9 घंटे दूर ट्रेनिंग, अब इकलौता गोल मारकर 44 साल बाद दिलाया गोल्ड... लालरेमसियामी की कहानी
2018 में जो सपना अधूरा रह गया था, उसे भारतीय महिला हॉकी टीम ने इस बार पूरा कर दिया। इस ऐतिहासिक जीत में लालरेमसियामी हमारजोटे का भी अहम योगदान रहा।
9 घंटे दूर ट्रेनिंग, अब इकलौता गोल मारकर 44 साल बाद दिलाया गोल्ड... लालरेमसियामी की कहानी
एशियन गेम्स के फाइनल मुकाबले में टीम इंडिया की ओर से लालरेमसियामी ने एकलौता गोल किया। (फोटो- X/ @TheHockeyIndia)

जिस उम्र में बच्चे घर से बाहर नहीं निकलते, उस उम्र में मिजोरम के कोलासिब की एक बच्ची हॉकी खेलने का सपना लिए 8-9 घंटे का लंबा और थका देने वाला सफर तय करती थी। पूरे राज्य में खेल की महज एक अकादमी थी और वहां तक पहुंचने का रास्ता संघर्ष भरा था। लेकिन आज उसी बच्ची ने भारत के लिए 44 साल का सूखा खत्म कर दिया। ये कहानी भारतीय महिला हॉकी टीम की स्टार लालरेमसियामी हमारजोटे (Lalremsiami Hmarzote) की है।

भारतीय महिला हॉकी टीम ने एशियन गेम्स में 44 साल बाद गोल्ड मेडल जीता है। भारत ने फाइनल में चीन को 1-0 से हराया। टीम की ओर से एकमात्र गोल लालरेमसियामी ने 10वें मिनट में किया। उनका यह गोल निर्णायक साबित हुआ और भारतीय टीम ने पूरे मुकाबले में अपनी बढ़त बनाए रखी। इस जीत के साथ भारत ने लॉस एंजिलिस 2028 ओलंपिक के लिए सीधे क्वालिफाई भी कर लिया।

गोल्ड मेडल के साथ भारतीय महिला हॉकी टीम। (फोटो- ANI)

यह एशियाई खेलों में भारतीय महिला हॉकी टीम का दूसरा गोल्ड मेडल है। इससे पहले टीम ने 1982 में पहली बार स्वर्ण पदक जीता था।

'ये सिर्फ हमारी नहीं, पूरे भारत की जीत है'

लालरेमसियामी ने अपने 200वें इंटरनेशनल मैच को निर्णायक गोल के साथ यादगार बना दिया। गोल्ड जीतने के बाद उन्होंने कहा कि टीम ने पहले ही तय कर लिया था कि इस बार उसे लॉस एंजिलिस ओलंपिक के लिए क्वालिफाई करना है और एशियन गेम्स में गोल्ड जीतना है।

उन्होंने कहा, “बहुत अच्छा महसूस हो रहा है। एक टीम के तौर पर हमने तय किया था कि इस बार हमें लॉस एंजिलिस ओलंपिक के लिए क्वालिफाई करना है और यहां जीत हासिल करनी है। हमने टीम के तौर पर जो लक्ष्य तय किया था, उसे हासिल कर लिया। इसलिए बहुत अच्छा लग रहा है। यह सिर्फ हमारी टीम का जीता हुआ मेडल नहीं है, बल्कि पूरे भारत ने इसे जीता है। इसलिए हम यह मेडल पूरे भारत को समर्पित करना चाहते हैं।”

मिजोरम से शुरू हुआ हॉकी का सफर

मिजोरम की पहली महिला ओलंपियन बनने वाली लालरेमसियामी का यहां तक पहुंचने का सफर बेहद संघर्षपूर्ण रहा है। मिजोरम के कोलासिब में जब वह बड़ी हो रही थीं, तब वहां खेल के संसाधन बेहद सीमित थे। पूरे राज्य में उस समय हॉकी की केवल एक ही अकादमी थी और वहां सीट हासिल करना आसान नहीं था।

लालरेमसियामी ने स्कूल में हॉकी खेलना शुरू किया। इसके बाद उन्होंने ट्रायल दिया और आखिरकार अकादमी में जगह बनाने में कामयाब रहीं।

चीन के खिलाफ गोल के बाद जश्न मनाती भारतीय खिलाड़ी। (फोटो- ANI)

