
कर्मचारी ने वॉट्सऐप पर छुट्टी की अर्जी दी। जवाब में अधिकारी ने 'OK' लिख दिया। तो क्या ये माना जाएगा कि छुट्टी मंजूर हो गई है? नहीं। केंद्रीय कर्मचारियों की नौकरी से जुड़ी शिकायतों और विवादों को सुलझाने के लिए बनी न्यायिक संस्था सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (CAT) की इलाहाबाद बेंच ने हाल ही में एक मामले की सुनवाई के दौरान यही फैसला दिया।
CAT ने अपने फैसले में कहा कि वॉट्सऐप पर अधिकारी का ओके लिखना अपने आप में इस बात का पक्का सबूत नहीं माना जा सकता कि सक्षम अधिकारी ने छुट्टी मंजूर कर दी है।
क्या था पूरा मामला?
मामला रेलवे के एक कर्मचारी से जुड़ा था। कर्मचारी को छुट्टी लेने के बाद प्रयागराज से फतेहपुर ट्रांसफर कर दिया गया था। इस ट्रांसफर के खिलाफ ट्रिब्यूनल में याचिका दायर की गई। सुनवाई के बाद ट्रिब्यूनल बेंच ने याचिका खारिज कर दी।
जूडिशल अधिकारी ने कहा, आवेदक का वॉट्सऐप पर मिले 'OK' जवाब के भरोसे रहना, अपने आप में सक्षम अधिकारी द्वारा छुट्टी मंजूर किए जाने का पक्का सबूत नहीं माना जा सकता।
यह आदेश 7 अक्टूबर का प्रिया रंजन कुमार की एक अर्जी पर दिया गया था। उत्तर मध्य रेलवे के कर्मचारी प्रियरंजन कुमार ने 25 जुलाई, 2025 के अपने तबादले के आदेश को चुनौती दी थी।
छुट्टी से लौटने के बाद सस्पेंशन
याचिका के अनुसार, रेलवे कर्मचारी ने अपने पैतृक गांव जाने के लिए पिछले साल 14 से 16 जुलाई तक तीन दिन की छुट्टी ली थी। इसके बाद, उन्होंने वॉट्सऐप पर मैसेज करके अपनी छुट्टी को दो दिन और बढ़ाने की मांग की।
उन्होंने दावा किया कि सीनियर डिविजनल कमर्शियल मैनेजर हिमांशु शुक्ला ने 'OK' लिखकर इस अनुरोध को मंजूर कर लिया था। हालांकि, प्रियरंजन जब 21 जुलाई को ड्यूटी पर लौटे, तो उन्हें सस्पेंड कर दिया गया। चार दिन बाद, उनका तबादला फतेहपुर कर दिया गया।
रेलवे ने बताया- क्यों किया तबादला
इसके बाद, 31 जुलाई को कर्मचारी के खिलाफ एक अनुशासनात्मक चार्जशीट जारी की गई। कुमार ने तर्क दिया कि उनका तबादला कोई सामान्य प्रशासनिक फैसला नहीं था, बल्कि उनकी छुट्टी को लेकर हुए विवाद के कारण उन्हें दी गई एक सजा थी।
रेलवे ने इस दावे का विरोध करते हुए कहा कि फतेहपुर रेलवे स्टेशन पर एक नया प्रवेश द्वार और बुकिंग ऑफिस बनने की वजह से यह तबादला जरूरी हो गया था।
ट्रिब्यूनल ने सुनवाई के बाद रेलवे की दलील को स्वीकार कर लिया और कहा कि वॉट्सऐप पर मिले जवाब से यह साबित नहीं होता कि सक्षम अधिकारी ने छुट्टी मंजूर की थी।






