
भइया, छोड़ दीजिए... जाने दीजिए, प्लीज देख लीजिए, कॉपी-किताब है,
कसम खाते हैं अब से नहीं आएंगे। हम दोस्त हैं... 'भईया! छोड़ दीजिए'
चेहरे पर डर, आंखों में बेबसी और गुहार लगाते ये शब्द बिहार की उस नाबालिग बच्ची के हैं, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर दो दिन से शेयर हो रहा है। तारीख 19 सितंबर, स्थान- बिहार का जमुई जिला, समय शाम के 7 बजे, 10वीं क्लास में पढ़ने वाले दो बच्चे। शनिवार का दिन था, ट्यूशन के बाद दोनों स्कूटी से जमुई स्थित मड़वा पहाड़ी घूमने गए थे। लौटते समय अंधेरा हो चुका था।
कुछ दूर आगे बढ़ते युवकों का समूह उन्हें अचानक रोक लेता है। 'बाइक रोको, कहां जा रहे हो?' इस पर जवाब मिलता है- 'भइया, घर जा रहे हैं। आपलोग रास्ता क्यों रोक रहे हैं?' इसके बाद शुरू होता है बदसलूकी और दरिंदगी का खेल। नाबालिग लड़की लगातार छोड़ने की गुहार लगाती है लेकिन मानवता को शर्मसार करने वाले ये लोग नहीं मानते।
#WATCH | Jamui, Bihar: Nandan Yadav, the prime accused in the harassment of a minor girl in Jamui, has been shot in the leg during an encounter with the police. pic.twitter.com/odhctAsLPH
— ANI (@ANI) September 22, 2026
लड़की के साथ अश्लील हरकत करते हैं, उसके कपड़े खींचते हैं। उसे घसीटते हैं। इनमें से गमछे से मुंह ढंका एक युवक लड़की के साथ बदसलूकी करता है। नाबालिग बच्ची लगातार 'भईया! छोड़ दीजिए' की गुहार लगाती है।
लड़की के साथ मौजूद लड़का भी युवकों के समूह से दोनों को छोड़ने की गुहार लगाता है। वह लड़की को बचाने की कोशिश करता नजर आता है। दोनों अंधेरे में सड़क पर अपनी स्कूटी की तरफ भागते हैं, दरिंदों का ग्रुप पीछा करता है। किसी तरह हाथ जोड़कर छोड़ देने की गुहार लगाते हुए दोनों नाबालिग बच्चे वहां से निकलते हैं।
जवाबदेही तो फेसबुक-X की भी है ना
अब घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद जिला प्रशासन कार्रवाई कर रहा है। मामले में एफआईआर दर्ज होती है। एसटीएफ का गठन होता है। तीन लोगों की गिरफ्तारी होती है। ऊपर की घटना में सबसे पहले जिम्मेदार वो लोग हैं जो नाबालिग बच्चों के साथ अश्लीलता और अमानवीयता कर रहे हैं।
इस घटना का एक दूसरा किरदार भी है। ये किरदार है मेटा जैसे वो सोशल प्लेटफॉर्म (फेसबुक, इंस्टाग्राम, एक्स व अन्य) जिनके जरिये इस अश्लीलता और दरिंदगी का वीडियो शेयर किया जा रहा है।
क्या मेटा और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इस घटना में बराबर के भागीदार नहीं हैं? वीडियो वायरल करने के गुनहगार तो ये भी हैं।

आपके प्लेटफॉर्म के जरिए एक नाबालिग के साथ अमानवीयता को न सिर्फ फैलाया जा रहा है बल्कि उनके लिए सार्वजनिक रूप से शर्मिंदगी और जिंदगी भर ना भूलने वाला दर्द को दुनिया के सामने रखने में मदद की जा रही है। सवाल है कि क्या इसमें इन सोशल मीडिया कंपनियों की कोई जिम्मेदारी नहीं है। अगर जिम्मेदारी है तो इनकी तरफ से तुरंत वीडियो को सर्कुलेट करने को लेकर ऐक्शन क्यों नहीं हो रहा है।
घटना के तीन दिन बाद भी एक्स जैसे अन्य सोशल प्लेटफॉर्म पर अब भी यह वीडियो लगातार दिख रहा है। मगर इस सर्कुलेट को रोकने वाला कोई नहीं है। समाज के प्रति संवेदनशीलता और नैतिकता की बड़ी-बड़ी बातें करने वाली मेटा जैसी सोशल मीडिया कंपनियां आखिर कर क्या रही हैं?
