
दुबई से तेल अवीव जा रहे प्लेन में उस दिन भारतीय कैप्टन स्मित मच्छार पर हमला करने वाला कौन था, कहां का रहने वाला है, क्या नाम था, क्या उसका कोई आपराधिक रिकॉर्ड भी है? घटना के तीन दिन बाद इन सवालों के जवाब मिल गए हैं। कैप्टन स्मित पर हमला करने वाले को-पायलट का नाम हमाम अल-हमामी है।
विदेशी न्यूज चैनलों का दावा है कि उसे अल-कायदा की विचारधारा के जरिए भड़काया गया था। उसकी मुलाकात कुछ अज्ञात धार्मिक हस्तियों से भी हुई थी, हालांकि, इन धार्मिक लोगों की पहचान नहीं बताई गई है। आइए आपको बताते हैं विदेशी मीडिया हमलावर अल हमामी के बारे में क्या दावे कर रहा है-
1. ओमान ने लगाई थी प्लेन उड़ाने पर रोक
अमेरिका के CBS News ने सूत्रों के हवाले से खबर दी है कि ओमानी को-पायलट हमाम अल-हमामी ने पहले 'ओमान एयर' में पायलट की ट्रेनिंग ली थी। हालांकि, सरकारी निगरानी में पता चला कि वह चरमपंथी वेबसाइटों के प्रभाव में था और दिनभर उन्हीं के वीडियोज देखता था। यह बात सामने आने के बाद उसे डेस्क पर भेज दिया गया। इसके बाद वह ओमान सरकार की ओर से बिना किसी औपचारिक जांच-पड़ताल के 'फ्लाईदुबई' में शामिल हो गया था। रिपोर्ट में आगे बताया गया कि एक सूत्र के अनुसार, डेस्क पर ट्रांसफर किए जाने के बाद पायलट ने ओमान एयर से इस्तीफा दे दिया और लगभग 2024 में उसने एयरलाइन छोड़ दी थी।

2. वीडियो में अल जवाहिरी की तस्वीर लगाई थी
सऊदी अरब के चैनल Al Arabiya English ने सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट दी कि अल-हमामी को पहले ओमान में विमान उड़ाने से रोक दिया गया था। ऐसा उसके चरमपंथी विचारों के कारण किया गया था, जो कथित तौर पर सीरिया में उसके पहले रहने के दौरान असर में आए थे।
सूत्रों ने यह भी बताया कि एक मौके पर अल-हमामी ने दुबई में इजरायल की 'एल अल' (El Al) एयरलाइंस के विमानों का एक वीडियो साझा किया था, जिसके अंत में अल-कायदा के अयमान अल-जवाहिरी की तस्वीर लगाई गई थी। यह वही अल-जवाहिरी है जो 2022 में अमेरिकी ड्रोन हमले में मारा गया था। अल अरबिया इंग्लिश के सूत्रों के अनुसार, अलहमामी ने अपना ज्यादातर समय ओमान से बाहर, खासकर सीरिया में बिताया था। आरोप है कि यूएई (UAE) जाने से पहले वह वहीं कट्टरपंथी और चरमपंथी विचारों के प्रभाव में आया था।

3. पिता ओमानी, मां सीरिया की रहने वाली हैं
CNN के मुताबिक, अल-हमामी के पास ओमान की नागरिकता है, लेकिन सूत्रों ने बताया है कि उसका जन्म ओमान में नहीं हुआ था और उसने अपनी जिंदगी का ज्यादातर हिस्सा विदेश में ही बिताया है। उन्होंने खुलासा किया कि उसकी मां सीरियाई मूल की हैं जबकि पिता ओमानी हैं। हालांकि, ओमान सरकार ने अभी तक सार्वजनिक रूप से उसकी राष्ट्रीयता की पुष्टि नहीं की है।
