अमेरिका के ओहायो में एक हिंदू मंदिर पर ईंटों से हमला करने का मामला सामने आया है। अमेरिकी गैर-लाभकारी संगठन हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन (HAF) के मुताबिक, हमले के वक्त मंदिर में श्रद्धालु मौजूद थे। हमला ग्रेटर क्लीवलैंड इलाके के रिचमंड हाइट्स में स्थित श्री स्वामीनारायण वडताल धाम हिंदू मंदिर पर हुआ। HAF ने बताया कि मंदिर पर ईंटें फेंकी गईं। संगठन ने घटना का वीडियो भी जारी किया है, जिसमें मंदिर को हुए नुकसान को साफ देखा जा सकता है।
इस घटना के बाद अमेरिकी संगठन USCIRF पर भी सवाल उठ रहे हैं। यूनाइटेड स्टेट्स कमीशन ऑन इंटरनेशनल रिलीजियस फ्रीडम (USCIRF) दूसरे देशों में हमलों की रिपोर्ट देता आया है।
अमेरिका में कहां हुआ हिंदू मंदिर पर हमला?
हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन यानी HAF ने बताया कि मंदिर पर हमला वहां के समयानुसार दोपहर 1:30 बजे हुआ। घटना की विस्तृत जानकारी देते हुए 'कोलिशन ऑफ हिंदूज ऑफ नॉर्थ अमेरिका' (CoHNA) ने बताया कि ओहायो के ग्रेटर क्लीवलैंड इलाके में स्थित हिंदू मंदिर पर ईंटों से हमला किया गया, जिससे खिड़कियों के शीशे टूट गए।
⚠️Hindu temple attacked in Ohio today| At 1:30 PM today, the Shree Swaminarayan Vadtal Dham Hindu Mandir in Richmond Heights, Ohio was attacked by perpetrator(s) who threw bricks at the temple causing significant damage.
— Hindu American Foundation (@HinduAmerican) October 3, 2026
Surveillance video is available and being reviewed by… pic.twitter.com/yruWaC7TnR
CoHNA ने बताया कि मंदिर को निशाना बनाकर किया गया यह हमला शुक्रवार दोपहर को हुआ, हालांकि संगठन ने यह स्पष्ट नहीं किया कि किसी को चोट आई या नहीं। संगठन ने रिचमंड हाइट्स की मेयर किम थॉमस और स्थानीय प्रशासन से इस घटना की सार्वजनिक रूप से निंदा करने तथा पुलिस से तुरंत कार्रवाई करने की मांग की। हालांकि, बयान में किसी संदिग्ध का नाम नहीं लिया गया, न ही गिरफ्तारी को लेकर कोई ब्योरा दिया गया और न ही हमले के पीछे किसी धार्मिक मकसद की पुष्टि करने वाले ठोस सबूत पेश किए गए।

घटना की टाइमिंग पर उठ रहे सवाल
ओहायो के हिंदू मंदिर पर हमले की टाइमिंग को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। कोलिशन ऑफ हिंदूज ऑफ नॉर्थ अमेरिका ने ध्यान दिलाया कि यह घटना ठीक उसी समय हुई जब ओहायो में हिंदू समुदाय ने 'हिंदू हेरिटेज मंथ' (हिंदू विरासत माह) का जश्न शुरू किया था, साथ ही नवरात्रि का त्योहार भी नजदीक है। पूरे अमेरिका में विभिन्न हिंदू संगठनों द्वारा अक्टूबर के महीने को पारंपरिक रूप से 'हिंदू हेरिटेज मंथ' के रूप में मनाया जाता है।
CoHNA ने अमेरिका में हिंदुओं के खिलाफ बढ़ती नफरत और हिंसा को लेकर लगातार चिंता जताई है और पहले भी मंदिरों से जुड़ी कई घटनाओं का रिकॉर्ड दर्ज किया है। इनमें अगस्त 2022 में क्वींस, न्यूयॉर्क के 'श्री तुलसी मंदिर' में स्थापित महात्मा गांधी की प्रतिमा को नुकसान पहुंचाने और दिसंबर 2023 में नेवार्क, कैलिफोर्निया के 'SMVS श्री स्वामीनारायण मंदिर' की दीवारों पर नफरती नारे लिखे जाने जैसी घटनाएं शामिल हैं।
इस लिस्ट में आगे बताया गया कि सितंबर 2024 में मेलविले (न्यूयॉर्क) और सैक्रामेंटो (कैलिफोर्निया) स्थित BAPS मंदिरों में तोड़फोड़ की गई थी। इसके बाद, मार्च 2025 में चीनो हिल्स, कैलिफोर्निया स्थित BAPS मंदिर पर भी आपत्तिजनक और नफरती संदेश लिखे गए थे।

दूसरे देशों में हमले की रिपोर्ट देने वाले अमेरिका के इस आयोग को जानिए
दूसरे देशों में अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचार पर खूब बोलने वाले अमेरिका के इस आयोग को भी जान लीजिए। इसे अंग्रेजी में United States Commission on International Religious Freedom कहते हैं। हिंदी में सरल भाषा में कहें तो अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता पर अमेरिका का आयोग।
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यह आयोग असल में करता क्या है?
