
ईरान पर अमेरिका के हमले के बाद पश्चिम एशिया की जियोपॉलिटिक्स काफी कुछ बदल गई है। मिडिल ईस्ट के देशों की तरफ से अमेरिका से इतर अन्य देशों से रिश्तों में नया चैप्टर जोड़ा जा रहा है। पश्चिम एशिया से आज मंगलवार को सामने आए तीन नए अपडेट इस कहानी में काफी कुछ जोड़ रहे हैं।
इन तीनों अपडेट के केंद्र में ईरान, रूस, भारत और यूएई हैं। रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव सोमवार को ईरान में थे। इस मौके पर ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि तेहरान-मॉस्को के संबंध इतने अच्छे कभी नहीं रहे थे, जितने अब हैं।
दूसरी तरफ भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एससीओ बैठक के दौरान ईरान के चाबहार पोर्ट का जिक्र किया और मिडिल ईस्ट में कनेक्टिविटी की तारीफ की। वहीं, भारत दौरे पर आए यूएई के विदेश मंत्री शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान ने द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत बनाने की बात कही।
गौर करने की बात ये है कि इन तीनों घटनाओं की धुरी आपस में मिलती है।

1. तेहरान-मॉस्को के संबंधों में नई नजदीकी
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव से कहा कि तेहरान-मॉस्को के संबंध पहले इतने अच्छे कभी नहीं थे। उन्होंने दोहराया कि दोनों देश विदेशी सैन्य हस्तक्षेप के खिलाफ एक जैसा रुख रखते हैं
अराघची ने कहा कि रूस के साथ हमारा साझा नजरिया यह है कि क्षेत्रीय मुद्दों का कोई सैन्य समाधान नहीं हो सकता। इन्हें कूटनीति और राजनीतिक तरीके से ही सुलझाया जाना चाहिए।
उन्होंने दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों को रणनीतिक लिहाज से भी महत्वपूर्ण बताया और कहा कि ये लगातार आगे बढ़ रहे हैं। अराघची ने कहा कि हमें कैस्पियन सागर में असुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं हैं, जिसमें ईरानी और रूसी जहाजों पर हुए हमले भी शामिल हैं।
उन्होंने ईरान और रूस के बीच वैश्विक मंचों पर संयुक्त राजनयिक प्रयास जारी रखने की प्रतिबद्धता जताते हुए आगे कहा कि हम अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर सहयोग जारी रखेंगे, विशेष रूप से अमेरिका के आक्रामक और एकतरफा रवैये का सामना करने में।
❗️ ‘Russia & Iran Talks Focussed on Implementation of Strategic Partnership Treaty’ – Iranian FM Araghchi ‘We discussed the most important global and regional affairs and also the bilateral agenda,’ he added. https://t.co/uUncYDEyvU
— RT_India (@RT_India_news) October 19, 2026
दूसरी तरफ, रूसी विदेश मंत्री लावरोव ने कहा कि रूस ईरान के साथ अपनी रणनीतिक साझेदारी को लेकर प्रतिबद्ध है। उन्होंने इसके समर्थन में दवाओं की सप्लाई, संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका-इजरायल की अवैध आक्रामकता को सही ठहराने की कोशिशों को रोकने और पुतिन व पेजेश्कियान के बीच रेगुलर मीटिंग्स का हवाला दिया।
गौरतलब है कि RT हिंदी ने एक दिन पहले ही 730 किमी की वो रेल लाइन तैयार होने की खबर दी थी, जिसके जरिए भारत अफगानिस्तान और सेंट्रल एशिया तक पहुंच सकता है।
2. चाबहार के जरिये भारत की मिडिल ईस्ट कनेक्टिविटी

भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ताजिकिस्तान के दुशान्बे में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की काउंसिल ऑफ हेड्स ऑफ गवर्नमेंट की बैठक में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने साझा समृद्धि के लिए कनेक्टिविटी को महत्वपूर्ण बताया।
उन्होंने कहा कि भारत ऐसी कनेक्टिविटी का समर्थन करता है जो बाजारों को जोड़े, व्यापार को आसान बनाए और विकास के नए अवसर पैदा करे। 'इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर' और चाबहार पोर्ट जैसी पहल मध्य एशिया को व्यापक बाजारों से जोड़ने में अहम योगदान दे सकती है।
राजनाथ सिंह ने जोर देकर कहा कि कनेक्टिविटी की पहल संबंधित देशों के साथ परामर्श और उनकी संप्रभुता व क्षेत्रीय अखंडता के सम्मान पर आधारित होनी चाहिए। जो परियोजनाएं इन सिद्धांतों पर आधारित नहीं होंगी, वो लंबे समय तक टिक नहीं पाएंगी।
बदलते ग्लोबल इकोनॉमिक एनवायरनमेंट में SCO देशों को रेजिलिएंट सप्लाई चेन्स, बेहतर ट्रेड और इन्वेस्टमेंट तथा टेक्नोलॉजी-ड्रिवन डेवलपमेंट पर मिलकर काम करना होगा। भारत का दृष्टिकोण स्पष्ट है- सिक्योरिटी, कनेक्टिविटी और ऑपर्च्युनिटी के माध्यम से सभी सदस्य देशों के लिए समावेशी विकास सुनिश्चित करना।
— Rajnath Singh (@rajnathsingh) October 20, 2026
उन्होंने मजबूत सप्लाई चेन बनाने, व्यापार-निवेश को आसान बनाने और विकास को गति देने के लिए तकनीक के उपयोग की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने 2026-30 के लिए 'बहुपक्षीय व्यापार और आर्थिक सहयोग कार्यक्रम' के तहत एक कार्य योजना अपनाने के प्रति समर्थन दोहराते हुए कहा कि आर्थिक सहयोग का लाभ समाज के सभी वर्गों तक पहुंचना चाहिए।
अब मुंबई लौटते हैं, जहां अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो आए हुए हैं। वह विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात के बाद, अमेरिका को डीजल संकट से उबारने में मदद के लिए रिलायंस की जामनगर रिफाइनरी जाने वाले हैं। हालांकि, हम यहां बात UAE की करेंगे।
3. भारत और UAE के बीच खास संबंध

UAE के विदेश मंत्री शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान भी मुंबई में हैं। मुंबई में नाहयान ने विदेश मंत्री जयशंकर से मुलाकात की। इस दौरान कहा कि हमारे संबंध स्पेशल हैं। हम एक दूसरे के काफी करीब हैं, लेकिन अब और करीब होना चाहते हैं।
नाहयान ने कहा कि भारत आना हमेशा ही सुखद होता है। इतने लंबे समय बाद मुंबई आना मेरे लिए अनोखा अनुभव रहा है। पता चला कि यह शहर और देश किस तरह आगे बढ़ रहा है और विकसित हो रहा है। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) को भारत के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदारों में से एक होने पर गर्व है।
यूएई के विदेश मंत्री ने कहा कि मेरा मानना है कि अमेरिका और चीन के बाद, हम भारत के तीसरे सबसे बड़े व्यापारिक साझेदार हैं। हमारे नेतृत्व और लोगों का हमेशा यही लक्ष्य रहा है कि हमारे संबंध और भी करीबी, मजबूत और विविध हों।
उन्होंने आगे कहा कि इन मुलाकातों की सबसे अच्छी बात यह है कि इनमें न केवल हमारा कामकाजी रिश्ता शामिल है बल्कि हमारी दोस्ती भी है, जो विश्वास कायम करने के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। यही वजह है कि भारत और UAE के बीच के संबंध इतने खास हैं।
यूएई के विदेश मंत्री ने कहा कि सवाल अब यह है कि हम और क्या कर सकते हैं, खासकर लोगों के बीच आपसी संबंधों, संस्कृति, शिक्षा और विरासत के क्षेत्रों में। इन क्षेत्रों में जितना भी काम किया जाए, वह कम ही लगता है।
उनका कहना था कि ये चीजें हमारे संबंधों को और बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभाती हैं। ऐसे में हम न केवल यह समीक्षा कर सकते हैं कि हम अभी किस स्थिति में हैं, बल्कि इस पर भी विचार कर सकते हैं कि हम भविष्य में कहां तक पहुंच सकते हैं।
चलते-चलते एक महत्वपूर्ण अपडेट ये भी है कि पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर मंगलवार को पाकिस्तानी अधिकारियों के एक प्रतिनिधिमंडल के साथ ईरान की राजधानी तेहरान पहुंच चुके हैं। यह दौरा ऐसे समय हो रहा है, जब ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव सुलझाने के राजनयिक प्रयास ठप पड़े हैं। सऊदी अरब की सैन्य मदद करने को लेकर ईरान से पाकिस्तान के रिश्तों में खटास घुल चुकी है। इतना ही नहीं, ईरान और पाकिस्तान के बीच व्यापार पर ब्रेक लग चुके हैं।







