हूती कितने पावरफुल? सऊदी के आसमान के लिए Last Warning कितना बड़ा खतरा
यमन में बैठे हूती सऊदी के एयरपोर्ट्स को कैसे टारगेट कर पा रहे हैं? अब उनके हमलों से आसमान में उड़ रहे विमानों पर भी खतरा है?
हूती कितने पावरफुल? सऊदी के आसमान के लिए Last Warning कितना बड़ा खतरा
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पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ रहा है। अब सऊदी अरब के आसमान से गुजरने वाली कमर्शियल फ्लाइट के लिए बड़ा खतरा पैदा हो गया है।यमन के हूती विद्रोहियों ने 'Last Warning' दी है। खतरा मिसाइल और ड्रोन अटैक का है। 

यही वजह है कि यमन के हूती विद्रोहियों के हालिया हमलों को सिर्फ दो एयरपोर्ट्स पर हमला मानकर देखना शायद तस्वीर का छोटा हिस्सा होगा। सवाल यह है कि जिस संगठन के पास सऊदी जैसी एयरफोर्स या बड़ी सेना नहीं है, फिर भी वह सऊदी के सामने इतनी बड़ी ताकत कैसे बन चुका है? 

यमन के हूती विद्रोहियों के निशानोे पर सऊदी की एयरलाइन्स। (फाइल फोटो)AP

एयरपोर्ट पर हमला छोटी बात नहीं

पहले ताजा मामला जानिए। बुधवार को हूतियों ने सऊदी अरब के रियाद स्थित King Khalid International एयरपोर्ट और Abha एयरपोर्ट पर हमले की जिम्मेदारी ली। अबहा में दो लोगों की मौत और 28 लोग घायल हुए, जबकि रियाद में एक व्यक्ति की मौत और आठ लोग घायल हुए। सऊदी अधिकारियों ने रियाद की ओर आने वाली एक बैलिस्टिक मिसाइल को इंटरसेप्ट करने का दावा भी किया।

हूतियों ने 'आखिरी चेतावनी' भी दी है। हूतियों ने इन इलाकों में ऑपरेट करने वाली एयरलाइंस से सऊदी एयरस्पेस से बचने की चेतावनी दी है। हालांकि, हूती विद्रोहियों ने यह स्पष्ट किया है कि वह मक्का-मदीना को नहीं छेड़ेंगे।

इससे पहले हूती प्रवक्ता ने कहा कि ईश्वर की कृपा से, हमारे सशस्त्र बलों ने कई बैलिस्टिक मिसाइलों का इस्तेमाल करके रास अल-अराह इलाके के कावाह कैंप में मौजूद सऊदी दुश्मन के जमावड़ों और सैन्य टुकड़ियों को निशाना बनाया। ईश्वर की कृपा से ये हमले सीधे और सटीक रहे, जिससे दुश्मन के कई सैनिक मारे गए और घायल हुए, साथ ही हथियारों के कुछ गोदाम भी जलकर खाक हो गए।

उन्होंने कहा कि इसी दौरान, बाब अल-मंदब के दक्षिण, साकिया इलाके और रास अल-अराह में भी सऊदी दुश्मन के जमावड़ों और सैन्य टुकड़ियों पर कई बैलिस्टिक मिसाइलों से हमले किए गए। ये हमले अपने मकसद में कामयाब रहे और इनमें दर्जनों लोग मारे गए और घायल हुए।

अब इसे एविएशन के नजरिए से समझिए।

किसी विमान को हवा में सीधे मिसाइल से हिट करना ही सबसे बड़ा खतरा नहीं है। असल परेशानी तब शुरू होती है जब एयरपोर्ट के आसपास मिसाइल या ड्रोन एक्टिविटी बढ़ जाती है। तब टेक ऑफ और लेंडिग रोकने पड़ सकते हैं, फ्लाइट्स को दूसरे एयरपोर्ट की ओर डायवर्ट किया जा सकता है और पूरे एयपस्पेस के कुछ हिस्से को अस्थायी तौर पर बंद करना पड़ सकता है।

और कमर्शियल एविएशन में टेक-ऑफ और लैंडिग सबसे उड़ान के सबसे अहम और नाजुक समय में गिने जाते हैं। 

इसलिए हूतियों के लिए किसी एयरपोर्ट को टारगेट करना केवल वहां मौजूद इंफ्रास्ट्रक्चर को नुकसान पहुंचाने की कोशिश नहीं है। यह एविएशन सिस्टम पर प्रेशर डालने का तरीका भी है।

एक मिसाइल कितनी बड़ी एविएशन प्रॉब्लम है?

