
दुनिया भर में विश्वसनीयता के संकट से गुजर रहा संयुक्त राष्ट्र (UN) अपना रवैया बदलने का नाम नहीं ले रहा है। अपनी स्थापना के कई दशक बीतने के बाद भी वह कुछ देशों की कठपुतली बना हुआ है। ये बात हम नहीं, बल्कि यूएन द्वारा जारी की जाने वाली पक्षपाती रिपोर्टों और एजेंडे से खुद साबित हो जाती है।
ताजा मामले में संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत बेन सॉल (Ben Saul) ने अपनी रिपोर्ट में दाऊद इब्राहिम की डी-कंपनी को भारत स्थित आपराधिक गिरोह का सरगना बताकर नई दिल्ली को बदनाम करने वाला तथ्य पेश किया है। जबकि दुनिया जानती है कि दाऊद 1993 के मुंबई धमाके के बाद से ही फरार है और पाकिस्तान में रह रहा है। वह भारत में मोस्ट वॉन्टेड घोषित अपराधियों की सूची में टॉप पर है। इस मामले में भारत ने यूएन को कड़ा जवाब दिया है।
सवाल ये उठता है कि संयुक्त राष्ट्र की याददाश्त भारत या ग्लोबल साउथ के देशों के मामले कमजोर क्यों हो जाती है, उसका नजरिया अक्सर इन देशों के साथ बदल क्यों जाता है, वह इन्हें लेकर पक्षपाती रिपोर्ट और एजेंडा वाली रिपोर्टें जारी क्यों करता है? क्या इसे यूएन की भूल कहें या फिर पश्चिमी देशों के इशारे पर पाकिस्तान को बचाने और भारत की छवि को बदनाम करने के लिए जानबूझकर की जाने वाली साजिश? आइए एक्सपर्ट्स से समझते हैं।
UN ने डी कंपनी को भारत का आतंकी नेटवर्क क्यों बताया?
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में इंटरनेशनल स्टडीज विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर और जियोपॉलिटिकल एक्सपर्ट राज यादव ने RT हिंदी से बातचीत में कहा कि यूएन शुरू से ही पश्चिम के प्रभाव में रहा है। वह हमेशा भारत को विकासशील और पिछड़े हुए देश के तौर पर देखता रहा है। उन्होंने कहा कि दाऊद जैसे गंभीर मामलों में इस तरह की बातों को सिर्फ कमजोर याद्दाश्त बताकर खारिज नहीं किया जा सकता। यह पाकिस्तान और उसे सपोर्ट कर रहे कुछ पश्चिमी देशों के इशारे पर नई चाल हो सकती है। निश्चित रूप से यह भारत की छवि खराब करने के इरादे से है क्योंकि वैश्विक स्तर पर कई देश भारत के बढ़ते कद से परेशान हैं।

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान भी भारत की तरह लोकप्रिय होने के लिए हर तरह की उछल-कूद कर रहा है। इसके लिए वह हर दांव आजमा रहा है। चाहे अमेरिका के लिए चापलूसी करना हो या हाल ही में तुर्किये, इंडोनेशिया और कतर के साथ बद्र डील करना हो या उसके पहले अगस्त में तुर्किये और सऊदी के साथ मिलकर मक्का डिफेंस पैक्ट करना हो या फिर ईरान-अमेरिका युद्ध में मध्यस्थता करने का प्रयास हो, पाकिस्तान यह सब अपनी छवि चमकाने के लिए कर रहा है। ये बात अलग है कि वह इसमें सफल नहीं हो सका है।
वरिष्ठ पत्रकार और जियोपॉलिटिकल एक्सपर्ट रामधनी द्विवेदी ने RT हिंदी से कहा कि या तो ये यूएन की ओर से की गई तथ्यात्मक गलती है या फिर उसे अच्छी तरह से वेरीफाई नहीं किया गया। दाऊद इब्राहिम 1993 के मुंबई ब्लास्ट मामले से ही भारत में वॉन्टेड है। भारत ने इसके लिए पाकिस्तान से लेकर वैश्विक मंच तक पर कई बार डोजियर सौंपा है। ऐसे में यूएन जैसी संस्था से ऐसी गलती या भूल नहीं होनी चाहिए थी। मुझे लगता है कि या तो ये जानबूझकर किया गया है या फिर तथ्यों को सही से प्रमाणित नहीं किया गया।
’UN का डबल स्टैंडर्ड’
जेएनयू की असिस्टेंट प्रोफेसर राज यादव ने कहा कि यूएन अक्सर ग्लोबल साउथ के मामले में इस तरह की पक्षपाती रिपोर्ट पेश करता रहता है। हाल ही में उसने भारत में हुए प्रोटेस्ट में मानवाधिकारों की बात की, लेकिन उसे फ्रांस या यूरोप में हो रहे प्रोटेस्ट में कोई मानवाधिकार का उल्लंघन नहीं दिखता। यूएन का ग्लोबल साउथ, नॉर्थ साउथ या पश्चिमी देशों को देखने का नजरिया अलग-अलग है। वह दुनिया के दो अलग-अलग हिस्से में हुई एक जैसी घटनाओं को भी भिन्न-भिन्न चश्मे से देखता है। पक्षपाती रवैये की वजह से वह वैश्विक स्तर पर अपनी छवि खराब कर चुका है। उसे गलती को सुधारना चाहिए और निष्पक्षता से काम करना चाहिए।
