
एक ही फ्रेम में मोदी, पुतिन और शी जिनपिंग... BRICS समिट से आई ये तस्वीर सिर्फ तीन नेताओं की मुलाकात नहीं, बल्कि बदलती ग्लोबल जियोपॉलिटिक्स की भी झलक देती है। तस्वीर में तीनों नेता एक-दूसरे का हाथ थामे बातचीत करते और मुस्कुराते नजर आ रहे हैं। खास बात ये है कि पिछले 15 दिनों में मोदी, पुतिन और शी की ऐसी दूसरी तस्वीर सामने आई है। इससे पहले SCO समिट के दौरान भी तीनों नेता इसी अंदाज में साथ नजर आए थे। एक्सपर्ट्स के जरिए समझने की कोशिश करते हैं कि आखिर इन तस्वीरों के क्या मायने निकलते हैं?
"नए वर्ल्ड ऑर्डर की पावरफुल इमेज"
जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के प्रोफेसर और विदेश मामलों के जानकार शांतेश कुमार सिंह ने कहा, "तस्वीरें बोलती हैं। ब्रिक्स से सामने आई पीएम मोदी, पुतिन और शी जिनपिंग की तस्वीर भी बोल रही है। यह नए वर्ल्ड ऑर्डर की सबसे पावरफुल इमेज है। यह पश्चिम को संदेश दे रही है कि अमेरिका के नेतृत्व में दुनिया के चलने का दौर खत्म हो चुका है। अब भारत, रूस और चीन जैसी ताकतें विश्व को नई लीडरशिप देने के लिए तैयार हैं। आपने देखा होगा कि चीन ने भी अपनी स्ट्रैटेजी को बहुत बदला है।"
"अब चीन भी भारत और रूस के साथ मिलकर दुनिया को नई विश्व व्यवस्था देने की बात कर रहा है। आज चीनी मीडिया में भारत और चीन के रिश्तों को लेकर कई लेख छपे हैं, जिनमें भारत की तारीफ की गई है। चीनी मीडिया का कहना है कि बीजिंग और नई दिल्ली के बीच बन रहा नया टाइअप दुनिया की दिशा और ग्लोबल जियोपॉलिटिक्स को नया आकार दे सकता है।"
यूनिपोलर से मल्टीपोलर हुई दुनिया
प्रोफेसर शांतेश सिंह ने कहा कि दुनिया अब यूनिपोलर से मल्टीपोलर हो चुकी है। मोदी, शी जिनपिंग और पुतिन का एक मंच पर साथ दिखना भी एक बड़ा संदेश है कि अब वह दौर नहीं है, जब अमेरिका अकेले पूरी दुनिया को दिशा देता था। अमेरिका के सामने अब भारत, रूस और चीन जैसी मजबूत ताकतें खड़ी हैं। उनके मुताबिक, आने वाले समय में दुनिया तीन तरह के ऑर्डर के साथ आगे बढ़ेगी।
- जियोपोलिटिकल ऑर्डर
- इकोनॉमिक ऑर्डर
- ग्लोबल ऑर्डर
इनमें भारत, रूस और चीन फिट बैठते हैं। प्रोफेसर शांतेश सिंह के मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी की लीडरशिप दुनिया में भरोसा पैदा कर रही है। उनका कहना है कि मोदी आत्मनिर्भर बनने और अपने सामर्थ्य के दम पर आगे बढ़ने का संदेश दे रहे हैं। यानी अब दूसरे देशों की मदद के भरोसे बैठने के बजाय अपनी क्षमता और संसाधनों के आधार पर आगे बढ़ने की सोच पर जोर है।
ब्रिक्स एंटी-वेस्ट नहीं, नॉन-वेस्ट है
प्रोफेसर शांतेश सिंह ने कहा कि ब्रिक्स किसी के खिलाफ नहीं है। यह बात पीएम मोदी ने भी कही है। ब्रिक्स एंटी-वेस्ट नहीं, बल्कि नॉन-वेस्ट है। ब्रिक्स आधी दुनिया को रिप्रेजेंट करता है। इसकी इकोनॉमी भी बहुत बड़ी हो चुकी है। यह नए वर्ल्ड ऑर्डर की नींव रख चुका है।
पीएम मोदी ने क्या संकेत दिया?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ब्रिक्स भाषण के दौरान नए ग्लोबल ऑर्डर का संकेत दिया। उन्होंने पुरानी व्यवस्थाओं को बदलने की जरूरत बताई। पीएम ने कहा, "आज की चर्चा से स्पष्ट है कि बदलते विश्व का संचालन पुराने संस्थानों से नहीं किया जा सकता। रिप्रेजेंटेशन, रिस्पांसिव देश और रूल मेकिंग तीनों में सुधार की जरूरत है। हमने इस बात पर बल दिया कि भविष्य की टेक्नोलॉजी और उनके नियमों के निर्माण में ग्लोबल साउथ की बराबर भागीदारी होनी चाहिए।"
Sharing my concluding remarks during the BRICS Summit. pic.twitter.com/PNkEBxAD3O
— Narendra Modi (@narendramodi) September 12, 2026
पीएम मोदी ने की संयुक्त राष्ट्र में सुधार की मांग