ट्रेनिंग के लिए 8-9 घंटे का सफर

लालरेमसियामी के करियर में थेंजावल का स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (SAI) सेंटर अहम पड़ाव रहा। उनके घर से इस सेंटर तक पहुंचने में 8 से 9 घंटे का सफर करना पड़ता था। उन्होंने 2011 में सिर्फ 11 साल की उम्र में इस अकादमी में दाखिला लिया। अगले कुछ साल उन्होंने वहीं हॉकी की ट्रेनिंग ली। इसके बाद 2016 में वह नई दिल्ली की नेशनल हॉकी अकादमी चली गईं।

olympics.com के मुताबिक, अपने शुरुआती दिनों को याद करते हुए लालरेमसियामी कहती हैं, “अब जब मैं पीछे मुड़कर देखती हूं तो खुद को बहुत भाग्यशाली मानती हूं। मेरा सफर काफी मुश्किल था, क्योंकि मिजोरम में हॉकी की सिर्फ एक अकादमी थी और उसमें जगह मिलना बेहद मुश्किल था।”

लालरेम्सियामी भारत के लिए अबतक 200 मैच खेल चुकी हैं। (फोटो- hockey india)

अब बच्चों के लिए इंस्पिरेशन हैं लालरेमसियामी

लालरेमसियामी के लिए सबसे खास बात यह है कि अब उनके अपने राज्य में बच्चे उन्हें देखकर हॉकी खेलना चाहते हैं। जब वह मिजोरम जाती हैं तो लोग उनसे हॉकी को लेकर बात करते हैं।

लालरेमसियामी ने कहा, “अब वे मुझे और ज्यादा प्रेरित करते हैं। जब मैं मिजोरम जाती हूं तो माता-पिता और बच्चे मेरे पास आकर कहते हैं कि वे अपने बच्चों को हॉकी खिलाना चाहते हैं। बच्चे खुद कहते हैं कि वे हॉकी खेलना चाहते हैं और पूछते हैं कि शुरुआत कैसे करें। मेरे लिए यह बहुत बड़ी बात है कि कोई मेरी वजह से हॉकी खेलना चाहता है। यह मेरे लिए भी बहुत प्रेरणादायक है।”

उन्होंने कहा कि उनका सपना है कि मिजोरम में ज्यादा हॉकी ग्राउंड हों, ताकि ज्यादा बच्चे इस खेल को अपना सकें। उनके मुताबिक, हर बच्चे का सफर उनके जैसा नहीं होगा, लेकिन ज्यादा मौके मिलने से ज्यादा लड़कियां हॉकी खिलाड़ी बन सकती हैं और उनसे भी बेहतर प्रदर्शन कर सकती हैं।

मैच के दौरान टीम की अन्य खिलाड़ियों के साथ लालरेम्सियामी। (फोटो- hockey india)

2017 में सीनियर टीम में किया डेब्यू

लालरेमसियामी ने 2017 में बेलारूस के खिलाफ टेस्ट सीरीज से भारतीय सीनियर महिला हॉकी टीम में डेब्यू किया। इससे पहले वह भारत की अंडर-21 टीम में तेजी से आगे बढ़ चुकी थीं।

2018 में वह ब्यूनस आयर्स यूथ ओलंपिक में सिल्वर मेडल जीतने वाली भारतीय जूनियर हॉकी टीम का हिस्सा थी। इसी साल उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स और हॉकी महिला वर्ल्ड कप में भी भारत का प्रतिनिधित्व किया।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बनाई पहचान

लालरेमसियामी 2018 एशियन गेम्स में सिल्वर मेडल जीतने वाली भारतीय टीम का हिस्सा थीं। टोक्यो 2020 ओलंपिक में भारतीय महिला हॉकी टीम के ऐतिहासिक चौथे स्थान के सफर में भी उनकी अहम भूमिका रही।

इसके अलावा वह 2022 महिला एशिया कप और बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स में ब्रॉन्ज मेडल जीतने वाली भारतीय टीम का हिस्सा रहीं। FIH महिला हॉकी प्रो लीग 2021-22 में भी उन्होंने भारत के तीसरे स्थान पर रहने में अहम योगदान दिया।

2019 में उन्हें हॉकी इंडिया की ओर से अंडर-21 महिला वर्ग में 'असुंता लकड़ा अवॉर्ड फॉर अपकमिंग प्लेयर ऑफ द ईयर' दिया गया।

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