फ्रांस: 7 दिन में 2 बड़े प्रदर्शन, सड़कों पर 8 लाख लोग; हिंसा रोकने में कहां चूकीं एजेंसियां, आगे क्या?

फ्रांस में छात्रों से शुरू हुआ आंदोलन अब वेतन, महंगाई और सार्वजनिक सेवाओं से जुड़ी नाराजगी का रूप ले चुका है। बढ़ती भीड़ और हिंसा के बीच सरकार की तैयारियों और खुफिया एजेंसियों के आकलन पर भी सवाल उठ रहे हैं।

फ्रांस में मैक्रों सरकार के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन जारी हैं। एक महीने से ज्यादा समय से चल रहा यह आंदोलन लगातार बढ़ रहा है। शनिवार, 24 अक्टूबर को एक बार फिर बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतरे। फ्रांस के गृह मंत्रालय के मुताबिक, देशभर में 289 जगहों पर प्रदर्शन हुए, जिनमें 4.10 लाख लोग शामिल हुए। वहीं, प्रदर्शन करने वाले ट्रेड यूनियनों का दावा है कि संख्या 8 लाख से ज्यादा थी।

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, श्रमिक संगठनों के नेताओं ने अगले शनिवार को फिर प्रदर्शन करने और 5 नवंबर को देशव्यापी हड़ताल करने की अपील की है।

खासकर पिछले हफ्ते हुई हिंसा और लूटपाट की घटनाओं के बाद सरकार की तैयारियों पर सवाल उठ रहे हैं। खुफिया एजेंसियां भी सवालों के घेरे में हैं। क्या फ्रांस सरकार बढ़ते विरोध का अंदाजा लगाने में नाकाम रही? क्या खुफिया एजेंसियों से भी चूक हुई?

इन सवालों के जवाब आपको बताएंगे, लेकिन उससे पहले यह जानना जरूरी है कि आखिर फ्रांस में ऐसा क्यों हो रहा है?

कैसे बढ़ता गया विरोध-प्रदर्शन?

फ्रांस में विरोध-प्रदर्शन सितंबर 2026 के मध्य में शुरू हुए थे। शुरुआत में स्कूली छात्रों ने सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी, खराब इमारतों और क्लासरूम की बदहाल स्थिति के खिलाफ प्रदर्शन किए। बाद में यह आंदोलन महंगाई, बढ़ती जीवन-यापन लागत, सार्वजनिक सेवाओं में कटौती और सामाजिक असमानता जैसे मुद्दों तक फैल गया।

इन प्रदर्शनों में स्कूली छात्रों के अलावा शिक्षक, अभिभावक, प्रमुख फ्रांसीसी ट्रेड यूनियन CGT समेत अन्य यूनियनों के सदस्य, कर्मचारी और महंगाई व असमानता से परेशान आम लोग शामिल हैं। 2018-19 में ईंधन की बढ़ती कीमतों के खिलाफ हुए ‘येलो वेस्ट’ आंदोलन से जुड़े लोग भी इसका हिस्सा बन गए हैं। वे सरकार की नीतियों और प्रदर्शन करने के अधिकार पर लगाई जा रही पाबंदियों का विरोध कर रहे हैं।

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, श्रमिक संगठनों के नेताओं का कहना है कि वेतन, महंगाई और सार्वजनिक सेवाओं को लेकर लोगों में नाराजगी अब उन छात्रों के आंदोलन से कहीं आगे फैल चुकी है, जिन्होंने पिछले महीने सबसे पहले प्रदर्शन शुरू किए थे।

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8 लाख से ज्यादा लोग सड़कों पर उतरे?

गृह मंत्रालय के मुताबिक, शनिवार, 17 अक्टूबर को फ्रांस में 441 जगहों पर प्रदर्शन हुए थे, जिनमें 5.50 लाख लोगों ने हिस्सा लिया था। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस बार प्रदर्शनकारियों की संख्या कम रही। दूसरी ओर, ट्रेड यूनियनों का दावा है कि 24 अक्टूबर को हुए प्रदर्शनों में सरकारी आंकड़े से दोगुने से भी ज्यादा लोग शामिल हुए थे।

कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पूरे फ्रांस में करीब 70 हजार पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया था। राजधानी पेरिस में 1.10 लाख लोगों ने प्रदर्शन किया। इस दौरान कई शहरों में छिटपुट झड़पें भी हुईं। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर आंसू गैस के गोले छोड़े और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया।

पेरिस और मार्सेई में झड़पें

ज्यादातर जगहों पर प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहे, लेकिन रात होते-होते पेरिस और मार्सेई में झड़पें शुरू हो गईं। पेरिस के दक्षिण-पूर्वी बाहरी इलाके में मुख्य मार्च निकाला गया। इसके खत्म होने के बाद हालात बिगड़ गए। ठंड और बारिश के बीच दंगा नियंत्रण पुलिस ने करीब 500 नकाबपोश युवाओं पर आंसू गैस के गोले छोड़े और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया।