- यह अमेरिका की एक स्वतंत्र, द्विदलीय (bipartisan) संघीय संस्था है।
- इसका मुख्य काम दुनिया भर में धार्मिक स्वतंत्रता के उल्लंघन पर नजर रखना और अमेरिकी सरकार को नीतिगत सलाह देना है।
- इसका गठन अमेरिकी संसद (Congress) से पारित अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम, 1998 (IRFA) के तहत किया गया था।
- आयोग में कुल 9 कमिश्नर होते हैं, जो मानद (गैर-वेतनभोगी) आधार पर सेवा देते हैं।
- 3 सदस्यों की नियुक्ति अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।
- 6 सदस्यों की नियुक्ति कांग्रेस (संसद) के दोनों सदनों (सीनेट और हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) में सत्तारूढ़ और विपक्षी दलों के नेता करते हैं।
- अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता के लिए अमेरिकी विदेश विभाग के राजदूत (Ambassador-at-Large) इसके गैर-मतदाता (ex-officio) सदस्य होते हैं।
- USCIRF हर साल दुनिया भर में धार्मिक अल्पसंख्यकों की स्थिति, सरकारी कानूनों और मानवाधिकारों के उल्लंघन पर एक विस्तृत रिपोर्ट जारी करता है।
भारत के खिलाफ कब-कब बोला USCIRF?
अमेरिका का यह आयोग भारत के खिलाफ भी कई बयान दे चुका है।
- USCIRF ने साल 2020 से लगातार हर वार्षिक रिपोर्ट में अमेरिकी विदेश विभाग (State Department) से यह सिफारिश की है कि भारत को 'Country of Particular Concern' (CPC) की श्रेणी में डाला जाए।
- आयोग का तर्क रहता है कि भारत में धार्मिक स्वतंत्रता का गंभीर, सुनियोजित और निरंतर उल्लंघन हो रहा है।
- आयोग ने CAA को धार्मिक आधार पर भेदभावपूर्ण बताया था और आरोप लगाया कि यह मुस्लिम समुदाय के अधिकारों को कमजोर कर सकता है।
- आयोग ने कई भारतीय राज्यों में लागू गैर-कानूनी धर्मांतरण विरोधी कानूनों (Anti-Conversion Laws) और
- गो-हत्या विरोधी कानूनों की आलोचना करते हुए आरोप लगाया था कि इनका इस्तेमाल अल्पसंख्यकों (विशेषकर मुस्लिम और ईसाई) को डराने और कानूनी तौर पर परेशान करने के लिए किया जा रहा है।
- कथित गो-तस्करी या अन्य विवादों में होने वाली लिंचिंग की घटनाओं और अपराधों के आरोपियों के घरों पर बुलडोजर चलाए जाने को USCIRF ने “अल्पसंख्यकों को सामूहिक सजा देने की प्रवृत्ति” करार दिया था।
"मंदिर पर हमला शर्मनाक और चिंता का विषय"
लेखक और विदेश मामलों के जानकार रोबिंदर सचदेव ने हमले को बेहद शर्मनाक और चिंताजनक बताया। उन्होंने कहा कि खास तौर पर चिंता की बात यह है कि मंदिर पर ईंटें उस समय फेंकी गईं, जब अंदर पुजारी और श्रद्धालु मौजूद थे और घटना दिन के समय हुई।
सचदेव के मुताबिक, अमेरिका में पिछले कुछ वर्षों से हिंदू मंदिरों को निशाना बनाए जाने की घटनाएं सामने आती रही हैं। उनके अनुसार, पिछले तीन वर्षों में करीब 15 हिंदू मंदिरों पर हमले या ग्रैफिटी जैसी घटनाएं हुई हैं। हालांकि, ज्यादातर मामलों में मंदिरों पर रात के समय घटनाएं सामने आई हैं।
उनका कहना है कि ओहायो की घटना इस मायने में अलग और ज्यादा गंभीर है कि मंदिर के अंदर धार्मिक गतिविधियां चल रही थीं, श्रद्धालु मौजूद थे और इसके बावजूद दिनदहाड़े ईंटें फेंकी गईं।
