
BRICS के 12वें दो दिवसीय संसदीय मंच का मंगलवार को राजधानी दिल्ली में समापन हो गया। ब्रिक्स संसदीय मंच के दिल्ली डिक्लेरेशन के तहत संयुक्त एजेंडे में 5 बड़ी घोषणाएं की गईं, जिसे खासतौर से ग्लोबल नॉर्थ यानी पश्चिमी दुनिया के लिए बड़े संदेश के तौर पर देखा जा रहा है। इसमें जन-केंद्रित विकास को प्राथमिकता देने की बात कही गई।
12th BRICS Parliamentary Forum Concludes in New Delhi with Adoption of a Joint Declaration 💠Joint Declaration Reaffirms Consensus of New Delhi Declaration (NDD); Endorses UNSC Reform and Greater Representation of Global South in Global Governance 💠Joint Declaration Condemns Cross-Border Terrorism, Terror Financing and Safe Havens; Demands Zero Tolerance and an End to Double Standards 💠Permanent Solutions to Global Challenges Lie in Dialogue, Peace and Cooperation: Lok Sabha Speaker 💠Lok Sabha Speaker Pushes for Sovereign Equality and Global South Priorities at 12th BRICS Parliamentary Forum 💠Parliaments Must Evolve into Transparent, Citizen-Centric Institutions to Safeguard Public Trust: Lok Sabha Speaker For more details, read here: https://t.co/rgofxtk41P #BRICS2026 #BRICSParliamentaryForum
— PIB India (@PIB_India) October 27, 2026
ब्रिक्स संसदीय मंच सम्मेलन में भारत के अलावा विशेष रूप से ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के विधायी नेता एक साथ आए। इस दौरान संयुक्त राष्ट्र में सुधार, बहुपक्षवाद को बढ़ावा देने और आतंकवाद के खिलाफ कड़े कदम उठाने जैसी 5 बड़ी घोषणाएं की गईं-
- UNSC में सुधार
- मल्टीपोलर वर्ल्ड को समर्थन
- आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख
- एकतरफा प्रतिबंधों का विरोध
- AI का सुरक्षित उपयोग और क्लाइमेट चेंज
UNSC में सुधार
ब्रिक्स संसदीय मंच के सदस्यों ने तत्काल अंतरराष्ट्रीय शांति और UNSC के सुरक्षा ढांचे में व्यापक सुधार की जरूरत पर जोर दिया। इसे “अधिक न्यायसंगत, लोकतांत्रिक, प्रभावी और सफल” बनाने की मांग की ताकि वैश्विक व्यवस्था में ग्लोबल साउथ को बेहतर प्रतिनिधित्व मिल सके। सदस्यों ने ग्लोबल साउथ को सकारात्मक बदलाव का प्रतीक बताते हुए अंतरराष्ट्रीय शांति बनाए रखने, मानवाधिकारों की रक्षा करने और एकजुटता को बढ़ावा देने में संयुक्त राष्ट्र की केंद्रीय भूमिका पर जोर दिया।
The 12th BRICS Parliamentary Forum 2026 concluded today with the valedictory address by Lok Sabha Speaker Shri Om Birla, who called for reforms in the United Nations Security Council (UNSC), greater representation of the Global South in global governance, zero tolerance towards terrorism, and stronger, transparent, accountable and citizen-centric Parliaments. @loksabhaspeaker @ombirlakota @MEAIndia @BricsIndia2026 @BRICSParliament @sansad_tv #BRICS2026 #BRICSParliamentaryForum
— LOK SABHA (@LokSabhaSectt) October 27, 2026
मल्टीपोलर वर्ल्ड
ब्रिक्स संसदीय मंच के दिल्ली डिक्लेरेशन में एकपक्षवाद के बजाय बहुपक्षवाद पर फोकस किया गया। मतलब ऐसी स्थिति जहां कोई एक ताकत अपनी मनमानी न चलाए बल्कि सभी की भागीदारी रहे। बहुपक्षवाद को बढ़ावा देने के इरादे से यूएनएनसी में सुधारों को बहुत जरूरी बताया गया।
आतंकवाद पर सख्त रुख
घोषणापत्र में सभी रूपों में आतंकवाद की कड़ी निंदा की गई। मंच ने 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में पाकिस्तान समर्थित आतंकवादी हमले की “कड़े से कड़े शब्दों में” निंदा की, जिसमें 26 लोग मारे गए थे। नेताओं ने संयुक्त राष्ट्र के ढांचे के अंदर 'अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर जल्द से जल्द व्यापक सम्मेलन' (CCIT) बुलाने का आह्वान किया।
एकतरफा प्रतिबंधों का विरोध
सभी ब्रिक्स देशों ने एकतरफा तरीके से लगाए गए प्रतिबंधों का विरोध किया। घोषणापत्र में इसे अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ बताकर निंदा की गई और कहा गया कि इनका मानव अधिकारों, स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा पर बुरा असर पड़ता है।
इस मंच ने पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव पर भी गहरी चिंता व्यक्त की और नागरिक बुनियादी ढांचे की सुरक्षा की मांग की। साथ ही द्वि-राज्य समाधान के आधार पर इजरायल-फिलिस्तीन संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान का समर्थन किया।
Wrapping up Day One of the 12th BRICS Parliamentary Forum 2026, marked by bilateral meetings, Plenary Sessions and meaningful exchanges at Parliament of India, New Delhi. #BRICS2026 #BRICSParliamentaryForum https://t.co/gTduqlC0a7
— Om Birla (@ombirlakota) October 27, 2026
AI का सुरक्षित उपयोग और क्लाइमेट चेंज
संयुक्त घोषणा पत्र में सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी के अलावा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के खुले, सुरक्षित और शांतिपूर्ण उपयोग पर जोर दिया गया। साथ ही BRICS देशों के लिए एक “डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर रिपोजिटरी” शुरू करने का प्रस्ताव रखा गया।
गरीबी उन्मूलन को सबसे बड़ी वैश्विक चुनौती करार दिया गया। जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए विकसित देशों की मांग की गई कि वह विकासशील देशों को आसान फंडिंग और टेक्नोलॉजी प्रदान करें।
संसदीय प्रतिनिधियों ने 2026 में भारत की BRICS अध्यक्षता का समर्थन किया, जो “लचीलेपन, नवाचार, सहयोग और निरंतरता के निर्माण” विषयों पर आधारित है। इसके अलावा 12-13 सितंबर 2026 को 18वें BRICS शिखर सम्मेलन के सफल आयोजन के लिए भारत को बधाई दी गई।