ब्रिक्स को मजबूत करते हुए हमें ग्लोबल रिफॉर्म की दिशा भी तय करनी होगी। ग्लोबल गवर्नेंस का मौजूदा स्ट्रक्चर पिरामिड जैसा दिखाई देता है, जिसके ऊपरी भाग में पावर और डिसीजन मेकिंग केंद्र है, निचले भाग में वो देश हैं, जो डिसीजन से प्रभावित तो होते हैं, लेकिन उन्हें आकार नहीं दे पाते हैं।
#WATCH | Delhi: During the BRICS Summit 2026, Prime Minister Narendra Modi says, "While strengthening BRICS, we must also chart a course for global reform. The current structure of global governance resembles a pyramid: power and decision-making are concentrated at the top, while… pic.twitter.com/6Ksdy8LEF7
— ANI (@ANI) September 12, 2026
प्रोफेसर शांतेश सिंह ने कहा भारत की ग्रोथ ने ग्लोबल प्रोजेक्शंस को पीछे छोड़ा है और दुनिया के सामने नई उम्मीद पैदा की है।
रक्षा और विदेश नीति विशेषज्ञ कमर आगा कहते हैं कि मोदी, पुतिन और जिनपिंग तीनों ही दुनिया के सबसे प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते हैं। वह ऐसे देश का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो जनसंख्या से लेकर आर्मी और टेक्नोलॉजी व ट्रेड में काफी आगे रहने वाले राष्ट्र हैं। जिस तरह से मौजूदा वैश्विक हालात बने हैं, उसने भारत, रूस और चीन को विश्व का नया ग्लोबल पावर सेंटर बना दिया है। अभी हाल ही में एससीओ के मंच पर तीनों नेता दिखे थे, अब ब्रिक्स में तीनों नेता साथ हैं। भारत, रूस और चीन के पास अब बहुत अच्छा मौका है कि वह पश्चिमी दबाव को दरकिनार कर विश्व को नई लीडरशिप दे सकें। यह बहुत सही मौका है। ऐसे समय में भारत, चीन और रूस का एक होना उन पश्चिमी ताकतों के लिए बड़ा संदेश है, जो दबाव और धमकी की राजनीति करते आए हैं।
मोनोपोली का खेल बदल रहा
प्रोफेसर शांतेश सिंह के मुताबिक, अब तक पश्चिमी देश भारत, रूस और चीन जैसी ताकतों को रोकने की कोशिश करते रहे हैं। उनका कहना है कि पश्चिम की ताकत लंबे समय तक मोनोपोली और टेक्नोलॉजी पर रही, लेकिन अब इसका संतुलन चीन, रूस और भारत की ओर बदल रहा है। तीनों देश टेक्नोलॉजी से लेकर मिलिट्री पावर तक अपनी ताकत लगातार बढ़ा रहे हैं। भारत, रूस और चीन तीनों ही बड़ी परमाणु ताकतें हैं।
ब्रिक्स को वैश्विक मंच पर ठोस परिणामों में बदलने का वक्त
पीएम मोदी ने ब्रिक्स की ताकत को बयां करते कहा, हम किसी के विरुद्ध नहीं हैं, बल्कि सबको साथ लेकर चलने और आगे बढ़ने का प्रयास करते हैं। अब समय है कि हम ब्रिक्स में हमारी एकता और सहमति को वैश्विक मंच पर ठोस परिणामों में बदलें।
#WATCH | Delhi: During the BRICS Summit 2026, Prime Minister Narendra Modi says, "Today, BRICS, too, has reached a moment of 'coming of age'. Over the past two decades, BRICS has established a distinct identity on the global stage. We respect each other's perspectives and move… pic.twitter.com/qZpvKTKVrZ
— ANI (@ANI) September 12, 2026
अब भारत, रूस और चीन के हाथों में इकोनॉमी कंट्रोल
कमर आगा ने कहा कि ब्रिक्स और एससीओ संगठनों के जरिये दुनिया की इकोनॉमी का कंट्रोल अब भारत, चीन और रूस जैसे देशों के हाथ में आ गया है। ब्राजील और साउथ अफ्रीका भी अच्छा कर रहे हैं। यह पश्चिम के लिए बड़ा कंपटीशन है। इसीलिए पश्चिमी देशों में घबराहट है।
मोदी, पुतिन और जिनपिंग में कमाल की केमिस्ट्री
कमर आगा ने कहा कि मोदी, पुतिन और जिनपिंग में कमाल की केमिस्ट्री है, जो ऐसे मौकों पर साफ देखी भी जा सकती है। उनकी सोच और विचार आपस में तालमेल खाते हैं। इसीलिए मौजूदा वक्त में पुतिन, मोदी और जिनपिंग दुनिया के सबसे प्रभावशाली नेता बन चुके हैं। वह अक्सर बोल्ड फैसले लेते हैं, किसी भी ताकत के दबाव में नहीं आते, तीनों नेता अपने राष्ट्रीय हित को आगे रखते हैं।