"मामला सिर्फ भारत सरकार का नहीं, नागरिकों की सुरक्षा का है"
सचदेव ने कहा कि इस मामले को सिर्फ भारत सरकार की चिंता के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। अमेरिका में रहने वाले हिंदू भी अमेरिकी नागरिक हैं और उनके पूजा स्थलों की सुरक्षा अमेरिकी कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि अमेरिका में हिंदुओं के अलावा यहूदी, ईसाई, मुस्लिम और दूसरे धर्मों को मानने वाले लोग भी रहते हैं। ऐसे में किसी भी समुदाय के धार्मिक स्थल पर हमला अमेरिकी नागरिकों की धार्मिक स्वतंत्रता और सुरक्षा से जुड़ा सवाल है।
सचदेव के मुताबिक, भारत सरकार पहले भी अमेरिकी प्रशासन और कानून-प्रवर्तन एजेंसियों से ऐसी घटनाओं को गंभीरता से लेने का आग्रह करती रही है। उनका कहना है कि अगर धार्मिक स्थलों पर हमले और तोड़फोड़ की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं, तो अमेरिकी कानून-व्यवस्था को इनके खिलाफ सख्त कार्रवाई और प्रभावी जांच सुनिश्चित करनी चाहिए।
अमेरिका में कब-कब हुए मंदिरों पर हमले?
1. कार से आए और हिंदू मंदिर पर कर दी तोड़फोड़, उत्तरी कैरोलिना 18 जनवरी 2026
18 जनवरी, 2026 तड़के अमेरिका के उत्तरी कैरोलिना (North Carolina) के एक शांत इलाके कैरी (Cary) में स्थित 'श्री वेंकटेश्वर हिंदू मंदिर' को निशाना बनाकर हमला किया गया था। 'WTVD' और 'WRAL' की रिपोर्टों के अनुसार, यह घटना तड़के लगभग 3:00 बजे घटी थी। मंदिर के सीसीटीवी (CCTV) कैमरों में कम से कम पांच लोगों का एक ग्रुप परिसर की ओर बढ़ता हुआ दिखाई दिया।
कैरी पुलिस विभाग की ओर से जांचे गए फुटेज में लोग एक छोटी सेडान कार की ओर भागते दिखे और फिर तेजी से वहां से फरार हे गए। कैमरे में कैद उनके भागने की जल्दबाजी देखकर पता चला कि यह घटना पहले से सोची-समझी साजिश हो सकती है।
संदिग्धों के भागने के कुछ ही देर बाद, मंदिर के कर्मचारियों और श्रद्धालुओं ने देखा कि प्रवेश द्वार पर स्थापित महत्वपूर्ण और प्रतीकात्मक 'द्वारपालक' की प्रतिमा को नुकसान पहुंचाया गया था। यह प्रतिमा पारंपरिक रूप से हिंदू मंदिरों की दहलीज पर रक्षक का प्रतीक मानी जाती है।
2. स्वामीनारायण मंदिर में लिखे आपत्तिजनक नारे, दक्षिणी कैलिफोर्निया, 10 अगस्त 2025
पिछले साल 10 अगस्त 2025 को दक्षिणी कैलिफोर्निया के एक प्रमुख हिंदू मंदिर बीएपीएस श्री स्वामीनारायण में हिंदू-विरोधी और भारत सरकार-विरोधी आपत्तिजनक नारे लिखे गए थे। संस्था के एक स्वयंसेवक मेहुल पटेल ने बताया कि 8 मार्च की सुबह जब श्रद्धालु चीनो हिल्स स्थित 'बीएपीएस श्री स्वामीनारायण मंदिर' पहुंचे, तो वहां गुलाबी पत्थर के बने बोर्ड पर “हिंदुस्तान मुर्दाबाद” लिखा हुआ था।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने भी इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा था कि हम इस तरह की कायराना और निंदनीय हरकतों की कड़े से कड़े शब्दों में निंदा करते हैं। हम स्थानीय कानून प्रवर्तन अधिकारियों से अपील करते हैं कि इन कृत्यों के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए और पूजा स्थलों की पर्याप्त सुरक्षा भी सुनिश्चित की जाए।
