेता प्रधानमंत्री बनेगा, यह जरूरी नहीं है। इजरायल में सबसे ज्यादा सीटें जीतना और सरकार बनाने में सफल होना दो अलग बातें हैं। अगर किसी पार्टी को अपने दम पर बहुमत नहीं मिलता, तो उसे दूसरी पार्टियों के साथ मिलकर सरकार बनानी पड़ती है।
4. राष्ट्रपति कैसे तय करेंगे कि सरकार कौन बनाएगा?
वोटों की गिनती और आधिकारिक नतीजे आने के बाद इजरायल के राष्ट्रपति इजहाक हर्जोग अलग-अलग पार्टियों के नेताओं से बातचीत करेंगे। इसके बाद वह उस सांसद को सरकार बनाने की जिम्मेदारी देंगे, जिसके पास बहुमत जुटाने की सबसे ज्यादा संभावना होगी।

सरकार बनाने के लिए चुने गए नेता को शुरुआत में 28 दिन मिलते हैं। जरूरत पड़ने पर राष्ट्रपति 14 दिन का अतिरिक्त समय भी दे सकते हैं। अगर पहला नेता सरकार बनाने में नाकाम रहता है, तो दूसरे नेता को मौका मिल सकता है। इस प्रक्रिया के कारण चुनाव के नतीजे आने के बाद भी प्रधानमंत्री का नाम तय होने में समय लग सकता है।
गठबंधन कैसे बनेगा, नेतन्याहू के लिए क्या मायने हैं?
सरकार बनाने के लिए पार्टियों को आपस में बातचीत करनी होगी। इसमें मंत्रालयों के बंटवारे के साथ-साथ सुरक्षा, अर्थव्यवस्था, धार्मिक कानूनों और दूसरी नीतियों पर सहमति बनानी पड़ सकती है।
इसमें छोटी पार्टियां काफी अहम होती हैं, क्योंकि उनके समर्थन से किसी गठबंधन का बहुमत पूरा हो सकता है।
नेतन्याहू की लिकुड पार्टी को कितनी सीटें मिलती हैं, यह अहम होगा, लेकिन उनके प्रधानमंत्री बने रहने का फैसला उनके पूरे गठबंधन के समर्थन पर निर्भर करेगा।
दूसरी तरफ, विपक्षी पार्टियों को भी यह देखना होगा कि वे आपसी मतभेदों के बावजूद एक साथ सरकार बनाने के लिए तैयार हैं या नहीं। खास तौर पर अरब पार्टियों के समर्थन को लेकर विपक्ष के भीतर सहमति बनना भी बहुमत के गणित को प्रभावित कर सकता है।

अगर कोई भी पक्ष बहुमत नहीं जुटा पाया तो?
ऐसी स्थिति में सरकार बनाने की बातचीत लंबी खिंच सकती है। किसी दूसरे नेता को मौका दिया जा सकता है और पार्टियां नए सिरे से गठबंधन बनाने की कोशिश कर सकती हैं।
अगर तमाम कोशिशों के बावजूद कोई सरकार नहीं बनती, तो नए चुनाव कराने की नौबत भी आ सकती है। तब तक मौजूदा सरकार कार्यवाहक सरकार के रूप में काम करती रहेगी।




