
▶ हिंसा में शामिल कोई नाबालिग अगर पब्लिक प्रॉपर्टी को नुकसान पहुंचाएगा, तो वसूली पैरंट्स से की जाएगी।
▶ 14 साल तक के नाबालिग हिंसा में शामिल मिले, तो वे भी कानून के शिकंजे में आएंगे।
▶ हिंसा में शामिल होने पर पांच साल तक की जेल और 20,000 यूरो तक का जुर्माना।
▶ हिंसा के दौरान प्रदर्शनकारी अपने चेहरे को ढकते हैं या कोई घायल होता है, तो सजा बढ़ेगी।
इटली ने विरोध-प्रदर्शन के दौरान हिंसा पर नकेल कसने के लिए यह सख्त सुरक्षा उपाय लागू कर दिए हैं। इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने मंगलवार को हिंसा में भागीदारी को नया अपराध बनाते हुए तत्काल प्रभाव से इन कदमों का ऐलान किया। अब इसे कानून बनवाने के लिए इटली की संसद से 30 दिन के अंदर मुहर लगवानी होगी।
फ्रांस के साथ यूरोप के आधा दर्जन से ज्यादा देश हिंसक आंदोलन की जद में हैं। इसमें अल्बानिया, बेल्जियम और पुर्तगाल में भी शामिल हैं। पिछले दिनों इटली के मिलान में आंदोलनकारियों ने संपत्ति को काफी नुकसान पहुंचाया था। इस प्रदर्शन में काफी नाबालिग भी नजर आए थे। अब प्रधानमंत्री मेलोनी ने ऐसे प्रदर्शनों से निपटने के लिए कड़े सुरक्षा उपायों को मंजूरी दी है।
दंगा करने वालों के खिलाफ नया फरमान
इटली की मेलोनी सरकार ने मंगलवार को मंजूर नए सुरक्षा उपायों के तहत, प्रदर्शन में हिंसक भागीदारी, दंगाइयों के लिए कड़े दंड और बर्बरता व लूटपाट में शामिल बच्चों के माता-पिता से पैसा वसूलने की बात शामिल है। इस अध्यादेश की घोषणा करते हुए प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने सोशल मीडिया पर कहा,

नए आदेश में और क्या-क्या है?
इटली सरकार के इस नए अध्यादेश के तहत, यदि कोई व्यक्ति कम से कम पांच लोगों के समूह में शामिल होकर विरोध प्रदर्शन के दौरान सार्वजनिक सुरक्षा को खतरे में डालता है, तो उसे 5 साल तक की जेल और अधिकतम €20,000 (20 लाख रुपये से ऊपर) तक का जुर्माना हो सकता है।
अगर चेहरा छिपाया गया हो या लोग घायल हुए हों, तो सजा और भी बढ़ा दी जाएगी। इसके अलावा, अधिकारियों को किसी भी नुकसान के लिए तत्काल मुआवजे का आदेश देने का अधिकार दिया गया है और नाबालिगों के मामले में, उनके माता-पिता को जिम्मेदार ठहराया जाएगा।
Manifestare è un diritto, devastare le nostre città no. Ecco le misure che abbiamo approvato per contrastare la violenza e tutelare la sicurezza dei cittadini. https://t.co/kqk51X8YZa
— Giorgia Meloni (@GiorgiaMeloni) October 20, 2026
सरकार के नए आदेश में नाबालिगों को भी शामिल करने का दायरा बढ़ाया है। इसके तहत, अगर 14 से 17 साल के किशारों के खिलाफ इस बात के सबूत हैं कि वो आगे किसी भी तरह का खतरा पैदा कर सकते हैं, तो पुलिस उन्हें हिरासत में ले सकती है, भले उन्होंने कोई अपराध न किया हो। इसके तहत उन शक्तियों का दायरा बढ़ाया गया है जो पहले केवल वयस्कों पर लागू होती थीं।
अधिकारियों को शनिवार के लिए प्रस्तावित प्रदर्शनों के दौरान और अशांति फैलने की आशंका है, जिसके मद्देनजर सरकार ने कहा कि वह 2026 के अंत तक मिलान में पुलिस के साथ सेना के 500 जवानों को तैनात करेगी। रक्षा मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि सेना प्रमुख स्थलों पर सुरक्षा मजबूत करने, संवेदनशील ठिकानों की निगरानी बढ़ाने और पूरे इलाके में चौकसी तेज करने में मदद करेगी।
इटली में क्यों आई ये नौबत?
मेलोनी की सरकार को दक्षिणी इटली में विरोध प्रदर्शनों की एक अलग लहर से भी बढ़ते दबाव का सामना करना पड़ रहा है। वहां डीजल की आसमान छूती कीमतों और जीवन-यापन की बढ़ती लागत से नाराज ट्रक चालकों ने सड़कों पर नाकाबंदी कर दी है, जिससे सप्लाई चेन बाधित हो रही है। कुछ पास्ता निर्माताओं को अपना उत्पादन रोकना पड़ा है और कृषि समूहों ने चेतावनी दी है कि फल और सब्जियां सड़ने के कगार पर पहुंच सकती हैं। उद्योग प्रतिनिधियों के साथ बातचीत के बाद सरकार ने सड़क परिवहन ऑपरेटरों (road hauliers) के लिए नई सहायता देने का वादा किया है।

उत्तर और दक्षिण दोनों हिस्सों में प्रदर्शनकारियों का कहना है कि बढ़ती कीमतें परिवारों को गरीबी में धकेल रही हैं, जो कि 2027 में होने वाले चुनावों से पहले मेलोनी के लिए चिंता का विषय है। प्रधानमंत्री ने मंगलवार को कहा, “हम जानते हैं कि नौकरी तलाशने, कम वेतन पाने और भविष्य के लिए कोई उम्मीद न देखने का क्या मतलब होता है, लेकिन कठिनाई को कभी भी हिंसा का बहाना नहीं बनाया जाना चाहिए।”