फ्रांस के दूसरे सबसे बड़े शहर मार्सेई में युवाओं ने सड़कें रोकने के लिए कचरे के डिब्बों में आग लगा दी और सुरक्षा बलों पर पत्थर व बोतलें फेंकीं। पुलिस के मुताबिक, कई दुकानों में लूटपाट हुई, जिनमें गहनों की दो दुकानें भी शामिल थीं। ल्योन, बोर्डो, ग्रेनोबल, क्लेरमों-फेरां, लिली, रेनेस, नांते और टूलूज में भी झड़पें हुईं।

1,314 लोग गिरफ्तार, 53 सुरक्षाकर्मी घायल

फ्रांस के गृह मंत्रालय की ओर से रविवार सुबह 7:30 बजे तक जारी आंकड़ों के मुताबिक, प्रदर्शनों के दौरान 1,314 लोगों को गिरफ्तार किया गया। 17 अक्टूबर को यह संख्या 2,628 थी।

इस बार 53 पुलिसकर्मी और अन्य सुरक्षा बलों के सदस्य घायल हुए, जबकि पिछले सप्ताह यह संख्या 1,144 थी। आग लगने की 75 घटनाएं सामने आईं, जबकि पिछले सप्ताह ऐसी 2,025 घटनाएं दर्ज की गई थीं।

मंत्रालय के शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक, कई दुकानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को नुकसान पहुंचा और 24 दुकानों में लूटपाट हुई। 17 अक्टूबर को 1,522 दुकानों के प्रभावित होने की जानकारी दी गई थी।

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सरकार की तैयारियों पर सवाल, कहां हुई चूक?

फ्रांस के प्रधानमंत्री सेबास्टियन लेकोर्नू ने सोमवार, 19 अक्टूबर को माना कि दो दिन पहले हुए प्रदर्शनों से निपटने के लिए सरकार के इंतजाम पर्याप्त नहीं थे। उन्होंने कहा कि ऐसे मुश्किल अभियानों में कुछ चीजें सही होती हैं और कुछ गलत हो जाती हैं।

फ्रांसीसी अखबार ले मोंडे (Le Monde) की रिपोर्ट के मुताबिक, जब उनसे पूछा गया कि आखिर क्या गलत हुआ, तो प्रधानमंत्री ने कहा, “हमारे पास छिपाने के लिए कुछ नहीं है।”

17 अक्टूबर को पेरिस, ल्योन, मार्सेई, बोर्डो समेत फ्रांस के कई शहरों में हिंसा, आगजनी और लूटपाट की खबरें सामने आईं। इसके बाद सरकार पर आरोप लगे कि पुलिस इन घटनाओं को रोकने में नाकाम रही।

गृह मंत्री लॉरां नुनेज ने इस्तीफा दे दिया था, लेकिन राष्ट्रपति मैक्रों ने उसे स्वीकार नहीं किया। हालांकि, नुनेज ने माना कि “प्रदर्शनकारियों की संख्या को देखते हुए सुरक्षा के इंतजाम नाकाफी साबित हुए।”

खुफिया एजेंसियां भी सवालों के घेरे में

प्रदर्शनकारियों की संख्या का सही अनुमान नहीं लगा पाने के कारण खुफिया एजेंसियों पर भी सवाल उठ रहे हैं। इनमें राष्ट्रीय पुलिस की खुफिया एजेंसी DNRT और पेरिस पुलिस प्रीफेक्चर की खुफिया इकाई शामिल हैं। ये एजेंसियां अलग-अलग संगठनों के बारे में जानकारी जुटाती हैं और सोशल मीडिया पर नजर रखती हैं।

ले मोंडे (Le Monde) की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार ने 17 अक्टूबर के प्रदर्शनों में जुटने वाली भीड़ का सही अनुमान नहीं लगा पाने को लेकर इन एजेंसियों की खुफिया रिपोर्टों पर सवाल उठाए हैं।

16 अक्टूबर की एक रिपोर्ट में DNRT ने अनुमान लगाया था कि पेरिस क्षेत्र के बाहर होने वाले प्रदर्शनों में 60 हजार से 1.10 लाख लोग शामिल हो सकते हैं। गृह मंत्री नुनेज के मुताबिक, बाद में यह अनुमान बढ़ाकर 2 लाख किया गया। लेकिन गृह मंत्रालय के अनुसार, वास्तविक संख्या 5.50 लाख रही, जो शुरुआती अनुमान से करीब तीन गुना ज्यादा थी।

हालांकि, DNRT ने हिंसा, संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और लूटपाट की आशंका भी जताई थी।

22 अक्टूबर को राष्ट्रपति मैक्रों ने कहा कि आने वाले दिनों में “अवैध” प्रदर्शनों पर रोक लगाई जाएगी। उन्होंने 17 अक्टूबर को हुई हिंसा और लूटपाट के लिए कट्टरपंथी वामपंथी समूहों और तोड़फोड़ करने वालों को जिम्मेदार ठहराया।

खुफिया एजेंसियों के प्रमुखों और वरिष्ठ मंत्रियों के साथ बैठक के बाद मैक्रों ने कहा कि ट्रेड यूनियनों जैसे संगठनों की ओर से आयोजित प्रदर्शनों की अनुमति दी जाएगी। हालांकि, कारोबारियों और दुकानों की सुरक्षा के लिए इनके तय रास्तों में बदलाव किया जा सकता है।

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