
रूस की राजधानी मॉस्को में आयोजित ‘रूस एनर्जी वीक 2026’ का 16 अक्टूबर को आखिरी दिन है। 14 अक्टूबर से शुरू हुए इस अंतरराष्ट्रीय फोरम में वैश्विक ऊर्जा बाजार के भविष्य, ऊर्जा सुरक्षा, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और तेल-गैस उद्योग के सामने मौजूद चुनौतियों पर चर्चा हो रही है।
इस बार भारत फोरम का आधिकारिक साझेदार देश है। भारत की ओर से फेडरेशन ऑफ इंडियन पेट्रोलियम इंडस्ट्री (FIPI) भी इसमें हिस्सा ले रही है। इस मंच पर ऊर्जा सहयोग के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ विकास जैसे मुद्दे भी चर्चा के केंद्र में हैं।
एनर्जी वीक में तुर्किये के जीरो वेस्ट फाउंडेशन के अध्यक्ष समेद आगिरबाश ने कहा कि बेहतर और टिकाऊ दुनिया बनाने के लिए अलग-अलग देशों, क्षेत्रों और समूहों के साथ मिलकर काम करना जरूरी है। RT से बातचीत में उन्होंने कहा कि मॉस्को ऊर्जा के लिहाज से एक महत्वपूर्ण शहर है। यहां उन्होंने रूस के ऊर्जा मंत्रालय, परिवहन मंत्रालय और दूसरे सहयोगियों के साथ भी बातचीत की है।
आगिरबाश ने कहा, 'हम अलग-अलग लोगों और विभिन्न क्षेत्रों के साथ बातचीत करने की कोशिश कर रहे हैं। हम मॉस्को में हैं। ऊर्जा के लिहाज से मॉस्को एक बहुत महत्वपूर्ण शहर है। हमने रूस के ऊर्जा मंत्रालय, परिवहन मंत्रालय और वहां के कुछ अन्य सहयोगियों से भी मुलाकात की है। हमारा एक ही लक्ष्य है। हम एक बेहतर दुनिया बनाना चाहते हैं। हम एक बेहतर धरती बनाना चाहते हैं। इसके लिए हमें अलग-अलग क्षेत्रों, समूहों और लोगों के साथ चर्चा करनी होगी।'
आगिरबाश जीरो वेस्ट फाउंडेशन के अध्यक्ष होने के साथ COP31 के हाई-लेवल क्लाइमेट चैंपियन भी हैं। उनका काम कचरे को कम करने, संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल और टिकाऊ जीवनशैली को बढ़ावा देने से जुड़ा है।
एक तरफ मोटापे की दवाएं, दूसरी तरफ भुखमरी से जूझते लोग
फोरम में आगिरबाश ने खाने की बर्बादी और भुखमरी के बीच मौजूद असमानता पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि दुनिया के एक हिस्से में मोटापे से निपटने के लिए दवाएं बनाई जा रही हैं, जबकि दूसरे हिस्से में लोग भूख और साफ पानी की कमी से जूझ रहे हैं।
आगिरबाश ने इस असमानता को दूर करने के लिए तुर्किये की प्रथम महिला एमिन एर्दोगन की जीरो वेस्ट पहल का जिक्र किया। उनके मुताबिक, इस पहल का उद्देश्य दुनिया को अधिक न्यायसंगत और टिकाऊ रास्ता दिखाना है।
संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) की 2024 की रिपोर्ट खाने की बर्बादी की गंभीरता को रेखांकित करती है। रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2022 में दुनियाभर में करीब 1.05 अरब टन खाना बर्बाद हुआ। यह खुदरा बाजारों, खाद्य सेवाओं और घरों में उपभोक्ताओं के लिए उपलब्ध भोजन का लगभग पांचवां हिस्सा था। इसी रिपोर्ट के अनुसार, उस साल 78.3 करोड़ लोग भुखमरी से प्रभावित थे।
संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक, खाद्य नुकसान और बर्बादी से वैश्विक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन का लगभग 8 से 10 प्रतिशत हिस्सा जुड़ा है।
भारत पहली बार रूस एनर्जी वीक का आधिकारिक साझेदार देश
इस साल के रूस एनर्जी वीक में भारत की भागीदारी खास है। फोरम के आयोजकों से जुड़ी जानकारी के मुताबिक, भारत पहली बार इसका आधिकारिक साझेदार देश बना है।
फेडरेशन ऑफ इंडियन पेट्रोलियम इंडस्ट्री (FIPI), जो भारत के तेल और गैस क्षेत्र से जुड़ी प्रमुख संस्था है, इस दौरान भारतीय ऊर्जा कंपनियों के काम और परियोजनाओं को भी पेश कर रही है। रूस एनर्जी वीक में भारत की भागीदारी दोनों देशों के बीच ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग के महत्व को दर्शाती है।
भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा एक महत्वपूर्ण मुद्दा है। देश की तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात से पूरा होता है, इसलिए कच्चे तेल की उपलब्धता, कीमत और आपूर्ति के रास्ते अर्थव्यवस्था पर सीधा असर डालते हैं। रूस के साथ ऊर्जा व्यापार इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जिसमें भारत अलग-अलग देशों से तेल खरीदकर आपूर्ति के स्रोतों में विविधता बनाए रखने की कोशिश करता है।
’भारत की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना हमारी प्राथमिकता’
RT से बातचीत में फेडरेशन ऑफ इंडियन पेट्रोलियम इंडस्ट्री (FIPI) के श्याम पंडिता ने भारत-रूस संबंधों और ऊर्जा सुरक्षा पर बात की। उन्होंने कहा कि रूस ऐतिहासिक रूप से भारत का मित्र रहा है और मौजूदा भू-राजनीतिक हालात में भी भारत के लिए कच्चे तेल का प्रमुख स्रोत बना हुआ है।
उन्होंने आगे कहा, 'भारत के पास ऊर्जा के अलग-अलग स्रोत हैं। जहां से हमें आसानी से तेल मिल रहा है, हम खरीद रहे हैं। इसमें रूस भी शामिल है। हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी यह सुनिश्चित करना है कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा बरकरार रहे।




