
नई दिल्ली : भारत ने आइची-नागोया एशियन पैरा गेम्स 2026 में 114 पदक जीतकर इतिहास रच दिया है। यह किसी एक एडिशन में भारत का अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। भारत ने पिछली बार हांगझोऊ के मुकाबले 6 मेडल अधिक जीते हैं।
भारतीय पैरा-एथलीटों ने सभी उम्मीदों को पीछे छोड़ते हुए एशियाई पैरा गेम्स में अब तक का अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया। शुक्रवार को जापान के नागोया में अंतिम दिन भी शानदार प्रदर्शन किया। इस तरह भारत ने 30 गोल्ड मेडल समेत कुल 114 पदक जीतकर अपने अभियान का समापन किया।

पिछली बार से आधे एथलीट, शानदार प्रदर्शन
आइची-नागोया में भारत का प्रदर्शन उम्मीदों से बेहतर रहा। खासकर इसलिए क्योंकि वहां जाने वाला दल पिछले संस्करण की तुलना में काफी छोटा था। 2026 के खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व कुल 168 पैरा-एथलीटों ने किया। वहीं, हांगझोऊ में 309 एथलीटों ने हिस्सा लिया था।
उस समय भारत ने 108 पदक (जिनमें 27 गोल्ड शामिल थे) जीते थे, जो तब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन था। इन खेलों में पहली बार ऐसा हुआ कि गोल्ड मेडल की संख्या में केवल पैरा-एथलेटिक्स का ही दबदबा नहीं रहा।
आइची नागोया में बैडमिंटन खिलाड़ियों, तीरंदाजों और निशानेबाज मोना अग्रवाल ने भी अहम योगदान दिया। भारत ने गेम्स के अंतिम दिन 30 गोल्ड, 35 सिल्वर और 49 ब्रॉन्ज मेडल जीते।

अपने अभियान के आखिरी दिन, भारत ने नौ गोल्ड मेडल जीते। यह इस एडिशन में एक दिन में हासिल किए गए पदकों की अब तक की सबसे बड़ी संख्या है। भारत ने तीरंदाजी, शूटिंग, बैडमिंटन और एथलेटिक्स में गोल्ड अपने नाम किया।
शुक्रवार को शटलरों ने तीन गोल्ड मेडल जीते। इनमें पेरिस पैरालंपिक चैंपियन नितेश कुमार और नवीन शिवकुमार की व्यक्तिगत जीत भी शामिल है।
गेम्स के आखिरी दिन प्लेयर्स ने मेडल की बारिश कर दी। अपने अभियान के आखिरी दिन, भारत ने नौ गोल्ड मेडल जीते। यह इस एडिशन में एक दिन में हासिल किए गए पदकों की सबसे बड़ी संख्या है। इसमें तीरंदाजी, शूटिंग, बैडमिंटन और एथलेटिक्स में टॉप पोजिशन हासिल की।
एथलेटिक्स में दमदार प्रदर्शन
पैरा एशियन गेम्स में हमेशा की तरह, इस बार भी एथलेटिक्स सबसे अहम रहा। एथलेटिक्स में भारत ने कुल 65 (22 गोल्ड, 19 सिल्वर और 24 ब्रॉन्ज) जीते जो 2023 के मुकाबले 12 अधिक हैं। इस तरह भारत की तरफ से जीते गए कुल 30 गोल्ड मेडल में से 73% से अधिक गोल्ड अकेले एथलेटिक्स ट्रैक और फील्ड से निकले। भारत का पैरा एथलेटिक्स हमेशा से थ्रोइंग स्पर्धाओं (जैवलीन, शॉटपुट, क्लब थ्रो) पर निर्भर रहा है।

सुमित अंतिल और सुंदर सिंह गुर्जर जैसे स्थापित एथलीटों ने अपने वर्ल्ड क्लास स्टैंडर्ड को दोहराते हुए गोल्ड मेडल पर कब्जा जमाया। प्रणव सूरमा ने डबल गोल्ड जीतकर मेडल की संख्या में बढ़ोतरी की। हाई जंप और लॉन्ग जंप में निषाद कुमार (T47) का डबल गोल्ड में उनकी क्लास दिखाई दी।
पारंपरिक रूप से भारत फील्ड इवेंट्स में पदक जीतता रहा था, लेकिन इस बार ट्रैक इवेंट्स (100 मीटर, 200 मीटर, 400 मीटर) में भारतीय एथलीटों ने मेडल के साथ इतिहास रचा।
सिमरन शर्मा (T12) ने दृष्टिबाधित वर्ग में 100 मीटर और 200 मीटर का डबल गोल्ड जीतकर एशियाई स्प्रिंट पर भारत का दबदबा कायम किया। 100 मीटर और 400 मीटर दोनों श्रेणियों में स्वर्ण पदक जीतना भारतीय पैरा-स्प्रिंटिंग के लेवल को दिखाता है।

तैराकी में चौंकाने वाला प्रदर्शन
इस बड़े इवेंट में भारतीय तैराकी दल ने उम्मीदों से कहीं बेहतर प्रदर्शन करते हुए कुल 11 पदक जीते। इसमें तीन सिल्वर मेडल शामिल हैं। आखिरी दिन, हिमांशु नंदल ने पुरुषों की 100 मीटर फ्रीस्टाइल S11 स्पर्धा में ब्रॉन्ज जीतकर अपनी 'ब्रॉन्ज मेडल की हैट्रिक' पूरी की। इससे पहले, हिमांशु ने पुरुषों की 400 मीटर फ्रीस्टाइल और 100 मीटर ब्रेस्टस्ट्रोक S11 स्पर्धाओं में भी ब्रॉन्ज मेडल जीते थे।
22 वर्षीय हिमांशु, जो ऑप्टिक नर्व फेल होने के कारण जन्म से ही दृष्टिहीन हैं, ने 1 मिनट 5.90 सेकंड का समय लिया। वे जापान के उचु टोमिता (58.22 सेकंड) और चीन के चुआनझेन सन (58.70 सेकंड) के बाद तीसरे स्थान पर रहे। उन्होंने इन खेलों में अपने ही देश के रवि बुडिगिना के तीन पदक जीतने के रिकॉर्ड की बराबरी कर ली है; रवि ने दो सिल्वर और एक ब्रॉन्ज मेडल जीता था।
कैसे बदल रही तस्वीर?
‘टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम’ (TOPS) के माध्यम से पैरा एथलीटों को ओलंपिक/पैरालंपिक स्तर के गैर-पैरा एथलीटों के समान ही प्रायोरिटी लिस्ट में रखा जा रहा है। प्रमुख एथलीटों को प्रतियोगिता से पहले फिनलैंड, जर्मनी और जापान में ट्रेनिंग के साथ ही विदेशी कोचों के गाइडेंस में तैयारी करने के अवसर से तस्वीर बदली है।
भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) और नेशनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (NCOE) में बायोमैकेनिकल एनालिसिस, इंजरी मैनेजमेंट, न्यूट्रिशन और रिकवरी टूल्स से प्लेयर्स की क्षमता बढ़ी है।
इसके अलावा केंद्र सरकार और राज्य सरकारों (विशेषकर हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, तमिलनाडु) की तरफ से पैरा एथलीटों को सामान्य ओलंपिक/एशियाई पदक विजेताओं के बराबर नकद पुरस्कार और क्लास-1 सरकारी नौकरियां देने की नीति ने भी प्लेयर्स को बूस्ट किया है। इन सब का असर साल दर साल गेम्स में दिख रहा है।




