
ईरान में एलन मस्क की स्टारलिंक कंपनी पर बैन है, इसके बावजूद वहां सैटेलाइट इंटरनेट के टर्मिनल कैसे पहुंच गए? होर्मुज को लेकर एक बार फिर इलाके में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी कंपनी का यह मामला इतना बढ़ा कि ईरान ने विदेशी राजदूत को तलब कर लिया। तेहरान का आरोप है कि उसकी इजाजत के बिना स्टारलिंक टर्मिनल ईरानी इलाके में सिग्नल दे रहे हैं। अब सवाल है कि आखिर स्टारलिंक ईरान तक पहुंचा कैसे, इसे पकड़ा कैसे गया और इस पूरे मामले में नॉर्वे की क्या भूमिका है?
ईरान में स्टारलिंक पर बैन है, फिर पहुंचा कैसे?
स्टारलिंक जमीन पर मौजूद मोबाइल टावरों या फाइबर नेटवर्क के बजाय सीधे लो-अर्थ ऑर्बिट (LEO) सैटेलाइट से इंटरनेट देता है। इसके लिए यूजर के पास एक छोटा सैटेलाइट टर्मिनल होना जरूरी है। यही तकनीक किसी देश में इंटरनेट सेंसरशिप या ब्लैकआउट को बायपास करना संभव बनाती है। ईरान में स्टारलिंक को आधिकारिक तौर पर ऑपरेट करने की अनुमति नहीं है, लेकिन इसके बावजूद कुछ टर्मिनल देश के भीतर काम करते रहे हैं।
जनवरी 2026 में Reuters ने ईरान के अंदर स्टारलिंक इस्तेमाल करने वाले लोगों के हवाले से बताया था कि देश में इंटरनेट बंद किए जाने के बावजूद कुछ इलाकों में स्टारलिंक चल रहा था। बता दें कि स्टारलिंक को ईरान में लाइसेंस नहीं मिला है।
स्टारलिंक ईरान में कैसे पकड़ा गया?
यह इस पूरी कहानी का सबसे अहम हिस्सा है। ईरान ने इस मामले को इंटरनेशनल टेलीकॉम यूनियन (ITU) के रेडियो रेगुलेशन बोर्ड (RRB) के सामने उठाया था। ITU के रिकॉर्ड के मुताबिक, ईरान ने ऐसे माप और परीक्षण के नतीजे पेश किए, जिनसे दिखा कि ईरान की सीमा के भीतर मौजूद स्टारलिंक टर्मिनल से ट्रांसमिशन किया जा सकता है और विदेश स्थित इंटरनेट नेटवर्क से कनेक्शन बनाया जा सकता है। RRB ने यह भी दर्ज किया कि ईरान ने अपने क्षेत्र में स्टारलिंक सेवा के लिए कोई लाइसेंस नहीं दिया था। यानी मामला सिर्फ ईरान के आरोप तक सीमित नहीं रहा। ITU के रिकॉर्ड में अनधिकृत Starlink टर्मिनल से ट्रांसमिशन होने के सबूत और इस पर हुई आधिकारिक प्रक्रिया दर्ज है।
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फिर नॉर्वे को क्यों तलब किया गया?
सवाल उठता है कि स्टारलिंक का मामला है तो ईरान ने नॉर्वे के राजदूत को क्यों बुलाया? इसकी वजह है ITU में स्टारलिंक के नेटवर्क का रजिस्ट्रेशन। स्टारलिंक के इस सैटेलाइट नेटवर्क के लिए ITU के रिकॉर्ड में नॉर्वे की एक अहम जिम्मेदारी है, जबकि अमेरिका भी इस नेटवर्क से जुड़ा हुआ है। ITU ने दोनों देशों से कहा था कि ऐसे स्टारलिंक टर्मिनलों को रोका जाए, जो किसी ऐसे देश में काम कर रहे हैं जहां उन्हें चलाने की अनुमति नहीं है।
यानी आसान भाषा में समझें तो ईरान कह रहा है कि उसके यहां बिना इजाजत स्टारलिंक चल रहा है, तो इसे रोकने की जिम्मेदारी से नॉर्वे बच नहीं सकता। ITU के मुताबिक, Starlink के ऑपरेटर के पास ऐसे टर्मिनलों को दूर से बंद करने की तकनीकी क्षमता भी है। इसी वजह से ईरान ने नॉर्वे से कार्रवाई की मांग की है और अब उसके राजदूत को तलब कर औपचारिक विरोध दर्ज कराया है।

लेकिन स्टारलिंक ईरान के अंदर पहुंचा कैसे?
ITU के दस्तावेजों के मुताबिक, ईरान ने बताया था कि कुछ स्टारलिंक टर्मिनल गैरकानूनी तरीके से देश में लाए गए थे। इन टर्मिनलों की सदस्यता यानी Subscription ऐसे भौतिक पतों से जुड़ी थी जो ईरान के बाहर थे।
यानी इसे समझने का आसान तरीका है:
टर्मिनल ईरान में → सब्सक्रिप्शन किसी दूसरे देश के पते पर → सैटेलाइट से सीधा कनेक्शन → ईरान के अंदर इंटरनेट एक्सेस
इसी वजह से इसे रोकना पारंपरिक इंटरनेट सेवा को बंद करने से अलग चुनौती है।
ITU ने नॉर्वे से क्या कहा?
