
रिश्तों की कहानी सिर्फ हथियारों, तेल और कूटनीतिक मुलाकातों तक सीमित नहीं होती। कभी यह उन हाथों में दिखती है, जिन्हें दूसरे देश में काम मिलता है, कभी उन फैक्ट्रियों में, जहां दो देशों की साझेदारी से नए उत्पाद तैयार होते हैं, तो कभी कारोबारियों के उन रिश्तों में, जो सीमाओं से आगे तक जाते हैं। भारत और रूस के बीच सहयोग की एक ऐसी ही नई तस्वीर सामने आ रही है, जहां भारतीय प्रतिभा, औद्योगिक उत्पादन और व्यापार के नए रास्ते चर्चा के केंद्र में हैं।
भारत में ट्रेन और यात्री विमान बनाने से लेकर रूसी बाजार में उनकी संभावित पहुंच, भारतीय कामगारों के लिए अवसर और रूसी क्षेत्रों में निवेश तक- दोनों देशों के बीच आर्थिक साझेदारी का दायरा बढ़ाने की कोशिश हो रही है। इन मुद्दों पर चर्चा का एक अहम मंच बना रूस के कजान शहर में आयोजित भारत-रूस बिजनेस फोरम 2026।
क्या था भारत-रूस फोरम 2026?
भारत-रूस बिजनेस फोरम ‘TIME’ (Tatarstan Initiative for Mutual Efficiency) का दूसरा संस्करण 15-16 अक्टूबर 2026 को रूस के कजान शहर में आयोजित हुआ। इसका मकसद दोनों देशों के कारोबारी समुदायों, निवेशकों और सरकारी प्रतिनिधियों को एक मंच पर लाकर व्यापार, निवेश और दीर्घकालिक साझेदारी के नए अवसर तलाशना था।
फोरम में रूस के 33 क्षेत्रों और भारत के 26 राज्यों ने हिस्सा लिया। चर्चा में व्यापार, आईटी, फार्मास्यूटिकल्स, कृषि और विनिर्माण के साथ कुशल कामगारों की आवाजाही तथा भारत-रूस मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की संभावनाओं जैसे मुद्दे शामिल रहे। फोरम ने यह समझने का मौका दिया कि दोनों देश अपने आर्थिक रिश्तों को ठोस कारोबारी परियोजनाओं में कैसे बदल सकते हैं।
🇮🇳🇷🇺 Developed In Russia, Made In India, Sold To The World: Moscow Eyes New Industrial Partnership Russian companies are looking to manufacture trains and passenger aircraft in India, not just for Indian buyers but also for export to Russia and other countries, according to Lydia Kulik. Pointing to agreements on aircraft production, she noted that “we in Russia may use the planes made in India as well,” as both countries look to meet growing demand.
— RT_India (@RT_India_news) October 17, 2026
भारतीय प्रतिभा पर रूस की नजर
रूसी विज्ञान अकादमी (Russian Academy of Sciences) की शोधकर्ता लिडिया कुलिक (Lydia Kulik) ने भारत को वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए ‘प्रतिभाओं का भंडार’ बताया। उनके मुताबिक, भारतीय कामगारों की बढ़ती आवाजाही भारत-रूस सहयोग का एक महत्वपूर्ण क्षेत्र बन सकती है।
लेकिन केवल कामगारों की संख्या बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं है। इसके लिए कानूनी व्यवस्था को बेहतर बनाना, जरूरी प्रशिक्षण देना और दूसरे देश में काम करने वाले भारतीयों को उचित सहायता उपलब्ध कराना भी जरूरी है। कुलिक ने इस क्षेत्र में आगे सहयोग की काफी संभावनाएं बताईं।
यह मुद्दा इसलिए भी अहम है, क्योंकि श्रम सहयोग दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों को सीधे लोगों और रोजगार के अवसरों से जोड़ता है। इसके लिए कामगारों की जरूरतों और नियोक्ताओं की मांगों के बीच तालमेल बनाना महत्वपूर्ण होगा।

भारत में बनेंगी ट्रेनें और विमान, रूस तक पहुंचेगा उत्पादन?