इसे समझने के लिए यमन के अदन एयरपोर्ट की घटना महत्वपूर्ण है। हूतियों ने वहां बैलिस्टिक मिसाइल से हमला किया। एक मिसाइल रनवे के करीब गिरी, जबकि काहिरा से आने वाली एक फ्लाइट लैंडिग के लिए पहुंच रही थी। विमान सुरक्षित उतर गया और किसी के हताहत होने की खबर नहीं थी।

यानी मिसाइल ने विमान को हिट नहीं किया, फिर भी घटना एविएशन के लिए गंभीर थी।

अगर ऐसा खतरा बार-बार बना रहता है, तो एयरलाइन्स के लिए चिंता सिर्फ यात्रियों की सुरक्षा की नहीं होगी। उन्हें उड़ान का रास्ता बदलने से बढ़ने वाला खर्च और बीमा से जुड़ा जोखिम भी देखना पड़ेगा। 

हूती एयरलाइन्स को सीधे क्यों चेतावनी दे रहे हैं?

मामले को और दिलचस्प बनाता है हूतियों का वह संदेश जिसमें उन्होंने एयरलाइन्स को Saudi airspace से बचने की चेतावनी दी है। उन्होंने हालांकि मक्का और मदीना को इस चेतावनी से अलग रखा है।

यहां हूतियों की रणनीति समझना जरूरी है। वे सऊदी की एयरफोर्स को सीधे हराने की स्थिति में नहीं हैं। लेकिन उन्हें ऐसा करने की जरूरत भी नहीं है।

अगर आप किसी देश के महत्वपूर्ण एयरपोर्ट को बार-बार टारगेट कर दें, एयरलाइन्स को वार्निंग दे दें और एयरस्पेस में uncertainty पैदा कर दें, तो आप बिना उसकी पूरी मिलिट्री को चुनौती दिए भी उस देश पर दबाव बना सकते हैं।

यही हूतियों की असली ताकत है।

हूति लड़ाका (एआई जनरेटेड)

हूती आखिर कितने ताकतवर हैं?

हूतियों को अब सिर्फ एक आम विद्रोही गुट मानना सही नहीं होगा। उनके पास बैलिस्टिक, क्रूज मिसाइल और ड्रोन जैसे हथियार हैं। इनकी मदद से वे यमन से काफी दूर सऊदी अरब के इलाकों तक हमला करने की क्षमता दिखा चुके हैं।

उनकी बड़ी ताकत यह भी है कि वे अपेक्षाकृत कम खर्च वाले हथियारों से ऐसे ठिकानों को निशाना बना सकते हैं, जिन्हें बचाने के लिए सऊदी अरब को बहुत महंगे एयर-डिफेंस सिस्टम तैनात करने पड़ते हैं।

RT

सरल भाषा में समझें तो एक तरफ कम लागत में मिसाइल या ड्रोन भेजा जा रहा है, जबकि दूसरी तरफ उसे पहचानने और रोकने के लिए महंगा सिस्टम काम कर रहा है।

हूतियों के पास सऊदी अरब जैसी बड़ी सेना या एयर फोर्स नहीं है। लेकिन उनकी रणनीति अलग है। उन्हें सऊदी से सीधी सैन्य लड़ाई जीतने की जरूरत नहीं है। अगर वे कम संसाधनों में सऊदी के एयरपोर्ट, तेल ठिकानों और दूसरे अहम इलाकों पर बार-बार खतरा पैदा कर सकते हैं, तो वे सऊदी पर दबाव बनाने में सफल हो सकते हैं।

यही हूतियों की असली ताकत है- कम साधनों में बड़े देश के लिए बड़ी परेशानी खड़ी करना।

फिर सऊदी और हूतियों की लड़ाई क्यों हुई?

इसके पीछे करीब एक दशक पुराना यमन का गृहयुद्ध है।

2014 में हूतियों ने यमन की राजधानी सना पर कब्जा कर लिया। इसके बाद 2015 में सऊदी अरब के नेतृत्व में गठबंधन ने हूतियों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई शुरू की।

सऊदी को डर था कि उसकी सीमा से लगे यमन में हूतियों की ताकत बढ़ रही है और उन्हें ईरान का समर्थन हासिल है। इसी वजह से यह लड़ाई धीरे-धीरे सऊदी और ईरान की टक्कर से भी जुड़ गई।

2022 में सीजफायर के बाद हालात कुछ शांत हुए, लेकिन 2026 में फिर लड़ाई तेज हो गई। अब सऊदी समर्थित सेना यमन के पश्चिमी इलाकों और बाब-अल-मंदेब के आसपास बढ़ रही है, जबकि हूती जवाब में सऊदी के एयरपोर्ट, तेल ठिकानों और सैन्य ठिकानों को निशाना बना रहे हैं।

असली खतरा क्या है?

खतरा इसलिए बड़ा है क्योंकि हूतियों को पूरे सऊदी एयरस्पेस पर कब्जा करने की जरूरत नहीं है। एयरपोर्ट के पास एक मिसाइल या ड्रोन का खतरा भी उड़ानों को प्रभावित कर सकता है।

फ्लाइट डायवर्ट हो सकती है, एयरपोर्ट बंद हो सकता है और यात्रियों की सुरक्षा पर सवाल खड़ा हो सकते हैं।

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