ITU के रेडियो रेगुलेशन बोर्ड ने कहा कि ऐसे टर्मिनलों से उन देशों में ट्रांसमिशन नहीं होना चाहिए जहां संबंधित सरकार ने इसकी अनुमति नहीं दी है। बोर्ड ने नॉर्वे और अमेरिका से स्टारलिंक ऑपरेटर के जरिए ईरान में मौजूद अनधिकृत टर्मिनलों को बंद कराने के लिए कार्रवाई करने को कहा। लेकिन विवाद पूरी तरह खत्म नहीं हुआ। ITU के सबसे हालिया रिकॉर्ड में भी ईरान की शिकायत दर्ज है कि उसके क्षेत्र में स्टारलिंक टर्मिनल अब भी अनधिकृत तरीके से काम कर रहे हैं। बोर्ड ने यह भी कहा कि वह नॉर्वे और अमेरिका से कार्रवाई करने को कहता रहा है।
विवादों में स्टारलिंक

स्टारलिंक की कहानी सिर्फ बिना तार वाले इंटरनेट की नहीं है, इसे लेकर कई देशों में सवाल भी उठे हैं। बांग्लादेश में जून 2025 में वामपंथी दलों और संगठनों ने इसके खिलाफ प्रदर्शन किया और सरकार से एलन मस्क की कंपनी के साथ समझौता रद्द करने की मांग की। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि इससे देश की डिजिटल संप्रभुता और विदेशी कंपनियों के प्रभाव को लेकर सवाल खड़े होते हैं।
यूक्रेन संघर्ष में विवाद और बड़ा हो गया। युद्ध के दौरान यूक्रेनी सेना स्टारलिंक पर काफी निर्भर हो गई थी, लेकिन 2022 में रूस के खिलाफ सैन्य अभियानों में इसके इस्तेमाल को लेकर मस्क और यूक्रेन के बीच टकराव सामने आया। 2023 में SpaceX ने भी कहा कि स्टारलिंक को हथियार बनाने के लिए नहीं बनाया गया था और यूक्रेनी सेना के ड्रोन इस्तेमाल को सीमित किया गया। इससे यह बहस तेज हुई कि किसी निजी कंपनी के मालिक के हाथ में युद्ध के दौरान एक अहम संचार नेटवर्क का नियंत्रण कितना बड़ा रणनीतिक मुद्दा बन सकता है।
ईरान का US-इजरायल पर जासूसी का आरोप?
भले ही ईरान ने नॉर्वे के राजदूत को बुलाया, लेकिन अपने विरोध पत्र में उन्होंने अमेरिका और इजरायल पर ही निशाना साधा है। ईरान के विदेश मंत्रालय ने नॉर्वे के राजदूत से स्पष्ट कहा कि अमेरिका और इजरायल अपनी दखलअंदाजी वाली नीतियों को बढ़ाने के लिए स्टारलिंक का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं। Press TV ने इन आरोपों को अपनी रिपोर्ट में विस्तार से प्रकाशित किया है।
हालांकि, Starlink के ईरान में इस्तेमाल का रणनीतिक पहलू जरूर सामने आया है। Reuters ने जनवरी 2026 में रिपोर्ट किया था कि इंटरनेट ब्लैकआउट के दौरान कुछ ईरानी Starlink के जरिए ऑनलाइन थे।
तो असली कहानी क्या है?
कहानी सिर्फ इतनी नहीं है कि ईरान ने स्टारलिंक को बैन कर रखा है और फिर भी लोग इसका इस्तेमाल कर रहे हैं। असल सवाल यह है कि सैटेलाइट इंटरनेट की तकनीक किसी देश की इंटरनेट व्यवस्था और उसकी सीमाओं को कैसे बायपास कर सकती है। ईरान ने Starlink को अपने क्षेत्र में लाइसेंस नहीं दिया। इसके बावजूद कुछ टर्मिनल वहां पहुंच गए और ITU के रिकॉर्ड के मुताबिक उनसे विदेशी इंटरनेट नेटवर्क तक कनेक्शन भी स्थापित हुआ। इस मामले में ITU ने नॉर्वे और अमेरिका से कार्रवाई करने को कहा। अब ईरान उसी पुराने विवाद को लेकर नॉर्वे के राजदूत को तलब कर रहा है।
यानी स्टारलिंक की तकनीक ने इंटरनेट को सिर्फ एक कम्युनिकेशन सर्विस नहीं रहने दिया है, यह ऐसे देशों में भी कनेक्टिविटी का रास्ता बना सकती है जहां सरकार उसे अनुमति नहीं देती। और यही वजह है कि स्टारलिंक को लेकर यह मामला तकनीक, संप्रभुता और राष्ट्रीय सुरक्षा... तीनों से जुड़ गया है।







