
तारीख 14 मार्च 2013, ऑस्ट्रे्लियाई क्रिकेट टीम 4 मैचों की टेस्ट सीरीज खेलने भारत आई थी। वनडे हो, टेस्ट या टी-20, किसी प्लेयर का डेब्यू जरूर होता है। हाल के दिनों में देखें तो मानव सुथार ने बतौर स्पिन गेंदबाज अफगानिस्तान और सारांश जैन श्रीलंका के खिलाफ अपना अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट डेब्यू कर चुके हैं।
इसी तरह आज से 13 साल पहले जब ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ रेड बॉल क्रिकेट में भारत को एक और धाकड़ ओपनर मिला। नाम था- शिखर धवन। हर बड़ी पारी के बाद मूंछों पर ताव देते उनके अंदाज को देख फैन्स ने उन्हें गब्बर की संज्ञा दी थी। किसी भी डेब्यू करने वाले प्लेयर के लिए वो सीरीज या मैच तब यादगार बन जाता है, जब वह अपने शानदार प्रदर्शन से सबका दिल जीत ले।
धवन के साथ भी ऐसा ही हुआ पर क्या आपको पता है अगर उस दिन ऑस्ट्रेलिया ने गंभीरता से वो अपील की होती तो शायद धवन शून्य पर आउट हो जाते और वो पारी न खेल पाते।

ऑस्ट्रेलिया ने वो कौन सी अपील छोड़ दी जिसके बाद धवन ने कंगारुओं को अपने बल्ले से मुंहतोड़ जवाब दिया, आइए आपको बताते हैं।
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तीसरा टेस्ट और शिखर का डेब्यू
शिखर का मतलब क्या होता है? जो हमेशा आगे रहे, शीर्ष पर रहे। शिखर धवन के साथ भी ऐसा ही हुआ। शिखर ने 2013 में चार टेस्ट मैचों की सीरीज के तीसरे मुकाबले में बतौर ओपनर उतरे। धवन वनडे में 2010 में ही डेब्यू कर चुके थे। वहां भी प्रतिद्वंद्वी ऑस्ट्रेलिया ही थी। टेस्ट में उन्हें डेब्यू करने में तीन साल लग गए।
खैर, अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पहला मैच था और सौभाग्य से ओपनिंग बल्लेबाजी की जिम्मेदारी भी उनके कंधों पर थी। उस मैच में शिखर विस्फोटक ओपनर बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग की जगह टीम में शामिल किए गए थे। मुकाबला मोहाली में था। उनका साथ देने के लिए मुरली विजय उतरे। इंटरनेशनल क्रिकेट की पहली गेंद, स्वाभाविक है कोई भी नर्वस होगा, लेकिन उससे पहले कुछ ऐसा घटा जिसने शिखर को कुछ देर के लिए हैरान कर दिया था।

ऑस्ट्रेलिया की वो अपील वाला मजाक
कंगारुओं की एक आदत रही है, वो अपने खिलाफ उतरी टीम का मजाक उड़ाने और स्लेजिंग करने में पीछे नहीं रहते। मोहाली में तीसरे टेस्ट मैच में उनकी इसी हरकत ने फिर लोगों का ध्यान खींचा। मुरली विजय मैच की पहली गेंद खेलने जा रहे थे। ऑस्ट्रेलिया के गेंदबाज मिचेल स्टार्क पहली गेंद फेंकने के लिए जैसे ही हाथ आगे किया गेंद हाथ से फिसल गई और विकटों पर जा लगी। धवन उस समय नियम के हिसाब से क्रीज से काफी आगे थे और कायदे से आउट करार दिए जाते पर ऑस्ट्रेलिया ने अपील ही नहीं की। कप्तान माइकल क्लार्क ने मजाकिया अंदाज में रिव्यू का साइन बनाया और धवन को चिढ़ाया। इसके बाद धवन ने बल्ले से जो जवाब दिया, वो इतिहास बन गया।
Shikhar Dhawan was run out on his debut without facing a ball. Australia withdrew the appeal and mocked him as a nervous debutant. Dhawan’s response? The fastest Test century on debut by an Indian. 🥶🔥 https://t.co/ayw8XFmUwP
— Elysium (@CricketElysium) October 13, 2026
क्या था वो नियम जिसके चलते आउट हो जाते धवन

उस मैच का क्या हाल हुआ?
शिखर धवन ने अपने साथ हुए इस मजाक को गंभीरता से लेते हुए सबसे तेज टेस्ट शतक जड़ दिया। उस समय यह किसी भी भारतीय बल्लेबाज का डेब्यू पर सबसे तेज टेस्ट शतक था। मोहाली में खेले गए तीसरे टेस्ट में ऑस्ट्रेलिया ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 408 रन बनाए थे। स्टीव स्मिथ ने 92, वार्नर ने 71 और एड कोवन ने 86 रनों की पारी खेली थी। भारत ने शिखर धवन और मुरली विजय के शानदार 187 और153 रनों की बदौलत 499 रन बना डाले। ऑस्ट्रेलिया दूसरी पारी में मात्र 223 र ढेर हो गया और भारत ने अंतिम में यह मैच 6 विकेट से जीत लिया। बता दें कि उस सीरीज में भारत ने ऑस्ट्रेलिया को 4-0 से हराया था।
शिखर धवन का करियर

टेस्ट में सबसे तेज शतक लगाने वाले बल्लेबाज(डेब्यू)
| बल्लेबाज | गेंदें | टीम | विपक्षी टीम | साल |
| शिखर धवन | 85 | भारत | ऑस्ट्रेलिया | 2013 |
| जोश इंग्लिस | 90 | ऑस्ट्रेलिया | श्रीलंका | 2025 |
| ड्वेन स्मिथ | 93 | वेस्टइंडीज | दक्षिण अफ्रीका | 2004 |
| पृथ्वी शॉ | 99 | भारत | वेस्टइंडीज | 2018 |
| मैट प्रायर | 105 | इंग्लैंड | वेस्टइंडीज | 2007 |
| अबुल हसन | 106 | बांग्लादेश | वेस्टइंडीज | 2012 |
| लुआन-ड्रे प्रीटोरियस | 112 | दक्षिण अफ्रीका | जिम्बाब्वे | 2025 |