कनाडा की घटना का Chat GPT कनेक्शन
कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया स्थित कस्बे टंबलर रिज में इस साल 10 फरवरी को गोलीबारी हुई थी। इसमें आठ लोगों की मौत हो गई थी। घटना को 18 साल के ट्रांसजेंडर वैन रूट्सलार ने अंजाम दिया था। घटना वाले दिन रूट्सलार ने पहले अपने घर पर अपनी मां और सौतेले भाई को गोली मारी। इसके बाद अपने पुराने स्कूल जाकर एक एजुकेशनल असिस्टेंट और 12-13 साल की उम्र के पांच छात्रों की हत्या कर दी। बाद में वैन रूट्सलार ने आत्महत्या कर ली।
खास बात है कि घटना से पहले जून 2025 में युवक ने चैट जीपीटी पर अटैक की प्लानिंग से जुड़ी जानकारी सर्च की थी। Open AI ने सबसे पहले वैन रूट्सलार की ChatGPT के साथ बातचीत पर ध्यान दिया था। इसके बाद शूटर का अकाउंट डीएक्टिवेट कर दिया गया था, लेकिन वह एक नया अकाउंट बनाने और अटैक की प्लानिंग बनाने के लिए प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल जारी रखने में कामयाब रहा। इससे पहले सेफ्टी टीम के सदस्यों ने पुलिस से संपर्क करने की सलाह दी थी, लेकिन ऑल्टमैन और OpenAI के अन्य लीडर्स ने उनकी बात नहीं मानी।

अब ब्रिटिश कोलंबिया प्रांत ने कैलिफोर्निया की कंपनी OpenAI पर मुकदमा किया है। आरोप है कि टम्बलर रिज के एक स्कूल में शूटर के गोलीबारी करने से पहले, कंपनी ने अपने ChatGPT प्लेटफॉर्म पर मिली धमकियों के बारे में कानून लागू करने वाली एजेंसियों को इन्फॉर्म नहीं किया था।
सैन फ्रांसिस्को की फेडरल कोर्ट में दायर इस मुकदमे में OpenAI और उसके CEO सैम ऑल्टमैन को प्रतिवादी बनाया गया है। ब्रिटिश कोलंबिया सरकार, इमरजेंसी रिस्पॉन्स और कम्युनिटी रिकवरी से जुड़े पिछले और भविष्य के खर्चों की भरपाई के लिए OpenAI से आर्थिक मुआवजा मांग रही है।
मामले के सार्वजनिक होने के बाद अप्रैल 2026 में सैम ऑल्टमैन ने टम्बलर रिज समुदाय को पत्र लिखकर माफी मांगी थी। इसके साथ ही स्वीकार किया था कि कंपनी को समय रहते पुलिस को इन्फॉर्म करना चाहिए था।
ये कदम क्यों है खास?
ब्रिटिश कोलंबिया सरकार की तरफ से Open AI के खिलाफ इस केस को अहम माना जा रहा है। जानकारों का मानना है कि यह मामला तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दुनिया में एक बड़ा कानूनी मोड़ साबित होगा। अब तक सोशल मीडिया या एआई प्लेटफॉर्म्स धारा 230 जैसी कानूनी छूट (Safe Harbor) के तहत थर्ड-पार्टी कंटेंट के लिए जिम्मेदारी से बचते रहे हैं।
ऐसे में यह मुकदमा इस बात की नजीर तय कर सकता है कि यदि कोई एआई चैटबॉट किसी यूजर की तरफ से संभावित सामूहिक नरसंहार या हिंसा की योजना को पहचान लेता है, तो कंपनी की पुलिस को सतर्क करने की कानूनी जिम्मेदारी बनती है या नहीं।
अश्लीलता फैलाने पर कानून क्या कहता है?
