
‘रुकिए जरा… अभी तो बस अक्टूबर है!’ वाला मीम दिल्ली-NCR के मौजूदा हालात पर बिल्कुल फिट बैठता है। दिवाली अभी आनी बाकी है और सर्दियों की शुरुआत के साथ प्रदूषण की चुनौती और गंभीर हो सकती है। हालांकि, आने वाले दिनों में बारिश और तेज हवाओं से कुछ राहत मिलने की उम्मीद भी है।
लेकिन कहानी सिर्फ दिल्ली की नहीं है। देश के दूसरे शहरों में भी हवा की गुणवत्ता चिंता बढ़ा रही है। कहीं AQI बहुत खराब श्रेणी में पहुंच चुका है, तो कहीं मौसम में बदलाव से राहत की उम्मीद है। ऐसे में समझते हैं कि दिल्ली-NCR में अभी हवा का हाल क्या है, देश के सबसे प्रदूषित शहर कौन-से हैं और अगले कुछ दिनों में मौसम क्या संकेत दे रहा है।
दिल्ली-NCR में अभी हवा का क्या हाल है?
23 अक्टूबर की सुबह दिल्ली-NCR में हवा की गुणवत्ता खराब बनी हुई है। दिल्ली का औसत AQI 220–225 के आसपास दर्ज किया गया, जबकि ज्यादातर मॉनिटरिंग स्टेशनों पर यह 250 के करीब रहा। आनंद विहार में AQI 219, अलीपुर में 257, बवाना में 269 और चांदनी चौक में 245 दर्ज किया गया।
दिल्ली से सटे दूसरे शहरों में स्थिति और चिंताजनक है। 23 अक्टूबर 2026 को सुबह 5:05 बजे अपडेट किए गए आंकड़ों के मुताबिक, ग्रेटर नोएडा में AQI 332 दर्ज किया गया, जो बहुत खराब श्रेणी में आता है। पिछले कुछ दिनों में यहां प्रदूषण के स्तर में उतार-चढ़ाव देखने को मिला। 20 अक्टूबर को AQI 229, 21 अक्टूबर को 280 और 22 अक्टूबर को 219 था। वहीं, गाजियाबाद के वसुंधरा मॉनिटरिंग स्टेशन पर AQI 320 दर्ज किया गया। सिंगरौली में भी AQI 315 रहा। इन तीनों स्थानों पर हवा की गुणवत्ता बहुत खराब श्रेणी में दर्ज की गई।
#WATCH | Delhi: The Air Quality Index (AQI) in the area around India Gate is 236, categorised as 'Poor', as per the CPCB (Central Pollution Control Board). Visuals from the area this morning https://t.co/DFpshAXcNq
— ANI (@ANI) October 23, 2026
CPCB के मानकों के मुताबिक, AQI 201 से 300 के बीच होने पर हवा खराब, जबकि 301 से 400 के बीच होने पर बहुत खराब श्रेणी में आती है। ऐसे में दिल्ली में हवा खराब है, वहीं ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद के कुछ इलाकों में स्थिति और गंभीर बनी हुई है।
22 अक्टूबर को दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 223 दर्ज किया गया।
मौसम की बात करें तो 23 अक्टूबर को दिल्ली में आंशिक रूप से बादल छाए रह सकते हैं। अधिकतम तापमान 32 से 34 डिग्री और न्यूनतम तापमान 18 से 20 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने का अनुमान है। दिन में गर्मी और सुबह-शाम हल्की ठंडक का एहसास हो सकता है।
पांच दिन तक हवा में क्यों बना रह सकता है प्रदूषण?
इधर जर्नल Environmental Pollution में प्रकाशित एक स्टडी के मुताबिक, मौसम की परिस्थितियां अनुकूल न होने पर दिल्ली में वायु प्रदूषण पांच दिन तक बना रह सकता है। जनवरी 2017 से दिसंबर 2024 तक के वायु गुणवत्ता और मौसम संबंधी आंकड़ों पर आधारित इस अध्ययन में तापमान को हवा की गुणवत्ता पर असर डालने वाले प्रमुख मौसमी कारकों में शामिल पाया गया।
स्टडी का अहम निष्कर्ष यह है कि प्रदूषण की समस्या सिर्फ इस बात से तय नहीं होती कि हवा में कितना प्रदूषण पैदा हो रहा है। यह भी मायने रखता है कि प्रदूषक वातावरण में कितनी तेजी से फैलते और हटते हैं। जब उनका फैलाव धीमा पड़ता है, तो वे जमा होते रहते हैं और हवा की गुणवत्ता लंबे समय तक खराब रह सकती है।
यही वजह है कि प्रदूषण से निपटने के लिए केवल मौसम बदलने या बारिश होने का इंतजार करना काफी नहीं है। वाहनों, उद्योगों, निर्माण कार्यों और पराली जलाने जैसे स्रोतों से होने वाले उत्सर्जन को कम करना भी जरूरी है।
देश के 10 सबसे प्रदूषित शहर कौन-से हैं?
22 अक्टूबर 2026 के AQI बुलेटिन में हरियाणा के पंचगांव में AQI 378 दर्ज किया गया, जो बहुत खराब श्रेणी में आता है। इसके बाद उत्तर प्रदेश के बारौत और हापुड़ 328 के AQI के साथ संयुक्त रूप से दूसरे स्थान पर रहे।
इस सूची में हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई शहरों की मौजूदगी बताती है कि प्रदूषण की चुनौती केवल दिल्ली तक सीमित नहीं है।

