फ्रांस की हिंसा को दक्षिणपंथी पेन के लिए क्रिसमस का तोहफा क्यों कह रहे एक्सपर्ट?
फ्रांस में हिंसा, लूटपाट और कर्फ्यू के बीच राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों खाड़ी देशों के दौरे पर चले गए हैं। इस बीच, दक्षिणपंथी नेता मरीन ले पेन की चर्चा जोर-शोर से क्यों होने लगी है?
फ्रांस की हिंसा को दक्षिणपंथी पेन के लिए क्रिसमस का तोहफा क्यों कह रहे एक्सपर्ट?
फ्रांस के विरोध-प्रदर्शनों से धुर-दक्षिणपंथी नेता ली पेन को फायदा हो सकता है।© AP/Getty Images

फ्रांस में हालात काफी खराब हैं। सड़कों पर हिंसा और लूटपाट के बाद कर्फ्यू लगाना पड़ा है। बड़ी संख्या में दुकानों को नुकसान पहुंचा है, सरकारी इमारतों पर हमले हुए और 2000 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया गया। राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों फ्यूल का जुगाड़ करने खाड़ी देशों के तीन दिन के दौरे पर निकल गए हैं। ट्रंप ने पेरिस हिंसा में मुस्लिम एंगल ढूंढ लिया है। इस बीच, फ्रांस के भीतर एक नाम काफी चर्चा में आ गया है। वो नाम है- दक्षिणपंथी नेता ले पेन का। एक्सपर्ट कह रहे हैं कि हिंसा और उपद्रव ने उन्हें क्रिसमस का तोहफा दे दिया है। आखिर कैसे? आइए समझते हैं।

पहले बात मैक्रों की

फ्रांस के राष्ट्रपति कुवैत पहुंचे हैं। वह संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), बहरीन और कतर भी जाएंगे। उनके इस दौरे का मकसद खाड़ी देशों से एनर्जी सप्लाई बढ़ाना है ताकि देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कमी लाई जा सके। मैक्रों के इस दौरे की टाइमिंग पर सवाल उठ रहे हैं। लोग कह रहे हैं कि मैक्रों देश को बदहाल छोड़ विदेश दौरे पर निकल गए हैं।

अब फ्रांस के हालात समझिए

फ्रांस में पिछले दिनों महंगाई, जीवन-यापन के बढ़ते खर्च, स्कूलों में खराब सुविधाओं और सरकारी सेवाओं में कटौती को लेकर विरोध प्रदर्शन हुए। कई शहर इसकी चपेट में आ गए। दुकानों में लूटपाट हुई, सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया गया और लिमोज शहर के ऐतिहासिक टाउन हॉल में आग लगा दी गई।

© AP

कर्फ्यू की आ गई नौबत

सरकार के मुताबिक, 3,000 से ज्यादा दुकानों को नुकसान पहुंचा या उन्हें लूटा गया और वीकेंड की हिंसा के दौरान करीब 2,400 लोगों को गिरफ्तार किया गया। हालात संभालने के लिए पेरिस के कुछ इलाकों में रात का कर्फ्यू लगाया गया है। कई दूसरे शहरों में नाबालिगों के रात में बाहर निकलने पर भी पाबंदियां लगाई गई हैं।

हालात संभालने में नाकाम रहने की जिम्मेदारी लेते हुए गृह मंत्री लॉरेंट नुनेज ने अपने इस्तीफे की पेशकश कर दी है, जिसे मैक्रों ने स्वीकार नहीं किया। इसके बजाय उन्होंने सुरक्षा व्यवस्था में हुई चूक की जांच करने और पुलिस की रणनीति में बदलाव करने को कहा है।

मैक्रों के बाद कौन?

मैक्रों के कार्यकाल में अब सिर्फ छह महीने बचे हैं और पहले से ही कमजोर उनका सरकार को ताजा हालात ने और अधिक बैकफुट पर ला दिया है। इस बीच यह चर्चा भी तेज हो गई है कि इस स्थिति का सबसे अधिक फायदा दक्षिणपंथी नेता मरीन ले पेन को मिलेगा।

कौन हैं पेन?