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स (Intermediaries) और यूजर्स के लिए इन्फोर्मेशन टेक्नोलॉजी (मध्यवर्ती दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 लागू किए हैं। इसके तहत प्लेटफॉर्म्स को अपने यूजर्स को स्पष्ट रूप से सूचित करना होगा कि वे ऐसी सामग्री होस्ट, प्रदर्शित या शेयर न करें जो अश्लील, किसी की प्रिवेसी का उल्लंघन करने वाली, बच्चों के लिए हानिकारक या महिलाओं के प्रति अपमानजनक हो।
यदि कोई कंटेंट किसी व्यक्ति की नग्नता, यौन कृत्य, मॉर्फ्ड (छेड़छाड़ की गई) छवि या निजता का उल्लंघन दर्शाती है, तो शिकायत मिलने के 24 घंटे के भीतर प्लेटफॉर्म को उस सामग्री को हटाना या उसकी पहुंच ब्लॉक करना अनिवार्य है। अन्य गैर-कानूनी या भ्रामक कंटेंट की शिकायत पर 72 घंटे के भीतर कार्रवाई करना जरूरी है।
यदि सोशल मीडिया कंपनियां (X, Meta/Facebook, Instagram आदि) सरकारी आदेश या अदालत के आदेश के बाद भी ऐसी सामग्री हटाने में विफल रहती हैं, तो वे IT एक्ट की धारा 79 के तहत मिलने वाली कानूनी सुरक्षा खो देती हैं और उन्हें भी अपराध का पक्षकार माना जा सकता है।
POCSO एक्ट (2012) की धारा 13, 14 और 15: यदि पीड़िता या पीड़ित नाबालिग है, तो उसका अश्लील/आपत्तिजनक वीडियो स्टोर करना, देखना या दूसरों को सर्कुलेट करना गंभीर अपराध है।
जुवेनाइल जस्टिस (JJ) एक्ट की धारा 74: किसी भी नाबालिग पीड़ित की पहचान, चेहरा, स्कूल या पते को उजागर करने वाला वीडियो शेयर करने पर जेल और जुर्माने का प्रावधान है।
- भारतीय न्याय संहिता (BNS)
धारा 77 (ताक-झांक/Voyeurism): किसी महिला की सहमति के बिना उसकी निजी तस्वीरें या वीडियो कैप्चर करना और प्रसारित करना। - धारा 356: सोशल मीडिया पर मानहानिकारक या प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाली सामग्री शेयर करना।

हमारी क्या जिम्मेदारी है?
अब फिर से बिहार की घटना पर लौटते हैं। इस तरह की घटनाओं के वीडियो हमारे मोबाइल पर वाट्सऐप, इंस्टा या फेसबुक के जरिये आते हैं। हम इन्हें देखते हैं, इस पर रिएक्ट करते हैं। इसके बाद हम क्या करते हैं। ये काफी अहम हो जाता है। आमतौर पर हम इस तरह के वीडियो को देखते हैं और अपने जानने वाले कुछ लोगों को फॉरवर्ड कर देते हैं। हो सकता है कि सभी लोग ऐसा ना करते हैं। इस तरह की घटनाओं में हमारी भी जिम्मेदारी अहम हो जाती है।
ये जरूरी है कि हम इस तरह के संवेदनशील मामले में जिम्मेदारी और परिपक्वता का परिचय दें। हम किसी भी सूरत में इस तरह के आपत्तिजनक फुटेज को डाउनलोड, शेयर या दोबारा पोस्ट न करें। यदि किसी व्यक्ति के मोबाइल या वाट्सएप ग्रुप में यह वीडियो आता है, तो उसे आगे फॉरवर्ड करने के बजाय तत्काल अपने डिवाइस से डिलीट कर दें।
इस मामले में पुलिस की भी सख्त हिदायत हिदायत होती है कि नाबालिग की पहचान उजागर करने या अपराध से जुड़े वीडियो का प्रसार करने पर पोक्सो एक्ट की धारा 23 और किशोर न्याय (देखभाल एवं संरक्षण) अधिनियम यानी जेजे एक्ट की धारा 74 के तहत गैर-जमानती धाराओं में कार्रवाई हो सकती है।