22 अक्टूबर 2026 के AQI बुलेटिन के मुताबिक, देश के सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में हरियाणा का पंचगांव 378 AQI के साथ पहले स्थान पर रहा। उत्तर प्रदेश के बारौत और हापुड़ 328 AQI के साथ संयुक्त रूप से दूसरे स्थान पर रहे। इसके बाद बागपत 282 AQI के साथ चौथे, मेरठ 281 के साथ पांचवें और हरियाणा का मानेसर 271 AQI के साथ छठे स्थान पर रहा।

दिवाली से पहले मौसम क्या राहत देगा?
दिल्ली-NCR में प्रदूषण के बीच मौसम का पूर्वानुमान भी अहम है। मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, 23 अक्टूबर को दिल्ली में मौसम मुख्य रूप से शुष्क रह सकता है। 24 और 25 अक्टूबर को कुछ इलाकों में हल्की से छिटपुट बारिश की संभावना है।
बारिश होने पर हवा में मौजूद कुछ प्रदूषक (Pollutants) नीचे बैठ सकते हैं और अस्थायी राहत मिल सकती है। हालांकि, बारिश का असर उसकी तीव्रता, अवधि और स्थानीय मौसम पर निर्भर करेगा। केवल बारिश के पूर्वानुमान से यह मान लेना सही नहीं होगा कि दिल्ली-NCR का प्रदूषण खत्म हो जाएगा।
देश के दूसरे हिस्सों में भी मौसम बदलने के संकेत हैं। IMD के पूर्वानुमान के मुताबिक, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, असम, नागालैंड, त्रिपुरा, लक्षद्वीप और अंडमान-निकोबार द्वीपसमूह सहित 15 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में बारिश या तेज हवाओं की संभावना जताई गई है।

जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और उत्तराखंड के कुछ हिस्सों में 23 से 25 अक्टूबर के बीच बारिश हो सकती है। वहीं, पंजाब और हरियाणा में 24 और 25 अक्टूबर को कुछ स्थानों पर हल्की बारिश की संभावना है। पहाड़ी इलाकों में बारिश और बर्फबारी से उत्तर भारत में ठंड बढ़ने के आसार हैं।
पराली से लेकर गाड़ियों तक, प्रदूषण पर क्या हो रहा है?
दिल्ली-NCR की हवा की चर्चा होते ही पराली जलाने का मुद्दा सामने आता है। लेकिन प्रदूषण के कई स्रोत हैं और इन पर एक साथ काम करना जरूरी है।
इसी सिलसिले में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने पंजाब और हरियाणा सरकारों के साथ बैठक कर पराली जलाने की रोकथाम और प्रदूषण नियंत्रण के उपायों की समीक्षा की। आयोग ने जमीनी स्तर पर तेजी से कार्रवाई करने पर जोर दिया।
बैठक में फसल अवशेष प्रबंधन की मशीनों की उपलब्धता और इस्तेमाल, धान के पुआल को इकट्ठा करने और उसका उपयोग करने की व्यवस्था तथा सैटेलाइट से मिलने वाले आग के अलर्ट की जांच जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। ईंट भट्ठों में धान के पुआल से बने बायोमास का इस्तेमाल और थर्मल पावर प्लांटों में बायोमास मिलाने के लक्ष्यों की प्रगति की भी समीक्षा की गई।
इस बीच, मुंबई में भी हवा की गुणवत्ता को लेकर चिंता बनी हुई है। बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) के मुताबिक, 2026 में अब तक 231 दिन हवा की गुणवत्ता अच्छी या संतोषजनक रही, जबकि पूरे 2025 में ऐसे 222 दिन दर्ज किए गए थे। यह आंकड़ा साल के दौरान हवा की गुणवत्ता का एक पहलू दिखाता है, लेकिन इससे हर दिन या हर इलाके की मौजूदा स्थिति का पता नहीं चलता।

AQI की श्रेणियां क्या बताती हैं?
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के मुताबिक, AQI के आधार पर हवा की गुणवत्ता को छह श्रेणियों में बांटा जाता है।
अच्छा (0-50): हवा की गुणवत्ता अच्छी होती है।
संतोषजनक (51-100): हवा की गुणवत्ता आमतौर पर स्वीकार्य होती है।
मध्यम (101-200): संवेदनशील लोगों को सांस लेने में परेशानी हो सकती है।
खराब (201-300): लंबे समय तक ऐसी हवा में रहने से सांस लेने में परेशानी हो सकती है।
बहुत खराब (301-400): लंबे समय तक ऐसी हवा में रहने से सांस संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।
गंभीर (401-500): स्वस्थ लोगों पर भी असर पड़ सकता है और पहले से बीमार लोगों की परेशानी बढ़ सकती है।