3. राधा कृष्ण मंदिर पर ताबड़तोड़ फायरिंग, स्पैनिश फोर्क, 29 जून 2025
स्पैनिश फोर्क के पास स्थित 'श्री श्री राधा कृष्ण मंदिर' पिछले साल गोलियों की तड़तड़हाट से गूंज उठा था। मंदिर प्रबंधन के अनुसार, पिछले कुछ दिनों के भीतर मंदिर की इमारत या परिसर पर कम से कम 20 से 30 गोलियां चलाई गईं। उन्होंने बताया कि ये हमले संभवतः रात के समय किए गए थे। हालांकि इनमें कोई घायल नहीं हुआ, लेकिन गोलीबारी उस वक्त हुई जब लोग इमारत के अंदर मौजूद थे, जिससे मंदिर के ढांचे को हजारों डॉलर का नुकसान होने का अंदेशा था।
यूटा के कृष्ण मंदिर की सह-संस्थापक और मंदिर के पुजारी चारू दास की पत्नी, वाई वॉरेन ने कहा,
”हिंदू समुदाय एकजुट हो रहा है और कह रहा है, 'यह बहुत भयानक है। हम क्या कर सकते हैं?' क्योंकि यह वास्तव में एक प्रकार का धार्मिक उत्पीड़न है।”
18 जून को 15 एकड़ में फैले परिसर के रेडियो स्टेशन की छत से एक जोरदार धमाके की आवाज आई थी और धुआं निकलता दिखा था। उस समय मंदिर के अधिकारी समझ नहीं पाए कि यह क्या था और उन्होंने आतिशबाजी होने का अनुमान लगाते हुए घटना की सूचना पुलिस को नहीं दी थी।
लेकिन इसके एक हफ्ते से अधिक समय बाद, पाया गया कि एक गोली मंदिर की खिड़की को भेदती हुई अंदर पूजा कक्ष की सामने वाली दीवार में जा धंसी थी। उन्होंने बताया कि मंदिर की इमारत पर गोलियों के कई अन्य निशान भी मिले, जिनमें से कुछ ने इमारत के मेहराबों (arches) को नुकसान पहुंचाया है।
4. मंदिर के एंट्री गेट पर पीएम मोदी के लिए आपत्तिजनक शब्द, मेलविले, 17 सितंबर, 2024
17 सितंबर 2024 को मेलविले (Melville) में 'बीएपीएस श्री स्वामीनारायण मंदिर' की दीवारों पर धमकी भरे आपत्तिजनक नारे लिखे थे। मंदिर प्रबंधन ने बताया कि रात के समय देशोन ड्राइव पर मंदिर के रास्ते (ड्राइववे) और प्रवेश द्वार के पास लगे स्वागत बोर्ड पर स्प्रे पेंट से आपत्तिजनक शब्द लिख दिए गए थे। रास्ते पर भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ अभद्र भाषा लिखी गई थी। हिंदुओं के बारे में भी आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग किया गया था।
तब दो सांसदों डेमोक्रेट टॉम सुओजी और रिपब्लिकन निक लालोटा के साथ सफोल्क काउंटी के कार्यकारी एड रोमेन, राज्य सीनेटर मारियो मटेरा, राज्य विधानसभा सदस्य कीथ ब्राउन और स्टीव स्टर्न, टाउन सुपरवाइजर एड स्मिथ, सफोल्क विधायक रेबेका सैनिन और जेसन रिचबर्ग सहित कई अन्य नेताओं ने ग्रेटर लॉन्ग आइलैंड समुदाय में हिंदू श्रद्धालुओं के योगदान की सराहना की और जोर देकर कहा कि किसी के भी खिलाफ नफरत बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
अपने राजनीतिक मतभेदों के बावजूद, सभी अधिकारियों ने एकजुट होकर यह कड़ा संदेश दिया कि ऐसे नफरती नारों और इन्हें लिखने वालों के लिए लॉन्ग आइलैंड पर कोई जगह नहीं है।
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