वरिष्ठ पत्रकार रामधनी द्विवेदी ने कहा कि यह बात सत्य है कि भारत जैसे देशों में मानवाधिकार उल्लंघन के छोटे-मोटे मामलों को यूएन वैश्विक स्तर पर बढ़ा-चढ़ाकर पेश करता है या मुद्दा बनाने की कोशिश करता है, लेकिन जब दुनिया के अन्य हिस्सों में बड़ी-बड़ी मानवाधिकार उल्लंघन की घटनाएं होती हैं तो उसकी चर्चा तक नहीं होती। यह उसका डबल स्टैंडर्ड है। अब यह भरोसे की संस्था नहीं रह गई है इसीलिए लंबे समय से संयुक्त राष्ट्र में सुधारों की मांग हो रही है।
UN क्यों करता है पक्षपात?
रामधनी द्विवेदी ने कहा कि यूएन पश्चिम का पिछलग्गू बन चुका है। भारत की ताकत जिस तरह से वैश्विक स्तर पर बढ़ रही है, कई देश उसे इस तरह उभरते हुए नहीं देख पा रहे, इसीलिए यहां आंदोलनों को प्रोत्साहित किया जाता है। देश को अंदर से कमजोर करने की कोशिश की जाती है। उन्होंने कहा कि भारत के प्रतिनिधि रघु पुरी ने दाऊद वाले मामले में यूएन को तथ्यात्मक रूप से सटीक जवाब दे दिया है।
प्रोफेसर राज यादव कहती हैं कि यूएन को सबसे ज्यादा फंडिंग अमेरिका और यूरोपीय देश करते हैं इसलिए वह उनके खिलाफ संवेदनशील मामलों में भी चुप रहता है, लेकिन भारत जैसे देशों के खिलाफ एजेंडे में शामिल हो जाता है। पाकिस्तान अक्सर जम्मू-कश्मीर का भी मुद्दा उठाता रहता है। यूएन कहीं न कहीं गुप्त रूप से यह सब करने देता है। जबकि भारत कई बार कह चुका है कि पाकिस्तान द्विपक्षीय मामलों को ऐसे वैश्विक मंच पर उठाकर यूएन का दुरुपयोग कर रहा है। इसके बावजूद यूएन कुछ नहीं करता।
भारत ने यूएन को क्या जवाब दिया?
- UN के आरोपों का जवाब देते हुए संयुक्त राष्ट्र में भारत के प्राथमिक सचिव रघु पुरी कहा कि यूएन के विशेष दूत की रिपोर्टों में इस तरह की तथ्यात्मक गलतियां होना अस्वीकार्य हैं। उन्होंने तर्क देते हुए कहा-
- दाऊद इब्राहिम का डी गैंग भारत बैस्ड आपराधिक समूह नहीं है।
- दाऊद इब्राहिम 1993 से मुंबई आतंकवादी हमलों के लिए भारत में वांछित है।
- इसे 1267 प्रतिबंध व्यवस्था के तहत लिस्टिंग के कारणों में साफ लिखा गया है।
- दाऊद उसी देश (पाकिस्तान) में रहता है, जहां ओसामा बिन लादेन मिला था और मारा गया था।
- रिपोर्ट में अल-कायदा से जुड़े होने के कारण “डी-कंपनी” के मुखिया को 2003 में लिस्टेड किए जाने का जिक्र है।
- दाऊद यूएन में लिस्टेड किए जाने से पहले ही 1993 में पाकिस्तान भाग गया था।
- UN को आतंकियों, कट्टरता व उग्रवाद को बढ़ावा देने वालों की शरणस्थली नहीं बनना चाहिए।
- किसी भी तरह के आतंकवाद को कभी उचित नहीं ठहराया जा सकता।
- पाकिस्तान का बयान उसके असली शासकों (सेना) के संकीर्ण राजनीतिक फायदों के लिए गढ़ा गया प्रोपेगैंडा है।
#IndiaAtUN Raghoo Puri, First Secretary, took part in the interactive Dialogue with Special Rapporteur on the promotion and protection of human rights and fundamental freedoms while countering terrorism in the Third Committee of the General Assembly. He highlighted: ➡️ Factual inaccuracies in reports of SRs are unacceptable. ➡️ Report mentions listing of the leader of the "D-Company" for association with Al-Qaida. Read in isolation, it paints a very different picture from what is actual reality. ➡️ Dawood Ibrahim, has been wanted in India for terror attacks since 1993. And this is clearly written in the narrative summary of the reasons of listing under the 1267 sanctions mechanism. He resides in the same country where Osama bin Laden was found and neutralized. ➡️ HR Frameworks cannot be the refuge of the perpetrators of terror and those who propagate radicalization and extremism. Terrorism can never be justified. ➡️ Pakistan’s statement is pure propaganda for narrow political gains of its actual rulers, its military. @PMOIndia @MEAIndia @IndianDiplomacy @PIB_India @airnewsalerts @DDNewslive @UN
— India at UN, NY (@IndiaUNNewYork) October 22, 2026
दाऊद का मौजूदा ठिकाना कहां है?