भारत और रूस की औद्योगिक साझेदारी को लेकर भी नई संभावनाएं सामने आई हैं। लिडिया कुलिक के मुताबिक, रूसी कंपनियां भारत में ट्रेन और यात्री विमान बनाने में दिलचस्पी रखती हैं। विचार केवल भारत की मांग पूरी करने तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत में बने उत्पादों को रूस और दूसरे देशों तक पहुंचाने की संभावना भी है।
विमान निर्माण से जुड़े समझौतों का जिक्र करते हुए कुलिक ने कहा कि रूस भी भारत में बने विमानों का इस्तेमाल कर सकता है।
अगर इन संभावनाओं को व्यावहारिक परियोजनाओं में बदला जाता है, तो इससे दोनों देशों के बीच विनिर्माण, तकनीकी सहयोग और बाजार तक पहुंच के नए अवसर पैदा हो सकते हैं। हालांकि, इसे पहले से शुरू हो चुके उत्पादन या तय निर्यात योजना के बजाय औद्योगिक सहयोग की संभावनाओं के तौर पर देखना चाहिए।
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तातारस्तान का भारतीय कारोबारियों को न्योता
फोरम में रूस के तातारस्तान क्षेत्र ने भारतीय कंपनियों के साथ लंबे समय तक चलने वाली कारोबारी साझेदारी की जरूरत पर जोर दिया। तातारस्तान इन्वेस्टमेंट डेवलपमेंट एजेंसी की प्रमुख तालिया मिनुलिना ने कहा कि उनका क्षेत्र केवल एक बार के सौदों के बजाय कई वर्षों तक चलने वाली रणनीतिक साझेदारी चाहता है।
मिनुलिना के मुताबिक, तातारस्तान भारतीय कारोबारियों को रूस में निवेश और कारोबार के अवसर तलाशने में मदद कर सकता है। उन्होंने क्षेत्र की कारोबारी संस्कृति का जिक्र करते हुए कहा कि यहां हर जगह दोस्त होना एक सामान्य बात है।
यह पहल भारत की उन कंपनियों के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है, जो रूसी बाजार में अपनी मौजूदगी बढ़ाना चाहती हैं। वहीं, रूसी क्षेत्रों को भी भारतीय निवेशकों और कंपनियों के साथ नए व्यावसायिक संबंध बनाने का अवसर मिलता है।
🇷🇺🇮🇳 ‘We Are Looking For Partners Strategically For Many Years’: Tatarstan Invites Indian Businesses To Russia Tatarstan Investment Development Agency chief Taliya Minullina stressed that the Russian region wants long-term partnerships, not just one-time deals. She added that Tatarstan can connect Indian businesses with opportunities across Russia, explaining that “having friends everywhere is something very common” in Tatarstan's culture.
— RT_India (@RT_India_news) October 17, 2026
क्रिकेट, शतरंज और सिनेमा भी बने रिश्तों का हिस्सा
फोरम की खास बात यह रही कि भारत-रूस संबंधों को केवल व्यापारिक बैठकों तक सीमित नहीं रखा गया। कार्यक्रम के साथ क्रिकेट मैच, शतरंज टूर्नामेंट और भारतीय फिल्म महोत्सव जैसी गतिविधियां भी आयोजित की गईं।
तालिया मिनुलिना ने शतरंज से भारत के ऐतिहासिक जुड़ाव का उल्लेख करते हुए कहा, ‘भारत शतरंज की जन्मभूमि है।’
इन गतिविधियों ने कारोबार के साथ सांस्कृतिक संपर्क और लोगों के बीच रिश्तों को भी महत्व दिया। ऐसे आयोजन दोनों देशों के कारोबारी समुदायों को एक-दूसरे की संस्कृति और समाज को समझने का अवसर देते हैं।
भारत-रूस आर्थिक रिश्तों का अगला पड़ाव क्या?
कजान में आयोजित फोरम की चर्चाओं से साफ है कि भारत-रूस आर्थिक सहयोग के लिए कई क्षेत्रों में अवसर तलाशे जा रहे हैं। कुशल भारतीय कामगारों की आवाजाही, भारत में औद्योगिक उत्पादन, रूसी क्षेत्रों में निवेश और मुक्त व्यापार समझौते की संभावनाएं इस साझेदारी के अहम पहलू हैं।
हालांकि, इन अवसरों को वास्तविक नतीजों में बदलने के लिए कानूनी प्रक्रियाओं, प्रशिक्षण, निवेश और परियोजनाओं के क्रियान्वयन पर काम करना होगा। ट्रेन और विमान निर्माण जैसी योजनाओं के मामले में भी संभावनाओं को ठोस उत्पादन और बाजार तक पहुंच में बदलना अगला महत्वपूर्ण कदम होगा।
भारत और रूस के रिश्तों में पारंपरिक सहयोग के साथ अब यह सवाल भी अहम है कि दोनों देश एक-दूसरे की प्रतिभा, तकनीक, औद्योगिक क्षमता और बाजार का इस्तेमाल किस तरह कर सकते हैं। कजान का बिजनेस फोरम इसी व्यापक आर्थिक साझेदारी की संभावनाओं को सामने लाने वाला मंच बना।