इस बीच, CNN ने सूत्रों और एक इजरायली अधिकारी के हवाले से खबर दी है कि हमाम अल-हमामी के लिंक्डइन (LinkedIn) प्रोफाइल पर घटना के लगभग नौ घंटे बाद दो पोस्ट पब्लिश की गई थीं। इन पोस्ट्स में इजरायल की 'एल अल' (El Al) एयरलाइन के एक विमान के कॉकपिट का फुटेज और साथ में अल-कायदा से जुड़े लोगों की तस्वीरें शामिल थीं। उसने अपनी जिंदगी के कई साल यूएई में ही बिताए थे।
4. इरादा प्लेन को इजरायल में क्रैश कराने का था
इजरायली चैनल i24NEWS ने दावा किया है कि हमलावर अल हमामी ने जांच अधिकारियों को बताया था कि उसका इरादा विमान को इजरायल में क्रैश कराने का था इसलिए क्योंकि यह फ्लाइट तेल अवीव ही जा रही थी।
इससे पहले, 'i24NEWS' ने यूएई के एक सूत्र के हवाले से खबर दी थी कि उसके सामान से “फ्री फिलिस्तीन” (Free Palestine) के पर्चे, पत्रिकाएं और फिलिस्तीन-समर्थक अन्य सामग्री मिली थी। रिपोर्ट के अनुसार, पायलट ने बार-बार फिलिस्तीनियों के प्रति समर्थन और इजरायल के प्रति नफरत जाहिर किया था। 'i24NEWS' का कहना है कि इन सामग्रियों और उसके बयानों की गहनता से पड़ताल की जा रही है, जो उसके कथित इस्लामी कट्टरपंथ और संभावित आतंकी मंसूबों की व्यापक जांच का एक हिस्सा है।
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5. बकिंघमशायर न्यू यूनिवर्सिटी से पढ़ाई
विदेशी चैनलों को सूत्रों ने बताया कि अल-हमामी के लिंक्डइन प्रोफाइल में यह भी दर्ज था कि उसने इंग्लैंड की बकिंघमशायर न्यू यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की थी। इसके अलावा उसके हैंडल से दो पोस्ट भी की गई थीं। पहली पोस्ट में बोइंग 737 मैक्स विमान के कॉकपिट के अंदर रिकॉर्ड किए गए वीडियो क्लिप्स दिखाए गए।
बुधवार को सऊदी अरब की ओर मोड़ा गया विमान भी फ्लाईदुबई का 737 मैक्स 8 ही था। सीएनएन की ओर से दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट के रूप में पहचाने गए एक अंश में कैमरा ऑपरेटर एल अल एयरलाइन के एक विमान पर जूम करता नजर आता है, जिसमें कॉकपिट डिस्प्ले पर फ्लाइट नंबर OMA624 और 11 अक्टूबर, 2023 की तारीख दिखती है।
वीडियो का अंत अयमान अल-जवाहिरी (ओसामा बिन लादेन के बाद अल-कायदा की कमान संभाली थी) और हुमाम खलील अबू-मुलाल अल-बलावी के चित्रों के साथ हुआ। अल-बलावी अल-कायदा का वही समर्थक था जिसने 2009 के आत्मघाती बम धमाके को अंजाम दिया था, जिसमें सात अमेरिकी सीआईए अधिकारियों और ठेकेदारों सहित नौ लोगों की जान गई थी।
सीएनएन के अनुसार, दूसरी पोस्ट में एआई (AI) की ओर से तैयार किया गया एक ग्राफिक दिखाया गया था, जिसमें मक्का, मदीना और यरुशलम स्थित इस्लाम के तीन सबसे पवित्र स्थलों को एक रोशनी भरे रास्ते से जुड़ा हुआ दर्शाया गया था। साथ ही बैकग्राउंड में एक कविता पढ़ी जा रही थी, जिसमें बगावत, मौत के सामने निडरता और आत्मसम्मान की रक्षा पर जोर दिया गया था।
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