वरिष्ठ पत्रकार विवेक अग्रवाल ने RT India से कहा कि देखिये दाऊद कौन है, कहां रहता है, ये बात हर कोई जानता है। हमने संयुक्त राष्ट्र, अमेरिका और कई अन्य देशों को भी इस बारे में डोजियर (दस्तावेज) दिए हैं। मैं वह पहला व्यक्ति था, जिसने दाऊद इब्राहिम की हालिया तस्वीर प्रकाशित की थी, जो उसके कराची वाले घर की थी। हर कोई जानता है कि वह पाकिस्तान में है।
उन्होंने कहा कि ओसामा बिन लादेन भी पाकिस्तान में मिला था। सीआईए और एफबीआई ने उसे खत्म करके बढ़िया काम किया। उन्होंने एक डॉक्टर को अपना फील्ड वर्कर बनाया, जिसने लादेन की सही और सटीक स्थिति बताई। फिर मरीन कमांडोज ने वहां जाकर उसे मार गिराया और उसकी लाश को गहरे समुद्र में दफना दिया।
अग्रवाल ने कहा कि हर कोई जानता है कि दाऊद इब्राहिम का गिरोह और अल-कायदा कभी बहुत करीब थे, लेकिन उन्होंने कोई ऑपरेशन मिलकर किया या नहीं, यह एक संदिग्ध बात है। मुझे खुद कभी इस गठबंधन और उनके संयुक्त अभियानों के बारे में जानकारी नहीं मिली, लेकिन कुछ एजेंसियों का कहना है कि ये दोनों समूह भारत या दुनिया के किसी हिस्से में संयुक्त रूप से आतंक फैला रहे थे।
भारत पर UN के भ्रामक दावों की हालिया सूची
प्रोटेस्ट पर युवाओं पर भ्रामक निष्कर्ष
यूएन की विशेष दूत गिना रोमेरे ने 10 अक्टूबर को मानसिक स्वास्थ्य या जेंडर जस्टिस पर चर्चा करने पर युवाओं पर दबाव डाले जाने और प्रोटेस्ट करने पर पुलिस कार्रवाई, गिरफ्तारी जैसे आरोप लगाए। जबकि यूरोपीय देशों में हुए हालिया प्रोटेस्ट और पुलिस की बर्बर कार्रवाई पर चुप्पी साधे रही।
CERD की रिपोर्ट में लगाए कई आरोप
यूएन की इस कमेटी ने भारत में एससी-एसटी, दलित, आदिवासियों, रोहिंग्या, बंगाली बोलने वाले मुसलमानों, प्रवासियों और शरणार्थियों के खिलाफ हिंसा, बल प्रयोग, हिरासत आदि के आरोप लगाए। एनआरसी जैसी प्रक्रियाओं पर चिंता जताई। वहीं दूसरी तरफ अमेरिका और यूरोपीय देशों द्वारा अप्रवासियों को जबरन निकालने, उन्हें डिटेंशन सेंटर में रखने और यातनाएं दिए जाने पर कुछ नहीं कहा।
भारत का गलत मैप पेश करना
UN Geospatial की तरफ से 1 जुलाई को जारी “Map of the World” में अरुणाचल प्रदेश और अक्साई चिन को भारत-चीन दावा रेखाओं के बीच अलग क्षेत्रों के रूप में दिखाया गया। इसे पारंपरिक UN मार्कर के बिना शेयर किया गया। भारत ने इस पर कड़ी आपत्ति जाहिर की थी।
मणिपुर पर एकतरफा बयान
भारत के मणिपुर राज्य में यौन हिंसा, जबरन हत्या और विस्थापन आदि के आरोप लगाकर यूएन ने चिंता जाहिर की थी, जबकि पश्चिमी देशों की हिंसा पर उसका डबल स्टैंडर्ड साफ नजर आया।