2027 के राष्ट्रपति चुनाव की दौड़ में वह पहले से ही मजबूत दावेदार मानी जा रही हैं। मैक्रों के पूर्व सहयोगी जीन-बैप्टिस्ट मोरो ने तो यहां तक कहा कि ले पेन के लिए राष्ट्रपति बनने का रास्ता अब छह लेन वाले हाईवे जैसा हो गया है।

मरीन ले पेन ने एक वीडियो जारी कर ताजा हालात के लिए राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों पर सीधा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि देश इस वक्त भरोसे और कानून-व्यवस्था के गहरे संकट से गुजर रहा है, जो लोकतंत्र के लिए खतरा बन सकता है। फ्रांस के झंडे के सामने बैठकर दिए गए इस संदेश में ले पेन ने मैक्रों सरकार को थकी हुई, कमजोर और दिशाहीन बताया।

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आपने कल देखा कि हमारे शहरों, सड़कों और पूरे देश में किस तरह तोड़फोड़ की गई, नुकसान पहुंचाया गया और लूटपाट हुई। हम इस वक्त भरोसे और सरकार के अधिकार को लेकर गहरे संकट से गुजर रहे हैं। यह ऐसी स्थिति है, जो लोकतंत्र के लिए खतरा बन सकती है। हमें इस पर गंभीरता से ध्यान देना होगा। हमारा देश हिंसा और सरकार की बेबसी के बीच फंसकर रह गया है।
मरीन ले पेन
मरीन ले पेन
फ्रांस की धुर-दक्षिणपंथी नेता

ले पेन ने मौजूदा हालात को मैक्रों सरकार की नाकामी के तौर पर पेश करते हुए दावा किया कि उनकी पार्टी देश में कानून-व्यवस्था बहाल करने, सुरक्षा मजबूत करने और लोगों का भरोसा लौटाने का दूसरा रास्ता दे सकती है।

एक्सपर्ट्स बोले, पेन को मिला क्रिसमस का तोहफा

फ्रांस की राजनीति मोटे तौर पर तीन धड़ों में बंटी हुई है-

  • कट्टर दक्षिणपंथ (Far-Right), जिसकी नेता नेशनल रैली पार्टी की मरीन ले पेन हैं।
  • मध्य-दक्षिणपंथ (Centre-right), राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की पार्टी रेनेसां (Renaissance) को आम तौर पर मध्यमार्गी (Centrist) माना जाता है।
  • कट्टर वामपंथ (Far-Left), इसके नेता ला फ्रांस इंसूमिस (La France Insoumise) पार्टी के ज्यां ल्यूक मेलेंशों हैं।

एक्सपर्ट्स का कहना है कि फ्रांस के मौजूदा हालात में मरीन ले पेन और दक्षिणपंथी नेताओं के लिए इन हालात में अपनी बात रखना आसान हो गया है।

मेलबर्न यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर पीटर मैक्फी ने द कंवर्सेशन में अपने एक लेख में लिखते हैं, 'पेन वादा कर सकती हैं कि वह स्कूलों में अनुशासन दोबारा लागू करेंगी, पुलिस के लिए बजट बढ़ाएंगी और तोड़फोड़ करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेंगी। वह इन लोगों को कथित तौर पर अवैध प्रवासी बताकर देश से निकालने की बात भी कर सकती हैं।'

उन्होंने आगे लिखा, 'बड़े पैमाने पर हुए शांतिपूर्ण प्रदर्शनों के दौरान कुछ जगहों पर हुई हिंसा पेन के लिए किसी क्रिसमस गिफ्ट से कम नहीं है।'

पेन की पार्टी भी लगातार यह प्रचारित कर रही है कि मैक्रों सरकार स्थिति को संभाल नहीं पाई है और ले पेन ही देश को सही दिशा में लेकर जा सकती हैं।

ले की पार्टी के अध्यक्ष जॉर्डन बर्डेला ने एक्स पर लिखा, 'फ्रांस के लोग अपनी क्रय शक्ति बढ़ाने, ईंधन पर टैक्स घटाने और मेहनत के बदले अच्छा वेतन पाने की मांग कर रहे हैं। इन मांगों को लेकर उनका असली विरोध राष्ट्रपति चुनाव में मरीन ले पेन को वोट देने के रूप में सामने आएगा। फ्रांस में बदलाव लाना और देश के भविष्य के लिए सही फैसले करना अब फ्रांस की जनता के हाथ में है।'

फ्रांस में हिंसा के लिए कई लोग इमिग्रेशन को भी जिम्मेदार बता रहे हैं जिनमें सबसे प्रमुख नाम अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का है।

ट्रंप अलग एंगल जोड़ रहे

हां, सोमवार को एक रैली के दौरान ट्रंप ने फ्रांस को लेकर लंबा बयान दिया। उन्होंने कहा कि फ्रांस को प्रवासी, जिहादी और कम्युनिस्ट जीत रहे हैं, लूट रहे हैं और पूरी तरह जलाकर तबाह किया जा रहा है।

ट्रंप ने कहा कि अमेरिका में ऐसा नहीं होने दिया जाएगा। यह बयान ऐसे समय आया है, जब अमेरिका में मिडटर्म चुनाव नजदीक हैं और रिपब्लिकन पार्टी को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

इससे पहले पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ हुई बातचीत का जिक्र किया। उन्होंने कहा, 'मैंने उनसे बहुत पहले कहा था कि आप फ्रांस में बड़ी गलती कर रहे हैं। आप दुनिया भर से हर किसी को अपने देश में आने दे रहे हैं। पेरिस बहुत जल्द एक मुस्लिम शहर बनने जा रहा है।'

ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर भी फ्रांस को लेकर पोस्ट किया था। उन्होंने लिखा, 'प्रवासियों ने फ्रांस पर कब्जा कर लिया है। उन्हें जल्द से जल्द अपनी सीमाएं बंद कर देनी चाहिए!'

सबसे बड़ा सवाल, फ्रांस की मुस्लिम आबादी कितनी?

ट्रंप के बयान के बीच यह सवाल भी उठता है कि फ्रांस में मुस्लिम आबादी कितनी है। इसका कोई बिल्कुल सटीक सरकारी आंकड़ा उपलब्ध नहीं है, क्योंकि फ्रांस की जनगणना में लोगों का धर्म दर्ज नहीं किया जाता। हालांकि, सर्वे से इसका अनुमान लगाया जाता है।

फ्रांस के राष्ट्रीय सांख्यिकी संस्थान INSEE और राष्ट्रीय जनसांख्यिकी अध्ययन संस्थान INED के 2019-2020 के सर्वे के मुताबिक, फ्रांस की मुख्य भूमि में 18 से 59 साल के लोगों में करीब 10 फीसदी ने खुद को मुस्लिम बताया था।

इमिग्रेशन पर कैसा है ले पेन का रुख?

ले पेन लंबे समय से इमिग्रेशन पर सख्ती और राष्ट्रीय पहचान के मुद्दे उठाती रही हैं। वह फ्रांस में आने वाले प्रवासियों की संख्या कम करने, अवैध प्रवासियों को वापस भेजने और फ्रांसीसी नागरिकों को नौकरी, आवास और सरकारी सुविधाओं में प्राथमिकता देने की पक्षधर हैं।

इमिग्रेशन पर ले के रुख को समझिए-

  • इमिग्रेशन में बड़ी कटौती: ले पेन कानूनी इमिग्रेशन को भी काफी कम करना चाहती हैं। उनके 2027 के चुनावी एजेंडे से जुड़ी एक रिपोर्ट के मुताबिक, वह इसमें 80 से 90 फीसदी तक कटौती की पक्षधर हैं।
  • परिवार को बुलाने के नियम सख्त करना: वह विदेशियों के परिवार के सदस्यों को फ्रांस बुलाने की व्यवस्था यानी फैमिली रीयूनिफिकेशन पर रोक या कड़ी पाबंदियों का समर्थन करती हैं।
  • अवैध प्रवासियों को वापस भेजना: वह अवैध रूप से रह रहे विदेशियों और अपराध में दोषी पाए गए विदेशी नागरिकों को देश से निकालने की कार्रवाई तेज करने के पक्ष में हैं।
  • फ्रांसीसी नागरिकों को प्राथमिकता: पेन चाहती हैं कि फ्रांस के नागरिकों को नौकरी, सामाजिक आवास और कुछ सरकारी सुविधाओं में प्राथमिकता मिले। वह इसके लिए कानून और संविधान में बदलाव की भी पक्षधर हैं।
  • जनमत संग्रह कराना: वह इमिग्रेशन नीति पर जनमत संग्रह कराने की मांग करती रही हैं, ताकि फ्रांस के लोग इस मुद्दे पर सीधे अपनी राय दे सकें।

मुस्लिम प्रवासियों को लेकर क्या रुख है?

ले पेन इमिग्रेशन के साथ-साथ इस्लाम और फ्रांस की धर्मनिरपेक्ष व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर भी सख्त रुख रखती हैं। वह सार्वजनिक जगहों पर इस्लामी हिजाब पर प्रतिबंध लगाने की पक्षधर हैं।

उनका कहना है कि उनकी नीतियों का आधार धर्म या नस्ल नहीं, बल्कि फ्रांसीसी नागरिकता और देश के नियम हैं। हालांकि, उनकी आलोचना करने वाले इसे प्रवासियों और मुस्लिम समुदाय के प्रति भेदभाव बढ़ाने वाला रुख मानते हैं।

फ्रांस में मुस्लिमों को लेकर एक इंटरव्यू के दौरान ले पेन ने कहा, 'हां, इस्लाम फ्रांस की व्यवस्था के अनुकूल है। मैं यह बात दस बार कह चुकी हूं। लेकिन दूसरी ओर, जो लोग फ्रांस में शरिया कानून लागू करना चाहते हैं, उन्हें मैं ऐसा करने से रोकने के लिए उनके रास्ते में खड़ी मिलूंगी। हालांकि, मुसलमानों को चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है।'

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